Happy Teachers’ Day 2026: शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं, मैसेज और शानदार Quotes
5 सितंबर को Teachers’ Day पर अपने गुरु और शिक्षकों को भेजें दिल छू लेने वाली Wishes, Messages, Quotes और WhatsApp Status
काली स्लेट पर चाक की पहली लकीर खींचने से लेकर जीवन के सबसे कठिन इम्तिहानों में सही राह दिखाने तक, एक शिक्षक की भूमिका केवल किताबी ज्ञान बांटने तक सीमित नहीं होती। वह कच्ची मिट्टी को तराशकर राष्ट्र का सशक्त आधारस्तंभ तैयार करता है। 5 सितंबर का ऐतिहासिक दिन उसी पावन गुरु-शिष्य परंपरा और राष्ट्र निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। भारत के दूसरे राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में देशभर में यह पावन अवसर पूरे सम्मान के साथ मनाया जाता है। यदि आप भी अपने आदरणीय गुरुजनों, मेंटर्स और मार्गदर्शकों को सम्मानपूर्वक शिक्षक दिवस शुभकामनाएं प्रेषित करने के लिए प्रेरणादायक संदेश, संस्कृत श्लोक और दिल को छू लेने वाले शब्द तलाश रहे हैं, तो यह विशेष संकलन आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
दिलचस्प तथ्य (Interesting Fact): जब 1962 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तो उनके शिष्यों और प्रशंसकों ने उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति मांगी थी। इसके उत्तर में उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा था—”मेरे जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय यदि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा गौरव होगा।” तभी से भारत में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
मुख्य बिंदु: शिक्षक दिवस 2026 के 7 प्रमुख आकर्षण एवं संदेश (Key Highlights)
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पावन स्मृति: भारतीय संस्कृति, दर्शन और शिक्षा जगत के प्रकाशस्तंभ की 138वीं जयंती का पावन अवसर।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026: राष्ट्रपति भवन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के चयनित शिक्षकों को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय सम्मान।
शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता का दिन: स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भाषण प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन।
डिजिटल युग में गुरु-शिष्य संवाद: सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, फेसबुक और लिंक्डइन के माध्यम से पुराने गुरुओं को याद कर आभार व्यक्त करने का बढ़ता प्रचलन।
सर्वश्रेष्ठ शुभकामना संदेश एवं कोट्स: अध्यापकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए हृदयस्पर्शी हिंदी और संस्कृत शुभकामनाओं का समृद्ध संकलन।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का व्यावहारिक क्रियान्वयन: 21वीं सदी में नवाचार, अनुभवात्मक शिक्षण (Experiential Learning) और तकनीकी कौशल से लैस आधुनिक शिक्षकों की महत्ता।
आजीवन मार्गदर्शन का संकल्प: केवल औपचारिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि खेल, कला, तकनीकी और जीवन मूल्यों के क्षेत्र में रास्ता दिखाने वाले हर मार्गदर्शक का सम्मान।
ताजा अपडेट: राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार और देशभर में उल्लास (Latest Update)
5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भव्य राष्ट्रीय समारोह में देश के कोने-कोने से चुने गए सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया जा रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में शिक्षकों को भविष्योन्मुखी शिक्षा का सच्चा संवाहक बताते हुए कहा कि आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल टूल्स के दौर में भी एक मानवीय शिक्षक की सहानुभूति, मार्गदर्शन और नैतिक दृष्टि का कोई विकल्प नहीं हो सकता। देशभर के सभी केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, राजकीय व निजी शैक्षणिक संस्थानों में छात्र-छात्राएं विभिन्न रोचक प्रस्तुतियां देकर अपने प्रिय अध्यापकों के प्रति सम्मान प्रकट कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि: डॉ. राधाकृष्णन का प्रेरक जीवन और शिक्षक दिवस की ऐतिहासिक शुरुआत (Background Story)
5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तनी में जन्मे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक साधारण परिवार से निकलकर वैश्विक स्तर के प्रख्यात दार्शनिक बने। उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज, मैसूर विश्वविद्यालय और कलकत्ता विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक के रूप में सेवा दी। इसके बाद वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पूर्वी धर्म और नैतिकता के पीठ के प्रोफेसर रहे और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति के रूप में भी उच्च शिक्षा का कुशल नेतृत्व किया।
वे मानते थे कि जब तक देश के सर्वश्रेष्ठ मस्तिष्क शिक्षक नहीं बनेंगे, तब तक राष्ट्र निर्माण की गति अधूरी रहेगी। 1962 में उनके राष्ट्रपति बनने के बाद से ही 5 सितंबर को शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित किया गया। दुनिया के कई देश 5 अक्टूबर को ‘विश्व शिक्षक दिवस’ (World Teachers’ Day) मनाते हैं, लेकिन भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अगाध आदर के कारण 5 सितंबर को ही राष्ट्रीय शिक्षक दिवस का गौरवशाली अनुष्ठान करता है।
पाठक सतर्कता (Reader Alert): सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले अनवेरिफाइड फॉरवर्ड्स के बजाय अपने संदेशों में व्यक्तिगत आदर, शालीनता और गुरु-शिष्य मर्यादा का विशेष ध्यान रखें। किसी भी शिक्षक के लिए उनके पढ़ाए छात्र की वास्तविक सफलता और विनम्रता ही सबसे बड़ा उपहार होती है।
शिक्षक दिवस 2026: सर्वश्रेष्ठ शुभकामना संदेश, शायरी और कोट्स (Best Wishes & Quotes)
अपने आदरणीय शिक्षकों और मार्गदर्शकों को भेजने के लिए यहां चुनिंदा और प्रभावी संदेशों का विशेष संकलन प्रस्तुत है:
1. आदरणीय शिक्षकों के लिए औपचारिक एवं हृदयस्पर्शी संदेश
“अक्षर-अक्षर हमें सिखाते, शब्द-शब्द का अर्थ बताते, कभी प्यार से कभी डांट से, जीवन जीना हमें सिखाते। शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं सर!”
“गुरु का स्थान सबसे ऊंचा, ईश्वर से भी पहले दूजा। आपने तराशा हमें इस काबिल, हर मुश्किल अब लगती आसान। आदरणीय गुरुजी को शिक्षक दिवस की अशेष मंगलकामनाएं!”
“आपने केवल किताबें नहीं पढ़ाईं, बल्कि जीवन की चुनौतियों से लड़ना सिखाया। सही और गलत में फर्क करना सिखाने वाले मेरे सर्वश्रेष्ठ शिक्षक को सादर प्रणाम।”
“ज्ञान का दीपक जलाकर जिसने दूर किया अज्ञान का अंधकार, उस पावन गुरु चरणों में मेरा कोटि-कोटि नमस्कार। Happy Teachers’ Day 2026!”
2. संस्कृत के पावन गुरु श्लोक और उनका अर्थ
श्लोक:
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं और गुरु ही भगवान शंकर हैं। गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, ऐसे पूज्य गुरुदेव को मेरा बारंबार नमन।
श्लोक:
अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
अर्थ: जिसने अज्ञान रूपी अंधकार से अंधी हुई आंखों को ज्ञान रूपी शलाका (सलाई) से खोल दिया, उस परम गुरु को मेरा शत-शत प्रणाम।
3. व्हाट्सएप स्टेटस और सोशल मीडिया के लिए छोटे कोट्स (Short Quotes)
“एक अच्छा शिक्षक आशा जगाता है, कल्पना को प्रज्वलित करता है और सीखने का प्रेम पैदा करता है।”
“माता-पिता जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक जीवन जीने की कला सिखाते हैं। Happy Teachers’ Day!”
“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे आप दुनिया बदल सकते हैं, और शिक्षक उस हथियार को चलाना सिखाते हैं।”
“गुरु तेरे उपकार का, कैसे चुकाऊं मैं मोल? लाख कीमती धन भला, गुरु हैं मेरे अनमोल।”
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: जीवन वृत्त एवं ऐतिहासिक उपलब्धियां (Historical Milestones Table)
नीचे दी गई तालिका में भारत के महान दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का प्रामाणिक ब्योरा दिया गया है:
| ऐतिहासिक वर्ष / कालखंड | महत्वपूर्ण घटना / पदभार | राष्ट्रीय एवं वैश्विक प्रभाव |
| 05 सितंबर 1888 | तिरुत्तनी (तमिलनाडु) में जन्म | साधारण पृष्ठभूमि से वैश्विक दार्शनिक बनने का सफर |
| 1918 – 1921 | मैसूर विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर | भारतीय दर्शन और उपनिषदों की तार्किक व्याख्या |
| 1936 – 1952 | ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Spalding Professor) | पश्चिमी जगत में भारतीय चिंतन और अद्वैत वेदांत की प्रतिष्ठा |
| 1939 – 1948 | बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति | स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रवादी शिक्षा का पोषण |
| 1952 – 1962 | भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति | राज्यसभा के सभापति के रूप में उच्च संसदीय मर्यादाओं की स्थापना |
| 1954 | ‘भारत रत्न’ से अलंकृत | देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के पहले प्राप्तकर्ताओं में शामिल |
| 1962 – 1967 | भारत के दूसरे राष्ट्रपति | 1962, 1965 के युद्ध संकट के दौरान राष्ट्र का नैतिक नेतृत्व |
| 1962 से निरंतर | 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ की शुरुआत | शिक्षकों के सम्मान का अखिल भारतीय वार्षिक महापर्व |
विशेषज्ञ विश्लेषण: आधुनिक दौर में शिक्षक की बदलती भूमिका (Expert Analysis)
वरिष्ठ शिक्षाविदों और बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार:
“डिजिटल सूचना क्रांति और इंटरनेट के इस दौर में ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक क्लिक पर उपलब्ध है। ऐसे में 21वीं सदी के शिक्षक की भूमिका केवल ‘सूचना देने वाले’ (Information Provider) की नहीं, बल्कि एक ‘सहजकर्ता’ (Facilitator), प्रेरक और नैतिक मार्गदर्शक की हो गई है। शिक्षक दिवस शुभकामनाएं केवल एक रस्म नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का आत्ममंथन है कि समाज अपने शिक्षकों को कितना स्वायत्त, सम्मानित और साधन-संपन्न बना रहा है। जब तक शिक्षक का सामाजिक दर्जा ऊंचा नहीं होगा, तब तक कोई भी शिक्षा नीति अपने अंतिम लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकती।”
— प्रो. यशपाल त्रिवेदी शैली विश्लेषण, प्रख्यात शिक्षा नीति सलाहकार एवं पूर्व कुलपति
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार के बीच विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संबल के लिए मानवीय गुरु की उपस्थिति पहले से कहीं अधिक अपरिहार्य हो गई है।
आधिकारिक जानकारी एवं शिक्षा मंत्रालय की पहलें (Official Information: Ministry of Education)
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग) द्वारा शिक्षकों के संवर्धन के लिए संचालित प्रमुख योजनाएं:
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (NAT): प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के नवाचार, आईसीटी (ICT) के प्रयोग और सामुदायिक सहभागिता को सम्मानित करने की पारदर्शी राष्ट्रीय प्रक्रिया।
निष्ठा (NISHTHA) प्रशिक्षण कार्यक्रम: प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों के क्षमता निर्माण और समग्र विकास के लिए दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षक प्रशिक्षण डिजिटल अभियान।
दीक्षा (DIKSHA) पोर्टल: शिक्षकों के लिए ई-कंटेंट, टीचिंग लर्निंग मैटेरियल (TLM) और पाठ्य योजनाओं को साझा करने का एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म।
विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी पर इस दिन का वास्तविक प्रभाव (Student & Youth Impact)
शिक्षक दिवस का आयोजन युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण और शैक्षणिक दृष्टिकोण में गहरा बदलाव लाता है:
कृतज्ञता बोध (Gratitude Mindset): छात्रों में उन व्यक्तियों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करने की भावना प्रबल होती है जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को संवारने के लिए निस्वार्थ परिश्रम किया।
शिक्षकों की कठिनाइयों की समझ: कई विद्यालयों में इस दिन वरिष्ठ छात्र स्वयं शिक्षक की भूमिका निभाते हैं (Student-Teacher Activity), जिससे उन्हें अध्यापन कार्य की चुनौतियों और धैर्य का व्यावहारिक अनुभव होता है।
करियर चयन में प्रेरणा: उत्कृष्ट अध्यापकों के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर कई मेधावी छात्र शिक्षण को एक गरिमापूर्ण और रचनात्मक प्रोफेशन के रूप में चुनने के लिए प्रेरित होते हैं।
भविष्य का दृष्टिकोण: भावी भारत के निर्माण में शिक्षकों का योगदान (Future Impact)
1. विकसित भारत 2047 की आधारशिला
भारत को ज्ञान आधारित महाशक्ति (Knowledge Superpower) बनाने का सपना केवल कक्षाओं के भीतर से ही साकार हो सकता है, जहां शिक्षक युवा मस्तिष्कों में नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बीज बोते हैं।
2. हाइब्रिड और स्मार्ट कक्षाओं का नेतृत्व
भविष्य के शिक्षक डिजिटल तकनीकों, वर्चुअल लैब्स और एआई टूल्स का उपयोग करके शिक्षा को अधिक समावेशी और व्यक्तिगत बनाएंगे।
3. सामाजिक सुधार और नैतिक मूल्य
बढ़ती भौतिकता और सामाजिक तनावों के बीच भावी पीढ़ियों में मानवीय करुणा, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों को जीवित रखने का दायित्व शिक्षकों पर ही रहेगा।
विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के लिए आज के दिन जरूरी सुझाव (What Should Students Do?)
अपने पुराने शिक्षकों से संपर्क करें: स्कूल या कॉलेज छोड़े चाहे कितने भी वर्ष बीत गए हों, आज के दिन अपने किसी पुराने शिक्षक को कॉल करें या व्यक्तिगत संदेश भेजकर आभार अवश्य व्यक्त करें।
शिक्षकों के साथ सम्मानजनक संवाद बनाएं: सोशल मीडिया पर अपने शिक्षकों के सकारात्मक योगदान को साझा करें और उन्हें आश्वस्त करें कि उनकी सीख आपके जीवन में जीवित है।
सीखने की ललक बनाए रखें: किसी भी शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पारितोषिक यह होता है कि उसका छात्र निरंतर कुछ नया सीखे, सत्य के मार्ग पर चले और एक संवेदनशील नागरिक बने।
निष्कर्ष (Conclusion)
गुरु-शिष्य का संबंध केवल एक शैक्षणिक सत्र तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवन भर चलने वाला एक आध्यात्मिक और नैतिक बंधन है। शिक्षक दिवस शुभकामनाएं प्रेषित करने का यह पावन दिन हमें याद दिलाता है कि हम आज जीवन के जिस भी मुकाम पर खड़े हैं, उसके पीछे किसी न किसी शिक्षक के अनथक परिश्रम, धैर्य और विश्वास की मजबूत नींव मौजूद है। 5 सितंबर 2026 के इस ऐतिहासिक अवसर पर आइए हम सभी मिलकर अपने गुरुजनों के श्रीचरणों में कृतज्ञता का शीश नवाएं, उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारें और एक ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प लें जहां शिक्षकों का मान-सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता पर हो। समस्त गुरुजनों को शिक्षक दिवस की अशेष शुभकामनाएं!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions – FAQs)
Q1: भारत में शिक्षक दिवस प्रतिवर्ष 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद और प्रख्यात दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। उनके जन्मदिवस को उनके विनम्र अनुरोध पर शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित करते हुए 1962 से ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
Q2: शिक्षक दिवस 2026 की मुख्य प्रासंगिकता क्या है?
उत्तर: 5 सितंबर 2026 का अवसर डॉ. राधाकृष्णन की 138वीं जयंती का प्रतीक है। यह दिन आधुनिक डिजिटल युग में शिक्षकों के अमूल्य योगदान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और राष्ट्र निर्माताओं के प्रति आभार व्यक्त करने का एक राष्ट्रीय मंच है।
Q3: विश्व शिक्षक दिवस (World Teachers’ Day) और भारत के शिक्षक दिवस में क्या अंतर है?
उत्तर: भारत में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस प्रतिवर्ष 5 सितंबर को डॉ. राधाकृष्णन की जयंती पर मनाया जाता है, जबकि यूनेस्को (UNESCO) द्वारा घोषित ‘विश्व शिक्षक दिवस’ संपूर्ण विश्व में प्रतिवर्ष 5 अक्टूबर को मनाया जाता है।
Q4: शिक्षक दिवस पर अपने गुरु को भेजने के लिए सबसे अच्छा संदेश कौन सा है?
उत्तर: आप लिख सकते हैं—”अक्षर-अक्षर हमें सिखाते, शब्द-शब्द का अर्थ बताते, जीवन की कठिन राहों में सही मार्ग दिखाते। पूज्य गुरुदेव को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! आपके दिए ज्ञान और संस्कारों के लिए सदैव आभारी रहूंगा।”
Q5: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को ‘भारत रत्न’ से कब सम्मानित किया गया था?
उत्तर: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को वर्ष 1954 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया गया था। वे इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्राप्त करने वाले देश के प्रथम व्यक्तियों में शामिल थे।
Q6: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार किसके द्वारा प्रदान किया जाता है?
उत्तर: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रतिवर्ष 5 सितंबर को भारत के राष्ट्रपति द्वारा विज्ञान भवन (नई दिल्ली) में आयोजित एक गरिमामय राजकीय समारोह में देश के चयनित उत्कृष्ट शिक्षकों को प्रदान किया जाता है।
Q7: स्कूलों और कॉलेजों में छात्र शिक्षक दिवस कैसे मनाते हैं?
उत्तर: छात्र अपने शिक्षकों के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक, भाषण और कविताओं का आयोजन करते हैं। कई विद्यालयों में परंपरा के अनुसार वरिष्ठ कक्षाओं के छात्र स्वयं शिक्षक की भूमिका निभाकर कक्षाओं का संचालन करते हैं।
Q8: क्या शिक्षक दिवस पर सरकारी अवकाश (Public Holiday) होता है?
उत्तर: नहीं, शिक्षक दिवस पर सामान्यतः सार्वजनिक अवकाश नहीं होता है। सभी शैक्षणिक संस्थानों में नियमित कक्षाओं के स्थान पर उत्सव, विचार गोष्ठियां, सम्मान सभाएं और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
अस्वीकरण (Disclaimer): प्रस्तुत आलेख भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, ऐतिहासिक अभिलेखों, जीवनी संदर्भों और स्थापित सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर विशुद्ध रूप से शैक्षणिक एवं सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य महान शिक्षकों के योगदान का स्मरण करना और सामाजिक कृतज्ञता को बढ़ावा देना है।

























