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Home - World News - US Stock Market: $100 के पार पहुंचा तेल, Dow-S&P 500-Nasdaq में गिरावट; बढ़ी महंगाई की चिंता

US Stock Market: $100 के पार पहुंचा तेल, Dow-S&P 500-Nasdaq में गिरावट; बढ़ी महंगाई की चिंता

Brent Crude के $100 के पार जाने और Treasury Yields बढ़ने से अमेरिकी शेयर बाजार दबाव में आया, निवेशकों की नजर अब US Inflation Data पर है।

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
11/09/2026
in World News
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अमेरिकी शेयर बाजार

अमेरिकी शेयर बाजार: $100 पार तेल, डाउ और नैस्डैक लुढ़के

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US Stock Market: $100 के पार पहुंचा तेल, Dow-S&P 500-Nasdaq में गिरावट; बढ़ी महंगाई की चिंता

वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र वॉल स्ट्रीट से एक ऐसी हलचल सामने आई है जिसने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। ऊर्जा संकट के अचानक गहराने से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड जैसे ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकला, अमेरिकी शेयर बाजार में बिकवाली का चौतरफा तूफान देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में आए इस जबर्दस्त उछाल और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (बॉन्ड यील्ड) में आई तेजी ने निवेशकों के भीतर महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर दोबारा जिंदा कर दिया है।

डाउ जोंस (Dow Jones), एसएंडपी 500 (S&P 500) और टेक शेयरों वाले नैस्डैक (Nasdaq) तीनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए हैं। जब-जब ऊर्जा की कीमतें इस तरह बेकाबू होती हैं, तब-तब उसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और आम नागरिक की जेब पर पड़ता है, और इस बार बाजार को सबसे बड़ा झटका आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति (US Inflation) आंकड़ों से पहले लगा है।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • कच्चा तेल $100 के पार: अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं, जो पिछले कई हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर है।

  • वॉल स्ट्रीट में चौतरफा गिरावट: डाउ जोंस में 400 से अधिक अंकों (0.8%) की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एसएंडपी 500 लगभग 0.5% और नैस्डैक कंपोजिट 0.6% टूट गया।

  • ट्रेजरी यील्ड में रिकॉर्ड उछाल: अमेरिका की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड उछलकर 4.9% के पार पहुंच गई, जिससे इक्विटी बाजार से पूंजी का बहिर्वाह तेज हुआ।

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  • फेड रेट हाइक की आशंका: सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के मुताबिक, फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना बढ़कर 60% से अधिक हो गई है।

  • ऊर्जा क्षेत्र को छोड़ सभी सेक्टर लाल: एसएंडपी 500 के 11 प्रमुख सेक्टरों में से केवल एनर्जी सेक्टर में बढ़त रही, जबकि आईटी, रिटेल, और कंज्यूमर गुड्स में भारी बिकवाली देखी गई।

  • आगामी इन्फ्लेशन डेटा पर टिकी नजरें: बाजार अब आधिकारिक प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहा है।

ताजा अपडेट: वॉल स्ट्रीट के तीनों प्रमुख सूचकांकों में बिकवाली का दबाव

न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) पर ट्रेडिंग फ्लोर की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव हावी रहा। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 405 अंकों की भारी गिरावट के साथ 52,380 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। इसी तरह एसएंडपी 500 इंडेक्स 37 अंक फिसलकर 7,636 के स्तर पर आ गया, जो उसके पिछले महीने के रिकॉर्ड स्तर से 2% से अधिक नीचे है।

तकनीकी शेयरों के गढ़ नैस्डैक कंपोजिट में लगभग 168 अंकों की गिरावट आई। बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह लंबे समय की उधारी लागत (क्रेडिट कॉस्ट) का बढ़ना रही। सेमीकंडक्टर और बड़ी टेक कंपनियों—जैसे एनवीडिया और ओरेकल—के शेयरों पर भारी दबाव देखा गया। हालांकि, केवल तेल उत्पादक और रिफाइनिंग कंपनियों (जैसे एक्सॉन मोबिल और शेवरॉन) के शेयरों में तेजी रही, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

महत्वपूर्ण नोट (Important Note): जब 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाना ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे जोखिम भरी इक्विटी यानी शेयर बाजार से फंड्स तेजी से बाहर निकलने लगते हैं।

पृष्ठभूमि: भू-राजनीतिक तनाव और $100 के पार कच्चे तेल का सफर

कच्चे तेल में आई यह हालिया तेजी केवल सामान्य मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव एक मुख्य कारक बना हुआ है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों (विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य) में जहाजों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों ने ऊर्जा आपूर्ति को बाधित किया है।

दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति जिस समुद्री मार्ग से गुजरती है, वहां तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों के बाद वैश्विक शिपिंग कंपनियां जहाजों के रूट बदलने पर मजबूर हो गई हैं। इस लॉजिस्टिक्स संकट के कारण ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड दोनों में अचानक 5% से 6% का एकदिवसीय उछाल आया। 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके पार जाते ही वैश्विक परिवहन, विनिर्माण और विमानन कंपनियों की लागत सीधे बढ़ जाती है।

आखिर क्या हुआ? तीन मुख्य कारणों से डगमगाया बाजार

अमेरिकी शेयर बाजार में इस तेज गिरावट के पीछे तीन प्रमुख आर्थिक और तकनीकी कारण एक साथ सक्रिय हुए हैं:

  1. ऊर्जा लागत में उछाल और सप्लाई चेन की बाधा: कच्चे तेल के $100 पार जाने से अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमतें लगभग 32% बढ़कर $4.22 प्रति गैलन तक पहुंच चुकी हैं। डीजल की कीमतें सर्वकालिक उच्च स्तर पर हैं, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है और कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन सिकुड़ रहे हैं।

  2. ट्रेजरी यील्ड का 4.9% छूना: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा घोषित बॉन्ड बायबैक का आकार बाजार की उम्मीदों (8 से 10 अरब डॉलर) से कम यानी केवल 6 अरब डॉलर रहा। इसके चलते बॉन्ड की कीमतें गिरीं और 10-वर्षीय यील्ड 4.9% के पार पहुंच गई, जिसने इक्विटी के मूल्यांकन पर भारी कैंची चलाई।

  3. फेडरल रिजर्व की संभावित सख्ती (Hawkish Fed): फेडरल रिजर्व का लक्ष्य मुद्रास्फीति को 2% के दायरे में बनाए रखना है। तेल की महंगाई के कारण हेडलाइन इन्फ्लेशन के 3% से काफी ऊपर बने रहने की आशंका है। इससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें पूरी तरह धूल-धूसरित हो गईं और दरों में नई बढ़ोतरी की संभावना 60% तक पहुंच गई।

दिलचस्प तथ्य (Interesting Fact): अमेरिकी इतिहास में जब भी कच्चे तेल की कीमतों में एक ही तिमाही में 20% से अधिक की तेजी आई है, तो अगले 6 महीनों में वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों में औसतन 8% से 12% का करेक्शन देखा गया है।

बाजार सूचकांक और कमोडिटी दरों की स्थिति (Market Snapshot Table)

इंडेक्स / कमोडिटीमौजूदा स्तर (Latest Level)दैनिक बदलाव (Day Change)प्रतिशत बदलाव (% Change)मुख्य रुझान
डाउ जोंस (Dow Jones)52,109 – 52,380-405.41 अंक-0.8%भारी बिकवाली, बैंकिंग व इंडस्ट्रियल दबाव में
एसएंडपी 500 (S&P 500)7,605 – 7,636-37.16 अंक-0.5%एक महीने के निचले स्तर पर
नैस्डैक (Nasdaq 100)26,253 – 29,223-168.07 अंक-0.6%चिपमेकर्स और आईटी स्टॉक्स टूटे
ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent)$101.21 – $106.86+$5.66+5.59%मध्य पूर्व तनाव के बीच $100 के पार
10-वर्षीय यूएस यील्ड4.92%+0.08 bps+1.65%नवंबर 2023 के बाद का उच्चतम स्तर
वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX)17.28+0.82+2.57%बाजार में अनिश्चितता और घबराहट बढ़ी

विशेषज्ञ विश्लेषण: क्या यह मंदी की आहट है या सामान्य करेक्शन?

वॉल स्ट्रीट के दिग्गज अर्थशास्त्रियों और संस्थागत रणनीतिकारों का मानना है कि बाजार इस वक्त ‘स्टैगफ्लेशन’ (Stagflation) यानी सुस्त विकास और ऊंची महंगाई के चक्रव्यूह से डर रहा है।

विशेषज्ञ राय (वरिष्ठ निवेश रणनीतिकार, यूएस बैंक वेल्थ मैनेजमेंट):

“कच्चे तेल का $100 के पार निकलना कोई साधारण घटना नहीं है। यह सीधे तौर पर इनपुट कॉस्ट को बढ़ाता है। जब तक कंपनियां अपने तीसरी तिमाही के वास्तविक वित्तीय नतीजे पेश नहीं करतीं, तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी। बॉन्ड यील्ड का 4.9% पर पहुंचना ग्रोथ स्टॉक्स के पीई मल्टीपल को सीधे चोट पहुंचाता है। अगर आगामी सीपीआई डेटा में कोर इन्फ्लेशन में उछाल दिखता है, तो फेडरल रिजर्व के पास ब्याज दरें ऊंची रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। निवेशकों को फिलहाल आक्रामक खरीदारी के बजाय नकदी और डिफेंसिव सेक्टरों पर ध्यान देना चाहिए।'”

तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि डाउ जोंस अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (50 EMA) से नीचे फिसल चुका है। यदि यह 52,000 के स्तर को तोड़ता है, तो अगला मजबूत सपोर्ट 51,500 के आसपास मिलेगा।

आधिकारिक जानकारी और आगामी घटनाक्रम

अमेरिकी आर्थिक परिदृश्य के लिए अगला सप्ताह अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है:

  • प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI): अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (BLS) द्वारा थोक महंगाई दर के आंकड़े जारी किए जाएंगे, जिससे विनिर्माण लागत की पहली झलक मिलेगी।

  • कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI): इसके ठीक बाद रिटेल महंगाई के आधिकारिक आंकड़े पेश होंगे। बाजार को उम्मीद है कि हेडलाइन मुद्रास्फीति 3.4% से 3.6% के बीच रह सकती है।

  • फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) बैठक: फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति की आगामी बैठक में ब्याज दरों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

रीडर अलर्ट (Reader Alert): वैश्विक कमोडिटी बाजारों में उतार-चढ़ाव के दौरान लीवरेज्ड फ्यूचर्स या ऑप्शंस में शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग करने वाले खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान हो सकता है। स्टॉप-लॉस का कड़ाई से पालन करें।

भारतीय निवेशकों, छात्रों और आम नागरिकों पर प्रभाव

वॉल स्ट्रीट की यह गिरावट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। वैश्वीकृत वित्तीय व्यवस्था के चलते इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिक पर भी पड़ता है:

  1. भारतीय शेयर बाजार (Sensex/Nifty) पर दबाव: अमेरिकी बाजारों में बिकवाली से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय इक्विटी से पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित बॉन्ड्स में शिफ्ट करने लगते हैं, जिससे घरेलू बाजारों में भी करेक्शन आता है।

  2. पेट्रोल-डीजल और आयात बिल: भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है। कच्चा तेल $100 के पार रहने से भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ेगा और भारतीय रुपये (INR) पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी का दबाव आएगा।

  3. विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी: डॉलर के मजबूत होने से अमेरिका या यूरोप में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए ट्यूशन फीस और रहने का खर्च बढ़ जाता है, क्योंकि रुपये के संदर्भ में डॉलर की कीमत अधिक चुकानी पड़ती है।

  4. महंगाई और लोन की ईएमआई: यदि कच्चे तेल की वजह से भारत में भी ईंधन और माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी ब्याज दरों में कटौती टालनी पड़ सकती है, जिसका सीधा असर होम लोन और कार लोन की ईएमआई पर पड़ेगा।

भविष्य का प्रभाव: आगे क्या होगा और अगले कदम क्या हैं?

ऊर्जा संकट और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों के बीच आने वाले महीनों में वित्तीय जगत में निम्नलिखित बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

  • पोर्टफोलियो रोटेशन: निवेशक हाई-ग्रोथ टेक शेयरों से पैसा निकालकर कंज्यूमर स्टेपल्स, यूटिलिटीज, फॉर्मा और ऑयल एंड गैस जैसी मूल्य-आधारित (Value Stocks) कंपनियों में लगाना शुरू करेंगे।

  • केंद्रीय बैंकों का कड़ा रुख: यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा हाल ही में ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी के बाद यदि फेड भी दरें बढ़ाता है, तो वैश्विक स्तर पर ‘हाई फॉर लॉन्गर’ (लंबे समय तक ऊंची दरें) का दौर खिंच सकता है।

  • कमोडिटी आधारित मुद्रास्फीति: यदि मिडिल ईस्ट में लॉजिस्टिक्स संकट जल्द हल नहीं हुआ, तो आगामी त्यौहारी सीजन में खाद्य पदार्थों और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम 5% से 10% तक बढ़ सकते हैं।

निवेशकों और पाठकों को क्या करना चाहिए? (Actionable Advice)

  • घबराकर बिकवाली न करें (Panic Selling): यदि आपके पास मजबूत फंडामेंटल वाली लार्ज-कैप कंपनियों के शेयर हैं, तो तात्कालिक बाजार गिरावट में घबराकर घाटे में शेयर न बेचें।

  • सिप (SIP) जारी रखें: म्यूचुअल फंड्स और इंडेक्स फंड्स में निवेश करने वाले खुदरा निवेशकों को अपनी मासिक एसआईपी निर्बाध जारी रखनी चाहिए, क्योंकि बाजार गिरावट के समय ‘रुपये की लागत औसत’ (Rupee Cost Averaging) का सबसे बेहतर फायदा मिलता है।

  • गोल्ड और डेट में विविधता लाएं: अपने पोर्टफोलियो का 10% से 15% हिस्सा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, फिजिकल गोल्ड या लिक्विड फंड्स में रखें, ताकि इक्विटी के झटकों से बचाव हो सके।

  • आधिकारिक आर्थिक डेटा को ट्रैक करें: सोशल मीडिया के भ्रामक दावों के बजाय केवल यूएस बीएलएस (BLS), फेडरल रिजर्व और आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट्स पर जारी प्रेस विज्ञप्तियों पर नजर रखें।

निष्कर्ष

वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय एक दोराहे पर खड़ा है। अमेरिकी शेयर बाजार में आई यह गिरावट केवल अंकों का घटना नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल, $100 के पार निकलते कच्चे तेल और जिद्दी महंगाई के विरुद्ध केंद्रीय बैंकों की अधूरी जंग का सीधा आईना है। जब तक ऊर्जा आपूर्ति के सुरक्षित गलियारे बहाल नहीं होते और ब्याज दरों के चक्र पर स्पष्ट विराम नहीं लगता, तब तक वॉल स्ट्रीट से लेकर दलाल स्ट्रीट तक अनिश्चितता के बादल मंडराते रहेंगे। समझदार निवेशकों के लिए यह समय आक्रामकता दिखाने का नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन, धैर्य और सतर्कता के साथ बाजार की दिशा को परखने का है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. अमेरिकी शेयर बाजार में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?

कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकलने, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 4.9% तक उछलने और फेडरल रिजर्व द्वारा दोबारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के कारण वॉल स्ट्रीट में भारी बिकवाली हुई।

2. ब्रेंट क्रूड के $100 पार जाने का मुख्य कारण क्या है?

मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक संघर्ष का विस्तार, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और वैश्विक तेल आपूर्ति मार्गों में आए व्यवधान के चलते तेल की कीमतों में यह उछाल आया है।

3. अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से शेयरों पर क्या असर पड़ता है?

ट्रेजरी यील्ड बढ़ने का मतलब है कि निवेशकों को जोखिम-मुक्त सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिल रहा है। इससे शेयर बाजार की तुलनात्मक चमक कम हो जाती है और निवेशक इक्विटी बेचकर बॉन्ड खरीदने लगते हैं।

4. क्या फेडरल रिजर्व सितंबर 2026 में ब्याज दरें बढ़ाएगा?

बाजार के अनुमानों (CME FedWatch) के अनुसार, तेल की कीमतों से उपजी महंगाई के कारण फेड द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करने की संभावना 60% से अधिक हो गई है।

5. इस गिरावट का भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) पर क्या असर होगा?

वॉल स्ट्रीट की कमजोरी से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों से पूंजी वापस खींच सकते हैं, जिससे भारतीय बाजारों में भी अल्पावधि में गिरावट या दबाव देखने को मिल सकता है।

6. कच्चे तेल की महंगाई से भारत के आम नागरिक पर क्या प्रभाव पड़ता है?

भारत के आयात बिल में वृद्धि होती है, रुपया कमजोर हो सकता है और माल ढुलाई महंगी होने से दैनिक उपयोग की वस्तुएं, किराना और सब्जियां महंगी हो सकती हैं।

7. गिरावट के दौरान कौन से सेक्टर सुरक्षित माने जाते हैं?

ऐसी स्थितियों में एनर्जी (ऑयल एंड गैस), हेल्थकेयर, फार्मास्यूटिकल्स, यूटिलिटीज और कंज्यूमर स्टेपल्स जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहता है।

8. खुदरा निवेशकों को इस वोलेटाइल मार्केट में क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

खुदरा निवेशकों को पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए, अपनी अनुशासित एसआईपी जारी रखनी चाहिए और पोर्टफोलियो को गोल्ड व फिक्स्ड इनकम में डायवर्सिफाई करना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों के वास्तविक कारोबारी रुझानों, प्रतिष्ठित वैश्विक समाचार एजेंसियों (रॉयटर्स, ब्लूमबर्ग) और आधिकारिक विनियामक डेटा के आधार पर विशुद्ध रूप से सूचनात्मक व शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार की गई है। शेयर बाजार और कमोडिटी में निवेश वित्तीय जोखिमों के अधीन है। कोई भी वित्तीय या निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Advisor) से परामर्श अवश्य लें। भारती फास्ट न्यूज किसी भी लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।

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Abhay Jeet Singh

Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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NEET PG Answer Key 2026
Education News

NEET PG Answer Key 2026 LIVE: आज जारी हो सकती है Response Sheet, 30 सितंबर तक रिजल्ट

by Abhay Jeet Singh
सितम्बर 11, 2026
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NEET PG Answer Key 2026 LIVE: आज जारी हो सकती है Response Sheet, 30 सितंबर तक रिजल्ट अस्पतालों के इमरजेंसी...

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हैवान फिल्म रिलीज

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Nayyi Navelli Teaser: ‘डायन-पिशाच नाश्ते में खाती हूं’, यामी गौतम का खतरनाक दुल्हन अवतार

सितम्बर 11, 2026
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ChatGPT 80s Photo Trend: ‘मैं 1980 का हीरो, पत्नी हीरोइन’, फोटो बनाने से पहले जानें Privacy Risk

सितम्बर 11, 2026
अमेरिकी शेयर बाजार

US Stock Market: $100 के पार पहुंचा तेल, Dow-S&P 500-Nasdaq में गिरावट; बढ़ी महंगाई की चिंता

सितम्बर 11, 2026
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