Nita Ambani Saree: 600 साल पुरानी आशावली साड़ी, 5 महीने में हुई तैयार; ईशा संग किया गरबा
स्वदेश की पहली वर्षगांठ पर नीता अंबानी ने गुजरात की पारंपरिक आशावली सिल्क साड़ी पहनी। वहीं, ईशा अंबानी ने मां के साथ ‘जय मां अष्ट भवानी’ पर गरबा किया।
Nita Ambani Ashavali Saree: नीता अंबानी का पारंपरिक अंदाज एक बार फिर चर्चा में है। स्वदेश की पहली वर्षगांठ और ‘देवी शक्ति’ समारोह के दौरान उन्होंने गुजरात की मशहूर आशावली सिल्क ब्रोकेड साड़ी पहनी। रिपोर्टों के मुताबिक, इस साड़ी को हाथ से तैयार करने में दो कारीगरों को करीब पांच महीने लगे। नीता अंबानी ने इसे अपने पुराने वेलवेट कोटी ब्लाउज के साथ पहना। समारोह में ईशा अंबानी ने भी अपनी मां के साथ ‘जय मां अष्ट भवानी’ पर गरबा किया।
भारतीय पारंपरिक परिधानों और हस्तकरघा कला को बढ़ावा देने के लिए पहचानी जाने वाली नीता अंबानी एक बार फिर अपने खास फैशन लुक को लेकर सुर्खियों में हैं। मुंबई में स्वदेश की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में उनका पहनावा भारतीय बुनाई परंपरा, गुजराती संस्कृति और पारंपरिक कारीगरी का खूबसूरत उदाहरण बना।
इस मौके पर नीता अंबानी ने मैजेंटा रंग की आशावली सिल्क ब्रोकेड साड़ी पहनी। साड़ी पर बारीक सुनहरे डिजाइन और पारंपरिक बॉर्डर नजर आया। इसके साथ उन्होंने अपनी निजी कलेक्शन का पुराना वेलवेट कोटी ब्लाउज पहना, जिसने उनके पूरे लुक को विंटेज और शाही अंदाज दिया।
कार्यक्रम में सिर्फ फैशन ही नहीं, बल्कि नवरात्रि की भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत भी आकर्षण का केंद्र रही। ईशा अंबानी ने मां नीता अंबानी के साथ ‘जय मां अष्ट भवानी’ पर गरबा किया। इस पल के वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में रहे।
नीता अंबानी की आशावली साड़ी में क्या है खास?
नीता अंबानी की साड़ी गुजरात की पारंपरिक आशावली बुनाई से जुड़ी है। आशावली ब्रोकेड अपनी जटिल बुनाई, सजावटी पैटर्न और समृद्ध बनावट के लिए जाना जाता है। इस तरह के वस्त्रों में कारीगरों को डिजाइन की बारीकियों और धागों के संयोजन पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
फैशन रिपोर्टों के मुताबिक, नीता अंबानी ने Royal Brocades की तैयार की गई आशावली ब्रोकेड साड़ी पहनी। इस ब्रांड से तीसरी पीढ़ी के बुनकर और पारंपरिक वस्त्रों के पुनरुद्धार से जुड़े Paresh Patel का नाम जुड़ा है। साड़ी की बुनाई में पारंपरिक तकनीक और कुशल हस्तकला का इस्तेमाल किया गया।
- रंग: मैजेंटा यानी गहरा गुलाबी रंग।
- कपड़ा और बुनाई: सिल्क ब्रोकेड की पारंपरिक आशावली शैली।
- डिजाइन: सुनहरे मोटिफ और बारीक सजावटी बॉर्डर।
- कारीगरी: रिपोर्टों के अनुसार, दो कारीगरों ने करीब पांच महीने तक काम किया।
- निर्माण से जुड़ा नाम: Royal Brocades और बुनकर Paresh Patel।
इस साड़ी की खासियत सिर्फ इसका रंग या डिजाइन नहीं, बल्कि इसके पीछे मौजूद पारंपरिक बुनाई का कौशल है। ऐसी हस्तनिर्मित साड़ियों में डिजाइन तैयार करने से लेकर धागों को बुनने और अंतिम फिनिशिंग तक काफी समय और धैर्य की जरूरत होती है।
600 साल पुरानी विरासत का क्या है मतलब?
नीता अंबानी की साड़ी को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में आशावली बुनाई की सदियों पुरानी परंपरा का उल्लेख किया गया है। इसे गुजरात की ऐतिहासिक वस्त्र कला से जोड़कर देखा जाता है। आशावली नाम का संबंध अहमदाबाद के पुराने नाम आशावल और साबरमती नदी के आसपास के ऐतिहासिक क्षेत्र से भी बताया जाता है।
हालांकि, यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। ‘600 साल पुरानी विरासत’ का संदर्भ पारंपरिक बुनाई की ऐतिहासिक जड़ों और कारीगरी से है। इसका अर्थ यह नहीं है कि नीता अंबानी ने जो साड़ी पहनी, वह स्वयं 600 साल पुरानी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह एक नई तैयार की गई साड़ी है, जिसे पारंपरिक आशावली तकनीक और डिजाइन से बनाया गया।
भारत में ऐसी क्षेत्रीय बुनाई शैलियां स्थानीय इतिहास, कारीगर समुदायों और पीढ़ियों से चली आ रही तकनीकों को आगे बढ़ाती हैं। इनका संरक्षण पारंपरिक हुनर को जीवित रखने के साथ-साथ बुनकरों की आजीविका के लिए भी महत्वपूर्ण है।
साड़ी तैयार करने में लगे पांच महीने
फैशन रिपोर्टों के अनुसार, आशावली साड़ी को तैयार करने में दो कारीगरों ने करीब पांच महीने तक काम किया। इसे गुजरात के रिड्रोल गांव में पारंपरिक जाला लूम पर बुने जाने की जानकारी दी गई है। जटिल ब्रोकेड डिजाइन में धागों को व्यवस्थित करना और पैटर्न को कपड़े पर उतारना विशेष कौशल की मांग करता है।
हाथ से बुने जाने वाले ऐसे परिधानों में मशीन से तैयार कपड़ों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। इसकी वजह डिजाइन की जटिलता, बुनाई की तकनीक और कारीगरों द्वारा की जाने वाली बारीक फिनिशिंग है।
पांच महीने का समय इस साड़ी के पीछे लगी मेहनत को दर्शाता है। हालांकि, यह समय इसी विशेष साड़ी के बारे में प्रकाशित रिपोर्टों से संबंधित है; हर आशावली साड़ी को तैयार करने में इतना ही समय लगे, यह जरूरी नहीं है। डिजाइन और बुनाई की जटिलता के अनुसार समय बदल सकता है।
पुराने वेलवेट कोटी ब्लाउज से मिला विंटेज लुक
नीता अंबानी ने साड़ी के साथ अपनी निजी कलेक्शन का वेलवेट कोटी ब्लाउज पहना। कोटी शैली का यह ब्लाउज साड़ी के पारंपरिक लुक के साथ अलग पहचान बनाता नजर आया। गहरे रंग के वेलवेट और साड़ी के मैजेंटा-सुनहरे संयोजन ने पहनावे को शाही अंदाज दिया।
उनके लुक में पारंपरिक आभूषणों का भी खास योगदान रहा। रिपोर्टों में उनके गहरे मैजेंटा और सफेद रंगों वाले लेयर्ड नेकलेस, स्टेटमेंट ईयररिंग्स, बिंदी और बालों में सजाए गए चमेली के फूलों का उल्लेख किया गया है। इन चीजों ने साड़ी की पारंपरिक खूबसूरती को और उभारा।
इस स्टाइलिंग में एक खास बात यह भी रही कि नया हस्तनिर्मित परिधान और पुराना ब्लाउज एक साथ इस्तेमाल किए गए। इससे यह संदेश सामने आया कि पारंपरिक कपड़ों को नए और पुराने परिधानों के मेल से भी अलग अंदाज में पहना जा सकता है।
स्वदेश की पहली वर्षगांठ पर ‘देवी शक्ति’ समारोह
स्वदेश की पहली वर्षगांठ के अवसर पर मुंबई में आयोजित समारोह का उद्देश्य भारतीय हस्तकला, पारंपरिक वस्त्रों और कारीगरों की प्रतिभा को सामने लाना था। इस आयोजन को ‘देवी शक्ति’ की थीम से भी जोड़ा गया, जिसमें नवरात्रि की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावना दिखाई दी।
कार्यक्रम में अंबानी परिवार के सदस्यों और मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने हिस्सा लिया। समारोह में पारंपरिक भारतीय परिधान, संगीत और उत्सवी माहौल ने लोगों का ध्यान खींचा। नीता अंबानी की आशावली साड़ी इसी सांस्कृतिक थीम का हिस्सा बनी।
स्वदेश की पहल भारतीय हस्तशिल्प और क्षेत्रीय कारीगरी को पहचान दिलाने पर केंद्रित है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से पारंपरिक वस्त्रों, हाथ से बने उत्पादों और स्थानीय कारीगरों के काम को बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
ईशा अंबानी ने मां नीता के साथ किया गरबा
समारोह का एक खास आकर्षण नीता अंबानी और ईशा अंबानी का गरबा प्रदर्शन रहा। ईशा अंबानी ने पारंपरिक परिधान में अपनी मां के साथ ‘जय मां अष्ट भवानी’ पर गरबा किया। नवरात्रि के दौरान गरबा गुजरात की प्रमुख सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है और इसे देवी शक्ति की आराधना से जोड़ा जाता है।
मां-बेटी का यह पल समारोह की सांस्कृतिक थीम के अनुरूप था। जहां नीता अंबानी की साड़ी ने गुजरात की पारंपरिक बुनाई को सामने रखा, वहीं गरबा प्रदर्शन ने उत्सव की भक्ति और लोक-संस्कृति को उजागर किया।
इस तरह कार्यक्रम में भारतीय परंपरा के दो अलग-अलग रूप देखने को मिले—एक ओर हाथ से तैयार की गई पारंपरिक साड़ी, दूसरी ओर नवरात्रि से जुड़ा लोकनृत्य।
आशावली बुनाई क्यों है महत्वपूर्ण?
आशावली जैसी पारंपरिक बुनाई शैलियां भारत की विविध वस्त्र विरासत का हिस्सा हैं। इनके डिजाइन और तकनीक स्थानीय इतिहास, कलात्मक कल्पना और कारीगरों के अनुभव से विकसित हुए हैं। पारंपरिक ब्रोकेड में बुनाई की बारीकी और पैटर्न की जटिलता इसे विशेष बनाती है।
ऐसी शैलियों को लोकप्रिय मंचों पर जगह मिलने से ग्राहकों का ध्यान हस्तनिर्मित वस्त्रों की ओर आकर्षित हो सकता है। इससे कारीगरों के काम, पारंपरिक तकनीकों और क्षेत्रीय कला को पहचान मिलने की संभावना बढ़ती है। हालांकि, किसी एक सेलिब्रिटी के पहनावे से कारीगरों की आय पर कितना प्रभाव पड़ा, यह अलग आंकड़ों के बिना तय नहीं किया जा सकता।
पारंपरिक वस्त्र खरीदते समय ग्राहक बुनकर या ब्रांड की जानकारी, निर्माण प्रक्रिया और उत्पाद की प्रामाणिकता के बारे में पूछ सकते हैं। इससे हस्तनिर्मित और पारंपरिक तकनीक से बने कपड़ों की पहचान करने में मदद मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. नीता अंबानी ने कौन-सी साड़ी पहनी?
नीता अंबानी ने स्वदेश की पहली वर्षगांठ के अवसर पर गुजरात की पारंपरिक आशावली सिल्क ब्रोकेड साड़ी पहनी। इसका रंग मैजेंटा था और इस पर सुनहरे डिजाइन व पारंपरिक बॉर्डर दिखाई दिए।
2. आशावली साड़ी बनाने में कितना समय लगा?
फैशन रिपोर्टों के अनुसार, इस विशेष साड़ी को तैयार करने में दो कारीगरों ने करीब पांच महीने तक काम किया।
3. क्या नीता अंबानी की साड़ी सचमुच 600 साल पुरानी है?
नहीं, उपलब्ध रिपोर्टों में 600 साल का संदर्भ आशावली बुनाई की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा है। नीता अंबानी की पहनी हुई साड़ी नई तैयार की गई बताई गई है।
4. आशावली बुनाई किस राज्य से जुड़ी है?
आशावली बुनाई गुजरात की पारंपरिक वस्त्र कला है। इसका ऐतिहासिक संबंध आशावल क्षेत्र और गुजरात की ब्रोकेड परंपरा से बताया जाता है।
5. नीता अंबानी ने साड़ी के साथ क्या पहना?
उन्होंने अपनी निजी कलेक्शन का वेलवेट कोटी ब्लाउज पहना। इसके साथ पारंपरिक आभूषण, बिंदी और बालों में चमेली के फूलों से लुक पूरा किया।
6. साड़ी किसने तैयार की?
रिपोर्टों के अनुसार, साड़ी Royal Brocades से जुड़ी है। इस ब्रांड का संबंध तीसरी पीढ़ी के बुनकर और टेक्सटाइल रिवाइवलिस्ट Paresh Patel से बताया गया है।
7. ईशा अंबानी ने किस गाने पर गरबा किया?
रिपोर्टों के मुताबिक, ईशा अंबानी ने अपनी मां नीता अंबानी के साथ ‘जय मां अष्ट भवानी’ पर गरबा किया।
8. यह कार्यक्रम किस अवसर पर आयोजित हुआ?
यह समारोह स्वदेश की पहली वर्षगांठ और ‘देवी शक्ति’ थीम के साथ आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भारतीय हस्तकला और नवरात्रि की सांस्कृतिक भावना को प्रमुखता दी गई।
9. आशावली ब्रोकेड की खासियत क्या है?
आशावली ब्रोकेड अपनी बारीक बुनाई, जटिल पैटर्न और पारंपरिक डिजाइन के लिए जाना जाता है। इसे तैयार करने में कारीगरों के विशेष कौशल की जरूरत होती है।
10. स्वदेश का मुख्य उद्देश्य क्या है?
स्वदेश भारतीय हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्रों और कारीगरों की कला को बढ़ावा देने पर केंद्रित पहल है। इसका उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कारीगरी को व्यापक पहचान दिलाना है।
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निष्कर्ष
नीता अंबानी की आशावली सिल्क साड़ी ने स्वदेश की पहली वर्षगांठ पर गुजरात की पारंपरिक बुनाई को चर्चा में ला दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस विशेष साड़ी को दो कारीगरों ने करीब पांच महीने में तैयार किया। पुराने वेलवेट कोटी ब्लाउज और पारंपरिक आभूषणों के साथ उनका लुक विरासत और आधुनिक स्टाइल का मेल रहा।
वहीं, ईशा अंबानी के साथ ‘जय मां अष्ट भवानी’ पर गरबा ने समारोह में नवरात्रि की सांस्कृतिक भावना को सामने रखा। यह आयोजन याद दिलाता है कि भारतीय परिधान केवल फैशन नहीं, बल्कि कारीगरों के कौशल, स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं की अभिव्यक्ति भी हैं।
अस्वीकरण: यह लेख प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। साड़ी की ऐतिहासिक विरासत, निर्माण अवधि और कार्यक्रम से संबंधित विवरणों में स्रोतों के अनुसार अंतर हो सकता है। 600 साल का उल्लेख आशावली बुनाई की परंपरा के संदर्भ में है, न कि पहनी गई साड़ी की वास्तविक उम्र के रूप में।





























