TV Channels पर सरकार की सख्ती: भड़काऊ बहस और AI के गलत इस्तेमाल पर चेतावनी
टीवी न्यूज चैनलों पर होने वाली बहसों, संवेदनशील खबरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 21 अक्टूबर 2026 को निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए एडवाइजरी जारी कर प्रसारण के दौरान जिम्मेदारी बरतने और नियमों का पालन करने की सलाह दी। मंत्रालय ने भड़काऊ, सांप्रदायिक या राष्ट्रविरोधी सामग्री से बचने, आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज नहीं करने और AI टूल्स का उपयोग खबरों की सटीकता से समझौता किए बिना करने पर जोर दिया है।
TV Channels Advisory: मुख्य बातें
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को एडवाइजरी जारी की।
- भड़काऊ, सांप्रदायिक और अपमानजनक बहसों पर संपादकीय नियंत्रण मजबूत करने को कहा गया।
- जरूरत पड़ने पर अभद्र भाषा बोलने वाले पैनलिस्ट का ऑडियो म्यूट करने या कार्यक्रम रोकने की सलाह दी गई।
- आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचने को कहा गया।
- AI टूल्स का इस्तेमाल केवल सहायक भूमिका में करने और खबरों की प्रामाणिकता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
- हिंसक दृश्यों और संवेदनशील खबरों के प्रसारण में सावधानी बरतने की हिदायत दी गई।
भड़काऊ बहसों पर संपादकीय नियंत्रण बढ़ाने की सलाह
मंत्रालय ने टीवी चैनलों को बहस और पैनल चर्चा के दौरान प्रसारित होने वाली सामग्री पर अधिक निगरानी रखने को कहा है। समाचार कार्यक्रमों में किसी वक्ता की टिप्पणी सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली, अपमानजनक या भड़काऊ हो सकती है। ऐसे मामलों में चैनलों से समय रहते हस्तक्षेप करने और कार्यक्रम को नियमों के अनुरूप रखने की अपेक्षा की गई है।
एडवाइजरी के मुताबिक, चैनलों को पैनलिस्ट चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए और लाइव बहस के दौरान अनुचित भाषा को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। जरूरत पड़ने पर किसी वक्ता का माइक्रोफोन म्यूट करना, बहस बीच में रोकना या प्रसारण फीड काटना जैसे उपाय किए जा सकते हैं।
इसका उद्देश्य टीवी पर चर्चा को तथ्यपरक और जिम्मेदार बनाए रखना है, ताकि किसी विषय पर असहमति व्यक्त करते समय हिंसा, नफरत या सामाजिक तनाव को बढ़ावा देने वाली सामग्री प्रसारित न हो।
आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचने का निर्देश
मंत्रालय ने सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज को लेकर भी चेतावनी दी है। ऐसे अभियानों के दौरान प्रसारित होने वाली वास्तविक समय की जानकारी सुरक्षा बलों की कार्रवाई और अभियान की गोपनीयता को प्रभावित कर सकती है।
इसी कारण चैनलों से कहा गया है कि वे सुरक्षा अभियानों से संबंधित खबरों को प्रसारित करते समय संवेदनशील जानकारी और लाइव दृश्य दिखाने से बचें। ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग में आधिकारिक जानकारी और सत्यापित तथ्यों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
मंत्रालय की सलाह का उद्देश्य समाचार प्रसारण और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है। किसी अभियान से जुड़ी जानकारी प्रसारित करने से पहले उसके स्रोत और संवेदनशीलता की जांच करना महत्वपूर्ण है।
AI के इस्तेमाल पर क्या कहा सरकार ने?
एडवाइजरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टूल्स के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि AI का उपयोग समाचार सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने में सहायक भूमिका तक सीमित रखा जाना चाहिए। इसके इस्तेमाल से खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता या संवेदनशीलता से समझौता नहीं होना चाहिए।
AI की मदद से तस्वीरें, वीडियो, आवाजें और अन्य दृश्य सामग्री तैयार या संपादित की जा सकती है। यदि ऐसी सामग्री को बिना उचित जांच के वास्तविक घटना बताकर प्रसारित किया जाए, तो दर्शकों के बीच गलतफहमी पैदा हो सकती है। इसलिए AI से तैयार या संशोधित सामग्री की सत्यता जांचना और उसे जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।
- तथ्यों की पुष्टि: AI से तैयार जानकारी को प्रसारण से पहले सत्यापित किया जाना चाहिए।
- प्रामाणिकता: तकनीक के कारण खबर के मूल अर्थ या वास्तविकता में भ्रामक बदलाव नहीं होना चाहिए।
- संपादकीय समीक्षा: AI की मदद से तैयार सामग्री को संपादकीय जांच से गुजरना चाहिए।
- संवेदनशीलता: हिंसा, दुर्घटना, संघर्ष या अन्य संवेदनशील घटनाओं से जुड़ी सामग्री का उपयोग सावधानी से होना चाहिए।
हिंसक दृश्यों और संवेदनशील खबरों पर सावधानी
मंत्रालय ने हिंसक दृश्यों और संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग में भी सावधानी बरतने को कहा है। किसी दुर्घटना, हिंसक घटना या सुरक्षा अभियान के दृश्य दर्शकों पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे मामलों में चैनलों को यह देखना चाहिए कि प्रसारित की जा रही सामग्री समाचार के लिए जरूरी है या नहीं और क्या उससे किसी तरह का नुकसान या तनाव बढ़ सकता है।
साथ ही, खबरों में अपुष्ट दावों, भ्रामक दृश्यों और अधूरी जानकारी को तथ्य के रूप में पेश करने से बचना चाहिए। संवेदनशील मामलों में आधिकारिक बयानों और भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करना जिम्मेदार पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Programme Code का पालन करना जरूरी
मंत्रालय ने टीवी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क्स रूल्स, 1994 के तहत निर्धारित Programme Code का पालन करने की याद दिलाई है। ये नियम टेलीविजन कार्यक्रमों की सामग्री और प्रसारण के मानकों से संबंधित हैं।
एडवाइजरी में चैनलों को समाचार जुटाने, संपादन, प्रोडक्शन, प्रसारण और कार्यक्रमों के टेलीकास्ट से जुड़े कर्मचारियों को भी इन नियमों के प्रति जागरूक करने की सलाह दी गई है। संपादकीय और कंटेंट रिव्यू की प्रक्रिया मजबूत रखने से प्रसारण से पहले संभावित गलतियों और नियमों के उल्लंघन की पहचान की जा सकती है।
एडवाइजरी का अर्थ यह है कि चैनलों को प्रसारण संबंधी नियमों और जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। किसी खास उल्लंघन पर कार्रवाई होगी या नहीं, यह संबंधित तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर तय होगा।
टीवी दर्शकों और मीडिया जगत के लिए क्या मायने हैं?
इस एडवाइजरी का सीधा संबंध टीवी पर दिखाई जाने वाली खबरों, लाइव बहसों और तकनीक से तैयार सामग्री की गुणवत्ता से है। दर्शकों को उम्मीद रहती है कि समाचार चैनल तथ्यपरक जानकारी देंगे और संवेदनशील घटनाओं को जिम्मेदारी से प्रस्तुत करेंगे।
यदि चैनल पैनल चर्चा पर बेहतर नियंत्रण रखें, AI से तैयार सामग्री की जांच करें और संवेदनशील खबरों में सावधानी बरतें, तो गलत जानकारी फैलने और अनावश्यक तनाव बढ़ने की आशंका कम हो सकती है। वहीं, समाचार संस्थानों के लिए संपादकीय जांच और स्पष्ट जवाबदेही बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
TV Channels Advisory: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. सरकार ने टीवी चैनलों को चेतावनी क्यों दी?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भड़काऊ और सांप्रदायिक बहसों, संवेदनशील खबरों, हिंसक दृश्यों और AI के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को एडवाइजरी जारी की।
2. टीवी चैनलों को लाइव बहस में क्या करना चाहिए?
चैनलों से पैनलिस्टों की टिप्पणियों पर संपादकीय नियंत्रण रखने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर अभद्र भाषा को रोकने के लिए वक्ता को म्यूट करना या कार्यक्रम रोकना जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
3. क्या सरकार ने AI के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, एडवाइजरी में AI पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। मंत्रालय ने AI टूल्स का उपयोग सहायक भूमिका में करने और खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता तथा संवेदनशीलता बनाए रखने को कहा है।
4. आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से क्यों बचने को कहा गया?
ऐसे अभियानों की लाइव जानकारी सुरक्षा बलों की कार्रवाई और अभियान की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। इसलिए मंत्रालय ने ऐसी कवरेज से बचने और संवेदनशील जानकारी के प्रसारण में सावधानी बरतने की सलाह दी है।
5. टीवी चैनलों को किन नियमों का पालन करना होगा?
मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क्स रूल्स, 1994 के तहत निर्धारित Programme Code का पालन करने पर जोर दिया है।
निष्कर्ष
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की नई एडवाइजरी में टीवी चैनलों से जिम्मेदार पत्रकारिता, भड़काऊ बहसों पर नियंत्रण और AI के सावधानीपूर्वक इस्तेमाल की अपेक्षा की गई है। आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचने, हिंसक दृश्यों को संवेदनशीलता से दिखाने और खबरों की पुष्टि करने पर भी जोर दिया गया है। अब चैनलों के लिए जरूरी होगा कि वे अपने संपादकीय नियंत्रण और कंटेंट रिव्यू की प्रक्रिया को मजबूत रखें तथा लागू प्रसारण नियमों का पालन करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों और मंत्रालय की प्रसारण संबंधी एडवाइजरी पर आधारित है। नियमों और निर्देशों की विस्तृत व्याख्या के लिए मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचना को प्राथमिकता दें।




























