ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज, CEC को हटाने की क्या है प्रक्रिया?
ज्ञानेश कुमार इस्तीफा मांग को लेकर राजनीतिक विवाद 25 सितंबर 2026 को और तेज हो गया है। Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर कांग्रेस ने देशभर में विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा है। विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग की जा रही है। इसी बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को संवैधानिक रूप से पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में The Indian Express की एक रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ निर्णयों पर कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन रिपोर्टों के अलग-अलग पहलुओं को खारिज करते हुए कहा कि SIR सहित आयोग के फैसले सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए थे।
इस राजनीतिक विवाद से अलग, CEC को हटाने के लिए संविधान में बेहद कठिन प्रक्रिया निर्धारित है। अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है।
SIR को लेकर क्या है मौजूदा विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। हाल के दिनों में इसे लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हुई है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने से जुड़े सवाल उठे हैं और उन्होंने CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस ने 25 सितंबर को अपने राज्य इकाइयों और जिला कांग्रेस समितियों को संबंधित चुनाव कार्यालयों तक विरोध मार्च आयोजित करने के निर्देश दिए थे।
वहीं निर्वाचन आयोग के सूत्रों का कहना है कि आयोग के फैसले सामूहिक रूप से लिए गए और SIR से जुड़े फैसलों में सभी तीन सदस्यों की सहमति थी। इसलिए रिपोर्टों में सामने आए कथित मतभेदों और आयोग के आधिकारिक निर्णयों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों उठ रही है?
विपक्षी दलों ने SIR और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव KC Venugopal ने उनके तत्काल हटाए जाने की मांग की है। अन्य विपक्षी नेताओं ने भी कथित आंतरिक आपत्तियों का हवाला देते हुए CEC से इस्तीफा देने को कहा है।
इन नेताओं के आरोपों में निर्वाचन आयोग के कामकाज, SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। हालांकि इन राजनीतिक आरोपों को अभी आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी संवैधानिक पदाधिकारी को पद से हटाने के लिए केवल राजनीतिक मांग पर्याप्त नहीं होती, बल्कि संविधान में निर्धारित प्रक्रिया और आधार पूरे करने होते हैं।
CEC को हटाने का आधार क्या है?
यह सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल है।
अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 124(4) में दो आधार निर्धारित हैं:
- सिद्ध कदाचार (proved misbehaviour)
- अक्षमता (incapacity)
सिर्फ किसी राजनीतिक दल की ओर से इस्तीफे की मांग, किसी नीति पर असहमति या सार्वजनिक विरोध अपने आप में CEC को हटाने का संवैधानिक आधार नहीं बन जाता। हटाने की प्रक्रिया में आरोपों की जांच और उनका सिद्ध होना महत्वपूर्ण चरण है।
CEC को हटाने की प्रक्रिया कैसे शुरू होती है?
CEC को हटाने की प्रक्रिया संसद से जुड़ी है। यह सामान्य सरकारी आदेश या केवल राष्ट्रपति के प्रशासनिक निर्णय से पूरी नहीं होती।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के अनुरूप CEC के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है। Judges (Inquiry) Act, 1968 में इस तरह की प्रक्रिया के लिए आवश्यक चरण निर्धारित हैं।
सरल भाषा में पूरी प्रक्रिया को कई चरणों में समझा जा सकता है।
पहला चरण: सांसदों के समर्थन के साथ नोटिस
लोकसभा में प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
इसके बाद प्रस्ताव संबंधित सदन के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के समक्ष जाता है। वह नोटिस को स्वीकार या अस्वीकार करने पर निर्णय ले सकते हैं।
यही कारण है कि किसी राजनीतिक दल द्वारा CEC के इस्तीफे की मांग और वास्तविक संवैधानिक removal process में काफी अंतर है।
दूसरा चरण: प्रस्ताव स्वीकार होने पर जांच समिति
यदि प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाती है।
Judges (Inquiry) Act के तहत समिति में सामान्यतः शामिल होते हैं:
- सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश,
- किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश,
- एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता।
समिति आरोपों और उपलब्ध सामग्री की जांच करती है तथा संबंधित पदाधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है।
तीसरा चरण: जांच रिपोर्ट
जांच समिति का काम यह देखना होता है कि लगाए गए आरोपों में कदाचार या अक्षमता सिद्ध होती है या नहीं।
अगर समिति को कदाचार या अक्षमता सिद्ध नहीं मिलती, तो आगे removal motion की प्रक्रिया उस आधार पर आगे नहीं बढ़ती।
अगर समिति आरोपों को सिद्ध मानती है, तो उसकी रिपोर्ट संबंधित सदन में आगे की संसदीय प्रक्रिया के लिए जाती है। Judges (Inquiry) Act की धारा 6 इसी चरण को नियंत्रित करती है।
चौथा चरण: दोनों सदनों में विशेष बहुमत
जांच समिति द्वारा आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद भी CEC तुरंत पद से नहीं हटता।
प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित होना जरूरी है।
संविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार दोनों सदनों में प्रस्ताव के समर्थन में:
- सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत, और
- उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई बहुमत
दोनों शर्तें पूरी होनी चाहिए।
यानी केवल साधारण बहुमत से CEC को हटाया नहीं जा सकता।
पांचवां चरण: राष्ट्रपति का आदेश
यदि दोनों सदन संवैधानिक विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर देते हैं, तो दोनों सदनों का address राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया जाता है।
इसके बाद राष्ट्रपति आदेश जारी करके संबंधित पदाधिकारी को पद से हटाते हैं। CEC के मामले में यही वह अंतिम संवैधानिक चरण है जिसके बाद removal प्रभावी होता है।
क्या प्रधानमंत्री CEC को सीधे हटा सकते हैं?
नहीं। CEC को सामान्य सरकारी कर्मचारी की तरह सरकार सीधे बर्खास्त नहीं कर सकती।
संविधान ने CEC के पद को विशेष सुरक्षा दी है। Article 324(5) का उद्देश्य चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को राजनीतिक या कार्यपालिका के मनमाने हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सुरक्षा को निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है।
इसलिए CEC को हटाने के लिए संसद और राष्ट्रपति से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।
क्या CEC खुद इस्तीफा दे सकते हैं?
हां। इस्तीफा और removal दो अलग प्रक्रियाएं हैं।
CEC का कार्यकाल सामान्य रूप से छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, निर्धारित है। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट भी बताती है कि CEC को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी प्रक्रिया लागू होती है।
अगर CEC स्वयं पद छोड़ने का निर्णय लेते हैं, तो वह संवैधानिक removal motion से अलग स्वैच्छिक इस्तीफे की स्थिति होगी।
इसलिए विपक्ष की ओर से “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें” की मांग और उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हटाने का प्रयास एक ही बात नहीं है।
क्या अभी ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दिया गया है?
25 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ऐसा नहीं हुआ है। मौजूदा स्थिति में विपक्षी दल उनके इस्तीफे और removal की मांग कर रहे हैं तथा नए removal motion की तैयारी की खबरें सामने आई हैं।
इसलिए जब तक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती या स्वयं CEC इस्तीफा नहीं देते, उन्हें पद से हटाया हुआ बताना सही नहीं होगा।
क्या संसद में नया removal motion लाया जा रहा है?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार विपक्षी दल CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया removal motion लाने के लिए सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। The Indian Express ने 24-25 सितंबर की रिपोर्टों में दोनों सदनों में नोटिस देने की विपक्षी योजना की जानकारी दी है।
यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि motion की तैयारी या notice देना removal होने के बराबर नहीं है। प्रस्ताव को पहले स्वीकार किया जाना, फिर जांच, उसके बाद दोनों सदनों में आवश्यक विशेष बहुमत और अंत में राष्ट्रपति का आदेश—पूरी प्रक्रिया के बाद ही removal संभव होगा।
पहले भी CEC को हटाने की मांग हो चुकी है
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ removal की मांग पहली बार नहीं उठी है। 2026 में इससे पहले भी विपक्षी सांसदों की ओर से removal notices दिए जाने की रिपोर्टें सामने आई थीं। कुछ प्रस्तावों को संबंधित पीठासीन अधिकारियों द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था।
मौजूदा विवाद में फिर से सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने और दोनों सदनों में motion लाने की बात सामने आई है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि removal process में केवल राजनीतिक समर्थन पर्याप्त नहीं है; निर्धारित संसदीय और संवैधानिक चरणों से गुजरना आवश्यक है।
CEC और अन्य Election Commissioners में क्या अंतर है?
यहां एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अंतर है।
Chief Election Commissioner को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी प्रक्रिया के अलावा हटाया नहीं जा सकता। दूसरी ओर अन्य Election Commissioners को Article 324(5) के अनुसार CEC की सिफारिश के बिना हटाया नहीं जा सकता।
इसलिए CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की removal protection बिल्कुल समान नहीं है।
SIR विवाद में Election Commission का क्या कहना है?
विपक्षी दलों ने SIR से संबंधित प्रक्रियाओं और कथित आंतरिक मतभेदों को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि आयोग के फैसले, जिनमें SIR से जुड़े निर्णय भी शामिल हैं, सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए।
इसलिए इस विवाद में दो अलग पहलू हैं—एक ओर विपक्ष के आरोप और राजनीतिक मांगें हैं, दूसरी ओर आयोग का आधिकारिक पक्ष है। किसी आरोप को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के लिए सक्षम जांच या आधिकारिक निष्कर्ष जरूरी होगा।
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कांग्रेस के देशव्यापी प्रदर्शन में क्या मुद्दा है?
कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में विरोध मार्च का आह्वान किया। पार्टी की राज्य इकाइयों और जिला कांग्रेस समितियों को संबंधित चुनाव कार्यालयों तक मार्च आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। पार्टी ने CEC के इस्तीफे/हटाने और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।
यह राजनीतिक विरोध है। इसका अपने आप में CEC के संवैधानिक पद से removal पर कोई कानूनी प्रभाव नहीं पड़ता।
CEC हटाने की प्रक्रिया एक नजर में
| चरण | क्या होता है? |
|---|---|
| 1 | लोकसभा में कम से कम 100 या राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस |
| 2 | लोकसभा अध्यक्ष/राज्यसभा सभापति नोटिस स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं |
| 3 | स्वीकार होने पर तीन सदस्यीय जांच समिति |
| 4 | समिति आरोपों की जांच करती है |
| 5 | कदाचार/अक्षमता सिद्ध होने पर रिपोर्ट आगे बढ़ती है |
| 6 | लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव पर मतदान |
| 7 | दोनों सदनों में कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वालों का कम से कम 2/3 समर्थन |
| 8 | दोनों सदनों के address के बाद राष्ट्रपति removal order जारी करते हैं |
यह प्रक्रिया Article 324(5), Article 124(4) और Judges (Inquiry) Act, 1968 से जुड़ी है।
FAQ: ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग क्यों हो रही है?
विपक्षी दल SIR और मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं और उनके इस्तीफे या removal की मांग कर रहे हैं। इन आरोपों के जवाब में निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि आयोग के फैसले सामूहिक सहमति से लिए गए।
FAQ: क्या CEC को प्रधानमंत्री सीधे हटा सकते हैं?
नहीं। CEC को हटाने के लिए Article 324(5) के तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी removal प्रक्रिया लागू होती है। इसमें संसद के दोनों सदनों की संवैधानिक प्रक्रिया और अंत में राष्ट्रपति का आदेश शामिल है।
FAQ: CEC को हटाने के लिए कितने सांसदों के हस्ताक्षर चाहिए?
नोटिस शुरू करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसद या राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं। यह केवल प्रक्रिया शुरू करने की शर्त है; इससे CEC अपने आप पद से नहीं हटते।
FAQ: CEC को हटाने का संवैधानिक आधार क्या है?
CEC को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया से हटाया जा सकता है।
FAQ: क्या CEC को हटाने के लिए दोनों सदनों में बहुमत जरूरी है?
हां। दोनों सदनों में प्रस्ताव को कुल सदस्यता के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।
FAQ: CEC को हटाने का अंतिम आदेश कौन जारी करता है?
दोनों सदनों द्वारा निर्धारित संवैधानिक बहुमत से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति removal order जारी करते हैं।
FAQ: क्या इस्तीफा और CEC को हटाना एक ही बात है?
नहीं। इस्तीफा पदाधिकारी का स्वैच्छिक कदम है, जबकि removal संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संसद और राष्ट्रपति से जुड़ा औपचारिक कदम है।
FAQ: क्या अभी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो गया है?
25 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने की पुष्टि नहीं है। इस समय उनके इस्तीफे और removal की राजनीतिक मांगें तथा नए motion की तैयारी की खबरें सामने आई हैं।
FAQ: SIR को लेकर Election Commission का क्या पक्ष है?
निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि SIR सहित आयोग के फैसले सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए। वहीं विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया और कथित आंतरिक आपत्तियों को लेकर सवाल उठाए हैं।
ज्ञानेश कुमार इस्तीफा विवाद पर अंतिम बात
ज्ञानेश कुमार इस्तीफा मांग को लेकर राजनीतिक विवाद फिलहाल जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर CEC के खिलाफ प्रदर्शन और removal motion की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने आयोग के निर्णयों में सभी सदस्यों की सहमति होने की बात कही है।
कानूनी रूप से किसी CEC को केवल राजनीतिक मांग के आधार पर पद से नहीं हटाया जा सकता। Article 324(5) उसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी removal protection देता है। प्रस्ताव, आवश्यक सांसदों के समर्थन, प्रारंभिक स्वीकृति, तीन सदस्यीय जांच समिति, दोनों सदनों में संवैधानिक विशेष बहुमत और अंत में राष्ट्रपति के आदेश की पूरी प्रक्रिया के बाद ही CEC को पद से हटाया जा सकता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। परिस्थितियों या आधिकारिक निर्णयों में बदलाव होने पर जानकारी बदल सकती है। पाठकों को किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित विभाग या आधिकारिक स्रोत से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।





























