बिहार किसान आंदोलन 2026 को लेकर राकेश टिकैत का बड़ा ऐलान
बिहार में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का मुद्दा अब राजनीतिक और किसान संगठनों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों की जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर बिहार में आंदोलन का आह्वान किया है।
7 अक्टूबर 2026 को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस और नवादा में किसान महापंचायत के दौरान टिकैत ने कहा कि किसानों की जमीन विकास परियोजनाओं के लिए ली जा सकती है, लेकिन इसके बदले उन्हें मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप उचित कीमत मिलनी चाहिए। उन्होंने पुराने सर्किल रेट के आधार पर जमीन लेने का विरोध किया।
2013 के सर्किल रेट पर क्यों भड़के टिकैत?
राकेश टिकैत का मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि किसानों की जमीन के मूल्यांकन में पुराने सर्किल रेट को आधार बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों में निर्माण सामग्री, मजदूरी, मकान और दूसरी वस्तुओं की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं, तो किसानों की जमीन का मूल्य भी वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार तय होना चाहिए।
टिकैत ने मांग की है कि पहले सर्किल रेट को बढ़ाया जाए और उसके बाद सैटेलाइट टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसान विकास परियोजनाओं के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपनी जमीन कम कीमत पर देने को तैयार नहीं हैं।
चार गुना मुआवजे की मांग
नवादा की किसान महापंचायत में टिकैत ने मांग रखी कि बढ़े हुए सर्किल रेट या बाजार भाव में से जो अधिक हो, उसके आधार पर किसानों को चार गुना मुआवजा दिया जाए। उन्होंने किसानों से उचित मुआवजा और दर तय होने से पहले अपनी जमीन पर काम शुरू नहीं होने देने की अपील भी की।
हालांकि, यह राकेश टिकैत और किसान पक्ष की मांग है। इसे बिहार सरकार द्वारा घोषित अंतिम मुआवजा व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप की योजना क्या है?
बिहार सरकार राज्य में कई सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। बिहार मुख्यमंत्री सचिवालय के अनुसार जून 2026 में सरकार ने 11 सैटेलाइट टाउन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की थी। बैठक में इन टाउनशिप की भूमि उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और आगे की कार्ययोजना पर जानकारी ली गई थी।
पटना के पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर भी विकास योजना और भूमि से जुड़े सरकारी नोटिस जारी किए गए हैं। सितंबर 2026 में संबंधित क्षेत्र के ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान-2047 पर आपत्तियां और सुझाव देने की अवधि बढ़ाई गई थी।
सरकार की योजना और किसानों की आपत्ति
सरकार की ओर से सैटेलाइट टाउनशिप को शहरीकरण, आर्थिक विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी तरफ, किसानों की मुख्य चिंता उनकी जमीन के मूल्य और मुआवजे को लेकर है।
यही वजह है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे की दर पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। टिकैत का कहना है कि विकास परियोजनाओं का विरोध नहीं है, लेकिन किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
नवंबर में बड़े आंदोलन की तैयारी का दावा
रिपोर्टों के अनुसार राकेश टिकैत ने कहा है कि नवादा और खगड़िया में किसान महापंचायतों के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने सरकार के रुख में बदलाव नहीं होने पर नवंबर में बड़े आंदोलन की तैयारी की बात कही है और जरूरत पड़ने पर पटना में किसानों को जुटाने का संकेत दिया है।
उन्होंने किसानों को स्थानीय स्तर पर भी संगठित होने की अपील की है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
बिहार शहर विकास अधिनियम 2026 का भी मुद्दा
राकेश टिकैत ने केवल सैटेलाइट टाउनशिप के मुआवजे का मुद्दा नहीं उठाया है। 7 अक्टूबर को उनके द्वारा बिहार शहर विकास अधिनियम 2026 को रद्द करने, अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा देने और किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन का आह्वान किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित आंदोलन का दायरा केवल किसी एक टाउनशिप या जिले तक सीमित रखने के बजाय व्यापक किसान मुद्दों तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।
किसानों के लिए मुआवजे का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण?
भूमि अधिग्रहण में मुआवजा किसान परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होता है। जमीन केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि कई परिवारों के लिए खेती, रोजगार और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का आधार भी होती है।
इसी कारण किसान संगठन चाहते हैं कि भूमि का मूल्यांकन वास्तविक बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाए। वहीं सरकार के लिए चुनौती यह है कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने के साथ प्रभावित जमीन मालिकों के हितों और कानूनी प्रक्रियाओं का भी पालन किया जाए।
आगे क्या होगा?
फिलहाल बिहार किसान आंदोलन 2026 को लेकर राकेश टिकैत की ओर से आंदोलन तेज करने का आह्वान किया गया है। मुख्य मांगों में पुराने सर्किल रेट के बजाय उचित मूल्य, बेहतर मुआवजा और भूमि अधिग्रहण से जुड़े किसानों के हितों की सुरक्षा शामिल है।
वहीं, सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं को लेकर बिहार सरकार की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति, मुआवजे की दर और किसान संगठनों के विरोध के बीच बातचीत और टकराव दोनों महत्वपूर्ण रहेंगे।
नोट: राकेश टिकैत द्वारा चार गुना मुआवजे और पुराने सर्किल रेट को अस्वीकार करने की बातें उनके द्वारा रखी गई मांगें हैं। इन्हें बिहार सरकार द्वारा स्वीकृत अंतिम मुआवजा व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए।





























