लखनऊ में अमित शाह का ‘गोमती संदेश’, योगी ने याद दिलाई आडवाणी की विचारधारा
अमित शाह गोमती नदी बयान: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता अपने मन की निराशा और नाराजगी गोमती नदी में डालकर जाएं और संगठन के काम में जुटें। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की उस बात का उल्लेख किया, जिसमें पार्टी के मूल्यों, आदर्शों और विचारधारा को राजनीतिक प्राथमिकताओं से ऊपर बताया गया था।
30 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित इस बैठक में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज, कार्यकर्ताओं की भूमिका और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा हुई। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बयानों को पार्टी के भीतर एकजुटता और विचारधारा से जुड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अमित शाह ने क्यों कहा- नाराजगी गोमती नदी में डालकर जाइए?
अमित शाह ने बैठक में मौजूद BJP कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय नेताओं से कहा कि उनके मन में जो भी निराशा या नाराजगी है, उसे गोमती नदी में डालकर जाएं। उन्होंने एकजुट रहकर काम करने की अपील की। उनका कहना था कि कई बार व्यक्ति की अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, लेकिन संगठन के लक्ष्य को व्यक्तिगत अपेक्षाओं से ऊपर रखना चाहिए।
शाह ने यह भी कहा कि पार्टी में सभी को उनकी इच्छा के मुताबिक पद या जिम्मेदारी नहीं मिल सकती। किसी की मंत्री बनने की इच्छा रही होगी, किसी को दूसरी जिम्मेदारी मिली होगी, लेकिन संगठन की सफलता व्यक्तिगत पद से बड़ी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अगले विधानसभा चुनाव तक लगातार मेहनत करने की बात कही।
यह संदेश ऐसे समय आया है, जब पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से संगठन तथा सरकार में अपनी अनदेखी किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। हाल में हुई संगठनात्मक बैठकों में भी कार्यकर्ताओं की भूमिका, जिम्मेदारियों और संवाद को लेकर चर्चा हुई थी।
योगी आदित्यनाथ ने आडवाणी के किस मंत्र का किया जिक्र?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की बात याद दिलाई। उन्होंने कहा कि आडवाणी अक्सर कहते थे कि राजनीतिक प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन पार्टी के मूल्य, आदर्श और विचारधारा कभी नहीं बदल सकते।
योगी ने कहा कि BJP के कार्यकर्ता इसी विचारधारा के आधार पर काम करते हैं और व्यक्तिगत मान-सम्मान या अपमान की चिंता किए बिना संगठन के प्रति समर्पित रहते हैं। उनके इस बयान में पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक अनुशासन पर जोर दिखाई दिया।
इस तरह बैठक में अमित शाह ने जहां कार्यकर्ताओं की नाराजगी और आपसी मतभेदों को पीछे छोड़ने की बात कही, वहीं योगी आदित्यनाथ ने पार्टी के मूल सिद्धांतों और विचारधारा को बनाए रखने का संदेश दिया।
BJP कार्यकर्ताओं की नाराजगी का मुद्दा क्यों उठा?
उत्तर प्रदेश में BJP के कुछ क्षेत्रीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संगठन में जिम्मेदारी तथा सम्मान को लेकर असंतोष जताया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ नेताओं की शिकायत रही कि पार्टी के लिए लंबे समय तक काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं। संगठन के पदों और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर भी सवाल उठाए गए।
अमित शाह ने अपने संबोधन में इसी तरह की नाराजगी को पीछे छोड़कर संगठन के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि चुनाव में केवल बड़े नेता नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी कार्यकर्ताओं से संवाद बनाए रखने और बूथ समितियों को सक्रिय रखने पर जोर दिया। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कार्यकर्ताओं की बातें सुनने तथा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की अपील की।
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर क्या रहा अमित शाह का संदेश?
अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने को कहा। उन्होंने पार्टी की लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की मंशा का उल्लेख किया और संगठन को चुनावी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय रहने, जनता तक सरकार की योजनाओं और कामकाज की जानकारी पहुंचाने तथा संगठनात्मक जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने की बात कही। शाह ने चुनावी लक्ष्य को अर्जुन की मछली की आंख पर निशाना साधने वाले उदाहरण से भी समझाया।
बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था और केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन का भी जिक्र हुआ। शाह ने राज्य सरकार के कामकाज की सराहना की। ये बातें उनके संबोधन का हिस्सा थीं और इन्हें पार्टी के नेताओं के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
लखनऊ की बैठक में संगठन और सरकार के तालमेल पर भी चर्चा
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पार्टी संगठन की सक्रियता, बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी की संगठनात्मक ताकत उसके कार्यकर्ता हैं और उनकी भूमिका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बैठक में अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में संगठन की आगामी जिम्मेदारियों और चुनावी तैयारियों पर विचार किया गया। इस बैठक का एक प्रमुख संदेश पार्टी के भीतर संवाद और समन्वय बनाए रखने से जुड़ा रहा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. अमित शाह ने गोमती नदी को लेकर क्या बयान दिया?
अमित शाह ने BJP कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने मन की निराशा और नाराजगी गोमती नदी में डालकर जाएं और आपसी मतभेद भुलाकर संगठन के लिए एकजुट होकर काम करें।
2. योगी आदित्यनाथ ने लालकृष्ण आडवाणी की कौन-सी बात याद दिलाई?
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आडवाणी के अनुसार राजनीतिक प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन पार्टी के मूल्य, आदर्श और विचारधारा कभी नहीं बदलते।
3. BJP की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कब और कहां हुई?
उत्तर प्रदेश BJP की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक 30 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के भीमराव आंबेडकर सभागार में हुई।
4. अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को किस चुनाव की तैयारी करने को कहा?
अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने और बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने की अपील की।
5. बैठक में पंकज चौधरी ने क्या अपील की?
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बनाए रखने, उनकी बातें सुनने और बूथ समितियों को सक्रिय रखने की अपील की।
निष्कर्ष
लखनऊ में BJP की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के संबोधन में दो प्रमुख बातें सामने आईं। अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से नाराजगी और मतभेद भुलाकर एकजुट रहने को कहा, जबकि योगी आदित्यनाथ ने लालकृष्ण आडवाणी के हवाले से पार्टी के मूल्यों और विचारधारा की अहमियत बताई। बैठक में संगठनात्मक संवाद, बूथ स्तर की सक्रियता और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी जोर दिया गया।





























