Gorakhpur Durga Visarjan Accident: हाईटेंशन तार से 3 की मौत, 10 झुलसे
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसे ने उत्सव को मातम में बदल दिया। 21 अक्टूबर 2026 को गुलरिहा थाना क्षेत्र में विसर्जन जुलूस के दौरान हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग झुलस गए। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में घायलों की संख्या 10 बताई गई है। हादसे के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में बिजली विभाग के एक जूनियर इंजीनियर (JE) और दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया, जबकि संबंधित लाइनमैन की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई।
Gorakhpur Accident: मुख्य बातें
- गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हादसा हुआ।
- हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से तीन युवकों की मौत हुई।
- शुरुआती रिपोर्टों में 10 लोगों के झुलसने की जानकारी दी गई।
- हादसे के बाद JE और दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की खबर है।
- संबंधित लाइनमैन की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की भी रिपोर्ट है।
- घटना ने विसर्जन जुलूसों के दौरान बिजली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
कैसे हुआ गोरखपुर में दुर्गा विसर्जन हादसा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुलरिहा थाना क्षेत्र के अयोध्या प्रसाद चौहान टोला से दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए जुलूस निकला था। प्रतिमा को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान ट्रॉली या उसके ऊपर लगी धातु की संरचना का संपर्क ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से हो गया। इससे वाहन में करंट फैल गया और उसकी चपेट में आए लोग झुलस गए।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। घटना के सटीक तकनीकी कारणों और बिजली आपूर्ति की स्थिति से जुड़े सवालों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।
तीन युवकों की मौत, कई लोग झुलसे
इस हादसे में तीन युवकों की जान चली गई। शुरुआती समाचार रिपोर्टों में 10 लोगों के झुलसने की जानकारी दी गई, हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में घायलों की संख्या अलग बताई गई है। इसलिए घायलों की अंतिम संख्या और उनकी स्वास्थ्य स्थिति के लिए प्रशासन या अस्पताल की आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल बन गया। घायलों को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज भेजे जाने की जानकारी सामने आई। परिजनों और स्थानीय लोगों ने हादसे की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
JE और दो पुलिसकर्मी निलंबित, लाइनमैन की सेवा समाप्त
हादसे के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की भी खबर सामने आई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बिजली विभाग के एक जूनियर इंजीनियर (JE) और दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इसके अलावा संबंधित लाइनमैन की सेवा समाप्त करने की जानकारी दी गई है।
यह कार्रवाई घटना के बाद सामने आई शुरुआती प्रशासनिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, किसी कर्मचारी की अंतिम जिम्मेदारी और हादसे में उसकी भूमिका जांच तथा संबंधित विभागीय प्रक्रिया के आधार पर तय होगी। निलंबन या सेवा समाप्ति की कार्रवाई को अपने आप में किसी व्यक्ति के विरुद्ध सभी आरोपों का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
बिजली आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विसर्जन जुलूस के रास्ते में हाईटेंशन लाइन से जुड़े जोखिम को रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। बिजली की लाइन के पास ऊंचे वाहन, लोहे की रॉड, सजावटी ढांचे या डीजे की धातु की रेलिंग का पहुंचना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
रिपोर्टों में बिजली आपूर्ति बंद होने और बाद में करंट फैलने की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में अलग-अलग विवरण सामने आए हैं, इसलिए बिजली आपूर्ति कब बंद या चालू हुई और किस स्तर पर चूक हुई, इसका अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विसर्जन मार्ग का पहले से निरीक्षण, बिजली विभाग और पुलिस के बीच समन्वय, ऊंचे वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा निगरानी बेहद जरूरी है।
विसर्जन जुलूसों में सुरक्षा क्यों जरूरी?
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुलूस में शामिल होते हैं। कई जगह प्रतिमाओं को ट्रैक्टर-ट्रॉली या अन्य वाहनों से ले जाया जाता है। यदि रास्ते में बिजली की तारें नीचे हों या वाहन पर ऊंची धातु की संरचना लगी हो, तो दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
- मार्ग का निरीक्षण: जुलूस से पहले बिजली की लाइनों और रास्ते की ऊंचाई की जांच होनी चाहिए।
- बिजली विभाग से समन्वय: जरूरत पड़ने पर अधिकृत कर्मचारियों के जरिए सुरक्षित बिजली प्रबंधन किया जाना चाहिए।
- वाहन की ऊंचाई: ट्रॉली, प्रतिमा और सजावटी ढांचे को बिजली की लाइनों से सुरक्षित दूरी पर रखना जरूरी है।
- भीड़ नियंत्रण: पुलिस और आयोजकों को संवेदनशील स्थानों पर लोगों की आवाजाही नियंत्रित करनी चाहिए।
- आपातकालीन सहायता: दुर्घटना होने पर घायलों को शीघ्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
Gorakhpur Durga Visarjan Accident: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. गोरखपुर में दुर्गा विसर्जन हादसा कहां हुआ?
यह हादसा गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र में अयोध्या प्रसाद चौहान टोला के पास विसर्जन जुलूस के दौरान हुआ।
2. हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से तीन युवकों की मौत हुई।
3. हादसे में कितने लोग झुलसे?
शुरुआती रिपोर्टों में 10 लोगों के झुलसने की जानकारी दी गई है। कुछ रिपोर्टों में संख्या अलग है, इसलिए अंतिम आंकड़े की पुष्टि आधिकारिक सूचना से की जानी चाहिए।
4. हादसे के बाद किन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक JE और दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया तथा संबंधित लाइनमैन की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई।
5. हादसा कैसे हुआ?
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, विसर्जन के लिए जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली या उससे जुड़ी धातु की संरचना हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आई, जिससे करंट फैल गया। सटीक परिस्थितियों की पुष्टि जांच से होगी।
निष्कर्ष
गोरखपुर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से तीन युवकों की मौत और कई लोगों के झुलसने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हादसे के बाद JE और दो पुलिसकर्मियों के निलंबन तथा संबंधित लाइनमैन की सेवा समाप्ति की खबर सामने आई है। अब घटना की परिस्थितियों और संभावित चूक की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और भविष्य में विसर्जन जुलूसों के दौरान ऐसी त्रासदी को रोका जा सके।
डिस्क्लेमर: यह लेख 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। घायलों की संख्या और घटना के कुछ तकनीकी विवरण अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्न हैं। अंतिम जानकारी के लिए प्रशासन की आधिकारिक सूचना और जांच के निष्कर्ष देखें।





























