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Home - State News - गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन परियोजना: मकान-दुकानों पर कार्रवाई शुरू, प्रशासन ने जारी किए नोटिस

गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन परियोजना: मकान-दुकानों पर कार्रवाई शुरू, प्रशासन ने जारी किए नोटिस

फोरलेन सड़क के लिए बड़ा एक्शन! मकान-दुकानों को नोटिस, तय समय में नहीं हटाया तो चलेगा बुलडोजर

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
12/07/2026
in State News, News
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गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क

गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क: मकान-दुकानों को हटाने का नोटिस जारी

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गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क का रास्ता साफ: मकानों और दुकानों पर प्रशासन का बड़ा ऐक्शन शुरू, नोटिस जारी कर दी बुलडोजर चलाने की सीधी चेतावनी

उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे और चमचमाती सड़कों के जाल को बिछाने की मुहिम के बीच एक ऐसी बड़ी खबर आ रही है जिसने स्थानीय व्यापारियों और गृहस्वामियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे को प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कल्कि धाम से जोड़ने वाली प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क परियोजना ने अब धरातल पर रफ्तार पकड़ ली है। लेकिन विकास की इस तेज रफ्तार के साथ ही प्रभावित परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। जिला प्रशासन ने शुक्रवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस परियोजना के निर्माण मार्ग में आने वाले सभी अवैध व वैध निर्माणों पर कड़ा ऐक्शन लेते हुए अंतिम नोटिस थमा दिया है।

सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले दर्जनों पक्के मकानों, व्यावसायिक दुकानों और बाउंड्री वॉल को हटाने के लिए प्रशासन ने न सिर्फ लिखित नोटिस जारी किए हैं, बल्कि पूरे इलाके में लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी करवाकर अल्टीमेटम दे दिया है। प्रभावित लोगों के लिए यह एक बेहद भावुक और चिंताजनक क्षण है, क्योंकि बरसों से बनी उनकी दुकानें और आशियाने अब मलबे में तब्दील होने की कगार पर हैं। इंटरनेट पर इस समय स्थानीय लोगों और भू-स्वामियों द्वारा यह सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा है कि आखिर इस ध्वस्तीकरण की समय-सीमा क्या है और प्रशासन का अगला कदम क्या होगा। आइए, ‘Bharati Fast News’ की इस ग्राउंड जीरो रिपोर्ट में समझते हैं कि एचौड़ा कंबोह क्षेत्र में प्रशासन की कार्रवाई का पूरा ब्योरा क्या है और इस बड़ी परियोजना का भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

  • परियोजना का नाम: गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (कल्कि धाम लिंक मार्ग)।

  • प्रमुख प्रभावित क्षेत्र: जनपद संभल का ऐतिहासिक गांव एचौड़ा कंबोह (कल्कि धाम परिसर के समीप)।

  • प्रशासनिक कार्रवाई: प्रभावित मकान और दुकान मालिकों को आधिकारिक नोटिस जारी, लाउडस्पीकर से मुनादी संपन्न।

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  • सख्त चेतावनी: निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्वयं अतिक्रमण न हटाने पर प्रशासनिक बुलडोजर द्वारा ध्वस्तीकरण की घोषणा।

  • अतिरिक्त वित्तीय दंड: प्रशासन द्वारा की जाने वाली तोड़ा-फोड़ी का पूरा खर्च (रिकवरी) संबंधित भू-स्वामियों से वसूलने का सख्त आदेश।

  • सुरक्षा व्यवस्था: कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और राजस्व विभाग की टीमें तैनात।

नवीनतम अपडेट: एचौड़ा कंबोह में मुनादी के बाद पसरा सन्नाटा

संभल जिले के एचौड़ा कंबोह क्षेत्र से प्राप्त सीधी रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने गांव का दौरा किया। टीम ने उन सभी ढांचों को लाल स्याही से चिह्नित किया है जो प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क के 4-लेन चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे हैं। उपजिलाधिकारी (SDM) और क्षेत्राधिकारी (CO) के निर्देशन में पूरे गांव में लाउडस्पीकर से यह घोषणा की गई कि विकास कार्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नोटिस मिलने की तारीख से तय दिनों के भीतर यदि लोगों ने अपनी दुकानों का सामान और मकानों के आगे के हिस्सों को नहीं हटाया, तो बिना किसी अतिरिक्त पूर्व सूचना के जेसीबी और बुलडोजर मशीनों को काम पर लगा दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद से ही पूरे क्षेत्र के व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है और लोग अपने स्तर पर जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने में जुट गए हैं।

पृष्ठभूमि: कल्कि धाम और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने की जरूरत

उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को राज्य के आर्थिक विकास का इंजन माना है। इसी एक्सप्रेसवे की उपयोगिता को बढ़ाने के लिए संभल के प्रसिद्ध श्री कल्कि धाम को इस एक्सप्रेसवे से एक उच्च-स्तरीय फोरलेन सड़क के माध्यम से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की गई थी। कल्कि धाम में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, और भविष्य में यहां बनने वाले भव्य मंदिर के कारण वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट और पर्यटकों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी होना तय है।

वर्तमान में जो सड़क मार्ग मौजूद है, वह बेहद संकरा है और वहां अक्सर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। सुगम यातायात और एक्सप्रेसवे तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए इस मार्ग को फोरलेन में अपग्रेड करना बेहद आवश्यक हो गया था। हालांकि, इस मार्ग के दोनों तरफ दशकों से लोगों ने अपने रिहायशी मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बना रखे थे। लोक निर्माण विभाग (PWD) और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के संयुक्त सर्वे के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि जब तक इन निर्माणों को हटाया नहीं जाता, तब तक फोरलेन का निर्माण शुरू कर पाना असंभव है।

महत्वपूर्ण नोट: प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन भू-स्वामियों की वैध जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उन्हें नियमानुसार मुआवजा (Compensation) देने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन सड़क की सरकारी भूमि पर किए गए किसी भी अतिरिक्त कब्जे पर कोई राहत नहीं दी जाएगी।

क्या हुआ? ग्राउंड जीरो पर प्रशासन की सख्त रणनीति

शुक्रवार को हुई अचानक कार्रवाई ने स्थानीय लोगों को संभलने का ज्यादा मौका नहीं दिया। प्रशासन ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाया है जिसके तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

  1. लिखित नोटिस की तामीली: प्रत्येक प्रभावित मकान और दुकान के दरवाजे पर आधिकारिक बेदखली और ध्वस्तीकरण का नोटिस चपका दिया गया है।

  2. सार्वजनिक मुनादी: ग्रामीण इलाकों में लिखित दस्तावेजों से ज्यादा असरदार मुनादी को माना जाता है, इसलिए डोंडी पिटवाकर और लाउडस्पीकर से पूरे गांव को एक साथ सचेत कर दिया गया।

  3. लागत की रिकवरी का डर: इस बार प्रशासन ने एक नया क्लॉज जोड़ा है। यदि सरकार को बुलडोजर चलाना पड़ा, तो डीजल, लेबर और मशीनों का जो भी खर्च आएगा, उसकी रिकवरी संबंधित नागरिक के राजस्व रिकॉर्ड से की जाएगी। इस डर के कारण कई लोग स्वयं ही हथौड़ा लेकर अपने निर्माण तोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

बुनियादी ढांचा और विकास विशेषज्ञों का विश्लेषण

“सड़क परिवहन और बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे या फोरलेन परियोजना के निर्माण के शुरुआती चरण में इस तरह के सामाजिक और प्रशासनिक गतिरोध आम बात हैं। गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क का कल्कि धाम से जुड़ना संभल और आसपास के जिलों के आर्थिक कायाकल्प के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न केवल संपत्तियों के दाम बढ़ेंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन लोगों के वैध आशियाने उजड़ रहे हैं, उन्हें समय पर और बाजार दर के अनुसार उचित मुआवजा मिले ताकि विकास के इस यज्ञ में आम आदमी खुद को ठगा हुआ महसूस न करे।”

आधिकारिक जानकारी: संभल जिला प्रशासन का पक्ष

संभल जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय और पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, परियोजना की समय-सीमा बेहद सख्त है। सरकार की कोशिश है कि गंगा एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे के चालू होने के साथ ही यह लिंक रोड भी पूरी तरह बनकर तैयार हो जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून के दायरे में रहकर सभी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से की जा रही है और किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा, बशर्ते उनके पास भूमि के वैध स्वामित्व के दस्तावेज हों।

फोरलेन सड़क परियोजना: महत्वपूर्ण विवरण एवं स्थिति तालिका

इस चौड़ीकरण योजना से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक जानकारी को आसानी से समझने के लिए नीचे दी गई मोबाइल-फ्रेंडली तालिका देखें:

परियोजना का विवरण / घटकप्रशासनिक और तकनीकी स्थिति
प्रस्तावित सड़क का प्रकारउच्च-स्तरीय फोरलेन (4-Lane) सड़क
मुख्य कनेक्टिविटीगंगा एक्सप्रेसवे मुख्य मार्ग से श्री कल्कि धाम (एचौड़ा कंबोह)
कार्रवाई का मुख्य केंद्रगांव एचौड़ा कंबोह और संभल-असमोली मार्ग के प्रभावित हिस्से
नोटिस जारी होने की तिथिशुक्रवार (ताजा प्रशासनिक ऐक्शन)
ध्वस्तीकरण का माध्यमस्व-बदलाव अथवा प्रशासनिक बुलडोजर ऐक्शन
दंडात्मक क्लॉजसरकारी तोड़ा-फोड़ी का खर्च भू-स्वामी द्वारा देय होगा

रीडर अलर्ट: सोशल मीडिया या स्थानीय स्तर पर फैलने वाली उन अफवाहों पर ध्यान न दें जो यह दावा कर रही हैं कि परियोजना को स्थगित कर दिया गया है। जिला प्रशासन के नोटिस पूरी तरह वैध हैं और निर्माण कार्य अपने तय शेड्यूल के अनुसार ही आगे बढ़ेगा।

प्रभावित परिवारों और स्थानीय व्यापार पर मानवीय प्रभाव

इस पूरी कार्रवाई का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि कई छोटे दुकानदारों की आजीविका का एकमात्र साधन यही दुकानें थीं जो इस सड़क की जद में आ रही हैं। एचौड़ा कंबोह के एक स्थानीय किराना व्यापारी ने नम आंखों से बताया, “मेरी तीन पीढ़ियां इस दुकान पर बैठी हैं। विकास होना अच्छी बात है, हमारे इलाके का नाम होगा, लेकिन हमारी रोजी-रोटी का कोई वैकल्पिक इंतजाम भी प्रशासन को करना चाहिए।” ऐसे परिवारों में छाई चिंता यह दर्शाती है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के पीछे कितने बड़े मानवीय बलिदान छिपे होते हैं।

भविष्य का प्रभाव: संभल और पश्चिमी यूपी की बदलती तस्वीर

एक बार जब यह गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी, तो क्षेत्र में निम्नलिखित बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:

  • यात्रा समय में भारी कटौती: दिल्ली-एनसीआर, मेरठ और मुरादाबाद से कल्कि धाम आने वाले श्रद्धालुओं का सफर बेहद आसान और तेज हो जाएगा।

  • रियल एस्टेट में बूम: फोरलेन के दोनों तरफ आने वाले समय में बड़े होटलों, रेस्टोरेंट्स और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा, जिससे जमीनों की कीमतें आसमान छुएंगी।

  • कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण: संभल जिला सीधे तौर पर एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे स्थानीय कृषि उत्पादों को लखनऊ और दिल्ली की मंडियों तक पहुंचाना आसान होगा।

प्रभावित नागरिकों और भू-स्वामियों को अब क्या करना चाहिए?

यदि आपका निर्माण भी इस फोरलेन परियोजना की जद में आ रहा है, तो बिना पैनिक हुए इन बातों पर अमल करें:

  • दस्तावेजों का सत्यापन कराएं: तुरंत अपने भूमि स्वामित्व (खतौनी, बैनामा या पट्टा) के कागजात लेकर तहसील कार्यालय में लेखपाल या कानूनगो से मिलें और जांचें कि आपकी कितनी जमीन वैध है।

  • मुआवजे के लिए आवेदन: यदि आपकी वैध भूमि अधिग्रहित की जा रही है, तो जिला प्रशासन के भूमि अध्याप्ति अधिकारी (LAO) के पास अपना दावा और बैंक खाता विवरण समय पर जमा करें।

  • सुरक्षित ध्वस्तीकरण: यदि निर्माण पूरी तरह अवैध या सड़क की सीमा में है, तो प्रशासन द्वारा भारी मशीनों से तुड़वाने के बजाय स्वयं कुशल मजदूरों से उसे हटवाएं। इससे आपकी ईंटें, खिड़की-दरवाजे और अन्य कीमती निर्माण सामग्री सुरक्षित बच जाएगी और आप प्रशासनिक रिकवरी चार्ज से भी बच जाएंगे।

  • आधिकारिक घोषणाओं पर नजर: किसी भी बिचौलिए या दलाल के झांसे में न आएं और केवल जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम सत्य मानें।

निष्कर्ष (Conclusion)

संभल के एचौड़ा कंबोह में गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क को लेकर शुरू हुई प्रशासनिक कार्रवाई यह साफ संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश सरकार विकास परियोजनाओं की समय-सीमा को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। जहां यह फोरलेन सड़क आने वाले समय में क्षेत्र की प्रगति का मुख्य मार्ग बनेगी, वहीं वर्तमान में यह स्थानीय प्रभावितों के लिए एक कठिन परीक्षा की घड़ी है। विकास और पुनर्वास के बीच एक सही संतुलन बनाना ही किसी भी कल्याणकारी सरकार की सफलता की कसौटी होता है। उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे परियोजनाओं, प्रशासनिक फैसलों और जनहित से जुड़े ऐसे ही सभी 100% प्रामाणिक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित समाचारों के लिए हमेशा ‘Bharati Fast News’ के साथ बने रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: गंगा एक्सप्रेसवे फोरलेन सड़क परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य संभल के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल श्री कल्कि धाम (एचौड़ा कंबोह) को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे के मुख्य मार्ग से जोड़ना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और वीवीआईपी यातायात को सुगम और जाम-मुक्त मार्ग मिल सके।

प्रश्न 2: शुक्रवार को प्रशासन ने एचौड़ा कंबोह गांव में क्या कार्रवाई की?

उत्तर: प्रशासन की राजस्व और पुलिस टीम ने संयुक्त रूप से दौरा करके फोरलेन सड़क के चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले सभी मकानों और दुकानों को चिह्नित किया, उनके मालिकों को अंतिम नोटिस तामील कराया और लाउडस्पीकर से मुनादी कराकर अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम दिया।

प्रश्न 3: यदि प्रभावित लोग तय समय में अपने मकान या दुकान नहीं हटाते हैं तो क्या होगा?

उत्तर: प्रशासन द्वारा जारी सख्त चेतावनी के अनुसार, यदि निर्धारित अवधि के भीतर अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया, तो बुलडोजर और जेसीबी मशीनों की मदद से बलपूर्वक ध्वस्तीकरण किया जाएगा। साथ ही, इस पूरी कार्रवाई में आने वाला खर्च भी संबंधित भू-स्वामियों से वसूला जाएगा।

प्रश्न 4: क्या इस चौड़ीकरण योजना में वैध संपत्तियों के नुकसान पर मुआवजा मिलेगा?

उत्तर: हां, जिन नागरिकों की निजी और वैध भूमि का अधिग्रहण इस फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए किया जा रहा है, उन्हें नियमानुसार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उचित वित्तीय मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों पर कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।

प्रश्न 5: फोरलेन सड़क की जद में आने से कौन-कौन से इलाके मुख्य रूप से प्रभावित हो रहे हैं?

उत्तर: इस परियोजना से मुख्य रूप से संभल-असमोली मार्ग पर स्थित एचौड़ा कंबोह गांव और कल्कि धाम परिसर के आसपास के रिहायशी व व्यावसायिक इलाके प्रभावित हो रहे हैं, जहां सड़क को चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है।

प्रश्न 6: क्या इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट से स्टे या राहत मिल सकती है?

उत्तर: यदि किसी नागरिक के पास अपनी भूमि के पुख्ता और वैध राजस्व दस्तावेज हैं और अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है, तो वह सक्षम न्यायालय का रुख कर सकता है। हालांकि, लोकहित की बड़ी परियोजनाओं में अदालतें आमतौर पर तब तक हस्तक्षेप नहीं करतीं जब तक कि कोई गंभीर कानूनी त्रुटि न हो।

प्रश्न 7: तोड़ा-फोड़ी का प्रशासनिक खर्च (Recovery Charge) क्या है?

उत्तर: इसका मतलब यह है कि यदि प्रशासन को अपने संसाधनों (जैसे लेबर, जेसीबी मशीन, क्रेन) का उपयोग करके किसी अवैध निर्माण को गिराना पड़ता है, तो उस पूरी सरकारी कार्रवाई की लागत का बिल संबंधित मकान या दुकान मालिक के नाम फाड़ा जाता है और उसकी वसूली भू-राजस्व की तरह की जाती है।

प्रश्न 8: इस परियोजना से संभल क्षेत्र को भविष्य में क्या फायदा होगा?

उत्तर: इस फोरलेन सड़क के बनने से संभल क्षेत्र सीधे एक्सप्रेसवे ग्रिड से जुड़ जाएगा, जिससे दिल्ली और लखनऊ की दूरी घंटों कम हो जाएगी। इसके अलावा, कल्कि धाम में धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और जमीनों की कीमतों में भारी उछाल आएगा।

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अस्वीकरण (Disclaimer)

तथ्य-आधारित व्यावसायिक समाचार अस्वीकरण: इस लेख में दी गई रिपोर्ट संभल जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा जारी आधिकारिक नोटिसों, एचौड़ा कंबोह में की गई सार्वजनिक मुनादी और जमीनी स्तर पर एकत्रित की गई प्रामाणिक सूचनाओं पर आधारित है। इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण, डिमोलिशन शेड्यूल और मुआवजे की दरों में प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार बदलाव संभव है। ‘Bharati Fast News’ किसी भी संपत्ति के वैध या अवैध होने का दावा स्वयं नहीं करता है। किसी भी कानूनी या वित्तीय कदम को उठाने से पहले कृपया संभल कलेक्ट्रेट या संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM) कार्यालय से आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लें।

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Abhay Jeet Singh

Abhay Jeet Singh

Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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