दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को विपक्षी INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की जा रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और गठबंधन के अन्य नेता विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विरोध जता रहे हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
रैली से पहले विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च का कार्यक्रम बनाया है। इस आयोजन में INDIA गठबंधन के करीब 21 दलों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई है और कई मार्गों पर यातायात संबंधी बदलाव किए हैं।
राहुल गांधी की दिल्ली रैली: अब तक क्या सामने आया?
- रैली की तारीख: 1 नवंबर 2026, रविवार।
- स्थान: रामलीला मैदान, नई दिल्ली।
- अभियान: वोट बचाओ, देश बचाओ।
- मुख्य मुद्दा: मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)।
- विपक्ष की मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता।
- मार्च का रास्ता: मिंटो रोड जंक्शन से अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान।
- कार्यक्रम का समय: रैली के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक का समय निर्धारित है; मार्च दोपहर 12 बजे शुरू होना है।
क्यों आयोजित की गई ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली?
INDIA गठबंधन का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई जगह पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव से पहले संबंधित नागरिकों को उचित सूचना और अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से SIR की प्रक्रिया पर जवाब मांगा है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी का असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित की गई है।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है। हालांकि, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक विपक्षी नेताओं का मार्च
रैली के तहत विपक्षी नेताओं का मार्च मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के जंक्शन से शुरू होकर अजमेरी गेट के रास्ते रामलीला मैदान तक पहुंचने का कार्यक्रम है। इस मार्च का उद्देश्य अलग-अलग विपक्षी दलों को एक मंच पर लाना और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त विरोध दर्ज कराना है।
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 INDIA गठबंधन दलों के नेताओं के इस मार्च में प्रतिनिधित्व की योजना है। राहुल गांधी के अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और दूसरे विपक्षी नेताओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
रैली में कौन-कौन से नेता हो सकते हैं शामिल?
इस आयोजन में कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं की भागीदारी प्रस्तावित है। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
- राहुल गांधी – लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष।
- मल्लिकार्जुन खड़गे – कांग्रेस अध्यक्ष।
- ममता बनर्जी – तृणमूल कांग्रेस प्रमुख।
- अखिलेश यादव – समाजवादी पार्टी प्रमुख।
- तेजस्वी यादव – राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख नेताओं में शामिल।
- अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता।
अलग-अलग दलों की भागीदारी का उद्देश्य मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर विपक्ष की साझा राजनीतिक स्थिति सामने रखना है। हालांकि, सभी नेताओं की वास्तविक उपस्थिति और मंच से दिए गए भाषणों की पुष्टि कार्यक्रम के दौरान जारी अपडेट से ही की जानी चाहिए।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ट्रैफिक पर असर
रैली में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम के लिए 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की योजना बनाई गई है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था भी की गई है।
पुलिस ने लोगों को संभावित यातायात बदलावों को ध्यान में रखकर यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी है। खासकर कनॉट प्लेस, मिंटो रोड, अजमेरी गेट और रामलीला मैदान के आसपास आने-जाने वालों को अतिरिक्त समय लेकर निकलना चाहिए।
SIR क्या है और इस पर विवाद क्यों?
SIR यानी Special Intensive Revision, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को ठीक करना है। इस प्रक्रिया के तहत मृत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों और अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान की जा सकती है।
विवाद इस बात को लेकर है कि पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटने की आशंका को कैसे रोका जाए और किसी नाम को हटाने से पहले उचित सत्यापन तथा सूचना की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। विपक्ष इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना उसका संवैधानिक दायित्व है।
इसलिए SIR पर बहस केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। इसमें मतदाता के अधिकार, सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और शिकायत निवारण की प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल हैं।
रैली से एक दिन पहले CEC के खिलाफ प्रतीकात्मक कार्यक्रम
रामलीला मैदान की रैली से एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित किया था। यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुआ, जिसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की।
इस कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। इसके अगले दिन रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करना विपक्ष की इसी मुहिम को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।
निष्कर्ष
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के जरिए राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेता SIR प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच हो और मुख्य चुनाव आयुक्त जवाबदेही तय करें। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। अब इस पूरे घटनाक्रम में रैली के दौरान सामने आने वाले बयान, आयोग की प्रतिक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर 1 नवंबर 2026 को उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावी अनियमितताओं से जुड़े आरोप विपक्षी दलों के दावे हैं। चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।




























