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Home - State News - UP बिजली उपभोक्ताओं के लिए अहम खबर, अचानक 4KW हुआ कनेक्शन, बढ़ी परेशानी

UP बिजली उपभोक्ताओं के लिए अहम खबर, अचानक 4KW हुआ कनेक्शन, बढ़ी परेशानी

बिजली विभाग का मैसेज आप भी चेक करो! मोबाइल पर आया एक मैसेज और 2KW से 4KW हुआ बिजली कनेक्शन! उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
05/07/2026
in State News
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बिजली कनेक्शन लोड बढ़ा

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका, बिना आवेदन बढ़ा कनेक्शन लोड!

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आपके मोबाइल पर भी आया है ऐसा मैसेज? बिना पूर्व लिखित सहमति के 2KW से सीधे 4KW हुआ बिजली कनेक्शन, जानिए इस खेल के पीछे का असली सच

सुबह-सुबह जब आप अपने मोबाइल इनबॉक्स को खोलते हैं और वहां बिजली विभाग का एक आधिकारिक मैसेज चमकता है कि “प्रिय उपभोक्ता, आपके परिसर का स्वीकृत भार (Sanctioned Load) 2 किलोवाट से बढ़ाकर 4 किलोवाट कर दिया गया है”, तो हैरान होना पूरी तरह लाजिमी है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के इस चौंकाने वाले और अचानक किए गए फैसले ने राज्य के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के बजट और मानसिक शांति को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ दिनों में बिना किसी पूर्व विधिक नोटिस या उपभोक्ता की लिखित सहमति के बिजली कनेक्शन लोड बढ़ा दिए जाने की घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से बाढ़ आ गई है।

यह कोई साधारण क्लर्कियल या तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि डिस्कॉम्स (विद्युत वितरण कंपनियों) द्वारा स्मार्ट मीटरों के पिछले तीन महीनों के डिजिटल डेटा का उपयोग करके किया गया एक व्यापक ऑटो-लोड एन्हांसमेंट (Auto Load Enhancement) अभियान है। इस औचक बदलाव ने उन मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने एक बड़ा वित्तीय संकट खड़ा कर दिया है, जो पहले से ही बढ़ी हुई प्रति यूनिट दरों और फिक्स्ड चार्जेस से परेशान थे। जब बिना आवेदन के ही लोड दोगुना हो जाएगा, तो अगले महीने के बिल में फिक्स्ड चार्ज भी दोगुना लगकर आएगा। इस गंभीर उपभोक्ता संकट, विभागीय नियमों और इसे वापस पुराने स्तर पर लाने की पूरी कानूनी प्रक्रिया का पॉइंट-बाय-पॉइंट विस्तृत विश्लेषण हमारी इस खोजी रिपोर्ट में समझिए।

बिजली कनेक्शन लोड बढ़ा: मुख्य अंश

  • ऑटो-लोड एन्हांसमेंट अभियान: उत्तर प्रदेश के सभी डिस्कॉम्स (MVVNL, PVVNL, DVVNL, PUVVNL) द्वारा स्मार्ट मीटर रीडिंग के आधार पर स्वतः ही भार में बढ़ोतरी।

  • 2KW से सीधे 4KW: अधिकांश मध्यमवर्गीय और घरेलू उपभोक्ताओं का कनेक्शन लोड बिना किसी भौतिक आवेदन के सीधे दोगुना किया गया।

  • फिक्स्ड चार्ज में भारी इजाफा: लोड दोगुना होने से मासिक बिजली बिल में जुड़ने वाला न्यूनतम तय शुल्क (Fixed Charge) भी सीधे दोगुना होकर आएगा।

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  • स्मार्ट मीटर का डेटा आधार: पिछले वित्तीय वर्ष या गर्मियों के महीनों में मीटर पर दर्ज की गई ‘मैक्सिमम डिमांड’ (MDI) को आधार बनाकर विभाग ने यह कार्रवाई की है।

  • उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश: बिना किसी विधिक नोटिस या सुनवाई का अवसर दिए एकतरफा लोड बढ़ाए जाने को लेकर उपभोक्ता संगठनों ने आपत्ति जताई है।

  • विधिक आपत्ति का विकल्प: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के नियमों के अनुसार उपभोक्ता इस स्वतः बढ़ी हुई लोड राशि के खिलाफ 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

लेटेस्ट अपडेट: कलेक्ट्रेट और विद्युत उपकेंद्रों पर शिकायतकर्ताओं की भीड़

शक्ति भवन मुख्यालय और राज्य के विभिन्न जोनल कार्यालयों से आ रही ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली कनेक्शन लोड बढ़ा दिए जाने के संदेश मिलने के बाद से ही उपभोक्ता बिजली उपकेंद्रों (Substations) और अधिशासी अभियंता (XEN) कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।

अकेले मुरादाबाद, सम्भल, लखनऊ और मेरठ संभागों में हजारों उपभोक्ताओं ने लिखित रूप में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके घरों में केवल एक या दो पंखे और एक रेफ्रिजरेटर है, इसके बावजूद विभाग ने उनके लोड को बढ़ाकर व्यावसायिक या उच्च श्रेणी के समकक्ष कर दिया है। विभाग के आईटी विंग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रणाली पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत एल्गोरिदम (Computerized Algorithm) पर काम कर रही है, जिसने मीटर के रिकॉर्डेड पीक लोड को कैच किया है।

🚨 रीडर अलर्ट (Reader Alert): यदि आपके मोबाइल पर भी लोड बढ़ने का मैसेज आया है, तो अपने वर्तमान महीने के बिल की बारीकी से जांच करें। यदि बिल में ‘स्वीकृत भार’ (Sanctioned Load) और ‘वास्तविक भार’ (Actual Maximum Demand) के बीच बड़ी विसंगति है, तो बिना भुगतान किए सीधे शिकायत दर्ज करें, अन्यथा इसे आपकी मर्जी मान लिया जाएगा।

पृष्ठभूमि: स्मार्ट मीटर की ‘मैक्सिमम डिमांड’ (MDI) का पूरा गणित

इस पूरे विवाद को समझने के लिए हमें बिजली के स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और उसके भीतर छिपे ‘एमडीआई’ (Maximum Demand Indicator) के तकनीकी पहलू को समझना होगा। जब आपके घर में नया इलेक्ट्रॉनिक या स्मार्ट मीटर लगाया जाता है, तो वह केवल यह नहीं मापता कि आपने कितनी यूनिट बिजली खर्च की, बल्कि वह यह भी रिकॉर्ड करता है कि पूरे 24 घंटे में किसी एक आधे घंटे (30 Minutes Window) के दौरान आपके घर में एक साथ कुल कितने वाट के उपकरण चल रहे थे।

गर्मियों के दिनों में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तो मध्यमवर्गीय परिवारों में भी मेहमानों के आने पर या अत्यधिक उमस होने पर अनजाने में पानी की मोटर, रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर या कूलर एक साथ चालू हो जाते हैं। भले ही यह स्थिति पूरे महीने में सिर्फ एक या दो बार ही क्यों न हुई हो, स्मार्ट मीटर की मेमोरी उस उच्चतम लोड (Peak Load) को हमेशा के लिए रिकॉर्ड कर लेती है। UPPCL के सॉफ्टवेयर ने इसी पीक लोड डेटा को स्कैन किया और जहां भी यह दर्ज लोड आपके स्वीकृत 2 किलोवाट से थोड़ा भी अधिक पाया गया, सिस्टम ने स्वतः ही आपका बिजली कनेक्शन लोड बढ़ा दिया।

क्या हुआ? क्यों नियमों को ताक पर रखकर बढ़ाया गया लोड

उपभोक्ता संरक्षण नियमों और विद्युत आपूर्ति संहिता (Electricity Supply Code) के अनुसार, किसी भी उपभोक्ता का स्वीकृत भार बढ़ाने से पहले विभाग को उसे एक लिखित नोटिस जारी करना होता है, जिसमें यह स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि आपका लोड आपकी स्वीकृत सीमा से अधिक पाया गया है, इसलिए आप 15 या 30 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण दें या स्वयं लोड बढ़ाने के लिए आवेदन करें।

परंतु, इस बार डिस्कॉम्स ने राजस्व संग्रह (Revenue Collection) बढ़ाने और सिस्टम ओवरलोडिंग का हवाला देकर इस विधिक प्रक्रिया को पूरी तरह से बायपास कर दिया। सीधे कंप्यूटर जनरेटेड कमांड के जरिए लाखों खातों का लोड एक साथ बदल दिया गया। उपभोक्ताओं का तर्क है कि यदि किसी एक दिन असाधारण परिस्थिति में उनका लोड बढ़ गया था, तो उसे स्थायी आधार मानकर हर महीने फिक्स्ड चार्ज वसूलना पूरी तरह से गैर-कानूनी और तानाशाही रवैया है।

विशेषज्ञ विश्लेषण: राजस्व का दबाव या तकनीकी मजबूरी?

“ऊर्जा क्षेत्र के विधिक विशेषज्ञों और उपभोक्ता फोरम के वकीलों का मानना है कि UPPCL का यह कदम सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का हनन है। विद्युत नियामक आयोग के नियमों के मुताबिक, यदि किसी उपभोक्ता का लोड तीन बार से अधिक अपनी सीमा को पार करता है, तभी विभाग को कार्रवाई का अधिकार है, वह भी उचित नोटिस के बाद। विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली कंपनियां अपने वित्तीय घाटे (Financial Deficit) को कम करने और फिक्स्ड चार्ज के जरिए एक निश्चित मासिक आय सुनिश्चित करने के लिए इस शॉर्टकट का सहारा ले रही हैं। उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है; यदि उनके पास यह साबित करने के दस्तावेज हैं कि उनका वास्तविक औसत उपभोग कम है, तो वे उपभोक्ता फोरम में जाकर इस बढ़े हुए लोड को पूरी तरह निरस्त करा सकते हैं और पेनल्टी से बच सकते हैं।”

आधिकारिक जानकारी: UPPCL के वर्तमान लोड और फिक्स्ड चार्ज के नियम

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के वर्तमान टैरिफ आर्डर के अनुसार, स्वीकृत भार और फिक्स्ड चार्ज का आधिकारिक विनिर्देश ढांचा नीचे दिया जा रहा है:

घरेलू उपभोक्ता (LMV-1) भार नियम:

  • 2 किलोवाट तक फिक्स्ड चार्ज: लगभग ₹110 प्रति किलोवाट प्रति माह।

  • 2 किलोवाट से अधिक (जैसे 4KW) होने पर: प्रति किलोवाट शुल्क बढ़कर ₹140 से ₹160 के स्लैब में चला जाता है।

  • विद्युत आपूर्ति संहिता की धारा 4.49: भार बढ़ाने से पहले उपभोक्ता को पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है।

  • आधिकारिक शिकायत निवारण: टोल-फ्री नंबर 1912 और ऑनलाइन पोर्टल ‘UPPCL Consumer Forum’।

लोड बढ़ने पर बिजली बिल के फिक्स्ड चार्ज का तुलनात्मक प्रभाव

इस स्पष्ट और मोबाइल-फ्रेंडली तालिका के माध्यम से समझें कि 2 किलोवाट से सीधे 4 किलोवाट लोड होने पर आपके मासिक खर्च पर क्या बड़ा असर पड़ेगा:

स्वीकृत भार (Sanctioned Load)मासिक फिक्स्ड चार्ज (औसत)न्यूनतम मासिक बिजली बिल (बिना उपभोग के)बिजली दरों का स्लैब प्रभावउपभोक्ता पर अतिरिक्त वित्तीय भार
2 किलोवाट (2 KW)₹220.00 (₹110 x 2)₹220 + टैक्ससामान्य घरेलू दरें (लोअर स्लैब)बुनियादी और किफायती स्तर पर संतुलित
4 किलोवाट (4 KW)₹560.00 (₹140 x 4)₹560 + टैक्सउच्च घरेलू दरें (हायर स्लैब)प्रति माह ₹340 से अधिक की सीधी चपत
प्रभाव विश्लेषणसीधे 150% से अधिक की वृद्धिन्यूनतम फिक्स बिल दोगुने से ज्यादायूनिट दरों में भी आंशिक स्लैब बदलाव संभवसालाना लगभग ₹4,000 का अतिरिक्त बोझ

मध्यमवर्गीय परिवारों और आम उपभोक्ताओं पर मानवीय प्रभाव

इस बिजली कनेक्शन लोड बढ़ा दिए जाने का सबसे दर्दनाक और मानवीय पहलू उन मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों और पेंशनभोगियों से जुड़ा है जो बेहद तंग और निश्चित मासिक बजट में अपना घर चलाते हैं। अचानक बिल में तीन सौ या चार सौ रुपये की मासिक बढ़ोतरी उनके पूरे महीने के किराना, बच्चों की स्कूल फीस या दवाइयों के बजट को असंतुलित कर देती है।

पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई स्थानीय नागरिक कल्याण मंचों (RWA) ने इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। आम जनता का कहना है कि बिजली विभाग पहले से ही अघोषित बिजली कटौती और ट्रिपिंग की समस्या को ठीक करने में नाकाम रहा है, और अब बिना बेहतर सुविधाएं दिए केवल कागजों पर लोड बढ़ाकर अवैध वसूली का रास्ता साफ किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।

भविष्य के परिणाम: क्या वापस कम हो पाएगा आपका लोड?

  1. शिकायत निवारण कैंपों का आयोजन: बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए बिजली विभाग बहुत जल्द हर सब-डिवीजन स्तर पर विशेष ‘भार संशोधन एवं शिकायत निवारण कैंप’ लगाने के लिए मजबूर होगा।

  2. स्मार्ट मीटर सॉफ्टवेयर में संशोधन: नियामक आयोग के कड़े रुख के बाद UPPCL को अपने ऑटो-लोड एन्हांसमेंट सॉफ्टवेयर के एल्गोरिदम में बदलाव करना होगा, ताकि केवल एक बार लोड बढ़ने पर स्वतः बदलाव न हो।

  3. उपभोक्ता साक्षरता में वृद्धि: इस संकट के बाद आम नागरिक अपने बिजली मीटरों की एमडीआई (MDI) रीडिंग को लेकर अधिक जागरूक होंगे, जिससे भविष्य में बिलिंग विवादों में कमी आएगी।

बढ़े हुए बिजली लोड को वापस पुराने स्तर पर लाने के लिए क्या करें?

यदि आपके खाते का भी लोड जबरन बढ़ा दिया गया है, तो इसे कानूनी रूप से वापस 2 किलोवाट पर लाने के लिए इन चार व्यावहारिक चरणों का पालन तुरंत करें:

  • लिखित आपत्ति पत्र तैयार करें: अपने सब-डिवीजन के अधिशासी अभियंता (XEN) या सहायक अभियंता (AE) के नाम एक औपचारिक विधिक प्रार्थना पत्र लिखें, जिसमें साफ तौर पर उल्लेख करें कि आपका बिजली कनेक्शन लोड बढ़ा दिए जाने से पहले आपको कोई आधिकारिक नोटिस नहीं दिया गया था।

  • पिछले 6 महीनों के बिल की कॉपी लगाएं: अपने आवेदन के साथ पिछले 6 महीनों के बिजली बिलों की फोटोकॉपी संलग्न करें और यह दिखाएं कि आपकी वास्तविक ‘मैक्सिमम डिमांड’ (MDI) अधिकांश समय 2 किलोवाट से कम ही रही है।

  • 1912 पर कंप्लेंट रजिस्टर्ड करें: बिजली विभाग के आधिकारिक टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल करें और ‘अनाधिकृत लोड एन्हांसमेंट’ (Unauthorized Load Enhancement) के तहत अपनी शिकायत दर्ज कराकर ‘टिकट नंबर’ सुरक्षित रख लें।

  • विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम (CGRF) जाएं: यदि स्थानीय बिजली कार्यालय के अधिकारी 15 दिनों के भीतर आपका लोड वापस कम नहीं करते हैं, तो सीधे अपने जिले के सीजीआरएफ (CGRF) फोरम में अपील दायर करें। वहां नियमों के उल्लंघन के आधार पर आपका केस तुरंत सुलझा लिया जाएगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन लोड बढ़ा दिया जाना तकनीकी आधुनिकता की आड़ में आम नागरिकों पर थोपा गया एक अनुचित वित्तीय बोझ है। तकनीक का उपयोग सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि उपभोक्ताओं को बिना सुनवाई का मौका दिए उनके मासिक खर्च को एकतरफा बढ़ाने के लिए। बिजली कंपनियों को यह समझना होगा कि एक लोक-कल्याणकारी राज्य में नागरिकों की संतुष्टि और विधिक प्रक्रियाओं का पालन सर्वोपरि है। हमारी सभी पाठकों को दृढ़ सलाह है कि वे इस ऑटो-लोड बढ़ोतरी को मूक सहमति न दें और आज ही हमारे बताए गए कानूनी तरीकों से अपनी तहसील या उपकेंद्र में आपत्ति दर्ज कराएं। उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक फैसलों, उपभोक्ता अधिकारों, बिजली विभाग के नए नियमों और जनहित की हर प्रामाणिक व तथ्य-आधारित बड़ी खबर की सबसे तेज और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए हमारी वेबसाइट ‘Bharati Fast News’ के साथ लगातार जुड़े रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: UPPCL ने बिना आवेदन के बिजली कनेक्शन का लोड क्यों बढ़ा दिया है?

उत्तर: बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटरों में दर्ज पिछले कुछ महीनों के ‘मैक्सिमम डिमांड इंडिकेटर’ (MDI) यानी पीक लोड डेटा के आधार पर ऑटो-लोड एन्हांसमेंट सॉफ्टवेयर के जरिए स्वतः ही लोड बढ़ा दिया है।

प्रश्न 2: बिजली लोड 2KW से 4KW होने पर मासिक बिल पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर: लोड बढ़ने से आपके बिल में जुड़ने वाला प्रति किलोवाट फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charge) सीधे तौर पर दोगुने से भी अधिक हो जाएगा, जिससे बिना एक भी यूनिट बिजली खर्च किए आपका मासिक न्यूनतम बिल ₹300 से ₹400 तक बढ़ जाएगा।

प्रश्न 3: क्या बिना नोटिस दिए बिजली का लोड बढ़ाना कानूनी रूप से सही है?

उत्तर: नहीं, उत्तर प्रदेश विद्युत आपूर्ति संहिता के नियमों के अनुसार किसी भी उपभोक्ता का लोड बढ़ाने से पहले उसे एक औपचारिक विधिक नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय देना अनिवार्य है, जिसका इस अभियान में उल्लंघन हुआ है।

प्रश्न 4: मैं कैसे चेक करूं कि मेरे मीटर पर वर्तमान में कितना लोड स्वीकृत है?

उत्तर: आप अपने मोबाइल पर आए हालिया बिजली बिल की पीडीएफ कॉपी में सबसे ऊपर ‘Sanctioned Load’ या ‘स्वीकृत भार’ के कॉलम में देख सकते हैं कि आपका लोड कितने किलोवाट (KW) दर्ज है।

प्रश्न 5: क्या मैं इस जबरन बढ़ाए गए लोड को वापस पुराने स्तर पर करवा सकता हूँ?

उत्तर: हां, आप 30 दिनों के भीतर अपने स्थानीय अधिशासी अभियंता (XEN) कार्यालय में पिछले बिलों की प्रतियों के साथ एक लिखित आपत्ति पत्र जमा करके और 1912 पर शिकायत दर्ज कराकर इसे वापस पुराने लोड पर ला सकते हैं।

प्रश्न 6: स्मार्ट मीटर में ‘MDI’ या मैक्सिमम डिमांड क्या होती है?

उत्तर: एमडीआई आपके मीटर में दर्ज वह उच्चतम विद्युत भार (Peak Load) होता है, जो पूरे महीने के दौरान किसी भी एक आधे घंटे के लिए आपके घर के सभी उपकरणों (जैसे एसी, मोटर, फ्रिज) के एक साथ चलने पर रिकॉर्ड होता है।

प्रश्न 7: यदि स्थानीय बिजली अधिकारी मेरी शिकायत पर लोड कम नहीं करते हैं तो क्या विकल्प है?

उत्तर: यदि स्थानीय उपकेंद्र से राहत नहीं मिलती, तो आप सीधे अपने क्षेत्र के ‘विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम’ (CGRF) या विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman) के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

प्रश्न 8: क्या लोड बढ़ने से मेरी बिजली की प्रति यूनिट दरें (Unit Tariff) भी महंगी हो जाएंगी?

उत्तर: सीधे तौर पर यूनिट दरें नहीं बदलतीं, लेकिन कुछ टैरिफ श्रेणियों में 2 किलोवाट से अधिक लोड होने पर फिक्स्ड चार्ज के साथ-साथ उच्च उपभोग स्लैब (Higher Consumption Slab) लागू होने का खतरा बढ़ जाता है जिससे बिल और महंगा हो जाता है।

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Disclaimer: यह समाचार समीक्षा उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के परिचालन नियमों, विद्युत आपूर्ति संहिता (Electricity Supply Code) के विधिक प्रावधानों और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध प्रामाणिक उपभोक्ता इनपुट्स पर आधारित है। विभिन्न वितरण कंपनियों (Discoms) के सॉफ्टवेयर कार्यान्वयन, जोनल टैरिफ संरचनाओं और नियामक आयोग के भावी संशोधनों के अनुसार विधिक प्रक्रियाओं की समय-सीमा में बदलाव संभव है। उपभोक्ता किसी भी तात्कालिक विधिक या तकनीकी सहायता के लिए केवल विभाग के आधिकारिक राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1912 पर ही संपर्क करें।

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Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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