लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की एलिवेटेड रोड में सीपेज, निर्माण गुणवत्ता पर फिर सवाल
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला केवल ग्रीनफील्ड हिस्से में सड़क धंसने या डामर की परत उखड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि बंथरा के पास एलिवेटेड रोड से कंक्रीट और मलबा गिरने की घटना ने सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। 13 सितंबर की देर रात एलिवेटेड रोड के एक हिस्से से कंक्रीट गिरने के बाद कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन को यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। NHAI ने निर्माण एजेंसी PNC को नोटिस देकर जवाब मांगा और संबंधित स्पैन की मजबूती जांचने के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट कराया।
इससे पहले जुलाई और अगस्त में भी एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क धंसने, सतह खराब होने, जलभराव और सीपेज जैसी समस्याएं सामने आई थीं। NHAI ने इन घटनाओं के बाद तकनीकी जांच कराई और जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई भी शुरू की। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार 26 जुलाई को करीब 300 मीटर हिस्से में स्लिपेज की घटना के बाद व्यापक तकनीकी जांच और सुधारात्मक कार्य शुरू किए गए थे।
एलिवेटेड रोड से मलबा गिरने से मचा हड़कंप
बंथरा क्षेत्र में आजाद गेस्ट हाउस के पास किलोमीटर 19.500 के आसपास 13 सितंबर की रात एलिवेटेड रोड के स्लैब से कंक्रीट का हिस्सा नीचे गिर गया। रिपोर्ट के अनुसार गिरा हुआ हिस्सा करीब ढाई मीटर के आसपास था और स्लैब में लगी सरिया भी दिखाई दे रही थी। सुरक्षा को देखते हुए कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन को बंद कर दिया गया।
NHAI ने संबंधित हिस्से की जांच के साथ निर्माण एजेंसी PNC को नोटिस जारी किया। अधिकारियों के अनुसार यह पता लगाने की कोशिश की गई कि स्लैब से कंक्रीट का हिस्सा क्यों गिरा और 18 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड हिस्से में कहीं अन्य स्थानों पर भी ऐसी समस्या तो नहीं है।
रिपोर्ट में शुरुआती तकनीकी निरीक्षण के हवाले से कवर ब्लॉक और कंक्रीट डालते समय वाइब्रेशन से जुड़े सवालों का उल्लेख किया गया है। हालांकि सीमेंट की गुणवत्ता या उसकी मात्रा में कोई वास्तविक कमी थी या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष मजबूती परीक्षण के बाद ही निकाला जाना है। इसलिए इन प्रारंभिक टिप्पणियों को अंतिम जांच निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सीपेज और ड्रेनेज की समस्या भी बनी चिंता
एलिवेटेड रोड की घटना से पहले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड हिस्से में बारिश के दौरान जलभराव और ड्रेनेज की समस्या भी सामने आई थी। अगस्त में निरीक्षण के दौरान NHAI अधिकारियों ने कई स्थानों पर पानी निकालने के निर्देश दिए थे।
स्थानीय निरीक्षणों के अनुसार कुछ जगहों पर शोल्डर रोड का बारिश का पानी अपेक्षित गति से बाहर नहीं निकल रहा था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पानी नीचे जाकर मुख्य सड़क की मिट्टी को नम कर रहा था, जिससे सड़क की डामर परत प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
यहां यह समझना जरूरी है कि सीपेज या जलभराव दिखना अपने आप में निर्माण गुणवत्ता की अंतिम पुष्टि नहीं करता। सड़क की मजबूती पर इसके प्रभाव का पता मिट्टी, ड्रेनेज, पेवमेंट और निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच से ही चलता है। इसी कारण विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
26 जुलाई की स्लिपेज घटना के बाद NHAI ने शुरू की थी बड़ी कार्रवाई
एक्सप्रेसवे पर शुरुआती बड़ी समस्या 26 जुलाई को सामने आई थी। PIB के माध्यम से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बताया था कि करीब 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे में किलोमीटर 64 के आसपास लगभग 300 मीटर हिस्से में स्लिपेज देखा गया था।
इसके बाद NHAI ने प्रभावित हिस्से की बहाली के साथ व्यापक तकनीकी जांच के निर्देश दिए। साथ ही परियोजना के निर्माण, निगरानी और पर्यवेक्षण से जुड़े जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई।
NHAI ने PNC Infratech को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का प्रस्ताव रखा और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी पर 2 प्रतिशत तक जुर्माने की प्रक्रिया शुरू की। साथ ही जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ तीन साल तक डिबारमेंट की कार्रवाई और ठेकेदार की रेटिंग प्रभावित करने का प्रावधान बताया गया। प्रभावित हिस्से की मरम्मत का खर्च भी निर्माण एजेंसी से वहन कराने की बात कही गई थी।
अधिकारियों और स्वतंत्र इंजीनियरिंग टीम पर भी कार्रवाई
NHAI की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक परियोजना के निर्माण और निगरानी से जुड़े कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर, स्वतंत्र इंजीनियर के टीम लीडर और रेजिडेंट इंजीनियर को परियोजना से हटाकर दो साल के लिए संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों की परियोजनाओं में भाग लेने से डिबार किया गया।
इसके अलावा परियोजना से जुड़े स्वतंत्र इंजीनियरिंग संस्थान के खिलाफ भी भविष्य की NHAI परियोजनाओं से डिबारमेंट का प्रस्ताव रखा गया था। इससे साफ है कि मामला केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निर्माण और निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी जांच के दायरे में आई।
PNC पर तीन साल की रोक की कार्रवाई
सितंबर में एलिवेटेड रोड से कंक्रीट गिरने की घटना के बाद कार्रवाई और आगे बढ़ी। रिपोर्टों के अनुसार NHAI ने PNC Infratech और संबंधित इकाई पर तीन साल के लिए भविष्य की NHAI परियोजनाओं में बोली लगाने पर रोक की कार्रवाई की।
यह कार्रवाई एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सामने आई समस्याओं की पृष्ठभूमि में हुई। हालांकि किसी कंपनी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई और किसी विशेष तकनीकी खामी के अंतिम कारण के बीच अंतर रखना जरूरी है। किसी घटना की अंतिम वजह तकनीकी जांच और आधिकारिक निष्कर्ष से ही तय होगी।
IIT खड़गपुर की जांच क्यों महत्वपूर्ण है?
NHAI ने एक्सप्रेसवे की समस्याओं के तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम को भी जांच में शामिल किया है। PIB के अनुसार प्रोफेसर K. S. Reddy के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम को परियोजना की तकनीकी जांच और कारणों का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
जांच में केवल सड़क की ऊपरी परत को नहीं देखा जाना है। रिपोर्टों के अनुसार डिजाइन, ड्रेनेज व्यवस्था, मिट्टी और एम्बैंकमेंट ट्रीटमेंट, निर्माण सामग्री तथा निर्माण प्रक्रिया जैसे विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है।
अगस्त में आई रिपोर्टों में बताया गया था कि तकनीकी जांच के लिए अलग-अलग स्थानों से नमूने भी लिए गए थे। इन नमूनों की लैब जांच के आधार पर एक्सप्रेसवे में सामने आई समस्याओं के कारणों को समझने की कोशिश की जा रही थी।
25 सितंबर को खुलने वाली थी बंद लेन, अब नई तारीख का इंतजार
13 सितंबर की घटना के बाद बंद की गई कानपुर से लखनऊ आने वाली एलिवेटेड लेन की मरम्मत का काम पूरा किया गया। NHAI ने प्रभावित हिस्से में पुराना कंक्रीट हटाकर नई स्लैब डाली और हाई-ग्रेड सीमेंट का इस्तेमाल किया। शुरुआती योजना के अनुसार लेन को 25 सितंबर तक यातायात के लिए खोलने की तैयारी थी।
लेकिन 24 सितंबर की ताजा जानकारी के अनुसार 25 सितंबर को लेन खोलने की योजना आगे खिसक गई है। NHAI के परियोजना निदेशक के अनुसार डामरीकरण का काम बाकी होने के कारण अब 27 से 28 सितंबर के बीच लेन खोलने की संभावना है। तब तक कानपुर से आने वाले वाहनों को बनी से रैंप के जरिए उतारकर पुराने कानपुर-लखनऊ हाईवे से लखनऊ भेजा जा रहा है।
इसका मतलब है कि 25 सितंबर 2026 तक एलिवेटेड रोड की संबंधित लेन पूरी तरह सामान्य यातायात के लिए बहाल नहीं हुई है। यात्रियों को यात्रा से पहले ताजा ट्रैफिक अपडेट देखना उचित रहेगा।
टोल वसूली को लेकर भी NHAI ने लिया फैसला
NHAI ने प्रभावित एक्सप्रेसवे पर सुधारात्मक कार्य के दौरान टोल वसूली को भी निलंबित किया था। PIB की आधिकारिक जानकारी में कहा गया था कि पूरी तरह सुधार होने तक यात्रियों से टोल नहीं लिया जाएगा और टोल से होने वाले नुकसान की वसूली कंसेशनaire से की जाएगी।
बाद की रिपोर्टों में भी टोल वसूली स्थगित रहने और भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध जारी रहने की जानकारी सामने आई। भारी वाहनों को लेकर अंतिम फैसला तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद किए जाने की बात कही गई है।
एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल क्यों बढ़े?
किसी नई सड़क परियोजना में शुरुआती महीनों में मरम्मत होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पूरा निर्माण मानकों के विपरीत हुआ है। लेकिन यहां कम समय में अलग-अलग प्रकार की समस्याएं सामने आने के कारण तकनीकी जांच की जरूरत बढ़ गई है।
ग्रीनफील्ड हिस्से में सड़क धंसने और सतह खराब होने की घटनाओं के बाद जलनिकासी पर सवाल उठे। इसके बाद एलिवेटेड रोड के स्लैब से कंक्रीट गिरने की घटना सामने आई। इन घटनाओं के कारण NHAI को अलग-अलग स्थानों पर निरीक्षण, मरम्मत और परीक्षण कराने पड़े।
वहीं NHAI की ओर से पहले यह स्पष्ट किया गया था कि जुलाई की वायरल घटना को पूरी सड़क के धंसने के रूप में देखना सही नहीं था। प्राधिकरण ने इसे स्थानीय सतही स्लिपेज बताया था, जिसे कुछ घंटों में ठीक कर दिया गया था।
इसलिए पूरे मामले का अंतिम आकलन केवल सोशल मीडिया वीडियो या अलग-अलग घटनाओं के आधार पर करने के बजाय तकनीकी जांच रिपोर्ट और NHAI के अंतिम निष्कर्षों के आधार पर करना अधिक उचित होगा।
यात्रियों के लिए अभी क्या स्थिति है?
25 सितंबर 2026 तक उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार:
- बंथरा के पास क्षतिग्रस्त एलिवेटेड हिस्से की मरम्मत की जा चुकी है।
- संबंधित स्लैब को हटाकर नई स्लैब डाली गई है।
- कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन को अभी सामान्य रूप से खोलने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
- 24 सितंबर की जानकारी के अनुसार डामरीकरण के बाद 27-28 सितंबर के आसपास लेन खोलने की संभावना है।
- तब तक संबंधित वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग/डायवर्जन लागू है।
- भारी वाहनों के प्रवेश को लेकर अंतिम फैसला तकनीकी जांच के बाद होने की बात कही गई है।
- टोल व्यवस्था भी सामान्य स्थिति में पूरी तरह लौटने से पहले NHAI के अगले निर्णय पर निर्भर है।
FAQ
FAQ: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में सीपेज की समस्या क्यों सामने आई?
बारिश के दौरान कुछ हिस्सों में पानी अपेक्षित गति से नहीं निकलने की शिकायत सामने आई थी। निरीक्षण में शोल्डर क्षेत्र में जलभराव और नीचे की मिट्टी के नम होने की बात रिपोर्ट हुई। हालांकि सीपेज का अंतिम तकनीकी कारण जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा।
FAQ: एलिवेटेड रोड से मलबा कब गिरा था?
बंथरा के आजाद गेस्ट हाउस के पास किलोमीटर 19.500 के आसपास 13 सितंबर 2026 की देर रात एलिवेटेड रोड के स्लैब से कंक्रीट का हिस्सा गिरा था। इसके बाद कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन को बंद कर दिया गया था।
FAQ: क्या NHAI ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की है?
हां। NHAI ने PNC Infratech के खिलाफ कार्रवाई की है। अगस्त में नॉन-परफॉर्मर प्रक्रिया, जुर्माने और अन्य दंडात्मक प्रावधानों की घोषणा की गई थी। सितंबर में कंपनी पर तीन साल तक नई NHAI परियोजनाओं में बोली लगाने से रोक की रिपोर्ट भी सामने आई।
FAQ: क्या एलिवेटेड रोड की मरम्मत पूरी हो चुकी है?
प्रभावित हिस्से में नई स्लैब डालने सहित प्रमुख मरम्मत कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई है। हालांकि 24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार डामरीकरण का काम बाकी था, इसलिए संबंधित लेन को 25 सितंबर के बजाय 27-28 सितंबर के बीच खोलने की संभावना बताई गई।
FAQ: क्या लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अभी टोल देना होगा?
NHAI ने प्रभावित परियोजना में सुधार कार्य पूरा होने तक टोल वसूली निलंबित करने की घोषणा की थी। सामान्य टोल व्यवस्था कब और किस चरण में बहाल होगी, इसके लिए NHAI के ताजा आधिकारिक अपडेट को देखना जरूरी है।
FAQ: क्या भारी वाहनों को एक्सप्रेसवे पर जाने की अनुमति है?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध जारी था और IIT खड़गपुर की तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद इस संबंध में फैसला किए जाने की बात कही गई थी।
FAQ: IIT खड़गपुर की रिपोर्ट में क्या पता चलेगा?
जांच का उद्देश्य सड़क में सामने आई समस्याओं के तकनीकी कारणों का पता लगाना है। इसमें डिजाइन, ड्रेनेज, मिट्टी और एम्बैंकमेंट ट्रीटमेंट, निर्माण सामग्री तथा निर्माण प्रक्रिया जैसे पहलुओं का परीक्षण शामिल है।
FAQ: क्या पूरी सड़क असुरक्षित घोषित की गई है?
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में पूरे एक्सप्रेसवे को असुरक्षित घोषित करने की बात नहीं कही गई है। अलग-अलग प्रभावित हिस्सों की जांच और मरम्मत की गई है तथा कुछ स्थानों पर यातायात प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसलिए पूरे मार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच और NHAI के आधिकारिक आकलन के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
FAQ: यात्रियों को अभी क्या सावधानी रखनी चाहिए?
यात्रियों को संबंधित लेन के डायवर्जन, भारी वाहनों के प्रतिबंध और लेन खुलने की स्थिति के बारे में यात्रा से पहले NHAI या स्थानीय यातायात प्रशासन की ताजा सूचना देखनी चाहिए। विशेष रूप से 27-28 सितंबर के आसपास यात्रा करने वालों को लेन बहाली की वास्तविक स्थिति की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचना
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सामने आई समस्याओं को लेकर जांच और सुधार की प्रक्रिया जारी है। एलिवेटेड रोड से कंक्रीट गिरने की घटना के बाद संबंधित लेन बंद की गई, मरम्मत कराई गई और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। दूसरी ओर, ड्रेनेज और सीपेज से जुड़ी समस्याओं के तकनीकी कारणों को लेकर विशेषज्ञ जांच महत्वपूर्ण है। इसलिए निर्माण गुणवत्ता पर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अधिक स्पष्ट होगा।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। परिस्थितियों या आधिकारिक निर्णयों में बदलाव होने पर जानकारी बदल सकती है। पाठकों को किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित विभाग या आधिकारिक स्रोत से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।





























