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आम का अचार बनाते समय न करें यह गलती! सही कच्ची कैरी और सही मसालों का चुनाव देगा सालभर बेहतरीन स्वाद

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Home - किसान और खेती की न्यूज़ - आम का अचार बनाते समय न करें यह गलती! सही कच्ची कैरी और सही मसालों का चुनाव देगा सालभर बेहतरीन स्वाद

आम का अचार बनाते समय न करें यह गलती! सही कच्ची कैरी और सही मसालों का चुनाव देगा सालभर बेहतरीन स्वाद

आम का अचार लंबे समय तक स्वादिष्ट और सुरक्षित रहे, इसके लिए कच्ची कैरी और सही मसालों का सही चुनाव बेहद जरूरी है | Bharati Fast News

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
06/06/2026
in किसान और खेती की न्यूज़, Indian Culture News, News
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आम का अचार

आम का अचार रेसिपी: सालभर सुरक्षित रखने के आसान और घरेलू तरीके

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आम का अचार बनाते समय न करें यह गलती! सही कच्ची कैरी और सही मसालों का चुनाव देगा सालभर बेहतरीन स्वाद

मई और जून की वो तपती दोपहरियां, घर के आंगन में बिछी सूती सफेद चादरें, और हवा में तैरती हुई सरसों के तेल, सौंफ और कलौंजी की तीखी खुशबू। यह केवल एक रेसिपी नहीं है, बल्कि भारत के लगभग हर घर की एक बेहद भावुक और सांस्कृतिक याद है। बचपन में नानी या दादी का मर्तबान पर कपड़ा बांधना और बच्चों को उसे छूने से मना करना, एक अघोषित कड़ा नियम हुआ करता था। लेकिन जब उसी मर्तबान को कुछ महीनों बाद खोला जाए और उसमें सफेद फंगस (फफूंद) जमी मिले या आम के टुकड़े पूरी तरह गलकर काले पड़ जाएं, तो न केवल पूरी मेहनत बेकार जाती है, बल्कि दिल भी टूट जाता है। आखिर क्यों कुछ लोगों के हाथ का बना अचार सालों-साल खराब नहीं होता, जबकि कुछ लोगों की बरनी दो महीने में ही सड़ने लगती है?

गर्मियों के इस पीक सीजन में जब हर घर में पारंपरिक तरीके से थाली का स्वाद बढ़ाने की तैयारियां चल रही हैं, तब भारती फास्ट न्यूज़ की टीम ने इस कला के पीछे छिपे वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारणों को खंगाला है। भारतीय रसोइयों में आम का अचार बनाने का यह पारंपरिक दौर अपने चरम पर है। लेकिन सही तकनीक, सही कच्ची कैरी और मसालों के सही अनुपात की कमी के कारण अक्सर लोग कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं जो पूरे मर्तबान को बर्बाद कर देती हैं। इस खोजी और तथ्य-आधारित घरेलू एक्सप्लेनर बुलेटिन में हम आपको उन कड़े नियमों और सीक्रेट्स के बारे में बताएंगे, जो आपके अचार को न केवल सालभर तक फ्रेश रखेंगे बल्कि उसका स्वाद भी दोगुना कर देंगे।

Key Highlights: मुख्य बिंदु

  • कैरी का सही चयन: अचार की लंबी उम्र के लिए हमेशा बिना रेशे वाली, पूरी तरह सख्त और गाढ़े हरे रंग की रामकेला या राजापुरी कच्ची कैरी का ही चुनाव करें।

  • नमी है सबसे बड़ी दुश्मन: कैरी को काटने के बाद और मसालों में मिलाने से पहले उसका पानी पूरी तरह सुखाना सबसे अनिवार्य कड़ा नियम है।

  • मसालों का सही संतुलन: सौंफ, मेथी, राई की दाल और कलौंजी का सही अनुपात ही फंगस को रोकने का प्राकृतिक एंटीसेप्टिक टूल है।

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  • तेल का सुरक्षा कवच: अचार के मर्तबान में शुद्ध सरसों का तेल हमेशा आम के टुकड़ों के ऊपर तक तैरना चाहिए, जिससे ऑक्सीजन का संपर्क पूरी तरह कट सके।

  • कांच या चीनी मिट्टी की प्राथमिकता: प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों के बजाय हमेशा धूप दिखाए गए सूखे कांच या सिरेमिक के बर्तनों का ही इस्तेमाल करें।

लेटेस्ट अपडेट: इस सीजन में क्यों बदल रहे हैं आम और मसालों के दाम?

कृषि मंडियों और थोक बाजारों से आ रही हालिया व्यापारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस साल बेमौसम मौसम बदलाव और भीषण लू के कारण अचार वाले खास कच्चे आमों (जैसे रामकेला और लदुआ) की आवक पर आंशिक कड़ा असर पड़ा है। इसके चलते मंडियों में कच्ची कैरी के दामों में पिछले साल के मुकाबले 15% तक की तेजी देखी जा रही है।

इसके साथ ही, शुद्ध सरसों तेल और साबुत मसालों के वैल्यूएशन में भी मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। लेकिन गृहणियों का मानना है कि चाहे लागत थोड़ी बढ़ जाए, घर के बने शुद्ध पारंपरिक स्वाद की तुलना बाजार के डिब्बाबंद और प्रिजर्वेटिव्स वाले रेडीमेड अचार से बिल्कुल नहीं की जा सकती। यही कारण है कि बढ़ती कीमतों के बावजूद घरेलू स्तर पर आम का अचार डालने का क्रेज कम नहीं हुआ है।

बैकग्राउंड स्टोरी: आखिर क्यों खराब हो जाता है आपका पसंदीदा अचार?

अचार के खराब होने के पीछे का विज्ञान बहुत ही सरल है, जिसे समझना हर गृहणी के लिए जरूरी है। जब हम कच्ची कैरी को बाजार से लाकर काटते हैं, तो उसके भीतर एक प्राकृतिक नमी (Moisture) होती है। यदि उस नमी को पूरी तरह सुखाया न जाए, तो वह बैक्टीरिया और फंगस (Fफूंद) के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार कर देती है।

अक्सर लोग समय बचाने के चक्कर में कटी हुई कैरी को बिना अच्छी तरह सुखाए सीधे मसालों और तेल में मिला देते हैं। इसके अलावा, बाजार से खरीदे गए पिसे हुए मसालों में मिलावट होना या उनमें पहले से सीलन होना भी मर्तबान के भीतर केमिकल रिएक्शन शुरू कर देता है, जिससे अचार काला पड़ने लगता है और उसकी महक बदल जाती है।

महत्वपूर्ण नोट: पुराने समय में दादी-नानी हमेशा कैरी को काटने के बाद हल्दी और नमक लगाकर रातभर के लिए छोड़ देती थीं। यह कोई अंधविश्वास नहीं था, बल्कि नमक ‘ऑसमोसिस’ प्रक्रिया के जरिए कैरी का सारा अतिरिक्त पानी बाहर निकाल देता है, जो अचार को लंबी उम्र देने का सबसे पहला कड़ा स्टेप है।

क्या हुआ? मसालों के गलत अनुपात ने कैसे बिगाड़ा पूरा खेल

एक आम गलती जो अक्सर नई पीढ़ी के लोग करते हैं, वह है मसालों का असंतुलित उपयोग। उदाहरण के लिए, मेथी दाना प्रकृति में कड़वा होता है। यदि आप स्वाद बढ़ाने के चक्कर में मेथी का अनुपात सौंफ या राई से ज्यादा कर देंगे, तो आपका आम का अचार पूरी तरह कड़वा हो जाएगा और उसका तीखापन खत्म हो जाएगा।

इसी तरह, कलौंजी (मंगरेल) को कभी भी अन्य मसालों के साथ मिक्सर में पीसना नहीं चाहिए। कलौंजी को हमेशा साबुत ही ऊपर से मिलाया जाता है। यदि आप कलौंजी को पीस देंगे, तो वह पूरे तेल और आम के टुकड़ों को पूरी तरह काला कर देगी, जिससे अचार विजुअली बिल्कुल भी आकर्षक नहीं लगेगा।

एक्सपर्ट एनालिसिस: पारंपरिक रसोइयों और फूड साइंटिस्ट्स की क्या है राय?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण संस्थान की वरिष्ठ न्यूट्रिशनिस्ट और फूड टेक्नोलॉजिस्ट डॉ. नलिनी शर्मा के अनुसार, अचार बनाना एक शुद्ध विज्ञान है:

“पारंपरिक भारतीय पद्धतियों में आम का अचार बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से ‘नेचुरल प्रिजर्वेशन’ (Natural Preservation) के सिद्धांतों पर काम करती है। इसमें नमक और सरसों का तेल केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि प्राकृतिक संरक्षक (Preservatives) के रूप में काम करते हैं। नमक नमी को सोखता है और लैक्टिक एसिड को बढ़ावा देता है, जबकि सरसों का तेल एक अभेद्य लेयर बनाता है जो हानिकारक फंगस को ऑक्सीजन नहीं मिलने देती। मैं कड़ी सलाह दूंगी कि अचार में आयोडीन युक्त रिफाइंड नमक के बजाय मोटे समुद्री नमक (Rock Salt) को पीसकर इस्तेमाल करें। यह अचार की शेल्फ-लाइफ को बिना किसी केमिकल के 3 साल तक सुरक्षित रख सकता है।”

आधिकारिक जानकारी: बर्तन और स्वच्छता के कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल्स

अचार बनाने की शुरुआत करने से पहले आपको अपने किचन के इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से सैनिटाइज और मॉइस्चर-फ्री करना होगा। जिस मर्तबान में आप अचार रखने वाले हैं, उसे गर्म पानी से धोकर कम से कम 5 से 6 घंटे की तेज धूप दिखाना अनिवार्य है।

धातु के बर्तनों (जैसे एल्युमीनियम, तांबा या स्टील) में कभी भी अचार को लंबे समय तक मिक्स करके नहीं रखना चाहिए। आम के भीतर मौजूद साइट्रिक एसिड धातुओं के साथ कड़ा केमिकल रिएक्शन करता है, जिससे बर्तन में जंग लग सकती है और अचार पूरी तरह जहरीला (Toxic) हो सकता है। हमेशा कांच, प्लास्टिक (BPA फ्री) या चीनी मिट्टी के बर्तनों को ही प्राथमिकता दें।

अचार बनाने और तैयार होने की कूटनीतिक समय-सारणी

अचार डालने की शुरुआत से लेकर उसके पूरी तरह पककर खाने योग्य होने तक की पूरी व्यावहारिक समय-सारणी को नीचे दी गई मोबाइल-फ्रेंडली तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

चरण (Phase) और गतिविधिनिर्धारित समय सीमामुख्य उद्देश्य और आवश्यक सावधानियां
चरण 1: नमक-हल्दी ट्रीटमेंटलगातार 12 से 14 घंटे (रातभर)कच्ची कैरी का अतिरिक्त पानी और कड़वाहट पूरी तरह बाहर निकालना।
चरण 2: धूप में सुखानातेज धूप में कम से कम 5 से 6 घंटेकैरी की ऊपरी सतह को पूरी तरह नमी-मुक्त और ड्राई बनाना।
चरण 3: मसाला मिक्सिंग व जारिंग1 से 2 घंटे की प्रक्रियामसालों को हल्का भूनकर दरदरा पीसना और तेल के साथ मिक्स करना।
चरण 4: मर्तबान की धूप सिकाईलगातार 7 से 10 दिन (रोजाना)धूप की गर्मी से आम के छिलके को गलाना और मसालों का अर्क तेल में उतारना।

आम परिवारों के बजट और स्वास्थ्य पर इसका व्यावहारिक प्रभाव

घर पर शुद्ध मसालों और कच्चे घानी के सरसों तेल से तैयार यह पारंपरिक व्यंजन बाजार के विज्ञापनों वाले आचारों के मुकाबले काफी किफायती बैठता है। बाजार के अचारों में सोडियम बेंजोएट जैसे कड़े केमिकल्स और अत्यधिक रिफाइंड तेल का इस्तेमाल होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।

रीडर अलर्ट: जब भी आप मर्तबान से खाने के लिए अचार निकालें, तो हमेशा पूरी तरह सूखी और साफ लकड़ी या स्टील की चम्मच का ही उपयोग करें। गीले हाथ या पानी की एक भी बूंद अगर जार के भीतर चली गई, तो आपका पूरा सालभर का स्टॉक कुछ ही दिनों में फंगस की भेंट चढ़ जाएगा।

इसके विपरीत, घर का बना अचार पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने वाले प्रोबायोटिक्स (Probiotics) का एक बहुत बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। सीमित मात्रा में इसका दैनिक सेवन पेट की गैस और अपच की समस्या को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है, जिससे परिवार के बुजुर्गों और बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।

भविष्य का प्रभाव: लुप्त होती पारंपरिक कला को डिजिटल सपोर्ट

इस आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली के बीच, जहाँ युवा पीढ़ी पैकेज्ड फूड पर ज्यादा निर्भर हो रही है, आम का अचार बनाने की इस विधा का ऑनलाइन सर्च ट्रेंड्स में ऊपर आना एक सुखद संकेत है। यूट्यूब और सोशल मीडिया के जरिए नए कपल्स और हॉस्टल में रहने वाले छात्र भी अब खुद घर पर कुकिंग और प्रिजर्वेशन की इन तकनीकों को सीख रहे हैं।

आने वाले समय में यह कूटनीतिक बदलाव भारत के पारंपरिक कृषि उत्पादों और छोटे मसाला उद्योगों (Local MSMEs) को एक बहुत बड़ा बूस्टर डोज देगा। लोग आर्गेनिक मसालों और कोल्ड-प्रेस सरसों तेल की महत्ता को समझ रहे हैं, जिससे ग्रामीण भारत के छोटे तेल मिलों और महिला गृह उद्योग समूहों (Self Help Groups) की आर्थिक स्थिति आने वाले सालों में और अधिक मजबूत होगी।

अचार को सालभर सुरक्षित रखने के 5 अचूक और प्रैक्टिकल स्टेप्स (Actionable Advice)

यदि आप चाहते हैं कि आपका बनाया अचार कभी खराब न हो, तो आज ही से इन कड़े और व्यावहारिक नियमों को अपनी किचन डायरी में नोट कर लें:

  • सरसों तेल को धुआं निकलने तक गर्म करें: अचार में कभी भी कच्चा सरसों का तेल सीधे न डालें। तेल को पहले कड़ाही में तब तक गर्म करें जब तक कि उसमें से धुआं न निकलने लगे, फिर उसे पूरी तरह ठंडा करके ही मसालों में मिलाएं। इससे तेल का तीखापन संतुलित हो जाता है।

  • हींग का कड़ा धुंआ (धुंआर तकनीक): मर्तबान में अचार भरने से पहले, एक छोटे जलते हुए कोयले पर एक चुटकी हींग डालें और उस मर्तबान को कोयले के ऊपर उल्टा रख दें। जब जार के भीतर हींग का कड़ा धुआं भर जाए, तब उसमें अचार भरें। यह फंगस के खिलाफ सबसे बड़ा प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल शील्ड है।

  • नमक की मात्रा में कंजूसी न करें: यदि आप स्वास्थ्य के प्रति अत्यधिक सजग होकर अचार में नमक की मात्रा बहुत कम कर देंगे, तो अचार बहुत जल्दी गलकर सड़ जाएगा। अचार में नमक का अनुपात हमेशा सामान्य सब्जी से थोड़ा तेज होना चाहिए।

  • सिरके (Vinegar) का कूटनीतिक इस्तेमाल: यदि आपको लगता है कि आपके इलाके में धूप कम आती है या कैरी में नमी रह गई है, तो मसाले मिलाते समय उसमें 2 से 3 चम्मच सफेद सिरका या जामुन का सिरका मिला दें। यह बिना किसी साइड-इफेक्ट के एक बेहतरीन प्रिजर्वेटिव का काम करता है।

  • सूती कपड़े की कैपिंग: धूप में मर्तबान रखते समय उसका ढक्कन कसकर बंद न करें। ढक्कन की जगह बरनी के मुंह पर एक साफ, पतला सूती कपड़ा (Muslin Cloth) रबर बैंड से बांध दें। इससे धूप की गर्मी से बनने वाली भाप (Condensation) ढक्कन पर पानी बनकर दोबारा अचार में नहीं गिरेगी, बल्कि कपड़े से उड़ जाएगी।

FAQ Section: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. नए सीजन के अनुसार आम का अचार बनाने के लिए सबसे बेहतरीन कच्ची कैरी कौन सी मानी जाती है?

अचार के लिए सबसे उत्तम ‘रामकेला’ (Ramkela) आम माना जाता है। इस कैरी की विशेषता यह है कि इसका गूदा बहुत सख्त होता है, इसमें जाली (रेशा) बहुत अच्छी पड़ती है और यह पकने के बाद भी अपनी शेप को नहीं छोड़ती। इसके अलावा आप राजापुरी या स्थानीय कड़े देसी आमों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

2. यदि मेरे अचार के ऊपर सफेद रंग की हल्की फफूंद (White Fungus) दिखने लगे, तो क्या पूरा अचार फेंकना होगा?

यदि फंगस शुरुआती चरण में है और केवल ऊपरी सतह पर है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। साफ और सूखे चम्मच से उस फंगस वाले हिस्से को पूरी तरह बाहर निकाल दें। इसके बाद, सरसों के तेल को गर्म करके ठंडा करें और मर्तबान को ऊपर तक तेल से भर दें। तेल के आते ही ऑक्सीजन सप्लाई कट जाएगी और फंगस पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

3. आम के टुकड़ों को धूप में कितने दिनों तक सुखाना सबसे सुरक्षित रहता है?

हल्दी-नमक का पानी निकालने के बाद कैरी के टुकड़ों को केवल एक दिन (ज्यादा से ज्यादा 5 से 6 घंटे) की तेज धूप में सुखाना काफी है। यदि आप उन्हें दो या तीन दिन तक लगातार धूप में सुखाएंगे, तो आम की बाहरी त्वचा बेहद कड़ी और रबर जैसी हो जाएगी, जो मसालों को नहीं सोख पाएगी और अचार खाने में बहुत सख्त लगेगा।

4. क्या अचार में पिसी हुई राई के बजाय राई की दाल (Mustard Dal) का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर है?

जी हां, प्रामाणिक रेसिपीज के अनुसार अचार में हमेशा पीली या काली राई की बिना छिलके वाली दाल का ही इस्तेमाल करना चाहिए। साबुत राई को घर में पीसने से कभी-कभी उसका छिलका कड़वापन छोड़ देता है, जबकि राई की दाल अचार को एक खूबसूरत गाढ़ा टेक्सचर और एकदम सही खट्टा-तीखा स्वाद प्रदान करती है।

5. बाजार से खरीदे गए रेडीमेड आचारों के मुकाबले घर का बना अचार स्वास्थ्य के लिए क्यों ज्यादा सुरक्षित है?

बाजार के आचारों में कमर्शियल प्रिजर्वेटिव्स जैसे सोडियम बेंजोएट और पाम ऑयल (Palm Oil) या सस्ते रिफाइंड तेलों का इस्तेमाल भारी मात्रा में होता है। वहीं, घर के बने अचार में शुद्ध कच्ची घानी सरसों तेल और साबुत मसालों का उपयोग होता है, जो आपके दिल, कोलेस्ट्रॉल और पेट की सेहत के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और गुणकारी हैं।

6. क्या प्लास्टिक के डिब्बों में आम का अचार रखना पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है?

यदि आपके पास कांच या चीनी मिट्टी का मर्तबान नहीं है, तो आप केवल ‘फूड-ग्रेड’ और बीपीए-फ्री (BPA Free) कड़े प्लास्टिक के जार का ही इस्तेमाल करें। सामान्य या सस्ते प्लास्टिक के डिब्बे अचार के एसिड के साथ मिलकर हानिकारक केमिकल्स रिलीज कर सकते हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

7. अचार का रंग कुछ महीनों बाद काला क्यों पड़ने लगता है और इससे कैसे बचें?

अचार के काले पड़ने के दो मुख्य कारण हैं—पहला, अचार का सरसों के तेल से बाहर सूखा रहना (ऑक्सीडेशन), और दूसरा, मसालों में कलौंजी को पीसकर मिला देना। इससे बचने के लिए हमेशा कलौंजी को साबुत रखें और यह सुनिश्चित करें कि अचार हमेशा तेल के भीतर पूरी तरह डूबा रहे।

8. क्या सिरका मिलाने से आम का अचार का पारंपरिक स्वाद बदल जाता है?

यदि आप सीमित मात्रा में (1 किलो आम में केवल 2 से 3 छोटे चम्मच) सिरका मिलाते हैं, तो स्वाद में कोई व्यावहारिक बदलाव नहीं आता। सिरका केवल अचार के खट्टेपन को एक कड़ा और सुखद बैलेंस देता है और एक अभेद्य सुरक्षा कवच की तरह उसे सालभर तक फंगस से बचाकर रखता है।

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निष्कर्ष: परंपरा और विज्ञान के अद्भुत मिलन का आनंद लें

संक्षेप में कहें तो रसोई की कला कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे केवल किताबों या इंटरनेट के नुस्खों से सीखा जा सके; यह असल में हमारे पूर्वजों के कड़े अनुभवों, धैर्य और विज्ञान का एक बेहद खूबसूरत और लाजवाब गुलदस्ता है। आम का अचार बनाने का यह सफर हमें सिखाता है कि जीवन में सही स्वाद पाने के लिए हर एक चीज का अपने सही अनुपात और समय पर होना कितना अनिवार्य है। इस लेख में सुझाई गई कटी-फटी गलतियों से खुद को पूरी तरह दूर रखें, मसालों के कड़े संतुलन का ध्यान रखें और स्वच्छता के नियमों का कड़ाई से पालन करें। जब आप पूरी लगन से मर्तबान को तैयार करेंगे, तो आपकी थाली में आने वाला हर एक निवाला दादी-नानी के उस प्यार और पुराने दौर की यादों को पूरी तरह जीवंत कर देगा। अपने घरेलू हुनर को चमकाते रहें, प्रामाणिक तरीकों को अपनाएं और इस बदलते मौसम में अपने परिवार को एक स्वस्थ व पारंपरिक स्वाद का अनमोल उपहार दें।

Disclaimer: इस लेख में प्रस्तुत की गई अचार बनाने की विधियां, मसालों के अनुपात और तकनीकी प्रिजर्वेशन टिप्स पारंपरिक भारतीय पाक कला के कड़े अनुभवों, फूड टेक्नोलॉजी के सामान्य सिद्धांतों और घरेलू विज्ञान के विशेषज्ञों की प्राथमिक समीक्षाओं के निष्पक्ष पत्रकारिता विश्लेषण पर आधारित हैं। व्यक्तिगत रसोइयों के वातावरण, स्थानीय आर्द्रता (Humidity) और आम की विभिन्न प्रजातियों के अनुसार अचार के पकने के समय और शेल्फ-लाइफ के परिणामों में आंशिक तकनीकी अंतर संभव है। किसी भी गंभीर एलर्जी या चिकित्सीय स्थिति में विशिष्ट मसालों के सेवन से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। भारती फास्ट न्यूज़ किसी भी व्यक्तिगत कुकिंग विफलता के नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

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Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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नमन धीर 173 रन
Sports

Naman Dhir ने मचाया तूफान: 64 गेंदों में 173 रन, क्रिस गेल का रिकॉर्ड 2 रन से बचा

by Abhay Jeet Singh
सितम्बर 8, 2026
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Naman Dhir ने मचाया तूफान: 64 गेंदों में 173 रन, क्रिस गेल का रिकॉर्ड 2 रन से बचा मोहाली के...

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