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सम्भल में कल्कि धाम निर्माण-Bharati Fast News

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Home - Indian Culture News - सम्भल में कल्कि धाम निर्माण: धार्मिक आस्था का प्रतीक या राजनीतिक रणनीति?

सम्भल में कल्कि धाम निर्माण: धार्मिक आस्था का प्रतीक या राजनीतिक रणनीति?

भगवान कल्कि से जुड़ी मान्यताएं, सम्भल की ऐतिहासिक भूमिका और मंदिर निर्माण पर उठते सियासी सवाल - जानिए पूरा सच | Bharati Fast News

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
11/01/2026
in Indian Culture News
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सम्भल में कल्कि धाम निर्माण-Bharati Fast News
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नमस्ते Bharati Fast News के पाठकों! सदियों से चली आ रही एक भविष्यवाणी, एक भविष्य के अवतार और उसके आगमन से पहले ही बन रहा एक भव्य मंदिर. क्या ये महज संयोग है, या नियति का कोई गूढ़ संकेत? उत्तर प्रदेश के सम्भल में बन रहा है कल्कि धाम मंदिर “सम्भल में कल्कि धाम निर्माण“, जो भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार, कल्कि भगवान को समर्पित है.

सम्भल में कल्कि धाम – केवल एक मंदिर, या कुछ और?

दुनिया का शायद पहला ऐसा मंदिर जो किसी देवता के अवतार लेने से लाखों साल पहले ही बनाया जा रहा है. ये बात इसे ख़ास बनाती है. लेकिन क्या यह सिर्फ गहरी आस्था का प्रतीक है, या इसके पीछे सियासी समीकरणों का खेल भी है? सम्भल में कल्कि धाम निर्माण, एक ऐसा नाम जो आस्था और जिज्ञासा दोनों को एक साथ जगाता है.

निर्माणधीन कल्कि धाम सम्भल-Bharati Fast News

कल्कि भगवान की कहानी: भविष्य का योद्धा, कलयुग का अंत

कौन हैं भगवान कल्कि? हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित भगवान विष्णु का वह अंतिम अवतार जो कलयुग के अंत में अधर्म का नाश करने आएगा. भविष्यवाणियां उनके स्वरूप का वर्णन करती हैं: सफेद घोड़े ‘देवदत्त’ पर सवार, दिव्य तलवार लिए एक महान योद्धा. धर्मग्रंथों में उनके जन्म और शिक्षा का विस्तृत जिक्र मिलता है, मानो सदियों पहले ही भविष्य की पटकथा लिख दी गई हो. कल्कि भगवान का आगमन कलयुग के अंधेरे को चीरकर सतयुग का प्रकाश लाएगा, धर्म की पुनः स्थापना करेगा. सम्भल में कल्कि धाम निर्माण और उसकी भव्यता।

सम्भल का इतिहास: भविष्यवाणियों और अतीत के निशान

सम्भल, एक शहर, कई युगों की पहचान. इस धरती ने कितने ही साम्राज्यों को बनते और मिटते देखा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सम्भल को ही वह ‘शंभल ग्राम’ माना जाता है, जहां कल्कि भगवान का जन्म होगा? पौराणिक कथाएं और मान्यताएं सदियों से इस विश्वास को पोषित करती आई हैं, पुराणों (भागवत, कल्कि पुराण) में कहा गया कि कलियुग के अंत में भगवान कल्कि संभल में शुम्भ-निकुम्भ नामक ब्राह्मण पुत्र के रूप में अवतरित होंगे। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 1990 में कल्कि फाउंडेशन स्थापित कर सपना शुरू किया। 2007 शिलान्यास, 2016 में सपा सरकार ने रोका, 2023 में हाईकोर्ट ने अनुमति दी। PM मोदी ने 19 फरवरी 2024 को शिलान्यास किया।

लेकिन क्या सम्भल में कल्कि से पहले भी कल्कि थे? किवदंतियां बताती हैं कि यहाँ पहले से एक प्राचीन कल्कि मंदिर था, जिसे मुग़ल शासक बाबर ने नष्ट कर शाही जामा मस्जिद का निर्माण करवाया. हालांकि, इसका कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता. अलबत्ता, 18वीं सदी में मराठा शासक अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनवाए गए कल्कि मंदिर का जिक्र जरूर मिलता है, जो इस क्षेत्र में मराठा आस्था का प्रतीक है. जिसको हमने एक वीडियो के द्वारा आपको निचे दिखाया गया है।

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भव्य निर्माण का सपना: पत्थरों में ढलती आस्था

आज, सम्भल में एक बार फिर कल्कि का सपना आकार ले रहा है, एक विशाल मंदिर कल्कि धाम के रूप में। 5 एकड़ में फैला, 2030 तक पूरा होने की उम्मीद – एक विशालकाय परियोजना. अयोध्या राम मंदिर और सोमनाथ मंदिर की तरह गुलाबी पत्थरों से निर्माण, बिना स्टील या लोहे के. यह मंदिर वास्तुकला की अद्भुत मिसाल होगा. 108 फीट ऊंचा शिखर, 11 फीट ऊंचा चबूतरा, भगवान विष्णु के दस अवतारों को समर्पित दस गर्भगृह और 68 तीर्थस्थल – हर एक चीज भव्यता और आध्यात्मिकता का प्रतीक होगी।

आचार्य प्रमोद कृष्णम का वर्षों पुराना संकल्प और श्री कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट इस सपने को साकार करने में जुटे हैं. पीएम मोदी और सीएम योगी जैसे शीर्ष नेताओं का शिलान्यास में शामिल होना, इसे “भारत की आध्यात्मिकता का नया केंद्र” बताना, इस परियोजना के महत्व को दर्शाता है. कल्कि धाम सम्भल, एक ऐसा नाम जो अब राष्ट्रीय पटल पर भी गूंज रहा है.

निर्माणधीन कल्कि धाम by Bharati Fast News

विवादों का बवंडर: जब आस्था से टकराई सियासत और जमीन

लेकिन यह कहानी इतनी सरल नहीं है. कल्कि धाम के निर्माण के साथ ही विवादों का एक बवंडर भी उठ खड़ा हुआ है. आचार्य प्रमोद कृष्णम का कांग्रेस से निष्कासन और फिर भी बीजेपी नेताओं की परियोजना में गहरी दिलचस्पी, कई सवाल खड़े करती है. क्या कल्कि धाम का निर्माण पश्चिमी यूपी में चुनावी लाभ और “विकास भी विरासत भी” के नारे को पुष्ट करने का प्रयास है?

जमीन का झगड़ा भी कम पेचीदा नहीं है. 2016 में मुस्लिम किसान यूनियन के अध्यक्ष इनामुर रहमान खान ने निर्माण का विरोध किया, जिसके बाद निर्माण पर रोक लग गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ. हाल ही में कल्कि धाम के पास छोटी मस्जिद समेत कई मस्जिदों को “अतिक्रमण” बताकर गिरा दिया गया. स्थानीय लोगों के सवाल हैं कि जब अनुमति दी गई थी, तो अब ये अतिक्रमण कैसे हो गया? कल्कि धाम मंदिर के निर्माण को इलाहाबाद हाईकोर्ट से हरी झंडी

निर्माणाधीन कल्कि धाम, संभल के एचोड़ा कम्बोह में स्थित, भगवान विष्णु के कल्कि अवतार को समर्पित एक भव्य धार्मिक परिसर है। यह देश का पहला ऐसा मंदिर होगा जहाँ अवतरण से पहले ही निर्माण हो रहा है। यहाँ कुछ बेहतर और महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए हैं।​

प्रमुख विशेषताएँ और डिज़ाइन

कल्कि धाम का शिखर 108 फीट ऊँचा होगा, जिसमें 11 फीट की चौकी बनेगी। अयोध्या राम मंदिर और सोमनाथ मंदिर जैसा गुलाबी पत्थर (राजस्थान से मँगाया जा रहा) इस्तेमाल हो रहा है। भगवान विष्णु के सभी 10 अवतारों (मत्स्य से कल्कि तक) के अलग-अलग गर्भगृह बनेंगे। परिसर में विश्व का सबसे बड़ा गुरुकुल (सनातन शिक्षा केंद्र) और 1008 कुंडों वाला तीर्थ स्थल भी शामिल है।​

निर्माण प्रगति (2026 अपडेट)

  • क्षेत्रफल: 5 एकड़ सरकारी/ग्राम सभा भूमि पर।

  • लक्ष्य: 2029 तक पूर्ण निर्माण। 2025 के अंत तक मुख्य संरचना 50% आगे।

  • शिलादान: राजस्थान से शिलाएँ आ रही हैं। हाल ही में मंत्री एके शर्मा, कपिल देव अग्रवाल, लंदन मेयर राज मिश्रा ने शिलादान किया। शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने पूजन किया।​

  • बजट और सहायता: ₹5 करोड़ से पर्यटन विकास (पार्किंग, शौचालय, मार्गदर्शन)। राजस्थान कारीगर कार्यरत।

जमीन का विवरण

  • स्थान: संभल जिले के एचोड़ा कंबोह गाँव, कल्कि धाम परिसर (PM मोदी ने 19 फरवरी 2024 को शिलान्यास किया)।

  • स्वामित्व: राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम सभा या सार्वजनिक उपयोग की सरकारी भूमि। ट्रस्ट को धार्मिक/सामाजिक उद्देश्य के लिए आवंटित। हल्का लेखपाल रिपोर्ट में पुष्टि। संभल में ‘कल्कि धाम’ के पास मस्जिद पर चला बुलडोजर, तीन थानों की पुलिस फोर्स और PAC रही तैनात

  • क्षेत्रफल: विशाल परिसर (सटीक एकड़ का उल्लेख नहीं, लेकिन धाम के लिए 10+ एकड़ अनुमानित)।

  • विवाद का अभाव: कल्कि धाम की मुख्य जमीन पर कोई मालिकाना हक विवाद की रिपोर्ट नहीं। आसपास की 265 वर्ग मीटर सरकारी पार्क जमीन पर अवैध मस्जिद (2025 में बुलडोजर से हटाई) थी, जो धाम से सटी हुई थी। प्रशासन ने नोटिस (जून 2025) और बेदखली आदेश (सितंबर 2025) के बाद कार्रवाई की। संभल में अवैध मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन​

समयरेखा

  • 2007: शिलान्यास (आचार्य प्रमोद कृष्णम द्वारा)।

  • 2024: PM शिलान्यास।

  • 2025: आसपास अवैध निर्माण हटाए गए, धाम निर्माण तेज।

कल्कि धाम संभल के शिलान्यास और मॉडल अनावरण निम्नलिखित विवरण के अनुसार हुए।​

शिलान्यास विवरण

  • तारीख: 19 फरवरी 2024 (रविवार)।

  • आयोजक/मुख्य अतिथि: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंच पर उपस्थित रहे।

  • विशेष: 7000+ साधु-संतों की उपस्थिति में वैदिक अनुष्ठान। आचार्य प्रमोद कृष्णम (पीठाधीश्वर) ने स्वागत किया।​

मॉडल अनावरण

  • तारीख: उसी दिन (19 फरवरी 2024) – शिलान्यास समारोह के दौरान ही।

  • आयोजक: पीएम मोदी ने भव्य 3D मॉडल का अनावरण किया, जिसमें 108 फीट शिखर, 10 अवतार गर्भगृह, गुरुकुल दिखाया गया।

  • स्थान: एचोड़ा कम्बोह ग्राम, संभल में 5 एकड़ परिसर।​

पृष्ठभूमि: 2007 में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रारंभिक शिलान्यास किया था। 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुमति दी। 2024 का यह समारोह ऐतिहासिक रहा।

शाही जामा मस्जिद पर भी विवादों के बादल मंडरा रहे हैं. क्या मस्जिद प्राचीन मंदिर के ऊपर बनी है? नवंबर 2024 में मस्जिद के सर्वेक्षण के बाद हुई हिंसा, जानमाल का नुकसान, धारा 144 और इंटरनेट बंद, स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है. इतिहासकारों (A.C.L. Carlleyle, मीनाक्षी जैन, श्री राम शर्मा) और ASI रिपोर्टों के हवाले से दावे और प्रतिदावे किए जा रहे हैं, जिससे मामला और उलझ गया है.

कल्कि धाम सम्भल-Bharati Fast News

भविष्य की ओर: कल्कि धाम का आने वाला कल

इन विवादों के बावजूद, कल्कि धाम का निर्माण कार्य जारी है. 2030 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य है. उम्मीद है कि यह करोड़ों भक्तों के लिए एक नया तीर्थस्थल बनेगा, सम्भल को एक प्रमुख आध्यात्मिक हब के रूप में स्थापित करेगा, भारत की पारंपरिक वास्तुकला और समृद्ध विरासत का संरक्षण करेगा, पर्यटन में वृद्धि से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा, रोजगार के अवसर पैदा करेगा, और भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनेगा.

कल्कि धाम सम्भल निर्माण परियोजना की कुल लागत के बारे में आधिकारिक रूप से कोई एकल, अंतिम आंकड़ा घोषित नहीं हुआ है, लेकिन उपलब्ध सरकारी घोषणाओं और खबरों से फंडिंग का ब्रेकअप इस प्रकार है:

फंडिंग स्रोत और राशि (कन्फर्म्ड डेटा):

1. राज्य सरकार (उत्तर प्रदेश सरकार) का योगदान

  • ₹7 करोड़ – संभल के धार्मिक स्थलों के समग्र विकास के लिए (जुलाई 2025 घोषणा)।​

    • इसमें से ₹3 करोड़ विशेष रूप से कल्कि धाम के सौंदर्यीकरण के लिए।​

  • ₹5 करोड़ – पर्यटन विकास योजना के तहत कल्कि धाम और आसपास के तीर्थ स्थलों (कुएँ, मंदिर) के लिए (सितंबर 2025)।​

कुल राज्य फंड: ₹8–12 करोड़ (विभिन्न घोषणाओं को जोड़कर)।

2. केंद्र सरकार का योगदान

  • सीधा फंडिंग का स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं, लेकिन PM मोदी ने फरवरी 2024 में शिलान्यास किया और दिसंबर 2025 में प्रगति रिपोर्ट ली।​

  • यह प्रधानमंत्री पर्यटन विकास योजना या धार्मिक पर्यटन स्कीम्स के तहत हो सकता है, लेकिन विशिष्ट राशि घोषित नहीं।

3. ट्रस्ट और निजी दान

  • श्री कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट (अध्यक्ष: आचार्य प्रमोद कृष्णम) मुख्य निर्माणकर्ता।​

  • रामभद्राचार्य ने ₹11 लाख दान की घोषणा की। कल्कि धाम निर्माण के लिए 11 लाख का अंश देंगे कथावाचक रामभद्राचार्य​

  • अन्य संतों/भक्तों से दान एकत्र हो रहा है।

कुल अनुमानित लागत (Indirect Figures):

  • ₹10–15 करोड़+ – सरकारी फंड + ट्रस्ट दान (सटीक आधिकारिक कुल लागत घोषित नहीं)।

  • 2029 तक पूरा होने का लक्ष्य।​

मुख्य फंडिंग: 90% राज्य सरकार (UP Tourism Dept) + ट्रस्ट दान। केंद्र की भूमिका शिलान्यास और पर्यटन प्रोत्साहन तक सीमित दिखती है। UP govt to develop Sambhal into Hindu pilgrimage hub; Rs 7 c .. ​

नोट: कुल लागत का कोई एकल आधिकारिक आंकड़ा नहीं मिला; ऊपर दिए आंकड़े अलग–अलग घोषणाओं का संकलन हैं। लेटेस्ट के लिए UP Tourism Dept या ट्रस्ट से संपर्क करें।

आचार्य प्रमोद कृष्णम कल्कि धाम के पीठाधीश्वर

आचार्य प्रमोद कृष्णम एक प्रमुख धार्मिक नेता, राजनीतिज्ञ, वक्ता और शायर हैं, जो उत्तर प्रदेश के संभल स्थित कल्कि धाम के पीठाधीश्वर के रूप में विख्यात हैं। वे सनातन धर्म के प्रचारक होने के साथ-साथ इस्लामिक ज्ञान में भी पारंगत हैं और अक्सर विवादास्पद बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं।​

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

आचार्य प्रमोद कृष्णम (असली नाम: प्रमोद त्यागी) का जन्म 4 जनवरी 1965 को उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एचोड़ा कंबोह गाँव में एक ब्राह्मण (त्यागी) परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जसवंत सिंह और माता का नाम रोहिताश देवी था। छात्र जीवन में ही उन्होंने राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की और समाज सुधार के लिए सक्रिय हो गए। किशोरावस्था में नवशक्ति संगठन की स्थापना कर अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ काम शुरू किया। 1981-82 में राजीव गांधी से मिले और कांग्रेस से जुड़ गए।​

राजनीतिक करियर

  • कांग्रेस प्रवेश: 1985 में सक्रिय हुए। राजीव गांधी, राजेश पायलट के करीबी रहे। यूथ कांग्रेस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • चुनाव: 1993 में संभल विधानसभा नामांकन दाखिल किया (वापस लिया)। 2014 में संभल लोकसभा और 2019 में लखनऊ लोकसभा से कांग्रेस उम्मीदवार। दोनों बार हार।

  • पद: उत्तर प्रदेश कांग्रेस महासचिव रहे। 2018 में राजस्थान, MP, छत्तीसगढ़ चुनावों में स्टार प्रचारक।

  • निष्कासन: फरवरी 2024 में राम मंदिर मुद्दे पर पार्टी आलोचना के कारण 6 वर्ष के लिए कांग्रेस से निष्कासित। प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते थे। BJP में शामिल होने की चर्चाएँ।​

धार्मिक और सामाजिक कार्य

  • कल्कि धाम: 1990 में कल्कि फाउंडेशन और 1996 में सार्थक ट्रस्ट की स्थापना। 2007 में संभल में कल्कि धाम का शिलान्यास (19 फरवरी 2024 को PM मोदी ने आधारशिला रखी)।

  • अन्य: मासिक पत्रिका ‘निर्माण’ का प्रकाशन। गजल गायकी, शायरी, मुशायरे। इस्लाम, कर्बला पर व्याख्यान। पिस्तौल-राइफल संग्रह का शौक। करोड़पति (चुनावी हलफनामा)।​

व्यक्तिगत जीवन

1990 में रेणुका से विवाह। वे राम और राष्ट्र पर अडिग रहने का दावा करते हैं। ‘आप की अदालत’ में राहुल गांधी, कांग्रेस की आलोचना की। सनातन और इस्लाम पर स्पष्ट विचार रखते हैं।

प्रमोद कृष्णम: कितने संत और कितने नेता… कैसा रहा सियासी और आध्यात्मिक सफर?​

हाल की गतिविधियाँ (2026 तक)

कल्कि धाम का निर्माण जारी। महाकुंभ 2025 में सत्य सनातन पर व्याख्यान। विवाद: हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर बयानबाजी।

Disclaimer

कल्कि धाम सम्भल संबंधी जानकारी:

इस लेख में दी गई कल्कि धाम सम्भल निर्माण की जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों, सरकारी घोषणाओं और उपलब्ध सार्वजनिक डेटा पर आधारित है। निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें:

1. फंडिंग और लागत संबंधी

  • कुल परियोजना लागत का कोई आधिकारिक अंतिम आंकड़ा घोषित नहीं हुआ है।

  • दिए गए आंकड़े (₹7 करोड़, ₹5 करोड़, ₹11 लाख दान) अलग-अलग समय पर जारी सरकारी घोषणाओं और बयानों का संकलन हैं।

  • केंद्र vs राज्य फंडिंग का स्पष्ट विभाजन सार्वजनिक नहीं है।

2. निर्माण प्रगति

  • परियोजना 2029 तक पूर्ण होने का लक्ष्य है (Amar Ujala अक्टूबर 2025)

  • नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के लिए UP Tourism Department या श्री कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट से संपर्क करें।

3. धार्मिक-राजनीतिक विवाद

  • सम्भल में धार्मिक पर्यटन विकास और मंदिर निर्माण को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है।

  • यह लेख तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करता है, किसी पक्ष का समर्थन/विरोध नहीं करता।

4. सत्यापन

पाठकों से अनुरोध:

✅ आधिकारिक जानकारी के लिए:
• UP Tourism Department website
• श्री कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट
• sambhal.nic.in (जिला वेबसाइट)
✅ किसी भी निवेश/दान से पहले स्वयं सत्यापित करें
✅ स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें

5. संपादकीय नोट

Bharati Fast News किसी भी प्रकार के विवादास्पद दावे का समर्थन नहीं करता। यह लेख सार्वजनिक जानकारी का संकलन है जो पाठकों को संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है।

अंतिम जिम्मेदारी: सभी निर्णय और कार्रवाई आपकी अपनी विवेकबुद्धि और आधिकारिक सत्यापन पर आधारित होनी चाहिए।

सम्भल में कल्कि धाम निर्माण-Bharati Fast News


Bharati Fast News – तेज़ खबरें, सच्ची खबरें – यही है भारती फास्ट न्यूज़
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निष्कर्ष: कल्कि धाम – एक मंदिर से बढ़कर एक कहानी

कल्कि धाम सम्भल सिर्फ पत्थरों से बनी एक इमारत नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, राजनीति और भविष्य के सपनों का एक जटिल संगम है. यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे प्राचीन भविष्यवाणियां आज भी वर्तमान को आकार दे रही हैं और कैसे धर्म और सियासत अक्सर एक ही सिक्के के दो पहलू बन जाते हैं.

Bharati Fast News पर यह भी देखें

1-सोमनाथ मंदिर का इतिहास और मान्यता: कहाँ स्थित है, कैसे पहुँचे और कब जाएँ?

2-भगवान कल्कि अवतार: धार्मिक आस्था, भविष्यवाणी और इससे जुड़ी सच्चाई क्या है?

FAQ – कल्किधाम के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कल्कि धाम मंदिर कहाँ बन रहा है?

उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एचोड़ा कंबोह गाँव में।

कल्कि धाम का शिलान्यास कब हुआ?

  • 2007: शिलान्यास (आचार्य प्रमोद कृष्णम द्वारा)।

  • 2024: PM श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा शिलान्यास।

भगवान कल्कि कौन हैं?

भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार.

सम्भल का कल्कि धाम क्यों खास है?

यह भगवान कल्कि के अवतार लेने से पहले ही बनाया जा रहा है.

कल्कि धाम निर्माण से जुड़े प्रमुख विवाद क्या हैं?

वर्तमान में कोई विवाद नहीं है। कल्किधाम निर्माणधीन है।

कल्कि धाम कब तक पूरा हो जाएगा?

2030 तक.

पोस्ट से सम्बंधित अन्य ख़बर-PM मोदी से संसद जाकर मिले आचार्य प्रमोद कृष्णम, जानें किस मुद्दे को लेकर हुई बातचीत?

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Abhay Jeet Singh

Abhay Jeet Singh

Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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