CEC ज्ञानेश कुमार की अहम बैठक, SIR पर लिए गए बड़े फैसले; CJP ने भी उठाए सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 26 सितंबर 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी—के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। निर्वाचन सदन, नई दिल्ली में हुई इस बैठक के बाद चुनाव आयोग ने SIR, नोटिस पाने वाले मतदाताओं, BLO की भूमिका, Form-6, ECINet और दिल्ली-महाराष्ट्र की समयसीमा को लेकर कई फैसलों की जानकारी दी।
बैठक में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि 24 जून 2025 को जारी देशव्यापी SIR आदेश को सभी आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को बरकरार रखा था।
दूसरी ओर, Cockroach Janta Party (CJP) ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए हैं। CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की बैठक में क्या हुआ?
26 सितंबर को शाम 3 बजे निर्वाचन सदन में आयोग की बैठक हुई। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी मौजूद रहे।
यह बैठक ऐसे समय हुई जब SIR से जुड़े फैसलों और आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर सार्वजनिक बहस तेज थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।
ECI ने बैठक के बाद जारी स्पष्टीकरण में कहा कि अलग-अलग नोट या सुझाव आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और हाल के SIR संबंधी फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
SIR नोटिस पाने वाले मतदाताओं को बड़ी राहत
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला उन मतदाताओं से जुड़ा है जिन्हें SIR के दौरान unmapped या logical discrepancies के आधार पर नोटिस मिला है।
ECI के अनुसार अब ऐसे लोगों को सामान्य परिस्थितियों में ERO या AERO कार्यालय जाकर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी।
इसके बजाय BLO संबंधित मतदाता के घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके बाद ERO दस्तावेजों के आधार पर आगे निर्णय लेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उन मतदाताओं की परेशानी कम करना है जिन्हें दस्तावेज संबंधी सत्यापन के लिए चुनाव कार्यालय जाना पड़ सकता था।
जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था
ECI ने यह भी कहा है कि केवल अपवादात्मक परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की आवश्यकता होगी।
ऐसी स्थिति में सुनवाई को प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को मजबूत करने की बात भी कही है।
यदि मतदाता स्वयं सुनवाई में शामिल नहीं हो सकता, तो आयोग के अनुसार वह अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अधिकृत कर सकता है, जो आवश्यकता पड़ने पर उसकी ओर से सुनवाई में शामिल हो सके।
Form-6 को लेकर ECI ने क्या फैसला लिया?
बैठक में Form-6 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई।
ECI ने कहा कि SIR की अवधि के दौरान Form-6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं, जब SIR लागू नहीं होगा, तब Registration of Electors Rules, 1960 के अनुसार लागू Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि SIR के दौरान नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया में लागू घोषणा और सामान्य अवधि में लागू प्रक्रिया में अंतर हो सकता है।
आयोग ने यह भी कहा कि SIR पूरा होने के बाद छूटे हुए मतदाता और युवा या पहली बार वोट देने वाले लोग निरंतर अपडेटेशन की प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ECINet सिस्टम की समीक्षा का फैसला
SIR प्रक्रिया में ECINet की भूमिका को देखते हुए आयोग ने इसके तकनीकी और कानूनी अनुपालन की समीक्षा का भी फैसला लिया है।
ECI के अनुसार फील्ड अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकारों के अनुरूप role-based access दिया जाता है। अब ECINet की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई जाएगी।
इस समिति की अध्यक्षता एक Senior Deputy Election Commissioner करेंगे और इसमें IIT/IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। समिति यह जांच करेगी कि ECINet संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।
IT मॉड्यूल से जुड़े नए फैसलों पर भी निगरानी
ECI ने यह भी तय किया कि भविष्य में IT modules और portals से जुड़ी नई पहलों को सीधे लागू करने से पहले अधिकारियों की समिति में चर्चा की जाएगी।
आयोग के अनुसार किसी नई IT पहल को आयोग की मंजूरी से पहले Committee of Officers (COO) में विचार के लिए रखा जाएगा।
इस फैसले को चुनाव आयोग के IT सिस्टम में निर्णय प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा सकता है।
दिल्ली में SIR की समयसीमा बढ़ी
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध के बाद आयोग ने SIR से जुड़े दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है।
इसके अलावा नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम समयसीमा 30 नवंबर 2026 कर दी गई है।
इससे दिल्ली के उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा जिन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपने नाम या विवरण से संबंधित आपत्ति दर्ज करनी है।
महाराष्ट्र में भी बढ़ी SIR की समयसीमा
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर वहां भी समयसीमा बढ़ाई गई है।
अब महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 होगी। वहीं नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
महाराष्ट्र में यह विस्तार ऐसे समय हुआ है जब unmapped या logical discrepancies के आधार पर नोटिस जारी किए गए मतदाताओं की प्रक्रिया चल रही है।
गरीब, बेघर और मजदूरों के लिए विशेष कैंप
आयोग ने SIR प्रक्रिया में ऐसे लोगों तक पहुंच बनाने के लिए भी निर्देश दिए हैं जो सामान्य चुनाव कार्यालयों तक आसानी से नहीं पहुंच सकते।
District Election Officers को रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए आवश्यकता के अनुसार हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका उद्देश्य ऐसे पात्र लोगों को मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संबंधित प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा देना है।
गोवा में BLO करेंगे घर-घर जाकर संपर्क
ECI ने गोवा की स्थिति का भी उल्लेख किया।
आयोग के अनुसार वहां छूटे हुए मतदाताओं के फॉर्म एकत्र करने के लिए BLO को घर-घर जाने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने बताया कि 97 ऐसे मतदाताओं में से 81 पहले ही Form-6 भर चुके हैं।
यह व्यवस्था यह दिखाती है कि SIR से संबंधित प्रक्रिया में कुछ मामलों में फील्ड स्तर पर घर-घर संपर्क को भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
CJP ने ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या सवाल उठाए?
SIR विवाद के बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
CJP ने 24 सितंबर को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम देने की बात कही थी। संगठन ने कहा था कि यदि CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
CJP ने SIR में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए।
इन दावों को CJP के आरोप और राजनीतिक मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए। ECI ने दूसरी ओर SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।
CJP ने ECINet और चुनावी डेटा को लेकर क्या कहा?
CJP की ओर से उठाए गए प्रमुख सवालों में चुनावी डेटा के centralisation और उसके access से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
संगठन ने कहा कि यदि चुनावी सूची में नाम जोड़ने, हटाने या डेटा तक पहुंच से संबंधित बड़े बदलाव किए जा रहे हैं तो उनकी निर्णय प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। CJP ने संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और स्वतंत्र जांच की मांग भी रखी।
हालांकि, ECI ने अपने 26 सितंबर के स्पष्टीकरण में कहा कि फील्ड अधिकारियों को ECINet पर उनके वैधानिक अधिकारों के अनुरूप role-based access दिया जाता है और अब स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ की भागीदारी वाली समिति से इसकी समीक्षा कराई जाएगी।
ECI ने आंतरिक मतभेदों पर क्या कहा?
पिछले दिनों कुछ रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों के बीच SIR और IT से जुड़े विषयों पर मतभेद की चर्चा हुई थी।
ECI ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट में कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या IT Division की नीति से संबंधित नहीं था। आयोग के अनुसार यह ECI में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी work redistribution orders को दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया और IT Division पर Deputy Election Commissioner की निगरानी कभी वापस नहीं ली गई।
SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए: ECI
ECI ने अपने स्पष्टीकरण में विशेष रूप से कहा कि 24 जून 2025 का SIR आदेश पूरे आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था।
आयोग के अनुसार इसके बाद 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी किए गए SIR schedules को भी आयोग की सर्वसम्मति प्राप्त थी।
ECI ने यह भी कहा कि SIR से संबंधित 24 जून 2025 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में बरकरार रखा था।
20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा होने का दावा
आयोग ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है।
ECI के मुताबिक जिन लोगों के नाम SIR के दौरान या उसके बाद छूट गए हैं, वे निरंतर अपडेटेशन की प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हैं।
आयोग ने CEO, DEO और ERO को ऐसे मतदाताओं के नामांकन के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
चुनाव आयोग की बैठकों में भी बदलाव
26 सितंबर की बैठक में सिर्फ SIR से संबंधित फैसले ही नहीं हुए। आयोग ने अपने आंतरिक कामकाज को लेकर भी कुछ निर्देश जारी किए।
अब आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले से circulate किया जाएगा और बैठकों के minutes जारी किए जाएंगे। अधिकारियों की APAR यानी Annual Performance Appraisal Reports को हर साल 31 दिसंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की पूर्व अनुमति जरूरी होगी और Commissioners द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
ज्ञानेश कुमार SIR बैठक में सबसे बड़े फैसले एक नजर में
26 सितंबर की बैठक के प्रमुख फैसलों को संक्षेप में इस तरह समझा जा सकता है—
- SIR नोटिस पाने वाले unmapped और logical discrepancy वाले मतदाताओं के घर BLO जाएंगे।
- BLO दस्तावेज लेकर उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे।
- सामान्य मामलों में ERO/AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत नहीं होगी।
- विशेष मामलों में ऑनलाइन सुनवाई की जा सकेगी।
- जरूरत पड़ने पर परिवार का वयस्क सदस्य मतदाता की ओर से सुनवाई में शामिल हो सकेगा।
- ECINet की स्वतंत्र तकनीकी और कानूनी समीक्षा होगी।
- दिल्ली में दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और निपटारे की तारीख 30 नवंबर होगी।
- महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर और निपटारे की तारीख 10 नवंबर होगी।
- गरीब, मजदूर, बेघर और रैन बसेरों में रहने वालों के लिए विशेष कैंप/हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे।
- आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले जारी होगा और minutes तैयार किए जाएंगे।
ज्ञानेश कुमार SIR बैठक पर अंतिम बात
26 सितंबर 2026 की बैठक SIR को लेकर चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण रही। बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त मौजूद रहे और आयोग ने SIR प्रक्रिया में मतदाताओं की सुविधा, ECINet की समीक्षा और दिल्ली-महाराष्ट्र की समयसीमा समेत कई फैसलों की घोषणा की।
विशेष रूप से unmapped और logical discrepancy के कारण नोटिस पाने वाले मतदाताओं के घर BLO द्वारा दस्तावेज लेने की व्यवस्था महत्वपूर्ण बदलाव है। वहीं ECINet की समीक्षा के लिए IIT/IIIT विशेषज्ञ को शामिल करने वाली समिति बनाने का निर्णय तकनीकी व्यवस्था से जुड़े सवालों के संदर्भ में उल्लेखनीय है।
दूसरी ओर, CJP ने SIR, चुनावी डेटा और CEC की भूमिका को लेकर अलग-अलग सवाल और मांगें उठाई हैं तथा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। ये CJP की राजनीतिक मांगें हैं, जबकि ECI ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में SIR संबंधी फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। दोनों पक्षों की स्थितियों को अलग-अलग समझना इस पूरे विवाद को समझने के लिए जरूरी है।
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ज्ञानेश कुमार SIR बैठक से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
SIR बैठक में ज्ञानेश कुमार के साथ कौन-कौन शामिल थे?
26 सितंबर 2026 की बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हुए थे।
SIR नोटिस पाने वालों के लिए नया फैसला क्या है?
Unmapped या logical discrepancies के कारण नोटिस पाने वाले मतदाताओं के घर BLO जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। सामान्य तौर पर उन्हें ERO/AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
क्या SIR नोटिस पर ऑनलाइन सुनवाई होगी?
केवल अपवादात्मक परिस्थितियों में सुनवाई की आवश्यकता होगी और ऐसी सुनवाई को प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा।
दिल्ली में SIR की नई अंतिम तारीख क्या है?
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 और इनके निपटारे की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 है।
महाराष्ट्र में SIR की अंतिम तारीख क्या है?
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और इनके निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 है।
ECINet की समीक्षा क्यों होगी?
ECI ने ECINet के कानून और नियमों के अनुरूप काम करने की दोबारा जांच के लिए Senior Deputy Election Commissioner की अध्यक्षता में समिति बनाने का फैसला किया है। इसमें IIT/IIIT का स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा।
CJP ने ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या मांग की है?
CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। संगठन ने SIR से संबंधित डेटा और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
क्या ECI ने SIR के फैसलों में मतभेद स्वीकार किया है?
ECI ने कहा है कि अलग-अलग नोट या सुझाव आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े प्रमुख निर्णय आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने SIR को मंजूरी दी है?
ECI के 26 सितंबर के आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार 24 जून 2025 के SIR आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में बरकरार रखा था।
क्या छूटे हुए युवा या पहली बार वोटर नाम जुड़वा सकते हैं?
ECI ने कहा है कि SIR के दौरान या उसके बाद छूटे हुए व्यक्ति, जिनमें युवा और पहली बार वोटर भी शामिल हैं, निरंतर अपडेटेशन की प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ज्ञानेश कुमार SIR बैठक से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचना
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