मंदसौर Treasure: नींव से निकले 700+ ब्रिटिशकालीन चांदी के सिक्के, बंटवारे ने खोल दिया राज
पुरखों की कच्ची दीवारों के नीचे दबी दौलत जब दशकों बाद बाहर आती है, तो अक्सर इंसानी लालच के सारे ताले तोड़ देती है। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के बरखेड़ी गांव में एक पुराने मकान का पुनर्निर्माण चल रहा था। फावड़े की चोट जैसे ही जमीन में एक भारी मटके से टकराई, मजदूरों की आंखें फटी की फटी रह गईं। मटका ब्रिटिश हुकूमत के दौर के शुद्ध चांदी के सिक्कों से लबालब भरा था। मजदूर और मकान मालिक ने तय किया कि बात गांव की चौखट के बाहर नहीं जाएगी। चुपचाप सिक्कों की गड्डियां बांटी गईं और जमीन का राज जमीन में ही दफन करने की कसम खाई गई।
मगर लालच के समीकरण कभी बराबर नहीं बैठते। इस कथित Mandsaur Treasure के बंटवारे में जब किसी एक हिस्सेदार को कम सिक्के मिले, तो महीनों दबा रहा यह रहस्य गाली-गलौज और हाथापाई के रूप में सड़क पर आ गया। बात थाने पहुंची और जो खजाना चार दीवारों में गुप्त रहना था, वह पूरे मालवा अंचल की सबसे बड़ी कानूनी व पुरातात्विक जांच बन गया। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज करते हुए 144 बेशकीमती चांदी के सिक्के जब्त कर लिए हैं, जबकि जमीन से निकले 700 से अधिक सिक्कों के बाकी हिस्से की बरामदगी के लिए दबिश जारी है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
घटनास्थल: मंदसौर जिले के सीतामऊ अनुभाग के अंतर्गत आने वाला बरखेड़ी गांव।
खजाने का स्वरूप: क्वीन विक्टोरिया, किंग एडवर्ड सप्तम और जॉर्ज पंचम के शासनकाल (1862 से 1918 के मध्य) के शुद्ध चांदी के सिक्के (रुपये)।
खुदाई का समय: पुराने पुश्तैनी मकान को तोड़कर नई नींव खोदने के दौरान मजदूरों को मिट्टी के घड़े में गड़ा हुआ मिला यह खजाना।
विवाद की वजह: बरामद 700 से अधिक सिक्कों को चारों आरोपियों ने आपस में बांट लिया था, लेकिन हिस्सेदारी के असंतुलन के बाद बात मारपीट और थाने तक पहुंच गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: पुलिस ने खजाने की सूचना छिपाने और गबन के आरोप में 4 लोगों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता व संबंधित अधिनियमों में मामला दर्ज किया।
अब तक बरामदगी: पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से प्राथमिक रूप से 144 चांदी के सिक्के बरामद किए, शेष 550+ सिक्कों की खोज जारी।
कानूनी पहलू: भारतीय खजाना अधिनियम (Indian Treasure Trove Act, 1878) के तहत जमीन से निकली किसी भी अज्ञात प्राचीन संपत्ति पर व्यक्तिगत नहीं बल्कि शासन का अधिकार होता है।
ताजा अपडेट: 144 सिक्के जब्त, शेष की तलाश में छापे
सीतामऊ थाना पुलिस के मुताबिक, मामले के मुख्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जब्त किए गए 144 सिक्कों का कुल वजन लगभग 1.6 किलोग्राम आंका गया है। हर एक सिक्के पर ‘One Rupee India’ और तत्कालीन ब्रिटिश सम्राटों के चेहरे स्पष्ट रूप से उत्कीर्ण हैं।
पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने उन मजदूरों और बिचौलियों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है, जिन्हें बाकी सिक्के बेचे जाने या छिपाए जाने की आशंका है। पुलिस ने स्थानीय सराफा व्यापारियों को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं कि यदि कोई भी व्यक्ति प्राचीन चांदी के सिक्के पिघलाने या बेचने आता है, तो तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दें। सूचना छिपाने वाले सुनारों को भी मामले में सह-आरोपी बनाया जाएगा।
बैकग्राउंड स्टोरी: बरखेड़ी के पुश्तैनी मकान का रहस्य
बरखेड़ी गांव का इतिहास मालवा के पुराने रजवाड़ों और व्यापारिक मार्गों से जुड़ा रहा है। जिस मकान में यह खजाना मिला, वह दशकों पुराना मिट्टी और गारे से बना पुश्तैनी घर था। परिवार के लोग लंबे समय से आर्थिक तंगी में जीवन यापन कर रहे थे और पक्के मकान के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा व्यक्तिगत बचत के जरिए काम शुरू कराया गया था।
रोचक तथ्य (Interesting Fact): 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में बैंक व्यवस्था सुलभ न होने के कारण मालवा के किसान और व्यापारी अपनी गाढ़ी कमाई को चांदी के सिक्कों में बदलकर मिट्टी के पक्के बर्तनों (घड़ों) में डालकर घर के मुख्य खंभों या नींव के नीचे गाड़ देते थे ताकि डकैतों और आपदाओं से धन सुरक्षित रहे।
मकान की नींव खोदने के लिए गांव के ही दो मजदूरों को लगाया गया था। करीब चार फीट नीचे मिट्टी हटाते ही खनखनाहट के साथ मटका फूटा। चांदी की चमक देखते ही काम तुरंत रोक दिया गया। उस समय चारों लोगों ने मिलकर तय किया कि यदि प्रशासन को खबर लगी तो सरकार सब कुछ जब्त कर लेगी, इसलिए रात के अंधेरे में सिक्के आपस में बांट लिए गए।
क्या हुआ था उस रात? लालच और बंटवारे का टकराव
शुरुआती जांच के अनुसार, घड़े में लगभग 700 से 750 सिक्के मौजूद थे। मुख्य हिस्सेदारों ने तय किया कि चारों लोग बराबर हिस्सेदारी करेंगे। लेकिन जब असल बंटवारा हुआ, तो मकान मालिक पक्ष ने जमीन अपनी होने का दावा करते हुए 400 से अधिक सिक्के अपने पास रख लिए और मजदूरों को केवल 50-50 सिक्के थमा दिए।
मजदूरों को लगा कि उनके साथ धोखा हुआ है। कुछ हफ्तों तक वे शांत रहे और अपने हिस्से के सिक्कों को स्थानीय स्तर पर औने-पौने दाम में बेचने की कोशिश की। लेकिन जब एक पक्ष ने शराब के नशे में दूसरे पक्ष पर अधिक सिक्के दबाने का आरोप लगाया, तो गांव के चौक पर दोनों पक्षों में लाठी-डंडे निकल आए।
शोर सुनकर ग्रामीण जमा हो गए। जब लोगों ने ‘चांदी के सिक्कों की चोरी’ की बात सुनी, तो मामला गांव के सरपंच और फिर सीधे पुलिस चौकी तक पहुंच गया। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो सारा कच्चा-चिट्ठा खुल चुका था।
बरामद सिक्कों का ऐतिहासिक विश्लेषण और विशेषताएं
पुरातत्व विभाग और इतिहासकारों के अनुसार, ब्रिटिश काल के इन चांदी के सिक्कों का पुरातात्विक और न्यूमिस्मैटिक (मुद्राशास्त्र) मूल्य उनकी धातु की कीमत से कई गुना अधिक है।
| सम्राट/रानी का नाम | शासन/सिक्के का काल | सिक्के का वजन (लगभग) | धातु संरचना (शुद्धता) | ऐतिहासिक महत्व |
| क्वीन विक्टोरिया (Victoria Empress) | 1862 – 1877 | 11.66 ग्राम | 91.7% शुद्ध चांदी (Standard Silver) | ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक |
| किंग एडवर्ड सप्तम (Edward VII) | 1903 – 1910 | 11.66 ग्राम | 91.7% शुद्ध चांदी | 20वीं सदी की शुरुआत का व्यापारिक मानक |
| किंग जॉर्ज पंचम (George V) | 1911 – 1920 | 11.66 ग्राम | 91.7% शुद्ध चांदी | प्रथम विश्व युद्ध के समय का भारतीय मुद्रा प्रवाह |
विशेषज्ञ नजरिया (Expert View): पुरातात्विक इतिहासकार डॉ. रमन त्रिवेदी के अनुसार:
“1862 के बाद जारी किए गए ब्रिटिश भारतीय रुपये शुद्ध चांदी के 11.66 ग्राम (एक तोला) के मानक पर ढाले जाते थे। इनमें 91.7% चांदी और 8.3% तांबा होता था। वर्तमान में सर्राफा बाजार में भले ही इनकी चांदी की कीमत ₹1,000 से ₹1,200 प्रति सिक्का आंकी जाए, लेकिन एंटीक और कलेक्टर्स मार्केट में एक दुर्लभ मिंट मार्क वाले सिक्के की कीमत ₹5,000 से ₹15,000 तक पहुंच जाती है।”
भारतीय खजाना अधिनियम 1878: कानून क्या कहता है?
अक्सर आम लोगों में यह भ्रांति होती है कि यदि उनके निजी खेत या मकान की जमीन से कोई पुरानी संपत्ति निकलती है, तो उस पर उनका मालिकाना हक होता है। लेकिन भारतीय कानून इस मामले में बेहद स्पष्ट और कड़ा है।
1. अनिवार्य सूचना का नियम
‘द इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ (The Indian Treasure Trove Act, 1878) की धारा 4 के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को ₹10 से अधिक मूल्य का कोई भी छिपा हुआ खजाना (सिक्के, गहने, सोना-चांदी) मिलता है, तो उसे तुरंत निकटतम जिला कलेक्टर या तहसीलदार को इसकी लिखित सूचना देनी होती है।
2. छिपाने पर दंडात्मक प्रावधान
यदि कोई व्यक्ति जमीन से मिले खजाने को जानबूझकर छिपाता है, पुलिस या प्रशासन को बताए बिना आपस में बांटता है या बेचता है:
उस खजाने पर उसका हर प्रकार का कानूनी दावा स्वतः समाप्त हो जाता है।
आरोपी के खिलाफ धारा 20 और 21 के तहत आपराधिक मामला दर्ज होता है, जिसमें कारावास और भारी जुर्माने की सजा है।
संबंधित खजाना पूरी तरह सरकारी संपत्ति (Government Property) घोषित कर दिया जाता है।
महत्वपूर्ण नोट (Important Note): यदि खोजने वाला व्यक्ति ईमानदारी से प्रशासन को सूचना देता है और जांच में साबित होता है कि खजाने का कोई वास्तविक उत्तराधिकारी नहीं है, तो कानून के तहत खजाने के कुल मूल्यांकित मूल्य का एक तय हिस्सा (रिवॉर्ड) खोजने वाले को कानूनी रूप से दिया जा सकता है।
महत्वपूर्ण तिथियां और जांच का घटनाक्रम
| चरण / तिथि | घटनाक्रम का विवरण | संबंधित पक्ष / जांच एजेंसी |
| लगभग 3 माह पूर्व | बरखेड़ी गांव में पुराने मकान की खुदाई के दौरान तांबे/मिट्टी के घड़े में सिक्के मिले | मकान मालिक एवं स्थानीय मजदूर |
| सिक्कों का गुप्त बंटवारा | बिना किसी को बताए चारों व्यक्तियों ने आपस में सिक्के बांटे | चारों मुख्य संदिग्ध |
| बीते 48 घंटे | सिक्कों की संख्या को लेकर विवाद, सार्वजनिक मारपीट और पुलिस हस्तक्षेप | सीतामऊ थाना पुलिस |
| जांच का पहला दिन | 4 आरोपियों पर आपराधिक मामला दर्ज, 144 चांदी के सिक्के बरामद | सीतामऊ पुलिस जांच टीम |
| आगामी कदम | पुरातत्व विभाग (ASI) को औपचारिक पत्र, शेष 550+ सिक्कों के लिए तलाश | जिला दंडाधिकारी एवं पुरातत्व दल |
समाज, ग्रामीणों और स्थानीय सराफा बाजार पर प्रभाव
इस घटना ने पूरे जिले में एक अजीब किस्म की हलचल पैदा कर दी है:
पुराने मकानों पर नजर: घटना के बाद आसपास के गांवों में पुराने और खंडहरनुमा मकानों के मालिकों में अपनी जमीनों को लेकर कौतूहल बढ़ गया है।
सर्राफा व्यापारियों में हड़कंप: पुलिस की सख्ती के बाद स्थानीय सराफा बाजार में कोई भी व्यापारी पुराने सिक्के खरीदने से बच रहा है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि बिना बिल या वैध पहचान के प्राचीन सिक्के खरीदने पर व्यापारी को चोरी का माल खरीदने (Section 317 BNS / पुरानी IPC 411) के दायरे में लाया जाएगा।
ग्रामीणों में कानूनी जागरूकता: इस केस ने आम ग्रामीणों को यह समझाया है कि गड़ा धन मिलने पर उसे आपस में बांटना फायदे का नहीं बल्कि जेल जाने का सौदा है।
भविष्य का परिदृश्य (Future Impact): आगे क्या होगा?
पुरातत्व विभाग की एंट्री: बरामद सभी 144 सिक्के अब जिला कोषागार (Treasury) में जमा किए जाएंगे। राज्य पुरातत्व विभाग की टीम सिक्कों के मिंट (टकसाल), जारी होने के वर्ष और ऐतिहासिक दुर्लभता का परीक्षण करेगी।
बाकी सिक्कों की रिकवरी: पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपियों के बयानों के आधार पर उन लोगों की पहचान कर रही है जिन्हें सिक्के बेचे गए थे। आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।
अदालती कार्यवाही: यदि आरोपी अदालत में यह साबित नहीं कर पाते कि यह सिक्के उनके पूर्वजों के वैध दस्तावेज आधारित संचय थे, तो पूरी संपत्ति राज्य के अधीन कर दी जाएगी।
आम नागरिकों और पाठकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश
यदि कभी आपको अपने घर, खेत या किसी सार्वजनिक स्थान पर खुदाई के दौरान कोई प्राचीन वस्तु, सिक्के या धातु मिलती है, तो यह कदम उठाएं:
वस्तु को न छुएं और न बांटें: खुदाई को तुरंत रोक दें और उस स्थान की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी कर सुरक्षित करें।
तहसीलदार या पुलिस को सूचित करें: तत्काल स्थानीय पटवारी, तहसीलदार या नजदीकी थाने में लिखित सूचना दें।
कानूनी अधिकार सुरक्षित रखें: सूचना की एक पावती (Receipt) अपने पास रखें। कानून के तहत समय पर सूचना देने वाले को सरकारी संरक्षण और तय मुआवजा प्राप्त करने का विधिक अधिकार मिलता है।
कालाबाजारी से बचें: किसी भी सुनार या बिचौलिए के झांसे में आकर प्राचीन सिक्के न बेचें; यह गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. मंदसौर Treasure का यह मामला वास्तव में क्या है?
मंदसौर जिले के बरखेड़ी गांव में एक पुराने मकान की नींव की खुदाई के दौरान 700 से अधिक ब्रिटिशकालीन चांदी के सिक्के मिले थे। इन सिक्कों को मजदूरों और मकान मालिक ने गुप्त रूप से बांट लिया था, जिसके विवाद के बाद पुलिस ने 144 सिक्के बरामद किए।
2. बरामद सिक्के किस काल के हैं और उनकी खासियत क्या है?
ये सिक्के 1862 से 1918 के बीच के हैं, जिन पर क्वीन विक्टोरिया, एडवर्ड सप्तम और जॉर्ज पंचम के चित्र अंकित हैं। ये 91.7% शुद्ध चांदी से बने 11.66 ग्राम वजन के ब्रिटिश भारतीय रुपये हैं।
3. जमीन से निकला गड़ा धन किसका होता है?
‘द इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट 1878’ के तहत जमीन से निकली ₹10 से अधिक मूल्य की कोई भी लावारिस या प्राचीन निधि पूरी तरह शासन की होती है। जमीन का मालिक होने से गड़े खजाने पर स्वतः अधिकार नहीं मिलता।
4. पुलिस ने आरोपियों पर क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने सूचना छिपाने, गबन करने और सरकारी संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के आरोप में चार लोगों पर मामला दर्ज किया है और 144 सिक्के जब्त कर शेष सिक्कों की तलाश शुरू कर दी है।
5. क्या गड़ा खजाना मिलने की सूचना देने वाले को कोई इनाम मिलता है?
हां। यदि कोई व्यक्ति कानून का पालन करते हुए खजाना मिलने की सूचना तुरंत कलेक्टर को देता है, तो कानूनी जांच पूरी होने के बाद सरकार उसे खजाने के मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत पुरस्कार के रूप में दे सकती है।
6. शेष 550 से अधिक सिक्के कहां हैं?
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कुछ सिक्के रिश्तेदारों के पास छिपाने और कुछ स्थानीय स्तर पर बेचने की बात स्वीकारी है। पुलिस टीमें उनकी बरामदगी के लिए दबिश दे रही हैं।
7. क्या इन सिक्कों को बाजार में सामान्य रूप से बेचा जा सकता है?
नहीं। 100 वर्ष से अधिक पुरानी वस्तुएं एंटीक (Antiquity) के दायरे में आती हैं। एंटीक्विटीज एंड आर्ट ट्रेजर्स एक्ट 1972 के तहत बिना लाइसेंस के इनका क्रय-विक्रय या पिघलाना पूरी तरह गैरकानूनी है।
8. इन सिक्कों का अब क्या किया जाएगा?
जब्त सिक्कों को जिला कोषागार में सुरक्षित रखा जाएगा। पुरातत्व विभाग के परीक्षण के बाद इन्हें राज्य संग्रहालय (State Museum) में प्रदर्शित करने या सरकारी अभिलेखागार में रखने का निर्णय लिया जाएगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
मंदसौर के बरखेड़ी गांव का यह घटनाक्रम यह स्पष्ट संदेश देता है कि लालच और गोपनीयता कभी भी कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकते। जिस खजाने को जमीन से निकालकर चारों लोग रातों-रात अमीर बनने का सपना देख रहे थे, उसी के असंतुलित बंटवारे ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
इतिहास की यह अनमोल धरोहर अब सरकारी संरक्षण में जाकर हमारे समृद्ध अतीत की गवाही देगी। नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी प्रकार की पुरातात्विक खोज को व्यक्तिगत लाभ का माध्यम बनाने के बजाय राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर मानकर प्रशासन को सौंपें। इस मामले से जुड़ी कानूनी जांच और सिक्कों की बरामदगी के आगामी विवरण के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के आधिकारिक बुलेटिन पर नजर बनाए रखें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह समाचार लेख पुलिस प्राथमिक सूचना (FIR), स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के बयानों और विधिक प्रावधानों के आधार पर जन-जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बरामद सिक्कों की अंतिम संख्या, उनकी धातु शुद्धता और कानूनी मुकदमों के अंतिम फैसले न्यायालय एवं पुरातत्व विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अधीन हैं।





























