Bathinda Youth Run: 20 हजार युवाओं ने लगाई दौड़, ‘उड़ता पंजाब’ को दिया ‘खेलता पंजाब’ का जवाब
सूरज की पहली किरण जब मालवा की ऐतिहासिक धरती पर उतरी, तो बठिंडा की मुख्य सड़कों पर गूंजती कदमों की आहट ने पूरे सूबे को एक नया पैगाम दिया। किसी जमाने में सीमाओं पार से फैले नशे के काले जाल के कारण ‘उड़ता पंजाब’ के रूप में बदनाम किए गए इस राज्य ने अपनी नई तकदीर लिखने की ठान ली है। रविवार तड़के जब शहर के बहुउद्देश्यीय खेल स्टेडियम से सायरन बजा, तो 20,000 से अधिक युवा धावकों का हुजूम पटरियों और चौड़ी सड़कों पर उमड़ पड़ा। यह महज एक सामान्य मैराथन नहीं थी, बल्कि अपनी मिट्टी, अपनी सांसों और अपनी संस्कृति को नशा मुक्त करने की एक सामूहिक खुली बगावत थी।
पूरे मालवा क्षेत्र से आए छात्र, पेशेवर एथलीट, बेटियां, बुजुर्ग और पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने एक साथ कदमताल करते हुए साबित कर दिया कि पंजाब की नसों में आज भी वही ऐतिहासिक दम-खम जिंदा है। Bathinda Youth Run 2026 के इस आयोजन ने उन तमाम नकारात्मक आख्यानों को मटियामेट कर दिया, जो यह मानते थे कि पंजाब की युवा पीढ़ी अपनी राह भटक चुकी है। ‘खेलता पंजाब, तंदुरुस्त पंजाब’ के गगनभेदी नारों के बीच यह दौड़ न केवल स्वास्थ्य और फिटनेस का प्रतीक बनी, बल्कि नशे के सौदागरों के मुंह पर राज्य के युवाओं का सबसे कड़ा और निर्णायक तमाचा साबित हुई।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
विशाल जनभागीदारी: बठिंडा की सड़कों पर 20,000 से अधिक पंजीकृत धावकों ने 5 किमी (फन रन), 10 किमी (फिटनेस रन) और 21 किमी (हाफ मैराथन) श्रेणियों में भाग लिया।
आधिकारिक मिशन: पंजाब सरकार के खेल एवं युवा सेवा विभाग तथा जिला प्रशासन बठिंडा द्वारा नशे के उन्मूलन और खेल संस्कृति के पुनरुद्धार के लिए इस दौड़ का संयुक्त आयोजन।
‘खेलता पंजाब’ की गूंज: कार्यक्रम का केंद्रीय उद्देश्य पंजाब को ‘उड़ता पंजाब’ के कलंक से निकालकर ‘रंगला और खेलता पंजाब’ की वास्तविक पहचान लौटाना रहा।
महिलाओं की रिकॉर्ड हिस्सेदारी: कुल प्रतिभागियों में 40% से अधिक संख्या कॉलेज और ग्रामीण पृष्ठभूमि की युवा छात्राओं तथा महिला एथलीटों की रही।
दिग्गज खिलाड़ियों का समर्थन: ओलंपियनों, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजों और पूर्व हॉकी दिग्गजों ने युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ट्रैक पर दौड़ लगाई।
नशा मुक्ति का सामूहिक संकल्प: रेस शुरू होने से पूर्व मुख्य मंच से 20,000 धावकों ने राज्य को नशामुक्त करने और अपने-अपने गांवों में कम से कम 5 युवाओं को मैदान से जोड़ने की सामूहिक शपथ ली।
नकद पुरस्कार और प्रोत्साहन: विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को कुल 15 लाख रुपये से अधिक के नकद पुरस्कार, डिजिटल प्रमाण पत्र और मेडल प्रदान किए गए।
ताजा अपडेट: पदक, विजेताओं की घोषणा और प्रशासनिक घोषणाएं
सुबह 5:30 बजे बठिंडा के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई यह विशाल दौड़ सुबह 9:00 बजे पुरस्कार वितरण समारोह के साथ संपन्न हुई। 21 किलोमीटर की पुरुष हाफ मैराथन श्रेणी में फरीदकोट के 22 वर्षीय गुरप्रीत सिंह ने 1 घंटा 04 मिनट का शानदार समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। वहीं महिला वर्ग की 21 किमी श्रेणी में जालंधर की राष्ट्रीय स्तर की धाविका मनदीप कौर ने 1 घंटा 15 मिनट के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
समापन अवसर पर पहुंचे राज्य के खेल मंत्री और जिला उपायुक्त ने मंच से बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि बठिंडा के इस जनसैलाब को देखते हुए सरकार मालवा के प्रत्येक ब्लॉक में ‘ओपन विलेज फिटनेस पार्क’ और आधुनिक रनिंग ट्रैक का निर्माण करेगी। इसके अलावा, दौड़ में भाग लेने वाले शीर्ष 100 स्थानीय ग्रामीण धावकों को पंजाब खेल विंग के अकादमियों में विशेष वैज्ञानिक प्रशिक्षण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनका पूरा खर्च खेल विभाग वहन करेगा।
बैकग्राउंड स्टोरी: बदनामी के साये से बाहर निकलने की छटपटाहट
सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी और पिछले दो दशकों में फैले सिंथेटिक नशे ने पंजाब की समृद्ध विरासत को गहरी चोट पहुंचाई थी। जिस सूबे ने देश को मिल्खा सिंह, बलबीर सिंह सीनियर और करतार सिंह जैसे विश्वस्तरीय चैंपियन दिए, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशे के पर्याय के रूप में पेश किया जाने लगा था। सिनेमा और समाचारों में गढ़े गए ‘उड़ता पंजाब’ के तमगे ने यहां के आम युवाओं के स्वाभिमान को लगातार ठेस पहुंचाई।
रोचक तथ्य (Interesting Fact): 1970 और 80 के दशक में भारतीय सेना और राष्ट्रीय खेल टीमों में अकेले पंजाब का प्रतिनिधित्व 25 प्रतिशत से अधिक हुआ करता था। इस विरासत को दोबारा स्थापित करने के लिए राज्य ने 2026 में अपनी नई खेल नीति के तहत जमीनी स्तर पर हर महीने जिला स्तरीय खेल उत्सव आयोजित करने की रणनीति बनाई है।
इस नैरेटिव को जड़ से बदलने के लिए मालवा क्षेत्र को चुना गया, क्योंकि बठिंडा, मनसा और मुक्तसर जैसे जिले नशे की आपूर्ति श्रृंखला से सबसे ज्यादा प्रभावित माने जाते रहे हैं। प्रशासन ने इस बार पुलिसिया डंडे के बजाय ‘खेल के मैदान’ को नशे के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बनाने की रणनीति अपनाई। नतीजा यह हुआ कि गांव-गांव की पंचायतों ने आगे आकर युवाओं की बसें भरकर इस दौड़ में हिस्सा लेने के लिए भेजीं।
मैदान पर क्या हुआ: 20 हजार कदमों का बवंडर
जैसे ही सुबह का सायरन बजा, तिरंगे और खेल परिधानों में सजे युवाओं का उत्साह देखने लायक था। कोई अपने 60 वर्षीय पिता के साथ दौड़ रहा था, तो कोई अपने पूरे कॉलेज ग्रुप के साथ ‘नशे नू ना, खेड़ां नू हां’ (नशे को ना, खेलों को हां) के पोस्टर लेकर पसीना बहा रहा था।
1. बेटियों का अदम्य साहस
इस दौड़ का सबसे भावनात्मक पहलू मालवा के रूढ़िवादी ग्रामीण अंचलों से आई हजारों बेटियों की भागीदारी रही। पटियाला और बठिंडा के कॉलेजों की छात्राओं ने न केवल दौड़ पूरी की, बल्कि उन्होंने संदेश दिया कि यदि घर की बेटी खेल के मैदान में उतरेगी, तो पूरा परिवार नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहेगा।
2. बुजुर्गों और दिव्यांग धावकों का जोश
दौड़ में केवल युवा ही नहीं, बल्कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के कई वयोवृद्ध धावक भी शामिल हुए। व्हीलचेयर पर 5 किलोमीटर की फन रन पूरी करने वाले 19 वर्षीय अमनदीप ने जब फिनिश लाइन पार की, तो पूरे स्टेडियम ने खड़े होकर तालियों से उसका स्वागत किया।
विशेषज्ञ नजरिया (Expert View): प्रख्यात खेल मनोवैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रीय एथलेटिक्स कोच डॉ. हरविंदर सिंह संधू का कहना है:
“जब समाज का एक बड़ा वर्ग एक साथ शारीरिक श्रम के लिए सड़क पर उतरता है, तो यह केवल कैलोरी बर्न करने का मामला नहीं होता। यह एक सामूहिक सामाजिक मनोविज्ञान (Collective Social Psychology) का निर्माण करता है। एक युवा जब अपने साथ 20,000 लोगों को दौड़ते देखता है, तो उसके भीतर का एकाकीपन और अवसाद खत्म होता है—और यही अवसाद नशे का सबसे बड़ा कारण बनता है।”
मैराथन परिणाम और आधिकारिक आंकड़े (Race Statistics Table)
| श्रेणी (Category) | दूरी (Distance) | कुल प्रतिभागी (लगभग) | पुरुष विजेता (प्रथम स्थान) | महिला विजेता (प्रथम स्थान) |
| ओपन हाफ मैराथन | 21 किलोमीटर | 3,500+ | गुरप्रीत सिंह (फरीदकोट) – 1:04:12 | मनदीप कौर (जालंधर) – 1:15:40 |
| फिटनेस चैलेंज | 10 किलोमीटर | 6,500+ | सुखविंदर सिंह (बठिंडा) – 31:18 | हरप्रीत कौर (मोगा) – 36:45 |
| कम्युनिटी फन रन | 5 किलोमीटर | 10,000+ | अमनजोत शर्मा (पटियाला) | सिमरनजीत कौर (बरनाला) |
| वेटरन श्रेणी (50+) | 5 किलोमीटर | 800+ | कुलदीप सिंह (64 वर्ष, बठिंडा) | परमजीत कौर (58 वर्ष, संगरूर) |
नशे पर सामाजिक व खेल विशेषज्ञों का विश्लेषण
सामाजिक कार्यकर्ताओं और चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि नशा मुक्ति केंद्रों (De-addiction Centers) की दीवारों के भीतर दवाइयां देकर किसी इंसान को शारीरिक रूप से डिटॉक्स तो किया जा सकता है, लेकिन उसके दिमाग को सक्रिय रखने के लिए खेल का कोई विकल्प नहीं है।
महत्वपूर्ण नोट (Important Note): न्यूरो-साइंस के अनुसार, दौड़ने और गहन कसरत के दौरान मानव शरीर में ‘एंडोर्फिन’ और ‘डोपामाइन’ नामक हार्मोन प्राकृतिक रूप से स्रावित होते हैं, जिन्हें ‘फील-गुड केमिकल्स’ कहा जाता है। कृत्रिम रूप से ड्रग्स लेने वाला व्यक्ति भी इसी डोपामाइन की तलाश करता है। यदि युवाओं को खेलों के जरिए प्राकृतिक डोपामाइन मिलने लगे, तो सिंथेटिक ड्रग्स की लत की संभावना 70% तक घट जाती है।
बठिंडा सिविल अस्पताल के मनोरोग विभाग के डॉक्टरों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि पिछले एक साल में जिन युवाओं को पुनर्वास के दौरान स्थानीय अखाड़ों और रनिंग क्लबों से जोड़ा गया, उनके दोबारा नशे की ओर लौटने (Relapse) की दर में 45 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आधिकारिक जानकारी और प्रशासनिक तंत्र की तैयारी
इस विशाल आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए बठिंडा प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए थे:
सुरक्षा और ट्रैफिक डायवर्जन: पंजाब पुलिस के 1,200 जवानों की तैनाती के साथ पूरे 21 किलोमीटर के रूट को सुबह 4:00 बजे से 10:00 बजे तक गैर-आपातकालीन वाहनों के लिए पूरी तरह सील रखा गया था।
मेडिकल इमरजेंसी सपोर्ट: रूट के हर 1 किलोमीटर पर मेडिकल डेस्क, 15 एम्बुलेंस और 50 से अधिक साइकल-सवार फर्स्ट-एड वॉलंटियर्स तैनात रहे ताकि डिहाइड्रेशन या क्रैम्प्स से तुरंत निपटा जा सके।
हाइड्रेशन और रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स: धावकों के लिए ग्लूकोज, ताजे फल और ओआरएस से लैस 25 हाइड्रेशन स्टेशन बनाए गए थे, जिनका संचालन स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और स्कूली एनसीसी कैडेट्स ने संभाला।
रीडर अलर्ट (Reader Alert): किसी भी बड़ी मैराथन या लंबी दौड़ में भाग लेने से पूर्व कम से कम 4 से 6 सप्ताह का नियमित कार्डियो प्रशिक्षण और पर्याप्त मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन अनिवार्य है। बिना तैयारी के सीधे 21 किमी दौड़ना हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
महत्वपूर्ण तिथियां और पंजाब खेल कैलेंडर (Sports Calendar 2026)
पंजाब में जमीनी खेलों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित की गई आगामी समय-सारणी इस प्रकार है:
| आयोजन / चरण | प्रस्तावित तिथि | स्थान / जिला | मुख्य उद्देश्य |
| बठिंडा यूथ रन (Bathinda Youth Run) | 13 सितंबर 2026 (सफलतापूर्वक संपन्न) | बठिंडा शहर | एंटी-ड्रग अवेयरनेस एवं फिटनेस अभियान |
| मालवा ब्लॉक स्तरीय फुटबॉल लीग | 28 सितंबर – 05 अक्टूबर 2026 | मनसा, फाजिल्का, मुक्तसर | ग्रामीण फुटबॉल प्रतिभाओं की खोज |
| पंजाब स्टेट इंटर-यूनिवर्सिटी गेम्स | 15 – 22 अक्टूबर 2026 | पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला | उच्च शिक्षा स्तर पर एथलेटिक्स का उत्थान |
| ‘खेड़ां वतन पंजाब दियां’ (फेज-2) | 05 – 25 नवंबर 2026 | सभी 23 जिले | ब्लॉक से राज्य स्तर तक 30+ खेल स्पर्धाएं |
| चंडीगढ़-मोहाली इंटरनेशनल मैराथन | 12 दिसंबर 2026 | मोहाली स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की ब्रांडिंग |
छात्र, नागरिक और समाज पर इस आयोजन का प्रभाव
इस आयोजन की लहर केवल बठिंडा शहर की सीमा तक सीमित नहीं रहने वाली है। इसके बहुआयामी प्रभाव पूरे राज्य में दिखाई देने लगे हैं:
छात्रों में नई ऊर्जा का संचार: स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों में सोशल मीडिया और डिजिटल स्क्रीन की लत छोड़कर सुबह के समय मैदानों में उतरने की नई होड़ शुरू हुई है।
माता-पिता की सोच में बदलाव: ग्रामीण इलाकों के परिवारों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि खेल केवल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण और सुरक्षित भविष्य की पहली गारंटी हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट: स्पोर्ट्स शूज, एथलेटिक ट्रैकसूट्स, न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स और साइकलिंग से जुड़े स्थानीय कारोबारियों के व्यापार में तेजी आई है, जिससे युवाओं के लिए खेल उद्यमिता (Sports Entrepreneurship) के नए रास्ते खुल रहे हैं।
भविष्य का परिदृश्य (Future Impact): पंजाब के आगे के कदम
Bathinda Youth Run 2026 की अभूतपूर्व सफलता ने सरकार और नागरिक समाज को एक नया रोडमैप दिया है:
हर गांव में खेल नर्सरी: सरकार की योजना है कि इस दौड़ से निकले उत्साह को भुनाते हुए प्रत्येक पंचायत में एक समर्पित खेल मैदान तैयार किया जाए, जिसमें पूर्व सैनिकों और पीटीआई शिक्षकों को मेंटॉर बनाया जाएगा।
सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई चेन पर दोहरी मार: जहां एक तरफ पंजाब पुलिस ‘एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ (ANTF) के जरिए तस्करों की संपत्तियां जब्त कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मैदानों में युवाओं की भीड़ आपूर्ति मांग (Demand Side) को पूरी तरह सुखा देगी।
राष्ट्रीय खेलों में पदक तालिका में सुधार: जमीनी स्तर पर शुरू हुए इस फिटनेस अभियान का सीधा लाभ आगामी राष्ट्रीय खेलों और एशियन गेम्स में पंजाब के पदक प्रतिशत में वृद्धि के रूप में देखने को मिलेगा।
पाठकों, युवाओं और अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश
यदि आप अपने परिवार और क्षेत्र को स्वस्थ और नशामुक्त देखना चाहते हैं, तो इन व्यावहारिक कदमों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं:
प्रतिदिन 45 मिनट मैदान को दें: चाहे दौड़ना हो, योग हो या कोई पारंपरिक खेल, दिन में कम से कम 45 मिनट पसीना बहाने की आदत बनाएं।
सामुदायिक रनिंग क्लब बनाएं: अपने मोहल्ले या गांव के 5-10 दोस्तों के साथ मिलकर एक छोटा रनिंग या साइकलिंग ग्रुप शुरू करें; समूह में अभ्यास करने से प्रेरणा बनी रहती है।
नशे के प्रति शून्य सहनशीलता: यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति तनाव या गलत संगति के कारण नशे की गिरफ्त में जा रहा है, तो उससे नफरत करने के बजाय उसे खेल के मैदान में लाएं और पेशेवर काउंसलिंग दिलवाएं।
प्रशासनिक हेल्पलाइन का उपयोग करें: पंजाब सरकार के नशा विरोधी हेल्पलाइन नंबर 181 पर किसी भी प्रकार के अवैध ड्रग कारोबार की गुप्त सूचना दें; आपकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. Bathinda Youth Run 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस विशाल दौड़ का मुख्य उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नशे के खिलाफ एकजुट करना, फिटनेस और खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और ‘उड़ता पंजाब’ की नकारात्मक छवि को धोकर ‘खेलता पंजाब’ की नई पहचान स्थापित करना था।
2. इस मैराथन में कितने लोगों ने हिस्सा लिया?
बठिंडा के बहुउद्देश्यीय खेल स्टेडियम से शुरू हुई इस दौड़ में छात्र, खिलाड़ी, महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांग धावकों सहित 20,000 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराकर भाग लिया।
3. दौड़ का आयोजन किस विभाग द्वारा किया गया था?
इस मैराथन का सफल आयोजन पंजाब खेल एवं युवा सेवा विभाग, जिला प्रशासन बठिंडा और विभिन्न स्थानीय खेल एसोसिएशनों के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
4. इस आयोजन में कौन-कौन सी दौड़ श्रेणियां शामिल थीं?
दौड़ को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था: 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन पेशेवर धावकों के लिए), 10 किलोमीटर (फिटनेस चैलेंज), और 5 किलोमीटर (कम्युनिटी फन रन एवं वॉक)।
5. 21 किलोमीटर हाफ मैराथन के विजेता कौन रहे?
पुरुष वर्ग में फरीदकोट के धावक गुरप्रीत सिंह ने 1 घंटा 04 मिनट का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया, जबकि महिला वर्ग में जालंधर की मनदीप कौर ने 1 घंटा 15 मिनट में रेस जीतकर स्वर्ण पदक झटका।
6. क्या इस आयोजन से पंजाब में नशे की समस्या कम होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, खेल युवाओं को स्वाभाविक शारीरिक आनंद (डोपामाइन) देते हैं और तनाव कम करते हैं। जब हजारों युवा खेल मैदानों से जुड़ते हैं, तो नशे की सामाजिक मांग स्वतः कम होने लगती है।
7. सरकार ने विजेताओं और धावकों के लिए क्या घोषणाएं कीं?
विजेताओं को 15 लाख रुपये के नकद पुरस्कार दिए गए। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्थानीय ग्रामीण धावकों को सरकारी खेल विंग में निःशुल्क आवासीय वैज्ञानिक कोचिंग देने की घोषणा की गई।
8. क्या आम नागरिक ऐसी आगामी दौड़ों के लिए पंजीकरण कर सकते हैं?
हां, पंजाब खेल विभाग के आधिकारिक पोर्टल और जिला खेल अधिकारी (DSO) के कार्यालय के माध्यम से आगामी राज्य स्तरीय मैराथन और ब्लॉक खेलों के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन पंजीकरण कराया जा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
बठिंडा की पटरियों पर उतरा 20,000 युवाओं का यह सैलाब केवल एक खेल उत्सव नहीं था, बल्कि यह एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद था। इसने पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पंजाब की रगों में दौड़ने वाला लहू न तो पराजित हुआ है और न ही किसी नशे का गुलाम बनने को तैयार है। जब युवा शक्ति अपने पांवों में घुंघरू नहीं, बल्कि खेल के जूते बांधकर संकल्प के साथ निकलती है, तो बड़े से बड़े सामाजिक अभिशाप को भी घुटने टेकने पड़ते हैं।
‘उड़ता पंजाब’ का दंश अब इतिहास के पन्नों में दफन होने की ओर है, और मैदानों में पसीना बहाता यह ‘खेलता पंजाब’ एक स्वर्णिम कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है। प्रत्येक नागरिक, माता-पिता और संस्था का यह दायित्व है कि वे इस मशाल को बुझने न दें और हर बच्चे को खेल के मैदान तक पहुंचाने में अपना योगदान दें। आगामी खेल आयोजनों और आधिकारिक पंजीकरण की सटीक जानकारी के लिए पंजाब खेल विभाग के अधिकृत पोर्टल पर नजर बनाए रखें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह समाचार रिपोर्ट बठिंडा जिला प्रशासन, खेल एवं युवा सेवा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों और ग्राउंड स्तर पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के इनपुट्स के आधार पर जन-जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। विजेताओं की अंतिम समय-सारणी, पुरस्कार वितरण और आगामी खेल योजनाओं के आधिकारिक विवरण राज्य खेल विभाग की अधिसूचनाओं के अधीन हैं।





























