RSS प्रमुख भागवत: पहलगाम हमले से मिली सीख, जाने कौन हैं मित्र
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एक बार फिर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने 2 अक्टूबर 2025 को नागपुर के रेशिमबाग में आयोजित विजयादशमी समारोह में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद विभिन्न देशों द्वारा अपनाई गई भूमिका से यह स्पष्ट हो गया कि कौन से देश वास्तव में भारत के मित्र हैं और कहां तक। RSS की स्थापना के शताब्दी वर्ष के इस विशेष अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर आर्थिक आत्मनिर्भरता तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखे।

पहलगाम हमले पर भागवत का मूल्यांकन
26 निर्दोष तीर्थयात्रियों की हत्या
भागवत ने पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि “22 अप्रैल की घटना जिसमें सीमा पार के आतंकियों ने 26 भारतीय नागरिकों से उनका धर्म पूछकर हत्या की, इससे पूरे देश में प्रचंड दुख और क्रोध की लहर पैदा हुई”। उन्होंने इस हमले को भारतीय एकता पर एक सीधा हमला बताया।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता
RSS प्रमुख ने सरकार और सेना की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि “पूरी तैयारी करके सरकार ने हमारी सेना ने उसका बहुत पुरजोर उत्तर दिया”। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने आतंकियों का सफाया किया था। उन्होंने कहा कि “सारे प्रकरण में हमारी नेतृत्व की दृढ़ता, हमारी सेना का शौर्य, कौशल्य और समाज की एकता और दृढ़ता का एक उत्तम चित्र प्रस्थापित हुआ”।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका का विश्लेषण
सच्चे मित्रों की पहचान
भागवत ने एक स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि “यद्यपि हम सबके प्रति मित्र भाव रखते हैं और रखेंगे, फिर भी अपनी सुरक्षा के विषय में हमको अधिकाधिक सजग रहना पड़ेगा। समर्थ बनना पड़ेगा। क्योंकि इस घटना के बाद दुनिया में विभिन्न देशों ने अपनी-अपनी जो भूमिका ली उसमें हमारी यह भी ध्यान में आया कि हमारे मित्र कौन-कौन है और कहां तक है”।
राजनयिक संदेश
यह बयान स्पष्ट रूप से उन देशों की तरफ इशारा है जिन्होंने पहलगाम हमले के बाद भारत का साथ नहीं दिया या आतंकवाद की निंदा करने में देरी की। भागवत का यह कहना कि “हालांकि हम सभी के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखते हैं और रखेंगे, लेकिन जब हमारी सुरक्षा की बात आती है तो हमें अधिक सावधान, अधिक सतर्क और मजबूत होना होगा”, भारत की नई कूटनीतिक नीति को दर्शाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर भागवत के विचार
आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां
RSS प्रमुख ने आंतरिक सुरक्षा स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “देश के अंदर भी अशांति फैलाने वाले असंवैधानिक उग्रवादी या संविधान विरोधी कहिए उग्रवादी नक्सली आंदोलन पर शासन और प्रशासन की दृढ़ कार्रवाई भी हुई”।
नक्सली समस्या का समाधान
भागवत ने बताया कि “उग्रवादी नक्सली आंदोलन को बड़े पैमाने पर नियंत्रण में लाया गया है” राज्य की दृढ़ कार्रवाई और जनता की तरफ से उनकी विचारधारा की खोखलेपन की समझ के कारण। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि प्रभावित क्षेत्रों में न्याय, विकास और सद्भावना सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता का संदेश
अमेरिकी टैरिफ नीति पर चिंता
भागवत ने भारत की आर्थिक नीति पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “अमेरिका की टैरिफ नीति, जो पूरी तरह से अपने स्वार्थ पर आधारित है, हमारे लिए चुनौती नहीं बननी चाहिए”। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के महत्व पर जोर दिया।
स्वदेशी और स्वावलंबन
RSS प्रमुख ने कहा कि “आत्मनिर्भर बनकर और वैश्विक एकता के प्रति सचेत रहते हुए, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह वैश्विक परस्परता हमारे लिए बाध्यता न बन जाए”। उन्होंने स्वदेशी और स्वावलंबन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि “आत्मनिर्भरता का कोई विकल्प नहीं है”।
क्षेत्रीय चुनौतियों पर नजरिया
पड़ोसी देशों में अशांति
भागवत ने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुई अशांति की ओर इशारा करते हुए कहा कि “पड़ोसी देशों में हिंसक शासन परिवर्तन भारत के लिए चिंता का कारण है”। उन्होंने कहा कि “इन देशों में शांति, स्थिरता और समृद्धि न केवल हमारी प्राकृतिक निकटता के कारण बल्कि उनके साथ हमारे घनिष्ठ संबंधों की आवश्यकता है”।
दक्षिण एशिया के लिए चेतावनी
RSS प्रमुख ने जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और हिमालयी आपदाओं को भौतिकवादी और उपभोक्तावादी विकास मॉडल के खतरों से जोड़ते हुए इसे “भारत और दक्षिण एशिया के लिए चेतावनी की घंटी” बताया।
विजयादशमी समारोह की विशेषताएं
RSS की शताब्दी का विशेष अवसर
यह विजयादशमी समारोह RSS के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि संगठन अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर रहा है। 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा नागपुर में स्थापित RSS का यह शताब्दी वर्ष है।
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उपस्थित थे। समारोह में हजारों स्वयंसेवकों ने सामूहिक अभ्यास और संघ गीत प्रस्तुत किए।
हिंदू एकता और सामाजिक सद्भावना
जाति-धर्म से ऊपर एकता
भागवत के विजयादशमी भाषणों में हमेशा हिंदू एकता का संदेश होता है। उन्होंने जाति, पंथ या धर्म के आधार पर समाज में विभाजन के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे विभाजन राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक हैं।
संवैधानिक मूल्यों का समर्थन
RSS प्रमुख ने संवैधानिक मूल्यों के समर्थन की बात कहते हुए असंवैधानिक तत्वों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत पर बल दिया।
वैश्विक मुद्दों पर RSS का दृष्टिकोण
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन
भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत सभी देशों के साथ मित्रता बनाए रखेगा लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होंगे। उन्होंने कहा कि “हम सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखते हैं और रखेंगे, लेकिन हमारी सुरक्षा के मामले में हमें अधिक सावधान रहना होगा”।
आत्मनिर्भरता बनाम वैश्वीकरण
RSS प्रमुख ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के नकारात्मक पहलुओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि “बढ़ती वैश्विक असमानताएं, पर्यावरणीय गिरावट और मानवीय संबंधों में लेन-देन की प्रवृत्ति मौजूदा आर्थिक मॉडल की गहरी खामियां हैं”।
भारत की रक्षा क्षमताओं का आकलन
सेना और नेतृत्व की प्रशंसा
भागवत ने पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना और नेतृत्व की तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि “हमारी नेतृत्व की दृढ़ता, हमारी सेना का शौर्य और युद्ध-तत्परता, और हमारे समाज का दृढ़ संकल्प और एकता” का प्रदर्शन हुआ।
भविष्य की तैयारी
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा क्षमताओं को और भी मजबूत बनाना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि “हमें इस चुनौती के लिए सचेत रहना होगा, इसका अडिग होकर सामना करना होगा”।
समाज और राज्य की भूमिका
न्याय और विकास की आवश्यकता
भागवत ने कहा कि “न्याय की स्थापना, विकास का पहुंचना, सद्भावना, संवेदना और सामरस्य की स्थापना के लिए समाज और शासन-प्रशासन की योजनाएं चलानी होंगी”। उन्होंने चेतावनी दी कि इनका अभाव उग्रवादी ताकतों के पनपने का कारण बनता है।
लोकतांत्रिक समाधान
RSS प्रमुख ने सामाजिक असंतोष के लिए लोकतांत्रिक समाधानों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “जो लोग सिस्टम की सुस्ती से परेशान हैं वे ऐसे उग्रवादी तत्वों का समर्थन करते हैं। इसे रोकने के लिए राज्य और समाज को मिलकर ऐसी पहल करनी होगी जो लोगों को सिस्टम में विश्वास दिलाए”।
भविष्य की रणनीति और दिशा
बहुआयामी चुनौतियों का सामना
भागवत ने स्वीकार किया कि भारत को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है – आंतरिक सुरक्षा से लेकर आर्थिक आत्मनिर्भरता तक। उन्होंने कहा कि इन सभी चुनौतियों का समाधान एक समग्र दृष्टिकोण से करना होगा।
सामाजिक एकता की आवश्यकता
RSS प्रमुख ने सामाजिक एकता को राष्ट्रीय शक्ति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि “समाज की एकता और दृढ़ता” ही भारत की वास्तविक ताकत है।
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Disclaimer: यह लेख RSS के आधिकारिक विजयादशमी समारोह, मोहन भागवत के भाषण और प्रतिष्ठित मीडिया स्रोतों की रिपोर्ट्स पर आधारित है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर अलग-अलग मत हो सकते हैं। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है और किसी राजनीतिक संगठन या विचारधारा का प्रचार नहीं है। व्यक्तिगत राय बनाने से पहले विभिन्न स्रोतों से जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।
आग्रह और आपके अमूल्य सुझाव
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