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Home - News - Delhi-NCR Pollution: नवंबर-दिसंबर में स्कूलों की Sports Competitions टालने की सलाह, CAQM अलर्ट

Delhi-NCR Pollution: नवंबर-दिसंबर में स्कूलों की Sports Competitions टालने की सलाह, CAQM अलर्ट

सर्दियों में बढ़ते वायु प्रदूषण और बच्चों की सेहत को देखते हुए CAQM ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और यूपी को नवंबर-दिसंबर की शारीरिक खेल प्रतियोगिताएं टालने की सलाह दी है।

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
15/09/2026
in News
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Delhi-NCR Pollution

Delhi-NCR Pollution: स्कूल खेल प्रतियोगिताओं पर CAQM अलर्ट

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Delhi-NCR Pollution: नवंबर-दिसंबर में स्कूलों की Sports Competitions टालने की सलाह, CAQM अलर्ट

सर्दियों की दस्तक से पहले ही दिल्ली-एनसीआर के आसमान पर जहरीले धुंधलके का साया मंडराने लगा है। जब कड़ाके की ठंड और शांत हवाएं जमीन के करीब प्रदूषण के कणों को कैद कर लेती हैं, उस वक्त मैदान में दौड़ते मासूम बच्चों के फेफड़ों में सामान्य से दस गुना ज्यादा जहरीली हवा पहुंचती है। इसी गंभीर खतरे को भांपते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक ऐतिहासिक एडवाइजरी जारी की है। आने वाले नवंबर और दिसंबर के महीनों में स्कूली स्तर पर आयोजित होने वाले सभी आउटडोर स्पोर्ट्स और शारीरिक खेल प्रतियोगिताओं को स्थगित करने का सख्त परामर्श दिया गया है। Delhi-NCR Pollution के लगातार बिगड़ते रुझान और सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद लिया गया यह फैसला सीधे तौर पर लाखों छात्रों के स्वास्थ्य और उनके खेल कैलेंडर से जुड़ा है।

प्रमुख बिंदु (Key Highlights)

  • सख्त परामर्श: CAQM ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों को नवंबर और दिसंबर में होने वाली आउटडोर शारीरिक खेल प्रतियोगिताएं टालने की सलाह दी।

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की निरंतरता: सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में टिप्पणी की थी कि जब बड़े लोग एयर प्यूरीफायर चलाकर कमरों में बैठते हैं, तब बच्चों को ‘गैस चैंबर’ बने खुले मैदानों में खेलने के लिए नहीं झोंका जा सकता।

  • छात्रों के करियर की सुरक्षा: आयोग ने साफ किया है कि आयोजनों के टलने से छात्रों के खेल प्रमाण पत्र या भविष्य के अवसरों का नुकसान न हो; इसके लिए प्रतियोगिताओं को बाद के सुरक्षित महीनों में री-शेड्यूल किया जाए।

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  • चार राज्यों पर सीधा प्रभाव: दिल्ली एनसीटी सहित गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, सोनीपत और अलवर जैसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़े सभी जिलों के स्कूल इसके दायरे में आएंगे।

  • सर्दियों में चरम पर प्रदूषण: मौसमी उतार-चढ़ाव, पराली के धुएं और स्थानीय उत्सर्जन के कारण नवंबर-दिसंबर में एक्यूआई (AQI) अक्सर ‘गंभीर’ (400+) श्रेणी में पहुंच जाता है।

ताज़ा अपडेट: आयोग का औपचारिक पत्र और निर्देश

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों के लिए गठित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद एडवाइजरी जारी की। आयोग ने दिल्ली सरकार, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों और शिक्षा विभागों को स्पष्ट किया है कि सर्दियों के चरम महीनों में खेल प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन बच्चों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ साबित हो सकता है।

शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ गहन मंथन के बाद यह कदम उठाया गया है। आयोग ने दोहराया कि जो प्रतियोगिताएं पहले से तय थीं, उन्हें बिना किसी देरी के सुरक्षित महीनों (जैसे फरवरी या मार्च) में स्थानांतरित किया जाए, जब हवा की गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार दर्ज होता है।

पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और ‘गैस चैंबर’ की वास्तविकता

इस फैसले की जड़ें उस न्यायिक चिंता में हैं जो सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण से जुड़ी जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आई थी। अदालत की न्याय मित्र (Amicus Curiae) ने शीर्ष अदालत का ध्यान इस विरोधाभास की ओर खींचा था कि सर्दियों में जब राजधानी के अस्पताल सांस के मरीजों से भर जाते हैं और दफ्तरों में वर्क-फ्रॉम-होम की मांग उठती है, तब भी स्कूलों में जोनल और इंटर-स्कूल एथलेटिक्स मीट, फुटबॉल टूर्नामेंट और वार्षिक खेल दिवस आयोजित होते रहते हैं।

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो-टूक कहा था कि बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं। जहरीले स्मॉग में तेज दौड़ने से उनके श्वास तंत्र में पीएम 2.5 और पीएम 10 के सूक्ष्म कण फेफड़ों की गहराई तक उतर जाते हैं। अदालत ने CAQM को निर्देशित किया था कि वे सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएं और इन महीनों में खुली हवा की प्रतियोगिताओं पर रोक लगाने की रूपरेखा बनाएं। आयोग की यह ताज़ा एडवाइजरी उसी न्यायिक आदेश का परिणाम है।

विशेषज्ञ विचार: “खेलकूद के दौरान बच्चे सामान्य स्थिति की तुलना में 5 से 8 गुना अधिक हवा अंदर खींचते हैं, और वे नाक की बजाय मुंह से गहरी सांस लेते हैं। जब एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 से ऊपर हो, तो 15 मिनट की रनिंग भी 20 से 30 सिगरेट के धुएं जितना जहर सीधे फेफड़ों में उतार देती है।” — डॉ. वी. के. मोंगा, वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट

खेल मैदानों में क्या होता है जब प्रदूषण चरम पर पहुंचता है?

अक्सर अभिभावक पूछते हैं कि क्या खुली धूप में खेलना भी खतरनाक है? इसका वैज्ञानिक उत्तर बेहद चौंकाने वाला है। सर्दियों के दौरान ‘थर्मल इन्वर्जन’ (तापमान का उलटाव) की स्थिति बनती है। ठंडी हवा भारी होने के कारण ऊपर नहीं उठ पाती और वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और धूल जमीन से 100-200 मीटर की ऊंचाई पर एक अदृश्य चादर की तरह जम जाते हैं।

जब कोई एथलीट या छात्र 100 मीटर की स्प्रिंट लगाता है या 90 मिनट फुटबॉल खेलता है, तो उसके शरीर को ऑक्सीजन की अत्यधिक आवश्यकता होती है। तेजी से सांस लेने के कारण धूल के महीन कण प्राकृतिक फिल्टर (नाक के बाल और म्यूकस) को पार कर सीधे एल्वियोली (फेफड़ों की वायु थैलियों) में जम जाते हैं। इसके तुरंत बाद:

  • गले में तेज जलन और लगातार सूखी खांसी शुरू हो जाती है।

  • अस्थमा या ब्रोंकाइटिस से पीड़ित बच्चों में अचानक अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

  • आंखों में लालिमा और कंजंक्टिवाइटिस (संक्रमण) की शिकायतें आम हो जाती हैं।

  • लंबे समय में फेफड़ों की कार्यक्षमता (Lung Capacity) में 15 से 20 प्रतिशत तक की स्थायी गिरावट आ सकती है।

मेडिकल और वैज्ञानिक विश्लेषण: विशेषज्ञों की चेतावनी

पीडियाट्रिक और रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग आयोग के इस कदम को बच्चों के दीर्घकालिक जीवन की रक्षा के लिए अनिवार्य मान रहा है।

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, 6 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों की श्वसन प्रणाली पूर्ण रूप से परिपक्व नहीं होती। जब वे जहरीले वातावरण में उच्च-तीव्रता वाला व्यायाम करते हैं, तो फेफड़ों के ऊतकों में सूजन (Inflammation) आ जाती है। यह सूजन आगे चलकर एलर्जिक राइनाइटिस और क्रॉनिक पल्मोनरी समस्याओं का रूप ले लेती है।

हालांकि, खेल मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रशिक्षकों का एक दूसरा पहलू भी है। उनका कहना है कि खेल प्रतियोगिताएं रद्द होने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, खेल कोटा के तहत मिलने वाले दाखिलों और उनके साल भर के अभ्यास पर असर पड़ता है। इसलिए समाधान ‘रद्द करना’ नहीं, बल्कि ‘सावधानीपूर्वक री-शेड्यूलिंग’ होना चाहिए—जिस पर आयोग ने भी विशेष जोर दिया है।

प्रदूषण स्तर (AQI)स्वास्थ्य प्रभाव श्रेणीबच्चों की शारीरिक गतिविधियों के लिए सिफारिश
0 – 50अच्छा (Good)सभी आउटडोर खेल और अभ्यास पूरी तरह सुरक्षित।
51 – 100संतोषजनक (Satisfactory)सामान्य आउटडोर खेल बिना किसी बाधा के जारी रह सकते हैं।
101 – 200मध्यम (Moderate)संवेदनशील बच्चों में हल्की सांस की तकलीफ संभव; खेल सीमित करें।
201 – 300खराब (Poor)लंबी अवधि की मैराथन या तेज एथलेटिक्स से परहेज जरूरी।
301 – 400बहुत खराब (Very Poor)सभी आउटडोर खेल प्रतियोगिताएं तुरंत रोक दी जानी चाहिए।
401 – 500+गंभीर (Severe/Severe+)इमरजेंसी स्थिति; बच्चों को घर के अंदर रखें, स्कूल हाइब्रिड मोड में जाएं।

आधिकारिक जानकारी: CAQM और शिक्षा विभागों की कार्ययोजना

आयोग द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर दिल्ली और एनसीआर के शिक्षा निदेशालयों ने भी आंतरिक बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। सीएक्यूएम के दिशा-निर्देशों के प्रमुख प्रशासनिक बिंदु:

  • समान अवसर सुनिश्चित करना: किसी भी छात्र-एथलीट को इस स्थगन के कारण अंक या ग्रेड का नुकसान नहीं होना चाहिए। जिन प्रतियोगिताओं के आधार पर जोनल या नेशनल चयन होना है, उनके लिए वैकल्पिक विंडो खोजी जाए।

  • इंडोर विकल्पों पर विचार: जहां संभव हो, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, शतरंज या जिम्नास्टिक जैसे खेलों को उचित वेंटिलेशन और एयर-फिल्ट्रेशन वाले इंडोर हॉल में ही सीमित रखा जाए।

  • जन-जागरूकता अभियान (IEC): सितंबर से मार्च तक चलने वाले व्यापक जागरूकता अभियान के तहत स्कूलों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों और दैनिक एक्यूआई की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं।

रोचक तथ्य: क्या आप जानते हैं कि शीतकाल में दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण केवल स्थानीय कारकों से नहीं बढ़ता? हिमालय से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं जब पंजाब और हरियाणा से होकर गुजरती हैं, तो मौसमी बदलाव के साथ ही हवा की रफ्तार 5 किमी/घंटे से भी कम हो जाती है, जिससे समूचा क्षेत्र एक विशाल स्थिर बेसिन बन जाता है।

महत्वपूर्ण तिथियां और आगामी चरणबद्ध योजना

सर्दियों के महीनों में लागू होने वाले ग्रैप (GRAP – Graded Response Action Plan) और खेल आयोजनों के प्रस्तावित बदलावों की रूपरेखा:

अनुमानित समय सीमाप्रस्तावित प्रशासनिक कदमसंभावित प्रभाव / स्कूल दिशा-निर्देश
सितंबर – अक्टूबरखेल कैलेंडर की समीक्षा और अग्रिम पुनर्निर्धारणस्कूल वार्षिक खेल दिवसों को जनवरी अंत या फरवरी में शिफ्ट करेंगे।
15 अक्टूबर सेग्रैप (GRAP) के प्राथमिक चरणों का स्वतः सक्रियणनिर्माण कार्यों पर निगरानी और सड़कों पर पानी का छिड़काव।
01 नवंबर – 31 दिसंबरआउटडोर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं का पूर्ण स्थगनइंटर-स्कूल फुटबॉल, क्रिकेट और एथलेटिक्स टूर्नामेंट स्थगित।
जरूरत पड़ने पर (AQI > 400)प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के लिए हाइब्रिड मोडग्रैप स्टेज-3 और 4 के तहत कक्षाओं का ऑनलाइन संचालन।
जनवरी का अंतिम सप्ताहमौसम व वायु गुणवत्ता की पुनर्समीक्षायदि हवा साफ होती है, तो खेल कैलेंडर की बहाली पर विचार।

छात्र और नागरिक जीवन पर सीधा प्रभाव

इस फैसले का असर केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव दिल्ली-एनसीआर के सामाजिक और शैक्षणिक ताने-बाने पर पड़ेगा:

  • उभरते एथलीटों की तैयारी में बाधा: जो छात्र राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय ट्रायल्स की तैयारी में पसीना बहा रहे हैं, उनके रूटीन में रुकावट आएगी। आउटडोर ट्रैक पर सुबह की ट्रेनिंग प्रभावित होगी।

  • अभिभावकों को बड़ी राहत: सैकड़ों पैरेंट्स एसोसिएशन लगातार यह मांग कर रहे थे कि जब एक्यूआई ‘रेड ज़ोन’ में हो, तो बच्चों को खुले मैदान में जबरन न भेजा जाए। इस एडवाइजरी से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।

  • स्कूल प्रशासन के सामने लॉजिस्टिक चुनौती: अधिकांश निजी स्कूलों की वार्षिक फीस और गतिविधियों में स्पोर्ट्स डे एक बड़ा आकर्षण होता है। दिसंबर में होने वाले कार्यक्रमों को स्थगित करने से पूरे शैक्षणिक सत्र की समय-सारिणी पर असर पड़ेगा।

भविष्य का परिदृश्य: आगे क्या होने जा रहा है?

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की यह एडवाइजरी केवल एक सीजनल उपाय नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक नीतिगत बदलाव का संकेत है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो दिल्ली-एनसीआर में स्कूली अकादमिक कैलेंडर को स्थायी रूप से पुनर्गठित किया जा सकता है।

शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जैसे पहाड़ी राज्यों में सर्दियों की लंबी छुट्टियां होती हैं, वैसे ही एनसीआर में “प्रदूषण अवकाश” या “स्पोर्ट्स-ऑफ पीरियड” को वार्षिक कैलेंडर का स्थायी हिस्सा बनाना पड़ सकता है। आने वाले हफ्तों में हरियाणा (गुरुग्राम, फरीदाबाद), उत्तर प्रदेश (नोएडा, गाजियाबाद) और दिल्ली की राज्य सरकारें अपने-अपने जिलों के लिए विस्तृत सर्कुलर जारी करेंगी। किसी भी स्कूल द्वारा उल्लंघन किए जाने पर ग्रैप नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

अभिभावकों, शिक्षकों और पाठकों के लिए सुरक्षा सलाह

प्रशासनिक आदेश अपनी जगह हैं, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक और अभिभावक के रूप में आपको भी सतर्क रहने की आवश्यकता है:

  • दैनिक एक्यूआई (AQI) देखकर ही बाहर भेजें: समीर (SAMEER) ऐप या सीपीसीबी की वेबसाइट पर सुबह का एक्यूआई चेक करें। यदि स्तर 300 से ऊपर है, तो बच्चों को सुबह की सैर या आउटडोर खेल के लिए बिल्कुल न भेजें।

  • डाइट में शामिल करें एंटीऑक्सीडेंट्स: बच्चों के आहार में गुड़, अदरक, आंवला, तुलसी और हल्दी वाला दूध शामिल करें। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर फेफड़ों के संक्रमण से बचाता है।

  • मास्क का सही चुनाव: कपड़े के साधारण मास्क स्मॉग के बारीक कणों (PM 2.5) को नहीं रोक पाते। जब भी बाहर निकलना जरूरी हो, N95 या N99 प्रमाणित मास्क का ही उपयोग करें।

  • घरों में वेंटिलेशन का समय: सुबह और देर शाम जब स्मॉग जमीन के सबसे करीब होता है, तब खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें। दोपहर में जब धूप खिले, तभी थोड़ी देर के लिए वेंटिलेशन करें।

निष्कर्ष

आयोग की यह एडवाइजरी समय की मांग और बच्चों की सांसों की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक संवेदनशील कदम है। किसी भी देश या समाज के लिए खेलकूद और फिटनेस का महत्व निर्विवाद है, लेकिन जब सांस लेना ही बीमारी को बुलावा देने लगे, तो ठहराव ही समझदारी बन जाता है।

स्कूल प्रबंधनों, कोचों और अभिभावकों को इसे किसी असुविधा के बजाय बच्चों के स्वास्थ्य की प्राथमिकता के रूप में देखना चाहिए। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने संबंधित स्कूल और राज्य शिक्षा विभाग के आधिकारिक सर्कुलर पर नजर बनाए रखें और किसी भी अपुष्ट सूचना या अफवाह पर भरोसा न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्र.1: CAQM ने किन महीनों में स्कूल खेल प्रतियोगिताएं टालने की सलाह दी है?

उत्तर: आयोग ने मुख्य रूप से नवंबर और दिसंबर के महीनों में सभी आउटडोर शारीरिक खेल प्रतियोगिताओं और एक्टिविटीज को टालने या पुनर्निर्धारित करने की सलाह दी है, क्योंकि इन महीनों में दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सबसे खराब स्तर पर पहुंच जाती है।

प्र.2: क्या यह निर्देश केवल दिल्ली के स्कूलों पर लागू है या अन्य राज्यों पर भी?

उत्तर: यह परामर्श केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। इसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अंतर्गत आने वाले हरियाणा (जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद), उत्तर प्रदेश (जैसे नोएडा, गाजियाबाद) और राजस्थान के जिले भी शामिल हैं।

प्र.3: क्या खेल प्रतियोगिताओं के टलने से छात्रों के खेल कोटे या ग्रेड पर असर पड़ेगा?

उत्तर: आयोग ने राज्य सरकारों से स्पष्ट कहा है कि छात्रों को किसी भी तरह का शैक्षणिक या करियर संबंधी नुकसान नहीं होना चाहिए। इसके लिए आयोजनों को बाद के सुरक्षित महीनों में दोबारा कराने का अवसर दिया जाएगा।

प्र.4: सर्दियों में आउटडोर खेल खेलना बच्चों के लिए इतना खतरनाक क्यों हो जाता है?

उत्तर: सर्दियों में थर्मल इन्वर्जन के कारण जहरीले कण जमीन के पास फंस जाते हैं। खेलते समय बच्चे मुंह से गहरी और तेज सांस लेते हैं, जिससे सामान्य से कई गुना अधिक जहरीले कण सीधे उनके फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर संक्रमण पैदा करते हैं।

प्र.5: क्या इंडोर हॉल में होने वाले खेल भी इस रोक के दायरे में आते हैं?

उत्तर: आयोग की सलाह मुख्य रूप से खुले मैदानों में होने वाली शारीरिक प्रतियोगिताओं पर केंद्रित है। उचित वेंटिलेशन और एयर प्यूरीफिकेशन वाले इंडोर परिसरों में सामान्य गतिविधियां सुरक्षित मानकों के तहत आयोजित की जा सकती हैं।

प्र.6: क्या सामान्य फिजिकल एजुकेशन (PE) की क्लास भी बंद रहेंगी?

उत्तर: जब एक्यूआई ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचता है, तो ग्रैप (GRAP) के तहत स्कूलों को सभी प्रकार की आउटडोर पीई क्लास बंद कर छात्रों को इनडोर एक्टिविटी कराने के निर्देश दिए जाते हैं।

प्र.7: यह एडवाइजरी जारी करने के पीछे सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका रही है?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण पर सुनवाई करते हुए गहरी चिंता जताई थी कि अत्यधिक प्रदूषण के समय बच्चों को खुली हवा में खेलने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट के इसी निर्देश पर संज्ञान लेते हुए CAQM ने यह कदम उठाया।

प्र.8: अभिभावक अपने क्षेत्र की दैनिक वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसे जान सकते हैं?

उत्तर: अभिभावक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक ऐप ‘समीर’ (SAMEER) पर अपने नजदीकी मॉनिटरिंग स्टेशन का वास्तविक समय का एक्यूआई (AQI) देख सकते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा जारी आधिकारिक परामर्श, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और पर्यावरण व चिकित्सा विशेषज्ञों के सार्वजनिक बयानों के आधार पर जन-जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। स्कूलों की विशिष्ट समय-सारिणी, आगामी तिथियों और औपचारिक आदेशों के लिए अभिभावक एवं छात्र संबंधित विद्यालय प्रशासन और राज्य शिक्षा निदेशालय के आधिकारिक सर्कुलर का अवलोकन अवश्य करें।

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Abhay Jeet Singh

Abhay Jeet Singh

Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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