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Home - किसान और खेती की न्यूज़ - सरसों के दाम में बड़ी छलांग! ₹9,000 के करीब पहुंचे भाव, खाने का तेल फिर हुआ महंगा

सरसों के दाम में बड़ी छलांग! ₹9,000 के करीब पहुंचे भाव, खाने का तेल फिर हुआ महंगा

खाने का तेल फिर महंगा! सरसों के बढ़ते भाव से रसोई का बजट बिगड़ने की आशंका, जानिए नई कीमतें और वजह

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
11/07/2026
in किसान और खेती की न्यूज़, Business News
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सरसों के भाव 2026

सरसों के भाव 2026: सरसों और खाने का तेल हुआ महंगा, देखें कीमतें

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सरसों के दाम में ऐतिहासिक छलांग: देश की मंडियों में ₹9,000 के करीब पहुंचे भाव, सरसों तेल की कीमतों में लगी आग से रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ा

अगर आपकी रसोई में भी शुद्ध सरसों तेल का तड़का लगता है, तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ने के लिए तैयार हो जाइए। देश के प्रमुख तेल-तिलहन बाजारों और कृषि मंडियों से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर आ रही है जिसने आम उपभोक्ताओं की रातों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ हफ्तों के भीतर घरेलू मार्केट में सरसों के भाव 2026 ने तेजी के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और कीमतें अब ₹9,000 प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक स्तर के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। यह अचानक आया उछाल सिर्फ व्यापारियों या किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा और तीखा असर आपकी मंथली ग्रोसरी लिस्ट और घर के बजट पर पड़ने लगा है।

लोग लगातार इंटरनेट पर यह सर्च कर रहे हैं कि आखिर नई फसल के बाजार में आने के बावजूद तेल-तिलहन की कीमतें इतनी तेजी से क्यों भाग रही हैं? आम गृहिणियों के लिए यह एक बड़ा इमोशनल और फाइनेंशियल ट्रिगर बन चुका है क्योंकि कुकिंग ऑयल (खाद्य तेल) की महंगाई सीधे थाली के स्वाद को प्रभावित करती है। देश भर की प्रमुख मंडियों (जैसे राजस्थान की भरतपुर, अलवर, और हरियाणा की चरखी दादरी) में आवक की कमी और वैश्विक स्तर पर पाम ऑयल व सोयाबीन तेल की आसमान छूती कीमतों ने इस आग में घी का काम किया है। आइए, इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि आखिर इस अप्रत्याशित तेजी की असली वजह क्या है और आने वाले दिनों में आम जनता को इससे राहत मिलेगी या मुश्किलें और बढ़ेंगी।

मुख्य विशेषताएं

  • ऐतिहासिक तेजी: देश की प्रमुख मंडियों में सरसों की कीमतें ₹8,500 से लेकर ₹8,950 प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं।

  • खाद्य तेलों पर असर: कच्ची घानी और एक्सपेलर सरसों तेल के दाम घरेलू बाजार में ₹15 से ₹25 प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं।

  • वैश्विक संकट: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशियाई पाम तेल और अमेरिकी सोयाबीन वायदा बाजार में आई भारी तेजी का भारतीय बाजार पर सीधा असर।

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  • आवक का गणित: चालू सीजन में बंपर पैदावार के दावों के बावजूद मंडियों में किसानों द्वारा माल को रोककर लाने (होल्डिंग) से सप्लाई चेन प्रभावित।

  • सरकारी रुख: तेल-तिलहन की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा स्टॉक लिमिट की समीक्षा संभव।

  • सप्लाई गैप: शादी-ब्याह के सीजन की भारी घरेलू डिमांड और मिलर्स की आक्रामक लिफ्टिंग (खरीदारी) के कारण कीमतों को मिला तगड़ा सपोर्ट।

नवीनतम अपडेट: राजस्थान और हरियाणा की मंडियों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी

एशिया की सबसे बड़ी सरसों मंडी मानी जाने वाली राजस्थान की भरतपुर मंडी के साथ-साथ जयपुर, कोटा और हरियाणा के सिरसा व हिसार बाजारों से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, सरसों की दैनिक आवक में पिछले साल की तुलना में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कमर्शियल मिलर्स और बड़ी तेल निर्माता कंपनियां इस समय ऊंचे दामों पर भी स्टॉक खरीदने को तैयार हैं, जिससे दैनिक आधार पर कीमतों में ₹100 से ₹200 प्रति क्विंटल तक का उछाल देखा जा रहा है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि चालू सप्ताह के अंत तक सरसों की अच्छी क्वालिटी के दाम ₹9,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकते हैं। इसके समानांतर, खुदरा बाजार (Retail Market) में पैकेट बंद सरसों तेल के दाम जो कुछ महीने पहले तक ₹140 से ₹150 प्रति लीटर के आसपास चल रहे थे, वे अब बढ़कर ₹175 से ₹190 प्रति लीटर तक पहुंच चुके हैं।

पृष्ठभूमि: मौसम की मार और पिछले साल के कैरीओवर स्टॉक का संकट

इस संकट को गहराई से समझने के लिए हमें पिछले साल के कृषि चक्र और मौसम के पैटर्न को देखना होगा। इस साल की शुरुआत में जब सरसों की बुआई हुई थी, तो कड़ाके की ठंड और कुछ प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों (जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तरी राजस्थान) में बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि के कारण फसलों की क्वालिटी प्रभावित हुई थी। हालांकि कृषि मंत्रालय के शुरुआती अनुमानों में रिकॉर्ड पैदावार की बात कही गई थी, लेकिन जब फसल कटकर तैयार हुई, तो प्रति एकड़ पैदावार (Yield) अनुमान से काफी कम निकली।

इसके अलावा, पिछले साल का बचा हुआ स्टॉक (Carryover Stock) भी इस बार बेहद कम था। इसका परिणाम यह हुआ कि नई फसल के बाजार में आने के शुरुआती दो महीनों के भीतर ही मिलों की पेराई (Crushing) के लिए स्टॉक का संकट खड़ा हो गया। भारतीय परिवारों में सरसों के तेल को शुद्धता और स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे उत्तम माना जाता है, इसलिए अन्य आयातित तेलों (जैसे सनफ्लावर या पाम ऑयल) के दाम बढ़ने पर उपभोक्ता तुरंत सरसों तेल की तरफ शिफ्ट होते हैं, जिससे इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

इंटेरेस्टिंग फैक्ट: भारत अपनी कुल खाद्य तेल जरूरतों का लगभग 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों (मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना) से आयात करता है। इसलिए जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कूटनीतिक या मौसमी कारणों से शिपमेंट महंगी होती है, तो उसका सीधा असर भारत के घरेलू सरसों बाजार पर पड़ता है।

क्या हुआ? वे 4 बड़े कारण जिन्होंने सरसों के बाजार में लगाई आग

कमोडिटी मार्केट के विश्लेषकों ने इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे चार प्रमुख और ठोस कारणों को रेखांकित किया है:

1. अंतरराष्ट्रीय पाम तेल (Palmolein) की कीमतों में उछाल

इंडोनेशिया और मलेशिया में बायो-डीजल नीतियों के कड़े होने के कारण खाद्य उद्देश्यों के लिए पाम तेल का निर्यात कम हुआ है। इसके कारण वैश्विक बाजार में पाम तेल की कमी हो गई। चूंकि पाम तेल सबसे सस्ता होता है और इसका इस्तेमाल ब्लेंडिंग व कमर्शियल फूड में होता है, इसके महंगे होते ही घरेलू सरसों तेल पर दबाव बढ़ गया।

2. आयात शुल्क (Import Duty) में किया गया हालिया बदलाव

घरेलू तिलहन किसानों को सुरक्षा देने के उद्देश्य से सरकार ने कुछ समय पहले आयातित रिफाइंड तेलों पर सीमा शुल्क में आंशिक बढ़ोतरी की थी। इसका सकारात्मक असर किसानों को तो मिला, लेकिन स्थानीय स्तर पर मांग और आपूर्ति के असंतुलन के कारण कीमतों को अनियंत्रित रूप से भागने का मौका मिल गया।

3. किसानों की होल्डिंग क्षमता (Holding Capacity) में सुधार

आज का किसान डिजिटल रूप से जागरूक है। इंटरनेट और मोबाइल ऐप्स के जरिए उन्हें पल-पल के मंडी भाव की जानकारी रहती है। चूंकि उन्हें पता है कि इस साल फसल कम है, इसलिए वे कम दामों पर अपनी फसल बेचने के बजाय उसे रोक-रोककर (किश्तों में) मंडियों में ला रहे हैं ताकि उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।

4. मिलावट पर सरकार की कड़ाई

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) द्वारा शुद्ध सरसों तेल में किसी भी अन्य सस्ते तेल (जैसे राइस ब्रान या मिनरल ऑयल) की मिलावट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बाद से शुद्ध सरसों तेल की मांग औद्योगिक स्तर पर बहुत ज्यादा बढ़ गई है। अब मिलों को केवल शुद्ध सरसों की ही पेराई करनी पड़ रही है।

कृषि और आर्थिक विशेषज्ञों का विश्लेषण

“कृषि और कमोडिटी बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरसों के भाव 2026 में आ रही यह तेजी केवल एक अल्पकालिक सट्टा (Speculation) नहीं है, बल्कि इसके पीछे वास्तविक मांग और आपूर्ति के कड़े बुनियादी नियम काम कर रहे हैं। यदि मंडियों में आवक की यही स्थिति रही, तो आने वाले त्योहारों के सीजन (जैसे रक्षाबंधन और दिवाली) तक खाने के तेलों की कीमतें आम उपभोक्ताओं के बजट को और अधिक प्रताड़ित कर सकती हैं। सरकार को घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए बफर स्टॉक से दखल देने या आयात नियमों में तुरंत आंशिक ढील देने पर विचार करना पड़ सकता है ताकि खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) को नियंत्रण में रखा जा सके।”

आधिकारिक जानकारी और प्रमुख मंडियों के ताज़ा भाव

राज्य कृषि विपणन बोर्ड (State Agricultural Marketing Boards) द्वारा जारी आधिकारिक दैनिक बुलेटिन के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों की मंडियों में सरसों की कीमतों में एकरूपता नहीं है, बल्कि यह दानों की गुणवत्ता और उसमें मौजूद तेल की मात्रा (Oil Content Percentage) के आधार पर तय हो रही है। 42% तेल कंडीशन वाली सरसों की मांग सबसे ज्यादा है और इसी वैरायटी को सबसे ऊंचे भाव मिल रहे हैं।

प्रमुख मंडियों में सरसों की भाव स्थिति तालिका

विभिन्न राज्यों के किसान भाइयों और व्यापारियों की सुविधा के लिए वर्तमान सप्ताह के प्रामाणिक औसत मंडी भाव नीचे दिए गए हैं:

राज्य / प्रमुख मंडी का नामसरसों की दैनिक आवक (बोरी में)न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल)अधिकतम भाव (₹/क्विंटल)
भरतपुर (राजस्थान)4,500₹8,400₹8,850
जयपुर (राजस्थान – लाइन भाव)–₹8,650₹8,950
चरखी दादरी (हरियाणा)2,200₹8,350₹8,750
सिरसा (हरियाणा)1,800₹8,200₹8,600
मुरैना (मध्य प्रदेश)3,000₹8,100₹8,550
हापुड़ (उत्तर प्रदेश)1,200₹8,300₹8,700

रीडर अलर्ट: यदि आप खुदरा बाजार से सरसों का तेल खरीद रहे हैं, तो अत्यधिक सस्ते या बिना ब्रांड वाले खुले तेल को खरीदने से बचें। कीमतों में तेजी के इस दौर में बाजार में नकली या मिलावटी तेल की बिक्री बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है जो आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

उपभोक्ताओं और आम गृहिणियों पर मानवीय प्रभाव

मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर खाद्य तेलों की इस महंगाई का सीधा और दर्दनाक असर पड़ रहा है। दिल्ली के एक स्थानीय निवासी ने बताया, “सब्जियां पहले से ही महंगी हैं, और अब सरसों का तेल भी पहुंच से बाहर हो रहा है। महीने में जहां 5 लीटर तेल लगता था, अब हमें उसे घटाकर 3 लीटर करना पड़ रहा है। हर चीज का बजट री-एडजस्ट करना पड़ रहा है।” यह स्थिति दर्शाती है कि आवश्यक वस्तुओं के दामों में मामूली बढ़ोतरी भी आम आदमी के जीवन स्तर को किस प्रकार प्रभावित करती है।

भविष्य का प्रभाव: क्या तेल के दाम और बढ़ेंगे?

आने वाले महीनों में बाजार की दिशा निम्नलिखित कारकों से तय होगी:

  • मॉनसून का रुख: यदि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून बेहतर रहता है, तो आगामी खरीफ फसलों (जैसे सोयाबीन और मूंगफली) की बुआई अच्छी होगी, जिससे आगामी तिमाहियों में खाद्य तेलों के बाजार को मनोवैज्ञानिक राहत मिल सकती है।

  • सरकारी हस्तक्षेप: यदि कीमतें ₹9,000 के पार जाती हैं, तो केंद्र सरकार केंद्रीय पूल से रियायती दरों पर खाद्य तेलों का वितरण राशन की दुकानों (PDS) के जरिए बढ़ाने का बड़ा फैसला ले सकती है।

  • वैश्विक तेल नीतियां: अर्जेंटीना और ब्राजील में सोयाबीन की फसल के अंतिम आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स (समुद्री माल ढुलाई के किराये) में कमी-बेशी भी स्थानीय बाजार को प्रभावित करेगी।

किसान भाइयों और व्यापारियों के लिए एक्शन प्लान

बाजार की इस अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए विभिन्न पक्षों को निम्नलिखित रणनीतियां अपनानी चाहिए:

  • तिलहन किसानों के लिए: यदि आपके पास सुरक्षित भंडारण (Storage) की व्यवस्था है, तो सारा माल एक साथ बेचने के बजाय बाजार की तेजी का रुख देखते हुए टुकड़ों में फसल निकालें। इससे आपको औसत मुनाफा बेहतर मिलेगा।

  • सामान्य उपभोक्ताओं के लिए: पैनिक बाइंग (घबराहट में जरूरत से ज्यादा खरीदारी) न करें। तेल के बड़े टिन खरीदने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार मासिक पैकेट खरीदें ताकि बाजार में कृत्रिम कमी न पैदा हो।

  • आधिकारिक अपडेट ट्रैक करें: कृषि उपज और सरकारी फैसलों से जुड़ी किसी भी भ्रामक अफवाह पर ध्यान न दें। कीमतों और सरकारी नियमों के सटीक विश्लेषण के लिए केवल प्रामाणिक पोर्टल्स का ही उपयोग करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

सरसों के भाव 2026 में आया यह ऐतिहासिक उछाल भारतीय कृषि बाजार के बदलते स्वरूप और वैश्विक निर्भरता की कहानी बयां करता है। जहां एक तरफ यह स्थिति हमारे तिलहन उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत का सही और आकर्षक मूल्य दिला रही है, वहीं दूसरी तरफ यह देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के मासिक बजट के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। आत्मनिर्भर भारत के तहत तिलहन उत्पादन (Yellow Revolution) को और अधिक गति देने की आवश्यकता है ताकि हम विदेशी बाजारों के झटकों से पूरी तरह सुरक्षित रह सकें। कृषि, मंडियों के भाव और देश की आर्थिक नीतियों से जुड़े ऐसे ही सभी 100% प्रामाणिक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित समाचारों के लिए हमेशा ‘Bharati Fast News’ के साथ जुड़े रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: सरसों के भाव 2026 में अचानक इतनी तेजी से बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?

उत्तर: इसके पीछे मुख्य कारण इस साल मौसम की मार से उत्पादन में आई आंशिक कमी, देश की प्रमुख मंडियों में सरसों की आवक का कम होना, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयातित पाम ऑयल व सोयाबीन तेल की कीमतों में भारी उछाल होना है।

प्रश्न 2: वर्तमान में सरसों के अधिकतम भाव मंडियों में क्या चल रहे हैं?

उत्तर: ताजा मंडी समीक्षा के अनुसार, राजस्थान की जयपुर और भरतपुर जैसी मुख्य मंडियों में अच्छी गुणवत्ता वाली सरसों के भाव ₹8,650 से लेकर ₹8,950 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, जो ₹9,000 के बेहद करीब हैं।

प्रश्न 3: क्या सरसों के दामों में आई इस तेजी से सरसों तेल की खुदरा कीमतों पर भी असर पड़ा है?

उत्तर: हां, बिल्कुल। सरसों की कीमतें बढ़ने से खुदरा बाजार में पैकेज्ड कच्ची घानी सरसों तेल के दाम बढ़कर ₹175 से ₹190 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच चुके हैं, जिससे आम रसोई का बजट प्रभावित हुआ है।

प्रश्न 4: क्या सरकार इस महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई कदम उठा रही है?

उत्तर: सरकार स्थिति पर बारीक नजर रखे हुए है। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए खाद्य मंत्रालय द्वारा व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट (भंडारण सीमा) तय करने या बफर स्टॉक से बाजार में हस्तक्षेप करने जैसे नीतिगत उपायों पर विचार किया जा रहा है।

प्रश्न 5: FSSAI के किस नियम के कारण शुद्ध सरसों तेल की मांग बढ़ी है?

उत्तर: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सरसों के तेल में किसी भी अन्य वनस्पति या सस्ते तेल (जैसे राइस ब्रान ऑयल) की ब्लेंडिंग यानी मिलावट पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे मिलों को केवल शुद्ध सरसों के दानों का ही उपयोग करना पड़ रहा है।

प्रश्न 6: क्या आने वाले त्योहारों के सीजन में तेल के दाम और बढ़ सकते हैं?

उत्तर: बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंडियों में सरसों की आवक में सुधार नहीं हुआ और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आगामी शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में कीमतों में थोड़ी और तेजी देखी जा सकती है।

प्रश्न 7: 42% कंडीशन सरसों का क्या मतलब होता है?

उत्तर: इसका तात्पर्य सरसों के दानों में मौजूद तेल की मात्रा (Oil Content) से है। जिस सरसों में तेल की मात्रा 42 प्रतिशत या उससे अधिक होती है, उसकी गुणवत्ता को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है और मिलर्स उसके लिए सबसे ऊंचे दाम देते हैं।

प्रश्न 8: किसानों को अपनी सरसों की फसल बेचने के लिए विशेषज्ञों की क्या सलाह है?

उत्तर: कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसानों को अपना सारा स्टॉक एक साथ बेचने के बजाय बाजार की तेजी के अनुसार धीरे-धीरे किश्तों में बेचना चाहिए, ताकि वे अधिकतम लाभ कमा सकें।

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अस्वीकरण (Disclaimer)

तथ्य-आधारित व्यावसायिक समाचार अस्वीकरण: इस लेख में दिए गए सरसों और खाद्य तेलों के भाव देश की विभिन्न कृषि मंडियों और कमोडिटी एक्सचेंजों द्वारा दैनिक आधार पर जारी किए गए सार्वजनिक आंकड़ों पर आधारित हैं। कृषि उपजों के दाम बाजार की मांग, आपूर्ति, मौसम की परिस्थितियों और सरकारी नीतियों के अनुसार प्रतिदिन बदलते रहते हैं। ‘Bharati Fast News’ बाजार के केवल रुझानों और विश्लेषणों को प्रस्तुत करता है। किसी भी प्रकार का व्यापारिक निर्णय, फसल की बिक्री या बड़ा निवेश करने से पहले कृपया अपने स्थानीय मंडी बोर्ड या प्रमाणित वित्तीय सलाहकारों से मौजूदा भावों की पुष्टि अवश्य कर लें।

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Abhay Jeet Singh

Abhay Jeet Singh

Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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    सरकारी नौकरी 2026: नई सरकारी भर्तियां, Sarkari Naukri अपडेट | Bharati Fast News

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छत्तीसगढ़ गन्ना खरीदी दर 2026
किसान और खेती की न्यूज़

Sugarcane Price Hike 2026: छत्तीसगढ़ में गन्ने का भाव ₹425 प्रति क्विंटल, ₹70 की बढ़ोतरी

by Abhay Jeet Singh
अक्टूबर 10, 2026
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Sugarcane Price Hike 2026: छत्तीसगढ़ में गन्ने का भाव ₹425 प्रति क्विंटल, ₹70 की बढ़ोतरी छत्तीसगढ़ के गन्ना किसानों के...

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IRDAI बीमा वितरण सुधार 2026

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अक्टूबर 10, 2026
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