Nepal Flood: भारी बारिश से बाढ़-लैंडस्लाइड, नारायणी नदी खतरे के पार
नेपाल में सितंबर के आखिरी सप्ताह में लगातार हुई भारी बारिश ने एक बार फिर कई इलाकों में बाढ़, भूस्खलन और सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति पैदा कर दी है। नेपाल बाढ़ और लैंडस्लाइड के ताजा हालात में 24 सितंबर से शुरू हुई बारिश से देशभर में बाढ़, पहिरो, जलभराव, बिजली गिरने और अन्य वर्षा-जनित घटनाओं में कम से कम 27 लोगों की मौत और 4 लोगों के लापता होने की सूचना है। नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार इस अवधि में 1,000 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं।
इस बारिश का सबसे बड़ा असर नेपाल के पहाड़ी और नदी किनारे वाले इलाकों में देखने को मिला है। कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हुई हैं, पुल और सड़क संपर्क प्रभावित हुए हैं तथा बिजली और संचार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है।
चितवन में नारायणी नदी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। 27 सितंबर को देवघाट हाइड्रोलॉजिकल स्टेशन पर नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंच गया, जो वहां रिकॉर्ड शुरू होने के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया। हालांकि इसके बाद जलस्तर में तेजी से गिरावट आई और 28 सितंबर तक यह करीब 7.456 मीटर तक पहुंच गया।
नारायणी नदी 11.94 मीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
चितवन की नारायणी नदी में 27 सितंबर को अचानक जलस्तर में तेज वृद्धि दर्ज की गई। नेपाल के जल एवं मौसम विभाग के अनुसार देवघाट स्टेशन पर दोपहर करीब 2:10 बजे नदी का जलस्तर 11.94 मीटर दर्ज किया गया।
इस स्टेशन पर 7.30 मीटर को चेतावनी स्तर और 9 मीटर को खतरे का स्तर माना जाता है। यानी 11.94 मीटर का स्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर था। बाद में शाम 3:40 बजे तक जलस्तर 11.75 मीटर दर्ज किया गया, लेकिन तब भी नदी खतरे के स्तर से काफी ऊपर थी।
देवघाट में जलस्तर की निगरानी 1963 से की जा रही है। इससे पहले यहां सबसे ऊंचा जलस्तर 11.6 मीटर दर्ज किया गया था। नया रिकॉर्ड उस पुराने स्तर से भी ऊपर रहा।
नारायणी का पानी अब घटा, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं
नारायणी नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम हुआ। 28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक नदी का स्तर करीब 7.456 मीटर तक नीचे आ गया था। एक दिन के भीतर लगभग साढ़े चार मीटर की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि नदी के जलस्तर में कमी आने का मतलब यह नहीं है कि प्रभावित इलाकों में तत्काल सभी खतरे खत्म हो गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश दोबारा बढ़ने पर नदियों का जलस्तर फिर तेजी से ऊपर जा सकता है। नेपाल के जल-मौसम अधिकारियों ने भी पहाड़ी इलाकों में बारिश जारी रहने की स्थिति में जलस्तर में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई थी।
27 लोगों की मौत, 4 लोग अभी भी लापता
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय से उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 सितंबर से सोमवार शाम तक लगातार बारिश से जुड़े बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, तेज हवाओं और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में 27 लोगों की मौत हुई और 4 लोग लापता बताए गए। सात लोग घायल हुए हैं और 1,065 परिवार प्रभावित हुए हैं।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA के आंकड़ों में भी हाल की आपदा के दौरान 513 घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इन घटनाओं में बाढ़ और भूस्खलन के अलावा लगातार बारिश और अन्य मौसम संबंधी घटनाएं शामिल हैं।
यहां यह समझना जरूरी है कि यह आंकड़ा 24 सितंबर के बाद शुरू हुई नई बारिश-जनित आपदा का है। नेपाल इससे पहले अगस्त में भोटेकोशी क्षेत्र में एक अलग और बेहद बड़ी बाढ़ त्रासदी का सामना कर चुका है। दोनों घटनाओं के आंकड़ों को एक साथ जोड़कर वर्तमान मौतों का आंकड़ा बताना सही नहीं होगा।
भूस्खलन ने सबसे ज्यादा बढ़ाई परेशानी
लगातार बारिश के कारण नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। 27 से 28 सितंबर के 24 घंटे के दौरान देशभर में 272 आपदा संबंधी घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 97 भूस्खलन की घटनाएं थीं। इसी अवधि में भूस्खलन से 21 लोगों की मौत और चार लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई।
भूस्खलन के कारण कई प्रमुख सड़क मार्ग बाधित हुए हैं। मलबा सड़कों पर आने, सड़क के हिस्से बहने और पुलों के पास संपर्क मार्ग टूटने से कई जिलों का आवागमन प्रभावित हुआ।
कर्नाली प्रांत के कई जिलों में 28 सितंबर को भी सड़कें बंद थीं। कर्नाली हाईवे, कर्नाली कॉरिडोर, मिड-हिल हाईवे और बेरी कॉरिडोर के अलग-अलग हिस्सों में भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित रहा।
कई हाईवे और जिला सड़कें प्रभावित
लगातार बारिश और बाढ़ ने नेपाल के प्रमुख सड़क नेटवर्क को भी प्रभावित किया है। काठमांडू पोस्ट के अनुसार लमजुंग-मनांग, पर्वत-बागलुंग और म्याग्दी-मुस्तांग के बीच कई सड़क संपर्क बाधित हुए। कुछ स्थानों पर पुलों के एप्रोच रोड बह गए और कुछ जगह बाढ़ के पानी ने सड़क संरचना को नुकसान पहुंचाया।
सरकार के भौतिक अवसंरचना विकास मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार कालीगंडकी कॉरिडोर के कई हिस्सों में नुकसान हुआ। डुम्रे-बेसीसहर-चामे सड़क पर भी कुछ हिस्सों में नदी के कटाव और भूस्खलन के कारण आवाजाही प्रभावित हुई।
बारिश कम होने के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बंद सड़कों को दोबारा खोलना और प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना है।
नेपाल में 544 मिलीमीटर तक बारिश रिकॉर्ड
नेपाल के जल एवं मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 23 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह तक कई स्थानों पर 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई।
इस अवधि में नवलपुर के देवगांव में 544.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई, जो इस अवधि में सबसे ज्यादा थी। कास्की के पंचासे में 500.2 मिलीमीटर, तनहूं के अत्रौलीटार में 472 मिलीमीटर और पाल्पा के तानसेन में 458 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
चितवन के माडी कल्याणपुर में 396 मिलीमीटर और म्याग्दी के दरबांग में 397.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। इतनी अधिक बारिश ने नदियों के जलस्तर और पहाड़ी ढलानों पर दबाव बढ़ाया।
कालीगंडकी नदी ने भी मचाई तबाही
नेपाल के पर्वत जिले में कालीगंडकी नदी में आई बाढ़ से जलजला ग्रामीण नगरपालिका के फरसे इलाके में करीब 80 घर बह गए। सुरक्षा बलों ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अभी तक वहां किसी मानवीय क्षति की सूचना नहीं थी।
कालीगंडकी और दूसरी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ाया। कई जगह लोगों को घरों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा।
बिजली व्यवस्था पर भी बारिश और लैंडस्लाइड का असर
भारी बारिश और भूस्खलन का असर केवल सड़क और आवासीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। कालीगंडकी कॉरिडोर में भूस्खलन के कारण ट्रांसमिशन लाइन के टावरों को नुकसान पहुंचा और कई जलविद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ।
नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अनुसार 220 केवी कालीगंडकी कॉरिडोर के डाना-कुश्मा हिस्से में ट्रांसमिशन पाइलन क्षतिग्रस्त होने से करीब 358.2 मेगावाट क्षमता वाली 12 जलविद्युत परियोजनाएं बंद करनी पड़ीं। सावधानी के तौर पर अन्य परियोजनाओं को बंद करने के कारण कुल प्रभावित क्षमता 790 मेगावाट से अधिक बताई गई।
इसका असर नेपाल की बिजली आपूर्ति और आने वाले समय की ऊर्जा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
नेपाल के 49 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा
27 सितंबर को नेपाल में भारी बारिश के बीच अधिकारियों ने देश के कई हिस्सों में फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की थी। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार उस समय 49 जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा बताया गया था और प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही थी।
नारायणी, कोसी और दूसरी नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।
नेपाल की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में अचानक बाढ़ दोनों का खतरा बढ़ जाता है।
चितवन और नवलपरासी में नदी किनारे बस्तियों पर असर
नारायणी नदी के जलस्तर में तेज बढ़ोतरी से चितवन और नवलपरासी क्षेत्र की नदी किनारे बस्तियों में चिंता बढ़ी। नेपाली सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया।
नारायणी के आसपास के कुछ इलाकों में बाढ़ और कटाव की स्थिति बनी रही। नदी का रिकॉर्ड जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी थी।
नेपाल से भारत के बिहार और यूपी तक बढ़ा बाढ़ का खतरा
नेपाल में हुई भारी बारिश का असर सीमा पार भारत में भी दिखाई दिया है। गंडक नदी बेसिन में नेपाल से आने वाले तेज पानी के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा।
29 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर पानी का डिस्चार्ज 5,43,500 क्यूसेक तक पहुंच गया। इसके बाद बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत कई जिलों में सतर्कता बढ़ाई गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि बगहा क्षेत्र में गंडक के दबाव के कारण तटबंधों को नुकसान हुआ और कुछ स्थानों पर कटाव तथा टूटने की स्थिति सामने आई। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भी एक तटबंध टूटने की सूचना दी गई।
इससे साफ है कि नेपाल की बारिश का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहता। हिमालयी और तराई क्षेत्रों से निकलने वाली नदियों के कारण भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी जलस्तर तेजी से बदल सकता है।
महाकाली नदी भी खतरे के निशान के ऊपर
नेपाल के पश्चिमी हिस्से में महाकाली नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद शारदा बैराज पर चार पहिया वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। 27 सितंबर को नदी का प्रवाह करीब 1,97,774 क्यूसेक बताया गया। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी जिलों में यातायात पर भी प्रतिबंध लगाया गया।
नेपाल और भारत के बीच शारदा बैराज एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसलिए नदी के बढ़ते जलस्तर का असर लोगों की आवाजाही और सीमा क्षेत्र के परिवहन पर भी पड़ सकता है।
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राहत और बचाव अभियान जारी
लगातार बारिश और भूस्खलन के बीच नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान चलाया। NDRRMA से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक हजारों लोगों को जोखिम वाले इलाकों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
जहां सड़कें बंद हैं, वहां राहत और बचाव कार्यों को मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में सड़क संपर्क बहाल करने के लिए मलबा हटाने का काम जारी है।
नेपाल में पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए भी बढ़ा जोखिम
भारी बारिश और भूस्खलन का असर पर्यटन एवं ट्रेकिंग मार्गों पर भी पड़ा है। अन्नपूर्णा संरक्षण क्षेत्र परियोजना ने ट्रेकिंग मार्गों पर जाने वाले पर्यटकों को अधिक सावधानी बरतने और कई मार्गों पर अधिकृत गाइड के साथ यात्रा करने की सलाह दी। प्रवेश परमिट जारी करने से पहले कुछ क्षेत्रों में सड़क और मौसम की स्थिति का आकलन भी किया जा रहा है।
इसका कारण यह है कि बारिश के बाद पहाड़ी रास्तों पर अचानक पत्थर गिरने, सड़क धंसने और भूस्खलन की घटनाएं हो सकती हैं।
नेपाल बाढ़ और लैंडस्लाइड: आगे भी सतर्कता जरूरी
नेपाल में 24 सितंबर से शुरू हुई बारिश ने कुछ ही दिनों में बाढ़ और भूस्खलन का बड़ा संकट पैदा किया है। 27 लोगों की मौत और चार लोगों के लापता होने का ताजा आंकड़ा इस आपदा की गंभीरता को दर्शाता है।
हालांकि नारायणी नदी का जलस्तर रिकॉर्ड 11.94 मीटर से घटकर 28 सितंबर को करीब 7.456 मीटर तक आ गया था, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में दोबारा भारी बारिश होने पर नदियों का स्तर फिर बढ़ सकता है।
सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था को हुए नुकसान की मरम्मत में समय लग सकता है। नेपाल के साथ-साथ भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के नदी किनारे वाले इलाकों में भी नेपाल से आने वाले पानी को देखते हुए निगरानी जरूरी बनी हुई है।
FAQ: नेपाल बाढ़ और लैंडस्लाइड से जुड़े सवाल
1. नेपाल में हाल की बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं कब से बढ़ीं?
24 सितंबर 2026 से नेपाल के कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़, भूस्खलन और अन्य वर्षा-जनित घटनाएं बढ़ीं।
2. नेपाल में हाल की बारिश से कितने लोगों की मौत हुई है?
24 सितंबर से शुरू हुई नई बारिश-जनित आपदा में 27 लोगों की मौत की सूचना है। चार लोग अभी भी लापता बताए गए हैं।
3. नारायणी नदी का जलस्तर कितना पहुंचा था?
चितवन के देवघाट स्टेशन पर नारायणी नदी का जलस्तर 27 सितंबर को 11.94 मीटर तक पहुंचा था, जो वहां रिकॉर्ड शुरू होने के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया।
4. नारायणी नदी का खतरे का स्तर कितना है?
देवघाट स्टेशन पर 7.30 मीटर चेतावनी स्तर और 9 मीटर खतरे का स्तर माना जाता है। 11.94 मीटर का स्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर था।
5. क्या नारायणी नदी का जलस्तर अब कम हुआ है?
हां। 28 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर करीब 7.456 मीटर तक घट गया था। हालांकि बारिश दोबारा बढ़ने पर जलस्तर में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहती है।
6. नेपाल में सबसे ज्यादा नुकसान किस वजह से हुआ?
हालिया 24 घंटे के आंकड़ों में भूस्खलन सबसे ज्यादा दर्ज होने वाली आपदा थी। 97 भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गईं और इनसे 21 मौतों की जानकारी दी गई।
7. क्या नेपाल की सड़कें भी प्रभावित हुई हैं?
हां। कई हाईवे और जिला सड़कें भूस्खलन, नदी कटाव और बाढ़ के कारण बंद हुईं। कालीगंडकी, कर्नाली और डुम्रे-बेसीसहर-चामे जैसे मार्गों पर भी असर पड़ा।
8. क्या नेपाल की बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है?
हां। कालीगंडकी कॉरिडोर में भूस्खलन से ट्रांसमिशन लाइन के टावर क्षतिग्रस्त हुए और 358.2 मेगावाट क्षमता वाली 12 जलविद्युत परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ।
9. क्या नेपाल की बारिश से भारत में भी बाढ़ का खतरा बढ़ा है?
हां। नेपाल के गंडक बेसिन से तेज पानी आने के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है। वाल्मीकिनगर बैराज पर 5,43,500 क्यूसेक तक डिस्चार्ज दर्ज होने की रिपोर्ट है।
10. क्या नेपाल में अभी भी बाढ़ और लैंडस्लाइड का खतरा बना हुआ है?
नदी के कुछ जलस्तरों में कमी आई है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश दोबारा बढ़ने पर अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा फिर पैदा हो सकता है। इसलिए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
नेपाल बाढ़ और लैंडस्लाइड से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचना
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। परिस्थितियों या आधिकारिक निर्णयों में बदलाव होने पर जानकारी बदल सकती है। पाठकों को किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित विभाग या आधिकारिक स्रोत से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।




























