भारत को $30 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य, निर्यातकों को भी मिलेगी सरकारी मदद
Viksit Bharat 2047: भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ाने और छोटे कारोबारियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर जोर दे रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी में भारतीय समुदाय से भारत के विकास में योगदान देने की अपील की। उन्होंने भारत-जर्मनी व्यापार संबंधों को और मजबूत बनाने तथा सूक्ष्म और लघु उद्यमों को निर्यात से जुड़े प्रमाणन खर्च में सरकारी सहायता देने की बात भी कही।
इन पहलों का उद्देश्य भारतीय कारोबारियों के लिए विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान बनाना, निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाना और देश के आर्थिक विकास में प्रवासी भारतीयों की विशेषज्ञता, पूंजी तथा व्यावसायिक संपर्कों का उपयोग करना है।
2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य
पीयूष गोयल ने जर्मनी में भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत को आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर यानी 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने भारत के विकास में देश के भीतर रहने वाले नागरिकों के साथ-साथ विदेशों में बसे भारतीयों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
मंत्री के अनुसार, प्रवासी भारतीय अपने ज्ञान, पूंजी, पेशेवर अनुभव और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के जरिए भारत में निवेश, निर्यात, व्यावसायिक ऑर्डर और सेवा अनुबंध बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
यह लक्ष्य सरकार की दीर्घकालिक विकास परिकल्पना का हिस्सा है। इसे हासिल करने के लिए व्यापार, निवेश, उद्योग, कौशल विकास और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रयासों की जरूरत होगी।
प्रवासी भारतीय युवाओं की मदद कैसे कर सकते हैं?
पीयूष गोयल ने जर्मनी में बसे भारतीयों से अपील की कि वे भारत में अपने गांवों और शहरों के युवाओं को मार्गदर्शन देने के लिए आगे आएं। उन्होंने मेंटरशिप, छात्रवृत्ति, डिजिटल प्रशिक्षण और करियर संबंधी सलाह जैसे तरीकों से युवाओं की मदद करने पर जोर दिया।
उन्होंने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों की भूमिका का उल्लेख किया। ऐसे विशेषज्ञ ऑनलाइन कक्षाओं और प्रशिक्षण के माध्यम से भारत में विद्यार्थियों को नए कौशल सीखने में मदद कर सकते हैं।
इस पहल के पीछे विचार यह है कि देश के युवाओं को बेहतर शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर मिलें, ताकि वे भारत में रहकर भी अपने करियर और जीवन को आगे बढ़ा सकें।
छोटे निर्यातकों के प्रमाणन खर्च में मदद करेगी सरकार
बर्लिन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार निर्यात से जुड़े प्रमाणन और अनुपालन खर्चों से जूझ रहे सूक्ष्म और लघु उद्यमों की सहायता करने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission) के तहत पात्र सूक्ष्म और लघु कारोबारियों के प्रमाणन खर्च को पूरा समर्थन देने की बात कही गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पाद बेचने के लिए कई बार कारोबारियों को विशेष गुणवत्ता मानकों, प्रमाणपत्रों और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। इन आवश्यकताओं को पूरा करने का खर्च छोटे कारोबारियों के लिए चुनौती बन सकता है। सरकारी सहायता से ऐसे कारोबारियों के लिए विदेशों में व्यापार शुरू करने या उसका विस्तार करने की राह आसान हो सकती है।
मंत्री ने मौजूदा और नए निर्यातकों से अपनी जरूरत के अनुसार सहायता प्राप्त करने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से संपर्क करने की अपील की। हालांकि, वास्तविक सहायता संबंधित योजना के नियमों, पात्रता और स्वीकृति प्रक्रिया के अधीन होगी।
अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन पर भी फोकस
निर्यात के दौरान कारोबारियों को केवल प्रमाणन ही नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों के पर्यावरण और अन्य नियामकीय नियमों का भी पालन करना पड़ सकता है। पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार भारत में सत्यापन एजेंसियों को मंजूरी देने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों से जुड़े अनुपालन खर्च कम किए जा सकें।
इस संदर्भ में उन्होंने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और वनों की कटाई से संबंधित आवश्यकताओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, सूक्ष्म और लघु उद्यमों को इन प्रक्रियाओं से जुड़ी लागत में व्यापक सहायता देने तथा अन्य निर्यातकों को चरणबद्ध आधार पर मदद देने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
इन उपायों का उद्देश्य छोटे भारतीय कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम करने में मदद करना है। प्रस्तावित सहायता की अंतिम शर्तों और उपलब्धता के लिए संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों को देखना जरूरी होगा।
भारत-जर्मनी व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर जोर
पीयूष गोयल ने भारत और जर्मनी के बीच कारोबारी सहयोग की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने बताया कि लगभग 2,000 कंपनियां जर्मनी में काम कर रही हैं और कुछ कंपनियों की वहां मौजूदगी करीब एक सदी पुरानी है। कई कारोबारियों के भारत के साथ व्यावसायिक संबंध स्वतंत्रता से पहले के समय से चले आ रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए जर्मनी के गुणवत्ता मानकों और कारोबारी नेटवर्क से जुड़ने के अवसर हैं। बेहतर सहयोग से भारतीय कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंचने, उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने और निर्यात का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।
भारत-जर्मनी व्यापार को आगे बढ़ाने में प्रवासी भारतीयों के संपर्क भी उपयोगी हो सकते हैं। वे दोनों देशों की कारोबारी जरूरतों को समझते हैं और निवेश, साझेदारी तथा बाजार संबंधी जानकारी साझा करने में मदद कर सकते हैं।
भारतीय निर्यात बढ़ाने की व्यापक रणनीति
सरकार की व्यापक व्यापार रणनीति में निर्यातकों को नए बाजार उपलब्ध कराना, छोटे कारोबारियों को वैश्विक व्यापार से जोड़ना और भारत में बने उत्पादों की गुणवत्ता को मजबूत करना शामिल है। वाणिज्य मंत्रालय ने पहले भी मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का अधिक उपयोग करने और इनके लाभ छोटे कारोबारियों तक पहुंचाने पर जोर दिया है।
सितंबर 2026 में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि भारत के नौ मुक्त व्यापार समझौते ऐसे अर्थतंत्रों से जुड़े हैं, जिनका संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद लगभग 60 ट्रिलियन डॉलर है। मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से भारतीय कारोबारियों को वैश्विक व्यापार के बड़े हिस्से में प्राथमिकता के आधार पर बाजार पहुंच मिल सकती है।
सरकार का जोर है कि इन अवसरों का लाभ बड़े उद्योगों के साथ-साथ MSMEs, नए निर्यातकों, स्टार्टअप और महिला उद्यमियों को भी मिले। इसके लिए जागरूकता, गुणवत्ता मानकों की जानकारी और निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं में सहायता अहम होगी।
छोटे कारोबारियों और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने हैं?
प्रमाणन खर्च में सहायता और विदेशी बाजारों तक बेहतर पहुंच छोटे कारोबारियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यदि कारोबारी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा कर पाते हैं, तो उनके लिए नए ग्राहकों तक पहुंचने और कारोबार बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं। निर्यात बढ़ने से उत्पादन, रोजगार और विदेशी मुद्रा अर्जन को भी समर्थन मिल सकता है।
दूसरी ओर, 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य एक दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा है। इसे हासिल करने के लिए निवेश, उत्पादकता, बुनियादी ढांचे, कौशल विकास, उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में निरंतर प्रगति जरूरी होगी। केवल किसी एक योजना या सहायता से यह लक्ष्य पूरा नहीं होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. भारत को 2047 तक कितने ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है?
पीयूष गोयल ने भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखने की बात कही है।
2. छोटे निर्यातकों को किस तरह की सरकारी सहायता मिल सकती है?
निर्यात संवर्धन मिशन के तहत सूक्ष्म और लघु उद्यमों को निर्यात से जुड़े प्रमाणन खर्च में सहायता देने की बात कही गई है। सहायता योजना की पात्रता और लागू नियमों के अनुसार मिलेगी।
3. निर्यात सहायता के लिए कारोबारियों को किस विभाग से संपर्क करना चाहिए?
पीयूष गोयल ने मौजूदा और नए निर्यातकों से सहायता के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से संपर्क करने की अपील की है।
4. प्रवासी भारतीय भारत के विकास में कैसे योगदान दे सकते हैं?
वे निवेश, कारोबारी संपर्क, निर्यात के अवसर, पेशेवर अनुभव, छात्रवृत्ति, मेंटरशिप और डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से योगदान दे सकते हैं।
5. भारत-जर्मनी व्यापार सहयोग से किसे फायदा हो सकता है?
बेहतर व्यापारिक संबंधों से भारतीय कंपनियों, MSMEs और निर्यातकों को जर्मनी के बाजार, गुणवत्ता मानकों और कारोबारी नेटवर्क से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं। वास्तविक लाभ उत्पाद, बाजार और कारोबारी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की परिकल्पना में अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और उद्यमिता की अहम भूमिका है। पीयूष गोयल ने जर्मनी में प्रवासी भारतीयों से भारत के विकास में योगदान देने की अपील की है। साथ ही, छोटे निर्यातकों के प्रमाणन खर्च में सहायता और भारत-जर्मनी व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है। इन पहलों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सहायता कितनी प्रभावी ढंग से कारोबारियों तक पहुंचती है और भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता कितनी बढ़ा पाती हैं।
डिस्क्लेमर: यह समाचार प्रकाशित रिपोर्टों और सरकारी जानकारी पर आधारित है। प्रमाणन और अनुपालन खर्च से जुड़ी सहायता संबंधित योजना के नियमों, पात्रता और सरकारी स्वीकृति के अधीन होगी। 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य एक दीर्घकालिक आर्थिक परिकल्पना है, सुनिश्चित परिणाम नहीं।























