UPI MDR 2026: SC का सवाल- टैक्स या फीस नहीं तो शुल्क का आधार क्या? ‘No UPI Day’ टला
UPI MDR शुल्क 2026 को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI Merchant Transactions पर 0.4% Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। 28 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार, RBI और NPCI को नोटिस जारी कर इस शुल्क के कानूनी और तकनीकी आधार पर जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि अगर यह रकम टैक्स या फीस नहीं है, तो इसे लागू करने का कार्यकारी आधार क्या है। केंद्र की ओर से बताया गया कि MDR सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स या शुल्क नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच सेटलमेंट/चार्ज है। मामले में अब केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करना है।
इसी बीच 30 सितंबर को व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। बैठक के बाद All India Consumer Products Distributors Federation (AICPDF) और All India Mobile Retailers Association (AIMRA) ने 2 अक्टूबर 2026 के लिए घोषित ‘No UPI Day’ विरोध वापस ले लिया। व्यापारियों ने कहा कि सरकार ने उनकी चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
UPI MDR विवाद की शुरुआत क्यों हुई?
केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 में UPI के लिए नया MDR framework पेश किया। इसके तहत सभी UPI transactions पर शुल्क नहीं लगाया गया है। सरकार के अनुसार Person-to-Person यानी P2P transactions पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
इसी तरह ₹2,000 तक के Person-to-Merchant यानी P2M transactions पर भी MDR नहीं लगेगा। छोटे व्यापारियों के लिए zero-MDR framework के तहत आने वाले transactions भी शुल्क से बाहर रखे गए हैं।
सरकार के अनुसार लगभग 96% P2M transactions इस नए MDR framework से प्रभावित नहीं होंगे।
विवाद मुख्य रूप से उन चुनिंदा Merchant Transactions को लेकर है जिनकी राशि ₹2,000 से अधिक है और जो नए framework में MDR के दायरे में आते हैं।
₹2,000 से अधिक UPI Payment पर कितना MDR लगेगा?
सरकार द्वारा घोषित framework के अनुसार निर्दिष्ट P2M UPI transactions पर ₹2,000 से अधिक राशि होने पर सामान्य MDR 0.4% रखा गया है।
हालांकि इसमें एक महत्वपूर्ण cap भी है।
₹75,000 या उससे अधिक के eligible transaction पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति transaction तक सीमित रहेगा। इसका मतलब यह है कि ₹1 लाख के transaction पर 0.4% के हिसाब से ₹400 नहीं बल्कि अधिकतम ₹300 MDR होगा।
उदाहरण के तौर पर:
| UPI Merchant Payment | 0.4% के हिसाब से MDR | लागू अधिकतम MDR |
|---|---|---|
| ₹2,500 | ₹10 | ₹10 |
| ₹5,000 | ₹20 | ₹20 |
| ₹10,000 | ₹40 | ₹40 |
| ₹50,000 | ₹200 | ₹200 |
| ₹75,000 | ₹300 | ₹300 |
| ₹1,00,000 | ₹400 | ₹300 |
यह केवल सामान्य 0.4% MDR framework को समझाने के लिए उदाहरण है। सभी transactions इस सामान्य category में नहीं आते।
ग्राहक को UPI Payment पर पैसा देना होगा या नहीं?
यह इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकार के अनुसार MDR ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। UPI से किसी व्यक्ति द्वारा payment करने पर transaction charge लगाने की व्यवस्था नहीं की गई है।
P2P transactions किसी भी राशि पर free रहेंगे। वहीं ₹2,000 तक के merchant payments भी MDR से बाहर हैं। छोटे व्यापारी भी निर्धारित zero-MDR framework के तहत सुरक्षित रहेंगे।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि 15 अक्टूबर 2026 से हर UPI payment पर 0.4% charge ग्राहक से लिया जाएगा।
नया MDR मुख्य रूप से merchant-side payment ecosystem से जुड़ा charge है।
सुप्रीम कोर्ट ने MDR पर क्या सवाल उठाया?
28 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में इस framework को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI को नोटिस जारी किया। अदालत ने फिलहाल MDR framework पर interim stay देने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह समझना चाहा कि यदि MDR को टैक्स या फीस नहीं माना जा रहा है, तो इस रकम को लागू करने का कानूनी या executive basis क्या है।
यही सवाल इस मामले की कानूनी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार स्वयं इस रकम को प्राप्त नहीं कर रही है। सरकार का पक्ष है कि यह payment ecosystem में banks, payment aggregators और अन्य संबंधित entities के बीच लागू होने वाली व्यवस्था है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने UPI MDR को खारिज कर दिया?
नहीं।
यह समझना बहुत जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी MDR को रद्द या अवैध घोषित नहीं किया है।
अदालत ने फिलहाल:
- MDR framework पर interim stay नहीं दिया।
- केंद्र सरकार को जवाब देने को कहा।
- RBI और NPCI को भी जवाब देने के लिए कहा।
- शुल्क के कानूनी और तकनीकी आधार को स्पष्ट करने को कहा।
इसलिए फिलहाल UPI MDR framework पर कानूनी चुनौती जारी है, लेकिन 28 सितंबर की सुनवाई के बाद इसे रोकने का अंतरिम आदेश नहीं आया।
15 अक्टूबर 2026 से क्या बदलने वाला है?
मौजूदा सरकारी framework के अनुसार नया MDR 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना निर्धारित है।
इसका मतलब यह है कि 28 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के बाद भी framework पर तत्काल रोक नहीं लगी है। इसलिए जब तक सरकार नियम में बदलाव नहीं करती या अदालत आगे कोई अलग आदेश नहीं देती, निर्धारित framework के अनुसार 15 अक्टूबर से संबंधित MDR व्यवस्था लागू होने की स्थिति बनी हुई है।
हालांकि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए आगे की न्यायिक कार्रवाई के आधार पर स्थिति बदल सकती है।
किन UPI Transactions पर MDR नहीं लगेगा?
सरकार ने कई categories को स्पष्ट रूप से zero-MDR framework में रखा है।
P2P UPI Payment:
एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर MDR नहीं लगेगा, चाहे राशि कितनी भी हो।
₹2,000 तक का Merchant Payment:
₹2,000 तक के P2M payments पर MDR नहीं लगेगा।
छोटे व्यापारी:
P2PM category में आने वाले और UPI QR के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी zero-MDR व्यवस्था में बने रहेंगे।
इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और street vendors को अतिरिक्त payment cost से बचाना बताया गया है।
छोटे व्यापारियों के लिए ₹1 लाख की सीमा क्यों महत्वपूर्ण है?
नए framework में छोटे व्यापारियों को विशेष protection दिया गया है।
सरकार के अनुसार P2PM category के तहत UPI QR से प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले eligible छोटे व्यापारी zero MDR का लाभ जारी रखेंगे। इससे street vendors, neighbourhood shops और छोटे कारोबारियों को नए MDR से बाहर रखने का प्रयास किया गया है।
हालांकि व्यापारिक संगठनों ने इस सीमा को और बढ़ाने की मांग की है।
30 सितंबर की वित्त मंत्री के साथ हुई बैठक में व्यापारियों की ओर से ₹1 लाख की threshold की समीक्षा कर इसे ₹5 लाख तक बढ़ाने की मांग भी रखी गई।
Essential Services के लिए अलग व्यवस्था
सभी ₹2,000 से अधिक के transactions पर सामान्य 0.4% MDR लागू नहीं होगा।
सरकार ने कुछ essential और thin-margin sectors के लिए अलग व्यवस्था रखी है।
इनमें शामिल हैं:
- Railways
- Telecommunications
- Insurance
- Fuel
- Agricultural inputs
इन sectors में ₹2,000 से अधिक के eligible transaction पर ₹5 flat MDR का प्रावधान बताया गया है।
इसका उद्देश्य कम margin वाले महत्वपूर्ण sectors में percentage-based MDR से पैदा होने वाले बड़े खर्च को सीमित करना बताया गया है।
Capital Market Payments पर कितना MDR?
Mutual Funds, securities और stockbrokers/dealers से जुड़े कुछ payments के लिए भी अलग MDR rate निर्धारित किया गया है।
ऐसे eligible transactions पर 0.02% MDR और अधिकतम ₹300 प्रति transaction का cap रखा गया है।
इसलिए “UPI पर 0.4% शुल्क” को हर तरह के transaction पर लागू होने वाला एक समान charge समझना सही नहीं होगा।
क्या UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहक से पैसा काटा जाएगा?
सरकार का स्पष्ट पक्ष है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा।
वित्त मंत्रालय के अनुसार MDR payment ecosystem में merchant-side charge है और ग्राहक द्वारा UPI इस्तेमाल करने पर transaction fee नहीं लगाई जाएगी।
हालांकि व्यापारियों के संगठनों की मुख्य चिंता यह है कि यदि merchant को payment acceptance cost देनी पड़ेगी तो छोटे और मध्यम कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।
इसी वजह से व्यापारिक संगठन framework में बदलाव और threshold बढ़ाने जैसी मांगें कर रहे हैं।
‘No UPI Day’ क्या था?
MDR के विरोध में कुछ व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर 2026 को ‘No UPI Day’ के रूप में विरोध की घोषणा की थी।
इसका उद्देश्य UPI system को देशभर में बंद करना नहीं था। यह व्यापारियों की ओर से MDR framework के खिलाफ विरोध का प्रस्ताव था।
कुछ संगठनों ने QR codes और payment soundboxes को विरोध के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल करने की बात कही थी।
यहां एक जरूरी तथ्य यह भी है कि सितंबर के दौरान CAIT ने खुद स्पष्ट किया था कि उसने देशव्यापी ‘No UPI Day’ का आधिकारिक आह्वान नहीं किया है। इसलिए इसे पूरे देश के सभी व्यापारियों का एक समान nationwide boycott बताना सही नहीं होगा।
2 अक्टूबर का ‘No UPI Day’ अब क्यों टला?
30 सितंबर 2026 को CAIT के नेतृत्व में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।
बैठक में व्यापारियों ने MDR को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। इनमें ₹1 लाख की threshold को बढ़ाने, Merchant-to-Merchant यानी M2M transactions को framework से बाहर रखने और व्यापारियों की समस्याओं पर विचार करने के लिए एक विशेष समिति बनाने जैसी मांगें शामिल थीं।
बैठक के बाद AICPDF और AIMRA ने 2 अक्टूबर के लिए घोषित ‘No UPI Day’ विरोध वापस लेने का फैसला किया।
व्यापारिक प्रतिनिधियों ने कहा कि वित्त मंत्री की ओर से उनकी चिंताओं पर उचित विचार करने का आश्वासन मिला है।
क्या ‘No UPI Day’ टलने का मतलब MDR खत्म हो गया?
नहीं।
यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।
विरोध वापस लिया गया है, MDR framework समाप्त नहीं हुआ है।
व्यापारियों ने सरकार के साथ बातचीत जारी रखने का फैसला किया है। MDR की मूल व्यवस्था और उस पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी चुनौती अलग-अलग मुद्दे हैं।
इसलिए 2 अक्टूबर का विरोध वापस लिए जाने को MDR समाप्त होने की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
UPI 2 अक्टूबर को बंद होगा या नहीं?
नहीं।
‘No UPI Day’ का अर्थ देशभर में UPI network बंद होना नहीं था। यह कुछ व्यापारिक संगठनों द्वारा प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम था।
और अब संबंधित संगठनों द्वारा विरोध वापस लेने के बाद 2 अक्टूबर को UPI service के देशभर में बंद होने जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
ग्राहक सामान्य रूप से UPI का इस्तेमाल कर सकेंगे, जब तक किसी विशेष merchant या दुकान की अपनी payment-acceptance व्यवस्था अलग न हो।
MDR का पैसा किसे मिलेगा?
सरकार के अनुसार MDR कोई ऐसा tax नहीं है जिसे केंद्र सरकार अपने राजस्व के रूप में जमा करेगी।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि MDR payment ecosystem के participants के बीच वितरित होगा। इसमें banks, payment service providers और UPI application providers जैसे participants शामिल हैं।
सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से UPI ecosystem के operation, technology, cybersecurity और long-term sustainability को support करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने MDR लागू करने का आधार क्या बताया है?
वित्त मंत्रालय के अनुसार नया framework Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत UPI Steering Committee की विस्तृत deliberations के बाद पेश किया गया है।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य UPI ecosystem की long-term sustainability सुनिश्चित करना और individuals तथा small merchants को अतिरिक्त charges से बचाना है।
यही वह आधार है जिस पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिका के दौरान आगे कानूनी और तकनीकी स्पष्टीकरण अपेक्षित है।
अदालत ने केंद्र से इसी व्यवस्था का आधार स्पष्ट करने के लिए जवाब मांगा है।
UPI MDR पर व्यापारियों की मुख्य आपत्तियां क्या हैं?
व्यापारिक संगठनों की चिंता मुख्य रूप से payment acceptance cost को लेकर है।
उनका कहना है कि कम margin पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए प्रत्येक eligible high-value transaction पर MDR एक अतिरिक्त operating cost बन सकता है।
30 सितंबर की बैठक में व्यापारियों ने विशेष रूप से:
- ₹1 लाख की merchant threshold की समीक्षा,
- इसे ₹5 लाख तक बढ़ाने,
- M2M transactions को MDR से बाहर रखने,
- और उनकी चिंताओं के अध्ययन के लिए विशेष समिति
जैसी मांगें रखीं।
सरकार की ओर से व्यापारियों की चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद 2 अक्टूबर के विरोध को वापस लिया गया।
आम UPI User को अभी क्या जानना चाहिए?
अगर आप सामान्य रूप से UPI से भुगतान करते हैं, तो मौजूदा framework को इस तरह समझ सकते हैं:
| सवाल | मौजूदा स्थिति |
|---|---|
| P2P payment | Free |
| ₹2,000 तक P2M | Free |
| Eligible merchant payment ₹2,000 से ऊपर | 0.4% MDR |
| ₹75,000+ सामान्य eligible transaction | अधिकतम ₹300 |
| Essential/thin-margin sectors | ₹5 flat MDR |
| Small eligible merchants | Zero MDR framework |
| Capital-market payments | 0.02%, cap ₹300 |
| Customer से MDR | सरकार के अनुसार नहीं |
| Framework की निर्धारित शुरुआत | 15 अक्टूबर 2026 |
| सुप्रीम कोर्ट का interim stay | नहीं मिला |
| मामला | न्यायिक विचाराधीन |
सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम से क्या स्पष्ट होगा?
अब केंद्र सरकार, RBI और NPCI को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना है।
अदालत यह देख सकती है कि:
- MDR लागू करने का कानूनी आधार क्या है।
- इसकी संरचना कैसे तय की गई।
- सरकार की भूमिका क्या है।
- payment ecosystem में राशि का वितरण कैसे होगा।
- ₹2,000 threshold और अलग-अलग categories का आधार क्या है।
अदालत ने फिलहाल अंतिम फैसला नहीं दिया है। इसलिए आगे की सुनवाई इस मामले की कानूनी स्थिति को और स्पष्ट कर सकती है।
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UPI MDR शुल्क 2026 पर अंतिम बात
UPI MDR शुल्क 2026 को लेकर फिलहाल तीन घटनाएं सबसे महत्वपूर्ण हैं।
पहली, केंद्र ने चुनिंदा ₹2,000 से अधिक के P2M transactions के लिए 0.4% MDR का framework घोषित किया है, जबकि ₹75,000 या उससे अधिक के सामान्य eligible transaction के लिए ₹300 की अधिकतम सीमा रखी गई है। छोटे व्यापारी, ₹2,000 तक के merchant payments और P2P transactions को अलग रखा गया है।
दूसरी, सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को इस व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन केंद्र, RBI और NPCI से जवाब मांगा। सुनवाई में अदालत ने यह समझने की कोशिश की कि अगर MDR टैक्स या फीस नहीं है तो इसके लागू होने का कानूनी और executive आधार क्या है।
तीसरी, 30 सितंबर को व्यापारिक प्रतिनिधियों और वित्त मंत्री के बीच बातचीत के बाद AICPDF और AIMRA ने 2 अक्टूबर का घोषित ‘No UPI Day’ विरोध वापस ले लिया। इसका अर्थ यह नहीं है कि MDR का विवाद खत्म हो गया है। व्यापारियों और सरकार के बीच बातचीत जारी है, जबकि MDR framework को अदालत में भी चुनौती दी गई है।
FAQ: UPI MDR शुल्क 2026 से जुड़े सवाल
1. UPI MDR 2026 क्या है?
UPI MDR 2026 उस Merchant Discount Rate व्यवस्था को कहा जा रहा है जिसके तहत चुनिंदा ₹2,000 से अधिक के P2M UPI transactions पर 0.4% MDR प्रस्तावित/लागू framework में रखा गया है।
2. क्या हर UPI payment पर 0.4% charge लगेगा?
नहीं। P2P transactions, ₹2,000 तक के merchant payments और निर्धारित zero-MDR small merchant transactions को इससे बाहर रखा गया है।
3. क्या UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक को MDR देना होगा?
सरकार के अनुसार नहीं। MDR merchant-side payment ecosystem charge है और ग्राहक से UPI transaction fee नहीं ली जाएगी।
4. ₹10,000 के eligible merchant UPI payment पर MDR कितना होगा?
0.4% के हिसाब से ₹40 MDR होगा। यह सामान्य framework का उदाहरण है; transaction category के अनुसार अलग व्यवस्था हो सकती है।
5. ₹1 लाख के UPI merchant payment पर कितना MDR होगा?
सामान्य 0.4% के हिसाब से ₹400 बनता है, लेकिन ₹75,000 या उससे अधिक के eligible transaction पर ₹300 का cap है। इसलिए सामान्य category में अधिकतम ₹300 होगा।
6. क्या छोटे दुकानदारों को MDR देना होगा?
निर्धारित P2PM category में प्रति माह ₹1 लाख तक UPI QR receipts वाले eligible small merchants को zero-MDR framework में रखा गया है।
7. सुप्रीम कोर्ट ने UPI MDR पर रोक लगाई है?
नहीं। 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने interim stay देने से इनकार किया और केंद्र, RBI तथा NPCI से जवाब मांगा।
8. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या पूछा?
सुनवाई में अदालत ने MDR की कानूनी और executive basis को समझने के लिए सवाल उठाए, विशेष रूप से यह कि अगर यह tax या fee नहीं है तो इसे लागू करने का आधार क्या है।
9. 2 अक्टूबर 2026 को UPI बंद रहेगा?
नहीं। ‘No UPI Day’ UPI network shutdown नहीं था। इसके अलावा 30 सितंबर को AICPDF और AIMRA ने सरकार से बातचीत के बाद अपना विरोध वापस ले लिया।
10. UPI MDR framework कब से लागू होना है?
मौजूदा सरकारी framework के अनुसार संबंधित MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने के लिए निर्धारित है। आगे अदालत या सरकार के किसी नए निर्णय से स्थिति बदल सकती है।
UPI MDR शुल्क 2026 से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचना
यह लेख 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध केंद्र सरकार की जानकारी, वित्त मंत्रालय के MDR framework, सुप्रीम कोर्ट की 28 सितंबर की सुनवाई और व्यापारिक संगठनों द्वारा 2 अक्टूबर के ‘No UPI Day’ विरोध को वापस लेने से संबंधित ताजा रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। MDR मामले पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है, इसलिए आगे आने वाले अदालत के आदेश या सरकारी बदलाव के बाद स्थिति बदल सकती है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। परिस्थितियों या आधिकारिक निर्णयों में बदलाव होने पर जानकारी बदल सकती है। पाठकों को किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित विभाग या आधिकारिक स्रोत से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।





























