UPI MDR Charge 2026: 0.40% से 0.08% फीस करने का सुझाव, लागू होने में देरी संभव
UPI MDR Charge 2026: बड़ी बातें
- IIT बॉम्बे से जुड़े विशेषज्ञों की रिपोर्ट में प्रस्तावित MDR को 0.40% से घटाकर 0.08% करने की सिफारिश की गई है।
- रिपोर्ट में बैंकों को MDR से मिलने वाली बड़ी हिस्सेदारी समाप्त करने का सुझाव दिया गया है।
- PhonePe और Google Pay जैसे थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स के लिए 0.06% हिस्सेदारी का प्रस्ताव है।
- बैंकों की भूमिका वाले पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए 0.02% हिस्सा बनाए रखने की सिफारिश की गई है।
- 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले शुल्क में देरी की संभावना पर रिपोर्टें आई हैं, लेकिन अंतिम सरकारी निर्णय की पुष्टि जरूरी है।
भारत में डिजिटल पेमेंट के सबसे लोकप्रिय माध्यम UPI को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। IIT बॉम्बे के विशेषज्ञों की रिपोर्ट में मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को प्रस्तावित 0.40% से घटाकर 0.08% करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को चलाने और बेहतर बनाने के लिए बैंकों को MDR से मिलने वाली बड़ी हिस्सेदारी पर निर्भर रहने के बजाय अपने मौजूदा वित्तीय संसाधनों का उपयोग करना चाहिए।
यह सुझाव ऐसे समय आया है, जब चुनिंदा बड़े मर्चेंट UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का नया ढांचा चर्चा में है। रिपोर्ट में की गई सिफारिशें अपने आप लागू नहीं होतीं। इनके लागू होने के लिए संबंधित सरकारी और नियामकीय संस्थाओं का निर्णय जरूरी होगा।
UPI MDR क्या है और 0.40% से 0.08% करने का क्या मतलब है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो निर्धारित नियमों के तहत व्यापारी से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले लिया जाता है। यह ग्राहक द्वारा सीधे सरकार को दिया जाने वाला टैक्स नहीं है, बल्कि पेमेंट इकोसिस्टम में सेवाएं देने वाले संस्थानों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।
15 सितंबर 2026 को घोषित ढांचे के अनुसार, चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR का प्रावधान किया गया था। IIT बॉम्बे की रिपोर्ट इस दर को घटाकर 0.08% करने की सिफारिश करती है। यानी प्रस्तावित दर में 80% की कमी होगी।
| विवरण | दर |
|---|---|
| घोषित MDR ढांचे की दर | 0.40% |
| IIT बॉम्बे रिपोर्ट की सुझाई दर | 0.08% |
| कुल प्रस्तावित कमी | 80% |
उदाहरण: यदि किसी पात्र व्यापारी के ₹10,000 के लेनदेन पर केवल दर के आधार पर गणना की जाए, तो 0.40% के हिसाब से शुल्क ₹40 और 0.08% के हिसाब से ₹8 होगा। यह केवल दर समझाने के लिए उदाहरण है। वास्तविक शुल्क लेनदेन की श्रेणी, लागू नियमों, छूट और किसी निर्धारित सीमा पर निर्भर करेगा।
IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए गए हैं?
रिपोर्ट को IIT बॉम्बे के गणित विभाग के प्रोफेसर आशीष दास और RBI की पूर्व अधिकारी प्रज्ञा दास ने तैयार किया है। इसमें UPI पेमेंट इकोसिस्टम की लागत और शुल्क वितरण की व्यवस्था में बदलाव का सुझाव दिया गया है।
| मुद्दा | रिपोर्ट की सिफारिश |
|---|---|
| कुल MDR | 0.40% के बजाय 0.08% |
| थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स | 0.06% हिस्सेदारी |
| पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स | 0.02% हिस्सेदारी |
| बैंकों की MDR हिस्सेदारी | बैंकों को मिलने वाली बड़ी हिस्सेदारी समाप्त करने का सुझाव |
| डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर | बैंकों के संसाधनों से UPI व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर |
रिपोर्ट का तर्क है कि बैंकों को चालू और बचत खातों में जमा रकम से भी पर्याप्त लाभ मिलता है। इसलिए UPI जैसी आवश्यक डिजिटल भुगतान सेवा को चलाने और सुधारने के लिए बैंकों को अपनी भूमिका के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।
बैंकों की कमाई और CASA डिपॉजिट का क्या संबंध है?
CASA का मतलब Current Account और Savings Account है। इन खातों में जमा राशि पर बैंक आमतौर पर अपनी अन्य फंडिंग के मुकाबले कम ब्याज देते हैं। जमा राशि और उसके उपयोग से होने वाली कमाई के अंतर का बैंकिंग लाभ में योगदान होता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों ने CASA जमा से जुड़े नेट इंटरेस्ट मार्जिन के रूप में ₹4.85 लाख करोड़ से अधिक दर्ज किए। रिपोर्ट के लेखकों का तर्क है कि इस आर्थिक क्षमता का कुछ हिस्सा डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को चलाने और बेहतर बनाने में लगाया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि बैंक CASA जमाकर्ताओं को कम ब्याज देने से उत्पन्न लाभ का लगभग 3% UPI इकोसिस्टम के लिए अलग रख सकते हैं। रिपोर्ट में इसका अनुमान करीब ₹15,000 करोड़ बताया गया है। यह एक सुझाव है, लागू हो चुका सरकारी नियम नहीं।
क्या UPI MDR चार्ज लागू होने में देरी होगी?
घोषित ढांचे के अनुसार, चुनिंदा पात्र मर्चेंट लेनदेन पर MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली थी। हालांकि, 8 अक्टूबर के आसपास आई Reuters और अन्य मीडिया रिपोर्टों में त्योहारों के सीजन के बाद, संभावित रूप से 1 जनवरी 2027 तक, लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार किए जाने की जानकारी दी गई।
ऐसी रिपोर्टों का अर्थ यह नहीं है कि शुल्क निश्चित रूप से टल गया है। अंतिम निर्णय और प्रभावी तारीख की पुष्टि संबंधित आधिकारिक सूचना से ही की जानी चाहिए। IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में शुल्क कम करने की सिफारिश और लागू होने की तारीख को लेकर संभावित देरी दो अलग-अलग मुद्दे हैं।
क्या UPI पेमेंट करने वाले ग्राहकों को फीस देनी होगी?
प्रस्तावित MDR व्यवस्था व्यापारी पक्ष के शुल्क से संबंधित है। वित्त मंत्रालय की 15 सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और निर्धारित शून्य-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के भुगतान भी मुफ्त रहेंगे।
सरकारी जानकारी में कहा गया था कि लगभग 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस ढांचे से अप्रभावित रहेंगे। पात्र बड़े मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क लगने का मतलब यह नहीं कि हर ग्राहक से UPI इस्तेमाल करने के लिए सीधे फीस वसूली जाएगी। हालांकि, कारोबारियों की लागत और कीमतों पर संभावित अप्रत्यक्ष असर अलग विषय है।
इसलिए ग्राहक को किसी भी नई फीस के बारे में सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक नियमों की जांच करनी चाहिए।
किन UPI लेनदेन पर MDR लागू होने का प्रावधान है?
15 सितंबर 2026 को घोषित ढांचे में सभी UPI ट्रांजैक्शन पर एक जैसा शुल्क लगाने का प्रावधान नहीं था। इसमें पात्र मर्चेंट लेनदेन, छोटे व्यापारियों के लिए छूट और कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था का उल्लेख था।
- व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान (P2P): मुफ्त रखने का प्रावधान।
- ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान: MDR से मुक्त।
- पात्र बड़े मर्चेंट भुगतान: निर्धारित नियमों के अनुसार MDR लागू होने का प्रावधान।
- छोटे व्यापारियों की निर्धारित श्रेणी: शून्य-MDR व्यवस्था जारी रखने का प्रावधान।
किसी लेनदेन पर वास्तविक शुल्क लागू होगा या नहीं, यह उसकी श्रेणी और प्रभावी नियमों पर निर्भर करता है। रिपोर्ट में सुझाई गई 0.08% दर को वर्तमान में हर UPI भुगतान पर लागू दर नहीं समझना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. UPI MDR चार्ज 2026 में कितना प्रस्तावित है?
घोषित ढांचे में चुनिंदा पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए 0.40% MDR निर्धारित किया गया था। IIT बॉम्बे की रिपोर्ट इसे घटाकर 0.08% करने की सिफारिश करती है।
2. क्या 0.08% MDR लागू हो गया है?
रिपोर्ट में 0.08% की सिफारिश की गई है, लेकिन इसे लागू नियम मानने से पहले सरकार या संबंधित संस्था की आधिकारिक मंजूरी और अधिसूचना की पुष्टि जरूरी है।
3. क्या UPI से पैसे भेजने पर ग्राहक को फीस देनी होगी?
वित्त मंत्रालय की घोषित व्यवस्था के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI भुगतान मुफ्त रहेंगे। मर्चेंट भुगतान पर भी छूट और पात्रता के अलग नियम हैं।
4. IIT बॉम्बे की रिपोर्ट बैंकों के बारे में क्या कहती है?
रिपोर्ट में बैंकों को MDR से मिलने वाली बड़ी हिस्सेदारी समाप्त करने और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अपने संसाधनों का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है।
5. UPI MDR चार्ज लागू होने की तारीख क्या है?
घोषित कार्यक्रम में 15 अक्टूबर 2026 की तारीख थी। बाद की मीडिया रिपोर्टों में संभावित देरी की बात कही गई है। अंतिम प्रभावी तारीख की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही करें।
निष्कर्ष
UPI MDR चार्ज 2026 को लेकर IIT बॉम्बे की रिपोर्ट ने डिजिटल पेमेंट व्यवस्था में शुल्क घटाने और बैंकों की हिस्सेदारी की समीक्षा करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। 0.40% से 0.08% तक की प्रस्तावित कमी से पात्र मर्चेंट लेनदेन की लागत घट सकती है, लेकिन यह अभी रिपोर्ट की सिफारिश है, अपने आप लागू हो चुका नियम नहीं।
वहीं, शुल्क लागू होने में देरी की खबरों के बीच व्यापारियों और ग्राहकों को आधिकारिक फैसले का इंतजार करना चाहिए। UPI के सभी लेनदेन पर फीस लगने का दावा सही नहीं है, क्योंकि व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान और निर्धारित छूट वाली श्रेणियों को मुफ्त रखने का प्रावधान घोषित किया गया था।
डिस्क्लेमर: यह समाचार प्रकाशित रिपोर्टों और उपलब्ध सरकारी जानकारी पर आधारित है। IIT बॉम्बे की सिफारिश और सरकार द्वारा लागू किए गए नियम अलग हो सकते हैं। MDR की दर, छूट और प्रभावी तारीख में बदलाव संभव है। नवीनतम स्थिति के लिए वित्त मंत्रालय और NPCI की आधिकारिक घोषणाएं देखें।





























