Cyber Fraud पर सरकार का शिकंजा: 3718 ऐप्स बंद, 15.75 लाख SIM और 5.77 लाख IMEI ब्लॉक
गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा जब पलक झपकते ही किसी अज्ञात साइबर ठग के डिजिटल वॉलेट में गायब हो जाता है, तो वह केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि पीड़ित और उसके पूरे परिवार के लिए एक कभी न भूलने वाला गहरा मानसिक आघात बन जाता है। देश भर में फैलते डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर ठगी, फर्जी लोन ऐप्स और केवाईसी (KYC) अपडेट के नाम पर आम नागरिकों को शिकार बना रहे साइबर अपराधियों पर भारत सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और चौतरफा डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक की है।
ताजा Cyber Fraud News India अपडेट के अनुसार, गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन कार्य कर रहे ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) और दूरसंचार विभाग (DoT) ने मिलकर एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत 3,718 अवैध मोबाइल ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर व अन्य प्लेटफॉर्म्स से हटवा दिया है। इसके साथ ही, ठगी के जाल में इस्तेमाल किए जा रहे 15.75 लाख फर्जी सिम कार्ड (SIM Cards) को हमेशा के लिए निष्क्रिय कर दिया गया है और अपराधियों के 5.77 लाख मोबाइल सेट (IMEI Numbers) को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। Bharati Fast News की इस विशेष इंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में जानिए कि केंद्र सरकार ने यह निर्णायक कार्रवाई कैसे की, साइबर ठगों का नया नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और भविष्य में अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
ऐतिहासिक प्रशासनिक कार्रवाई: केंद्र सरकार ने देश भर में साइबर अपराध को अंजाम देने वाले डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कड़ा प्रहार किया है।
3,718 अवैध ऐप्स बैन: गूगल प्ले स्टोर और थर्ड-पार्टी एपीके फाइलों के जरिए फर्जी लोन, सट्टेबाजी और पार्ट-टाइम जॉब ऑफर करने वाले 3,718 ऐप्स को ब्लॉक किया गया।
15.75 लाख सिम कार्ड रद्द: फर्जी पहचान पत्रों (Fake IDs) और बल्क में हासिल किए गए 15 लाख 75 हजार से अधिक मोबाइल सिम कार्ड्स को तुरंत प्रभाव से बंद किया गया।
5.77 लाख IMEI नंबर ब्लॉक: संचार साथी पोर्टल और CEIR टेक्नोलॉजी का उपयोग करके साइबर ठगी में प्रयुक्त 5 लाख 77 हजार से अधिक मोबाइल हैंडसेट्स के IMEI नंबरों को हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया गया।
संदेहास्पद बैंक खातों पर फ्रीज: वित्तीय धोखाधड़ी के नेटवर्क में प्रयुक्त हजारों ‘म्यूल बैंक खातों’ (Mule Accounts) के लेन-देन पर रोक लगा दी गई है।
हेल्पलाइन 1930 का विस्तार: साइबर हेल्पलाइन 1930 और ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ (NCRP) के रिस्पॉन्स टाइम को और अधिक तेज कर दिया गया है।
नवीनतम अपडेट (Latest Update)
गृह मंत्रालय के सीनियर साइबर सुरक्षा अधिकारियों और दूरसंचार विभाग के समन्वय से जारी इस व्यापक आंकड़े ने देश भर के साइबर सिंडिकेट्स में हड़कंप मचा दिया है। आधिकारिक अपडेट के अनुसार, यह कार्रवाई केवल भारत के भीतर ही नहीं, बल्कि म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से भारत में चलाए जा रहे ‘डिजिटल स्लेवरी साइबर क्राइम सिंडिकेट्स’ के खिलाफ भी केंद्रित है।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर एक ऑटोमेटेड सिस्टम तैयार किया है। इस प्रणाली के तहत यदि कोई सिम या मोबाइल हैंडसेट किसी भी स्थान पर साइबर फ्रॉड में शामिल पाया जाता है, तो उसे रियल-टाइम में पूरे भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क से बेदखल कर दिया जाता है।
पृष्ठभूमि और बैकग्राउंड स्टोरी (Background Story)
विगत कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल पेमेंट्स (UPI), ऑनलाइन बैंकिंग और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों में भी चिंताजनक बदलाव आया है। पहले जहां केवल सिंपल ओटीपी (OTP) शेयरिंग या बैंक अधिकारी बनकर फोन करने के जरिए ठगी होती थी, वहीं हाल के दिनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ (जिसमें सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स या पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर लोगों को बंधक जैसी स्थिति में डराया जाता है) जैसे नए अपराधों ने तेजी पकड़ी।
आवेदकों को लोन का लालच देने वाले चाइनीज लोन ऐप्स, वर्क-फ्रॉम-होम टेलीग्राम फ्रॉड और शेयर मार्केट में फर्जी ट्रेनिंग देकर पैसे ऐंठने वाले सिंडिकेट्स ने आम नागरिकों की अरबों रुपये की संपत्ति लूट ली थी। इस राष्ट्रीय सुरक्षा व नागरिक हित के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्रालय ने आई4सी (I4C) को एक एकीकृत रणनीति बनाकर इन साइबर गैंग्स के डिजिटल टूल्स पर सीधा वार करने के कड़े निर्देश दिए थे।
क्या हुआ और सरकार ने यह तंत्र कैसे ध्वस्त किया?
इस महा-कार्रवाई के पीछे सरकार की तकनीकी रणनीति और अंतर-विभागीय तालमेल की मुख्य प्रक्रिया इस प्रकार रही:
AI-बेस्ड एनालिटिक्स और ASTRO तकनीक: दूरसंचार विभाग ने फेशियल रिकग्निशन और एआई-आधारित एनालिसिस टूल्स का उपयोग करके ऐसे सिम कार्ड्स की पहचान की, जो फर्जी फोटो या एक ही व्यक्ति के नाम पर सैकड़ों की संख्या में जारी कराए गए थे।
CEIR (सेंचुरियन इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर): ब्लॉक किए गए 5.77 लाख IMEI नंबरों को भारत के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) सिस्टम में दर्ज कर दिया गया है। इसके बाद अगर इन मोबाइलों में कोई नया सिम कार्ड भी डाला जाता है, तो वह हैंडसेट नेटवर्क से कनेक्ट ही नहीं होगा।
अवैध ऐप्स पर सर्जिकल स्ट्राइक: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की सिफारिशों पर ऐसे ऐप्स को हटा दिया गया जो बिना बैंकिंग लाइसेंस के काम कर रहे थे या उपयोगकर्ताओं का पर्सनल डेटा चुराकर ब्लैकमेल कर रहे थे।
Important Note: यदि आपका फोन गुम या चोरी हो जाता है या आपको अपने नाम पर जारी फर्जी सिम का अंदेशा है, तो आप सरकार के आधिकारिक ‘संचार साथी’ पोर्टल (
sancharsaathi.gov.in) पर जाकर बिना किसी शुल्क के अपने खोए हुए मोबाइल को ब्लॉक कर सकते हैं और फर्जी सिम की रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।
विशेषज्ञ विश्लेषण (Expert Analysis)
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, पूर्व पुलिस अधिकारियों और आईटी कानून के जानकारों का इस बड़ी कार्रवाई पर क्या नजरिया है, आइए जानते हैं:
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ आईटी एडवोकेट प्रशांत माली का विश्लेषण:
“सरकार का 3,718 ऐप्स, 15.75 लाख सिम और 5.77 लाख IMEI ब्लॉक करने का यह कदम Cyber Fraud News India के परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण वाटरशेड मोमेंट है। अब तक हम अपराधियों को पकड़ने के पीछे भाग रहे थे, लेकिन इस बार सरकार ने उनके मूल हथियारों—यानी फर्जी सिम, अवैध ऐप्स और मोबाइलों—पर ही प्रहार किया है। जब तक अपराधियों के लिए फर्जी सिम और हैंडसेट हासिल करना मुश्किल नहीं होगा, तब तक अपराध पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती। यह नेटवर्क को तोड़ने का सबसे कारगर तरीका है।”
साइबर फॉरेंसिक विश्लेषक डॉ. अनिरुद्ध वर्मा का मंतव्य:
“ब्लॉकिंग प्रक्रिया सराहनीय है, लेकिन साइबर क्रिमिनल्स लगातार तकनीक बदलते हैं। अब वे वर्चुअल नंबर्स (VoIP) और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का सहारा ले रहे हैं। इसलिए, तकनीक के साथ-साथ बैंकों में खुलने वाले ‘म्यूल अकाउंट्स’ (किराए के बैंक खाते) पर बैंकों का सख्त केवाईसी नियंत्रण होना सबसे ज्यादा जरूरी है।”
आधिकारिक आंकड़े और कार्रवाई की सारणी
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक कार्रवाई का विवरण नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है:
| मद / डिजिटल टूल | ब्लॉक / कार्रवाई का आंकड़ा | कार्रवाई करने वाली मुख्य एजेंसी |
| ब्लॉक किए गए अवैध ऐप्स | 3,718 ऐप्स | गृह मंत्रालय (I4C), MeitY, Google |
| रद्द किए गए शंकास्पद SIM | 15.75 लाख सिम कार्ड | दूरसंचार विभाग (DoT) व टेलीकॉम कंपनियां |
| ब्लॉक किए गए IMEI नंबर | 5.77 लाख मोबाइल सेट | CEIR (संचार साथी पोर्टल) |
| फ्रीज किए गए बैंक खाते | कई हजार म्यूल अकाउंट्स | इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) |
| राष्ट्रीय हेल्पलाइन | 1930 | राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) |
महत्वपूर्ण घटनाक्रम और कार्रवाई की समय सारणी
साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर ब्लॉकिंग से जुड़े मुख्य घटनाक्रमों की समय-सारणी इस प्रकार है:
| समयावधि / चरण | प्रशासनिक कदम और तकनीकी विकास |
| प्रथम चरण | संचार साथी पोर्टल का शुभारंभ और पैन-इंडिया CEIR सिस्टम का एकीकरण |
| द्वितीय चरण | एआई-आधारित विश्लेषण द्वारा बल्क और फर्जी सिम कार्डों की पहचान |
| हालिया कार्रवाई | 3,718 ऐप्स, 15.75 लाख सिम और 5.77 लाख IMEI का पूर्ण ब्लॉकडाउन |
| आगामी रणनीति | अंतर्राष्ट्रीय कॉल धोखाधड़ी (VoIP Spoofing) को रोकने के लिए नए फायरवॉल की तैनाती |
आम नागरिकों और डिजिटल उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव
सरकार के इस कड़े फैसले का आम नागरिकों के दैनिक डिजिटल जीवन पर व्यापक और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा:
फर्जी कॉल्स और स्पैम संदेशों में कमी: 15.75 लाख फर्जी सिम के बंद होने से आम लोगों को आने वाले फर्जी लॉटरी, केवाईसी अपडेट और बैंक अधिकारी बनकर किए जाने वाले स्पैम कॉल्स में भारी कमी आएगी।
डिजिटल लेनदेन में सुरक्षा का अहसास: यूपीआई और ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करने वाले नागरिकों के भीतर सुरक्षा और भरोसे की भावना मजबूत होगी।
जागरूकता में वृद्धि: सरकार के इस बड़े अभियान से गांव-देहात के लोग भी साइबर ठगी के प्रति अधिक जागरूक और सतर्क हो रहे हैं।
भविष्य का प्रभाव (Future Impact)
Cyber Fraud News India के इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बाद भविष्य में भारत के डिजिटल सुरक्षा तंत्र में निम्नलिखित बड़े सुधार देखने को मिलेंगे:
सख्त बायोमेट्रिक सिम वेरिफिकेशन: टेलीकॉम कंपनियों के सिम वेंडर्स (डीलो) के लिए केवाईसी नियम और अधिक कड़े किए जाएंगे। गलत दस्तावेजों पर सिम बेचने वाले एजेंटों पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज होंगे।
बैंकों में एआई-आधारित मॉनिटरिंग: संदिग्ध खातों (Mule Accounts) में अचानक होने वाले बड़े लेन-देन को रोकने के लिए रिजर्व बैंक की नई एआई-गाइडलाइंस लागू होंगी।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार समन्वय: भारत सरकार पड़ोसी देशों के साथ मिलकर साइबर क्राइम हब बन चुके विदेशी ठिकानों पर कूटनीतिक और पुलिस दबाव बढ़ाएगी।
आम नागरिकों को अब क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
भले ही सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है, लेकिन आपकी व्यक्तिगत सतर्कता ही सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है। साइबर ठगी से बचने के लिए इन 5 गोल्डन रूल्स का हमेशा पालन करें:
‘डिजिटल अरेस्ट’ से न डरें: याद रखें कि कोई भी पुलिस, सीबीआई, कस्टम या ईडी अधिकारी कभी भी व्हाट्सएप या कॉलिंग पर वीडियो कॉल करके किसी को अरेस्ट नहीं करता। ऐसा कॉल आते ही तुरंत डिस्कनेक्ट करें और 1930 पर रिपोर्ट करें।
अनजान एपीके (APK) फाइल्स डाउनलोड न करें: किसी भी व्यक्ति या टेलीग्राम ग्रुप के कहने पर व्हाट्सएप या लिंक से कोई ऐप इंस्टॉल न करें। केवल Google Play Store या Apple App Store से ही वेरिफाइड ऐप्स डाउनलोड करें।
ओटीपी और पिन कभी न शेयर करें: अपने बैंक अकाउंट का यूपीआई पिन (UPI PIN) केवल पैसे भेजने के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए कभी पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती।
संचार साथी पोर्टल पर अपनी आईडी चेक करें:
sancharsaathi.gov.inपर जाकर ‘Know Your Mobile Connections’ टैब में जांचें कि आपके नाम पर कोई ऐसा सिम तो नहीं चल रहा जिसकी आपको जानकारी नहीं है।गोल्डन आवर का लाभ उठाएं: यदि दुर्भाग्यवश आपके साथ कोई वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो बिना समय गंवाए शुरुआती 1 घंटे (Golden Hour) के भीतर 1930 डायल करें या
cybercrime.gov.inपर शिकायत दर्ज कराएं ताकि पैसे को ठगों के खातों से तुरंत फ्रीज कराया जा सके।
Reader Alert: कभी भी अधिक लाभ देने वाली संदिग्ध शेयर मार्केट ट्रेडिंग स्कीम्स या टेलीग्राम पार्ट-टाइम जॉब के विज्ञापनों के झांसे में न आएं। अज्ञात खातों में अपनी मेहनत की कमाई ट्रांसफर न करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में कहें तो, केंद्र सरकार द्वारा 3,718 अवैध ऐप्स, 15.75 लाख सिम कार्ड्स और 5.77 लाख IMEI नंबरों को बंद किया जाना भारत को साइबर-सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर कदम है। इस विशाल सर्जिकल स्ट्राइक ने साबित कर दिया है कि भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब अपराधियों के लिए असुरक्षित होता जा रहा है।
तथापि, तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ हर नागरिक की व्यक्तिगत सतर्कता ही इस लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार है। खुद को जागरूक रखें, अपने परिवार और बुजुर्गों को डिजिटल फ्रॉड के प्रति सचेत करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। देश में साइबर सुरक्षा, तकनीक और सरकारी नीतियों से जुड़ी हर सटीक व प्रामाणिक अपडेट के लिए Bharati Fast News के साथ लगातार जुड़े रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: सरकार ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ हाल ही में क्या बड़ा कदम उठाया है?
उत्तर: केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (I4C) और DoT ने मिलकर 3,718 अवैध ऐप्स को हटा दिया है, 15.75 लाख फर्जी सिम कार्ड रद्द किए हैं और 5.77 लाख मोबाइलों के IMEI नंबर ब्लॉक कर दिए हैं।
Q2: यदि मेरे साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हो जाए तो मुझे तुरंत क्या करना चाहिए?
उत्तर: धोखाधड़ी होते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि आपके पैसे को बैंक खातों से तुरंत फ्रीज कराया जा सके।
Q3: संचार साथी पोर्टल (Sanchar Saathi Portal) क्या है?
उत्तर: यह भारत सरकार के दूरसंचार विभाग का एक आधिकारिक वेब पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) है, जिसके जरिए नागरिक अपने खोए/चोरी हुए मोबाइल को ब्लॉक कर सकते हैं और अपने नाम पर चल रहे फर्जी सिम कनेक्शन की जांच कर सकते हैं।
Q4: क्या ब्लॉक किए गए IMEI नंबर वाला फोन दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, एक बार जब किसी मोबाइल का IMEI नंबर CEIR प्रणाली द्वारा ब्लॉक कर दिया जाता है, तो वह फोन भारत के किसी भी टेलीकॉम नेटवर्क (Airtel, Jio, VI, BSNL) पर काम नहीं करेगा।
Q5: डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) फ्रॉड क्या होता है?
उत्तर: यह एक ऐसा साइबर अपराध है जिसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम्स अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को डराते हैं कि उनके नाम पर कोई अवैध पार्सल या केस है और उन्हें फर्जी अरेस्ट का डर दिखाकर पैसे वसूलते हैं।
Q6: 3,718 ऐप्स को बैन क्यों किया गया?
उत्तर: ये ऐप्स अवैध लोन देने, उच्च ब्याज वसूलने, ब्लैकमेल करने, सट्टेबाजी कराने और बिना अनुमति के उपयोगकर्ताओं का निजी डेटा चोरी करने में लिप्त पाए गए थे।
Q7: कैसे चेक करें कि मेरे नाम पर कितने सिम एक्टिव हैं?
उत्तर: संचार साथी पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) पर जाएं, ‘TAFCO’ (Know Your Mobile Connections) लिंक पर क्लिक करें, अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी डालकर अपने नाम पर पंजीकृत सभी सिम कनेक्शन की सूची देखें।
Q8: ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) क्या होता है?
उत्तर: साइबर अपराधी ठगी का पैसा ट्रांसफर करने के लिए गरीब या निर्दोष लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे किराए के खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
Q9: फर्जी लोन ऐप्स से कैसे बचें?
उत्तर: कभी भी अज्ञात लिंक या थर्ड-पार्टी वेबसाइट से ऐप डाउनलोड न करें। लोन लेने से पहले जांच लें कि ऐप देने वाली कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पंजीकृत NBFC या बैंक है या नहीं।
Q10: साइबर अपराध की शिकायत कहां दर्ज कराई जा सकती है?
उत्तर: नागरिक किसी भी समय भारत सरकार के आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
अस्वीकरण (DISCLAIMER)
अस्वीकरण: यह लेख भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA), इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), दूरसंचार विभाग (DoT) और आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों द्वारा जारी सूचनाओं पर आधारित एक तथ्य-आधारित समाचार रिपोर्ट है। Bharati Fast News अपने पाठकों तक केवल सत्यापित और प्रामाणिक सूचनाएं पहुंचाता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी साइबर शिकायत के लिए केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टलों (cybercrime.gov.in एवं sancharsaathi.gov.in) का ही उपयोग करें।
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