Indri Whisky: देशी व्हिस्की की इतनी डिमांड क्यों? जानें इंद्री की कमी का असली राज
प्रीमियम शराब की दुकानों पर जैसे ही कोई खरीदार सिंगल मॉल्ट के रैक की ओर बढ़ता है, ज्यादातर सेल्समैन का एक ही बंधा-टका जवाब सामने आ रहा है—“सर, स्टॉक खत्म है, नई खेप कब आएगी कुछ पक्का नहीं कह सकते।” हरियाणा के यमुनानगर के पास बसे एक छोटे से देहाती कस्बे ‘इंद्री’ के नाम पर बनी सिंगल मॉल्ट ने वैश्विक मंच पर वह कारनामा कर दिखाया है जिसका सपना दुनिया भर के डिस्टिलर्स दशकों तक देखते हैं। अंतरराष्ट्रीय फलक पर स्कॉटलैंड, जापान और अमेरिका के सैकड़ों साल पुराने ब्रांड्स को पछाड़कर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ व्हिस्की का तमगा जीतते ही बाजार में Indri Whisky Shortage एक बड़ा मुद्दा बन गई है।
शराब शौकीनों और लक्जरी स्पिरिट्स के कद्रदानों के बीच आज केवल एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिर भारत में बनी यह ‘देशी’ सिंगल मॉल्ट रातों-रात इतनी दुर्लभ क्यों हो गई? क्या यह कंपनी द्वारा जानबूझकर पैदा की गई आर्टिफिशियल कमी है या फिर व्हिस्की बनाने के वैज्ञानिक नियमों, एजिंग बैरल्स की सीमाओं और बेतहाशा बढ़ी वैश्विक मांग का अपरिहार्य नतीजा?
अगर आप भी दुकानों पर इंद्री की खाली शेल्व्स देखकर हैरान हैं और इस ब्रांड की दुर्लभता के पीछे छिपे डिस्टिलेशन और अर्थशास्त्र को समझना चाहते हैं, तो यह विस्तृत खोजी रिपोर्ट इस किल्लत की हर परत को बेनकाब करती है।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
ग्लोबल अवॉर्ड्स से चमकी किस्मत: व्हिस्की ऑफ द वर्ल्ड अवार्ड्स (Whiskies of the World Awards) में ‘बेस्ट इन शो, डबल गोल्ड’ जीतकर इंद्री की ‘दिवाली कलेक्टर एडिशन’ ने दुनिया को हैरान कर दिया।
बाजार में भारी किल्लत (Shortage): दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख प्रीमियम बाजारों में इंद्री त्रिणी (Indri Trini) की मांग आपूर्ति से 4 गुना अधिक हो चुकी है।
बैरल एजिंग का नियम: व्हिस्की कोई फैक्ट्री में 24 घंटे में बनने वाला शीतल पेय नहीं है; इसे ओक बैरल्स (ओक पीपे) में परिपक्व होने में वर्षों का समय लगता है, जिसे कृत्रिम रूप से तेज नहीं किया जा सकता।
एंजल्स शेयर (Angel’s Share) की मार: भारत के गर्म और शुष्क मौसम के कारण हर साल बैरल में से 10 से 12 प्रतिशत व्हिस्की वाष्पीकृत होकर उड़ जाती है, जबकि स्कॉटलैंड में यह दर केवल 2 प्रतिशत होती है।
सप्लाई-चेन बाधाएं: एक्स-बॉर्बन (Ex-Bourbon), एक्स-वाइन (Ex-Wine) और पीएक्स शेरी (Pedro Ximénez Sherry) के आयातित ओक पीपों की वैश्विक कमी ने उत्पादन की रफ्तार को बांध दिया है।
पिकैडिली एग्रो का मेगा विस्तार: निर्माता कंपनी पिकैडिली एग्रो इंडस्ट्रीज (Piccadily Agro Industries) ने अपनी क्षमता को दोगुना करने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश शुरू किया है, लेकिन इसका बाजार पर असर दिखने में 3 से 4 साल लगेंगे।
भारतीय क्राफ्ट स्पिरिट्स की वैश्विक साख: इंद्री की सफलता ने अमृत (Amrut) और पॉल जॉन (Paul John) के बाद वैश्विक पटल पर ‘मेक इन इंडिया’ लग्जरी स्पिरिट्स की प्रतिष्ठा को नए शिखर पर पहुंचा दिया है।
ताजा घटनाक्रम: प्रीमियम रिटेल काउंटरों से बोतलें गायब
देश के बड़े शहरों में शराब की दुकानों, विशेष रूप से प्रीमियम वॉक-इन लिकर स्टोर्स पर इंद्री की बोतलों का मिलना लॉटरी लगने जैसा हो गया है। दिल्ली-एनसीआर के बड़े वेंडर्स बताते हैं कि स्टॉक आते ही कुछ ही घंटों के भीतर पेटी की पेटी बिक जाती हैं।
कई प्रीमियम रिटेलर्स ने तो इंद्री त्रिणी पर प्रति ग्राहक केवल ‘एक बोतल’ की राशनिंग लागू कर दी है। जो स्थिति कभी स्कॉटिश ब्रांड्स जैसे मैकैलन (Macallan) या जापानी व्हिस्की यामाजाकी (Yamazaki) के साथ देखी जाती थी, आज वही कद्र और किल्लत एक विशुद्ध भारतीय ब्रांड के साथ देखने को मिल रही है।
बैकग्राउंड स्टोरी: यमुनानगर के गन्ने के खेतों से दुनिया के मंच तक
पिकैडिली एग्रो इंडस्ट्रीज मूल रूप से चीनी मिल, डिस्टिलरी और माल्ट उत्पादन से जुड़ी एक पारंपरिक भारतीय कंपनी थी। इंद्री की नींव उस समय पड़ी जब कंपनी प्रबंधन ने तय किया कि वे सस्ते ब्लेंडेड शराब के कारोबार से ऊपर उठकर एक विश्वस्तरीय सिंगल मॉल्ट तैयार करेंगे।
इंद्री कस्बे का चयन संयोग नहीं था। यह क्षेत्र शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है, जहां का पानी मीठा और शुद्ध है और मौसम में अत्यधिक उतार-चढ़ाव होता है—सर्दियों में तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और गर्मियों में पारा 45 डिग्री के पार चला जाता है।
कंपनी ने राजस्थान और हरियाणा के छह-पंक्ति (6-Row) वाले देशी जौ को अपनी पहचान बनाया। पारंपरिक स्कॉच दो-पंक्ति (2-Row) जौ से बनती है, लेकिन भारतीय छह-पंक्ति जौ में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जो व्हिस्की को एक अनूठा फलदार और मसालेदार फ्लेवर प्रोफाइल प्रदान करता है। वर्ष 2021 में घरेलू बाजार में पेश की गई इंद्री ‘त्रिणी’ ने अपनी अनूठी ‘थ्री-वुड एजिंग’ (तीन अलग-अलग प्रकार के पीपों में परिपक्वता) के जरिए विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया।
दिलचस्प तथ्य: भारत दुनिया में व्हिस्की का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। हालांकि, भारत में बिकने वाली 90% से अधिक पारंपरिक व्हिस्की वास्तव में न्यूट्रल अल्कोहल (रेक्टीफाइड स्पिरिट) और गन्ने के शीरे (Molasses) से बनी होती है। इंद्री उन चुनिंदा देशी ब्रांड्स में है जो 100% माल्टेड बार्ली (जौ) और कॉपर पॉट स्टिल्स में बनती है।
क्या हुआ खास? किल्लत की 5 वास्तविक और तकनीकी वजहें
Indri Whisky Shortage के पीछे कोई कॉरपोरेट हेराफेरी नहीं, बल्कि व्हिस्की बनाने की वह तकनीकी और जैविक सीमाएं हैं जिन्हें पैसे से भी रातों-रात नहीं सुलझाया जा सकता:
[कारण 1: अप्रत्याशित वैश्विक मांग] ➜ ग्लोबल अवॉर्ड्स के बाद घरेलू और विदेशी मांग में 400% का भारी उछाल
[कारण 2: बैरल एजिंग की अनिवार्यता] ➜ अच्छी सिंगल मॉल्ट को तैयार होने में न्यूनतम 3 से 6 साल का समय चाहिए
[कारण 3: भारतीय 'एंजल्स शेयर'] ➜ गर्म जलवायु में हर साल 10-12% स्पिरिट हवा में उड़ जाती है
[कारण 4: आयातित ओक पीपों का टोटा] ➜ स्पेन और अमेरिका से आने वाले शेरी व बॉर्बन पीपों की वैश्विक कमी
[कारण 5: राज्यवार आबकारी नीतियां] ➜ भारत के विभिन्न राज्यों में जटिल कोटा, लेबल रजिस्ट्रेशन और डिस्ट्रीब्यूशन नियम
1. अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड्स के बाद मांग में सुनामी
साल 2023 के अंत में जब ‘इंद्री दिवाली कलेक्टर एडिशन’ को विश्व स्तर पर ‘बेस्ट इन शो’ घोषित किया गया, तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हेडलाइंस बन गईं। अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और खाड़ी देशों से विदेशी वितरकों ने ऑर्डर की झड़ी लगा दी। कंपनी की जो उत्पादन क्षमता घरेलू बाजार के लिए निर्धारित थी, उसका एक बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए आवंटित करना पड़ा, जिससे भारतीय बाजार में आपूर्ति अचानक सूख गई।
2. व्हिस्की एजिंग: समय को तेज नहीं किया जा सकता
एक बीयर फैक्ट्री को अपना उत्पादन दोगुना करने में 15 से 20 दिन लगते हैं। वोदका या जिन कुछ ही दिनों में तैयार होकर बोतल में बंद हो सकती है। लेकिन सिंगल मॉल्ट व्हिस्की के साथ ऐसा नहीं होता। आज डिस्टिलरी में जो स्प्रिट डिस्टिल हो रही है, वह लकड़ी के पीपों (Casks) में बंद होकर कम से कम 2029 या 2030 में पीने योग्य बनेगी। कंपनी ने 2020-2021 में जिस मांग का अनुमान लगाकर पीपे भरे थे, मौजूदा मांग उस अनुमान से चार गुना आगे निकल चुकी है।
3. ‘एंजल्स शेयर’ की दोहरी मार
व्हिस्की उद्योग में बैरल के भीतर से लकड़ी के छिद्रों के जरिए वाष्पीकृत होने वाले अल्कोहल को ‘एंजल्स शेयर’ (Angel’s Share) कहा जाता है—यानी वह हिस्सा जो स्वर्ग में फरिश्तों के हिस्से में चला गया।
स्कॉटलैंड में ठंडी और नम जलवायु के कारण हर साल केवल 1.5 से 2 प्रतिशत व्हिस्की उड़ती है।
भारत (खासकर हरियाणा के शुष्क मैदानों) में गर्मी के कारण हर साल 10 से 12 प्रतिशत व्हिस्की बैरल से उड़ जाती है।
इसका मतलब यह है कि अगर किसी पीपे में 200 लीटर स्पिरिट भरी गई, तो 5 साल बाद उसमें केवल 100 से 110 लीटर व्हिस्की ही बचती है। इस भारी प्राकृतिक नुकसान के कारण उत्पादन की अंतिम मात्रा उम्मीद से काफी घट जाती है।
4. तीन अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बैरल्स की कमी
इंद्री ‘त्रिणी’ को इसका अनूठा स्वाद देने के लिए तीन अलग-अलग प्रकार के ओक पीपों में परिपक्व किया जाता है:
अमेरिका से आयातित एक्स-बॉर्बन (Ex-Bourbon) बैरल्स।
फ्रांस से आने वाले एक्स-रेड वाइन (Ex-French Wine) बैरल्स।
स्पेन से आने वाले पेड्रो ज़िमेनेज़ शेरी (PX Sherry) बैरल्स।
वैश्विक स्तर पर शेरी और बॉर्बन पीपों की भारी किल्लत चल रही है। इन महंगे पीपों को हजारों मील दूर से मंगाना, कस्टम क्लीयरेंस और लॉजिस्टिक्स में लगने वाला समय उत्पादन की रफ्तार को धीमा कर देता है।
विशेषज्ञ मत: अंतरराष्ट्रीय स्पिरिट्स जज और व्हिस्की विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय सिंगल मॉल्ट्स को स्कॉटलैंड की तुलना में अधिक तेजी से मैच्योरिटी मिलती है। भारत में 3 साल की एजिंग स्कॉटलैंड के 10-12 साल के बराबर लकड़ी का अर्क सोख लेती है। लेकिन इस त्वरित परिपक्वता की कीमत भारी एंजल्स शेयर के रूप में चुकानी पड़ती है। जब तक भारतीय डिस्टिलरीज अपनी वेयरहाउसिंग क्षमता को कई गुना नहीं बढ़ाएंगी, तब तक यह किल्लत बनी रहेगी।
वैश्विक बाजार में भारतीय व्हिस्की का दबदबा (Mobile Friendly Table)
भारतीय सिंगल मॉल्ट्स ने किस तरह वैश्विक मंच पर पारंपरिक दिग्गजों को चुनौती दी है, इसे नीचे दिए गए तुलनात्मक विश्लेषण से समझा जा सकता है:
| ब्रांड का नाम | मूल स्थान (Origin) | मुख्य सामग्री | मैच्योरिटी का समय | प्रमुख वैश्विक मान्यता |
| इंद्री (Indri Trini) | हरियाणा, भारत | भारतीय 6-रो माल्टेड बार्ली | 3 से 5 साल (ट्रिपल वुड) | Best in Show (Whiskies of the World) |
| अमृत (Amrut Fusion) | बेंगलुरु, भारत | भारतीय + स्कॉटिश पीटेड बार्ली | 4 से 5 साल | Jim Murray’s 3rd Best in the World |
| पॉल जॉन (Paul John Nirvana) | गोवा, भारत | भारतीय 6-रो बार्ली | 3 से 5 साल (तटीय एजिंग) | San Francisco World Spirits Double Gold |
| ग्लेनफिडिक 12 (Glenfiddich) | डफटाउन, स्कॉटलैंड | स्कॉटिश 2-रो बार्ली | न्यूनतम 12 साल | दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली सिंगल मॉल्ट |
| यामाजाकी 12 (Yamazaki) | ओसाका, जापान | जापानी माल्ट + मिजुहारा ओक | न्यूनतम 12 साल | World Whiskies Awards Winner |
महत्वपूर्ण नोट (Important Note): व्हिस्की में उम्र (Age Statement) ही सब कुछ नहीं होती। ठंडे देशों (स्कॉटलैंड) में जो लकड़ी का प्रभाव 12 साल में आता है, भारत की उष्णकटिबंधीय जलवायु (Tropical Aging) में वह गहरा रंग और गाढ़ा स्वाद 4 से 5 साल में ही विकसित हो जाता है।
शराब उद्योग और आम नागरिकों पर प्रभाव (Economic & Consumer Impact)
इंद्री की मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन ने घरेलू बाजार में कई नई प्रवृत्तियों को जन्म दिया है:
प्रीमियम सेगमेंट की ओर झुकाव: भारतीय उपभोक्ता अब ‘क्वांटिटी’ (मात्रा) के बजाय ‘क्वालिटी’ (गुणवत्ता) पर खर्च करने को तैयार हैं। ₹3,000 से ₹5,000 के ब्रैकेट में भारतीय सिंगल मॉल्ट्स ने विदेशी आयातित स्कॉच के बाजार को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाया है।
कालाबाजारी और ओवर-रेटिंग: किल्लत का फायदा उठाकर कई गैर-कानूनी वेंडर्स और अनधिकृत शराब ठेके एमआरपी से 20 से 30 प्रतिशत अधिक कीमत पर इंद्री बेचने की कोशिश करते पकड़े जा रहे हैं।
रोजगार और कृषि को बढ़ावा: स्थानीय छह-पंक्ति जौ की मांग बढ़ने से हरियाणा और राजस्थान के किसानों को अपनी फसलों के बेहतर दाम मिल रहे हैं। इसके साथ ही पैकेजिंग, बॉटलिंग और स्थानीय लॉजिस्टिक्स में सैकड़ों नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए हैं।
रीडर अलर्ट (Reader Alert): कमी का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व खाली बोतलों में घटिया शराब भरकर नकली इंद्री बेचने का प्रयास कर सकते हैं। हमेशा सरकार द्वारा अधिकृत लाइसेंसी लिकर वेंडर्स से ही खरीदारी करें और बोतल पर लगे आबकारी सुरक्षा होलोग्राम और बारकोड को स्कैन करके प्रामाणिकता अवश्य जांचें।
भविष्य का प्रभाव: पिकैडिली का मास्टर प्लान और कब खत्म होगी किल्लत?
इस आपूर्ति संकट को हल करने के लिए निर्माता कंपनी पिकैडिली एग्रो इंडस्ट्रीज ने कमर कस ली है:
उत्पादन क्षमता का भारी विस्तार: कंपनी ने अपने इंद्री प्लांट में कॉपर पॉट स्टिल्स की संख्या बढ़ाने के लिए भारी पूंजीगत व्यय (CapEx) की घोषणा की है। लक्ष्य दैनिक माल्ट उत्पादन क्षमता को 12,000 लीटर से बढ़ाकर 25,000 लीटर से अधिक करने का है।
विशाल वेयरहाउसिंग क्षमता: हरियाणा के अलावा अन्य क्षेत्रों में तापमान-नियंत्रित (Climate-Controlled) परिपक्वता गोदाम बनाए जा रहे हैं ताकि अत्यधिक एंजल्स शेयर को कुछ हद तक कम किया जा सके और एक साथ 50,000 से अधिक बैरल्स को स्टोर किया जा सके।
किल्लत कब तक रहेगी?: उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 और 2027 के अधिकांश समय तक यह किल्लत कमोबेश बनी रहेगी। बाजार में पर्याप्त स्टॉक की उपलब्धता 2028 की शुरुआत तक ही सामान्य होने की संभावना है, जब वर्तमान में भरे जा रहे अतिरिक्त बैरल्स परिपक्व होकर बाजार में आएंगे।
व्हिस्की प्रेमियों और ग्राहकों को क्या करना चाहिए? (Consumer Advice)
यदि आप इंद्री सिंगल मॉल्ट की तलाश में हैं, तो इन व्यावहारिक सुझावों पर ध्यान दें:
विश्वसनीय रिटेलर्स के संपर्क में रहें: बड़े शहरों के प्रतिष्ठित लिकर बुटीक और सुपरस्टोर्स में अपना नाम ‘वेटिंग लिस्ट’ में दर्ज कराएं ताकि नई खेप आते ही आपको सूचना मिल सके।
ड्यूटी-फ्री स्टोर्स का विकल्प: अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु एयरपोर्ट ड्यूटी-फ्री) पर इंद्री का स्टॉक घरेलू दुकानों की तुलना में अधिक नियमित रूप से उपलब्ध रहता है। यात्रा के दौरान वहां से खरीदारी एक बेहतरीन विकल्प है।
अन्य भारतीय क्राफ्ट मॉल्ट्स को भी आजमाएं: जब तक इंद्री उपलब्ध नहीं होती, तब तक भारत के अन्य असाधारण विश्वस्तरीय सिंगल मॉल्ट्स जैसे Amrut Fusion, Paul John Bold, Rampur Select, या Godawan का स्वाद ले सकते हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत का परचम लहराया है।
अनुचित मूल्य न चुकाएं: कभी भी किसी वेंडर को प्रिंटेड एमआरपी (MRP) से एक रुपया भी अधिक न दें। कालाबाजारी को बढ़ावा न देना ही एक जिम्मेदार उपभोक्ता की पहचान है।
निष्कर्ष
Indri Whisky Shortage किसी विफलता की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय विनिर्माण और कारीगरी की वह गौरवगाथा है जिसने सदियों पुरानी पश्चिमी बादशाहत को हिलाकर रख दिया है। एक भारतीय डिस्टिलरी का माल दुकानों पर न मिलना और ग्राहकों का उसके लिए कतारों में लगना यह साबित करता है कि गुणवत्ता के मामले में ‘मेक इन इंडिया’ आज दुनिया के किसी भी कोने से मुकाबला कर सकता है।
व्हिस्की बनाना प्रकृति, समय और धैर्य का खेल है। ओक के पीपों में बंद तरल को अपनी परिपक्वता हासिल करने के लिए जितने वर्षों की नींद चाहिए, वह उसे देनी ही होगी। तब तक शराब प्रेमियों को थोड़ा धैर्य रखना होगा, क्योंकि बेहतरीन चीजों का इंतजार हमेशा थोड़ा लंबा होता है।
ब्रांड के आधिकारिक पोर्टफोलियो, आगामी एक्सक्लूसिव रिलीज और आधिकारिक वितरकों की सूची के लिए पिकैडिली एग्रो इंडस्ट्रीज की आधिकारिक वेबसाइट (piccadily.com) और इंद्री सिंगल मॉल्ट के आधिकारिक पोर्टल्स पर विजिट करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: Indri Whisky Shortage का सबसे मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड्स जीतने के बाद वैश्विक और घरेलू मांग में आया 400% से अधिक का अचानक उछाल है, जबकि सिंगल मॉल्ट को बैरल्स में परिपक्व होने में 3 से 5 साल का समय लगता है, जिसे तुरंत नहीं बढ़ाया जा सकता।
Q2: क्या इंद्री पूरी तरह से भारत में बनी व्हिस्की है?
उत्तर: हां, इंद्री पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ सिंगल मॉल्ट है। इसका निर्माण हरियाणा के यमुनानगर स्थित इंद्री कस्बे में पिकैडिली एग्रो इंडस्ट्रीज द्वारा किया जाता है। इसमें भारतीय 6-पंक्ति जौ और स्थानीय भूजल का उपयोग होता है।
Q3: इंद्री ‘त्रिणी’ को त्रिणी क्यों कहा जाता है?
उत्तर: ‘त्रिणी’ संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ ‘तीन’ होता है। इस व्हिस्की को तीन अलग-अलग प्रकार के ओक बैरल्स—एक्स-बॉर्बन, एक्स-फ्रेंच वाइन और एक्स-पीएक्स शेरी पीपों में परिपक्व किया जाता है, जिसके कारण इसका नाम त्रिणी पड़ा।
Q4: भारत में एंजल्स शेयर (Angel’s Share) क्या होता है और यह किल्लत को कैसे बढ़ाता है?
उत्तर: लकड़ी के पीपों से वाष्पीकृत होकर उड़ जाने वाली व्हिस्की को एंजल्स शेयर कहते हैं। भारत के अत्यधिक गर्म मौसम के कारण हर साल 10 से 12 प्रतिशत व्हिस्की हवा में उड़ जाती है, जिससे 5 साल बाद बैरल में लगभग आधी व्हिस्की ही बचती है।
Q5: भारत में इंद्री त्रिणी की औसत कीमत क्या है?
उत्तर: विभिन्न राज्यों की आबकारी नीतियों और टैक्स स्लैब के आधार पर इंद्री त्रिणी (750ml) की कीमत आमतौर पर ₹3,100 से ₹4,500 के बीच होती है। दिल्ली, हरियाणा और गोवा में यह अपेक्षाकृत कम दाम पर मिलती है।
Q6: क्या इंद्री को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ व्हिस्की का पुरस्कार मिल चुका है?
उत्तर: जी हां, अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित ‘व्हिस्कीज ऑफ द वर्ल्ड अवार्ड्स 2023’ में इंद्री की दिवाली कलेक्टर एडिशन 2023 को दुनिया भर के 100 से अधिक स्कॉच और बॉर्बन ब्रांड्स को पछाड़कर ‘बेस्ट इन शो, डबल गोल्ड’ का खिताब मिला था।
Q7: बाजार में इंद्री की सामान्य उपलब्धता कब तक बहाल होने की उम्मीद है?
उत्तर: कंपनी द्वारा उत्पादन क्षमता और वेयरहाउसिंग का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा रहा है। हालांकि, व्हिस्की एजिंग चक्र को देखते हुए बाजार में स्टॉक की सहज उपलब्धता 2027 के अंत या 2028 तक ही पूरी तरह सामान्य होने का अनुमान है।
Q8: इंद्री व्हिस्की का निर्माण कौन सी कंपनी करती है?
उत्तर: इंद्री सिंगल मॉल्ट का उत्पादन भारत की अग्रणी डिस्टिलरी कंपनी पिकैडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Piccadily Agro Industries Ltd) द्वारा किया जाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह समाचार विश्लेषण स्पिरिट्स उद्योग के सार्वजनिक वित्तीय आंकड़ों, वैश्विक वाइन एवं स्पिरिट्स प्रतियोगिताओं के परिणामों, कंपनी द्वारा जारी बयानों और बाजार समीक्षाओं पर आधारित है। यह लेख किसी भी रूप में शराब के उपभोग को बढ़ावा या प्रोत्साहन नहीं देता है। शराब का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। मदिरापान केवल कानूनी रूप से निर्धारित न्यूनतम आयु वर्ग के वयस्कों के लिए ही अनुमन्य है। वाहन चलाते समय शराब का सेवन कभी न करें।





























