दीपावली 2026: कब है दिवाली? जानें लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
दीपों का पर्व दिवाली 2026 में 8 नवंबर को मनाई जाएगी। जानें लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और दीपावली के धार्मिक महत्व की पूरी जानकारी
अमावस्या की घनी श्यामल निशा में जगमगाती अनगिनत दीपशिखाएं, देहरी पर रंगोली के सतरंगी चक्र, खील-बताशों की भीनी सुगंध और ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः’ के गूंजते वैदिक मंत्र—यह वह अलौकिक दृश्य है जब दरिद्रता का हर कोना प्रकाश की दिव्यता से आलोकित हो उठता है। सनातन संस्कृति का सबसे भव्य, समृद्ध और आध्यात्मिक महापर्व दीपावली 2026 इस वर्ष 8 नवंबर (रविवार) को देश-विदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कार्तिक मास की घोर कृष्ण अमावस्या पर जब संपूर्ण चराचर जगत अंधकार में डूब जाता है, तब दीपों की अविरल पंक्तियां मनुष्य की आत्मा को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। धन की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी और बुद्धि-विवेक के प्रदाता भगवान श्री गणेश के संयुक्त अर्चन का यह पर्व केवल घर को सजाने का उपक्रम नहीं, बल्कि आंतरिक संस्कारों और व्यापारिक बहीखातों को पवित्र करने की वार्षिक प्रतिज्ञा है। इस वर्ष स्थिर लग्न, प्रदोष काल और निशीथ काल के विशिष्ट मुहूर्त में मां भगवती का आवाहन कैसे करें, इसका संपूर्ण शास्त्रीय विधान समझना प्रत्येक साधक के लिए कल्याणकारी है।
दिलचस्प तथ्य (Interesting Fact): स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को ही क्षीरसागर से मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए दीपावली को माता लक्ष्मी का जन्मोत्सव भी माना जाता है। इसी रात्रि को भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का पावन विवाह अनुष्ठान भी संपन्न हुआ था।
मुख्य बिंदु: दीपावली 2026 महापर्व के 7 प्रमुख आयाम (Key Highlights)
पर्व की सर्वसम्मत तिथि: कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 (रविवार) को दोपहर से प्रारंभ होकर मध्यरात्रि (निशीथ काल) में पूर्ण रूप से व्याप्त रहेगी।
लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदोष काल: 8 नवंबर की शाम 05:31 बजे से 07:12 बजे तक स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) में गृहस्थों के लिए महालक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा।
व्यापारियों के लिए निशीथ काल मुहूर्त: व्यापारिक प्रतिष्ठानों, तंत्र-मंत्र साधकों और बहीखाता (चोपड़ा) पूजन हेतु मध्यरात्रि 11:39 बजे से 12:31 बजे (सिंह लग्न) का समय अति फलदायी रहेगा।
चौघड़िया मुहूर्तों का योग: सायंकालीन शुभ, अमृत और चर चौघड़िया के संयोग से आर्थिक स्थिरता और व्यापार वृद्धि के दीर्घकालिक योग बनेंगे।
पंचदिवसीय दीपोत्सव का मध्य बिंदु: 6 नवंबर को धनतेरस से आरंभ होकर 10 नवंबर को भाई दूज तक चलने वाले पंचपर्व का मुख्य केंद्र दीपावली का दिन है।
अयोध्या का ऐतिहासिक दीपोत्सव: प्रभु श्री राम के 14 वर्ष के वनवास उपरांत अयोध्या आगमन की स्मृति में सरयू तट पर लाखों मिट्टी के दीयों का भव्य विश्व रिकॉर्ड।
इको-फ्रेंडली ग्रीन दीपावली का संकल्प: वायु और ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए ग्रीन पटाखों का सीमित उपयोग और पारंपरिक मिट्टी के दीयों को प्रोत्साहन।
ताजा अपडेट: 8 नवंबर 2026 को देश भर में दीपोत्सव का उल्लास (Latest Update)
काशी, मथुरा, उज्जैन और मिथिला के प्रमुख वैदिक पंचांगों द्वारा जारी आधिकारिक काल-गणना के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि प्रदोष काल और अर्धरात्रि दोनों समय 8 नवंबर को ही मिल रही है। अतः संपूर्ण भारत में बिना किसी पंचांगीय मतभेद के 8 नवंबर 2026 को ही दीपावली मनाई जाएगी।
अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर और सरयू के घाटों पर भव्य दीपोत्सव के लिए लाखों मिट्टी के दीये बिछाने का कार्य पूर्ण हो चुका है। केंद्र और राज्य सरकारों के आपदा प्रबंधन विभागों ने अग्निशमन दस्तों, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और भीड़ नियंत्रण हेतु विशेष एडवाइजरी जारी की है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बाजारों में गोबर, गाय के घी और विशुद्ध मिट्टी से निर्मित दीपकों की मांग में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
पृष्ठभूमि: प्रभु श्री राम की वापसी, समुद्र मंथन और बलि का उद्धार (Background Story)
दीपावली के उद्भव से सनातन इतिहास की कई कालजयी घटनाएं जुड़ी हुई हैं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम लंकापति रावण का वध कर, 14 वर्षों का वनवास समाप्त करके माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने अमावस की घोर काली रात को अपने राजा के स्वागत में घी के दीये जलाकर समूची नगरी को जगमग कर दिया था। उस दिन से यह पर्व प्रकाश की विजय का प्रतीक बन गया।
इसके अतिरिक्त, पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि मांगकर तीनों लोकों को उसके अहंकार से मुक्त कराया था और बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाकर वर्ष में एक बार पृथ्वी पर दीपों के दर्शन की अनुमति दी थी। जैन धर्म में इसी पावन दिन 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को मोक्ष (निर्वाण) की प्राप्ति हुई थी, वहीं सिख परंपरा में छठे गुरु श्री हरगोबिंद साहिब जी द्वारा ग्वालियर के किले से 52 हिंदू राजाओं को मुक्त कराकर अमृतसर लौटने की स्मृति में इसे ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। अतः यह पर्व बहुआयामी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का वैश्विक संगम है।
पाठक सतर्कता (Reader Alert): दीपावली की रात दीये जलाते समय पर्दों, कपड़ों और लकड़ी के फर्नीचर से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। बिजली की झालरों के तारों में कट या शॉर्ट-सर्किट की जांच पहले ही कर लें। बच्चों को पटाखे जलाते समय कभी भी अकेला न छोड़ें और पास में पानी की एक बाल्टी हमेशा तैयार रखें।
क्या करें और कैसे करें? महालक्ष्मी पूजन की संपूर्ण षोडशोपचार विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
दीपावली की शाम को महालक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा शास्त्रीय मर्यादा और पवित्रता के साथ करनी चाहिए:
1. वेदी निर्माण और कलश स्थापना
घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला नया रेशमी वस्त्र बिछाएं। चौकी के बीच में अक्षत (साबुत चावल) की ढेरी बनाकर तांबे या पीतल का कलश स्थापित करें।
कलश के भीतर शुद्ध जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का, हल्दी की गांठ और दुर्वा डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 पत्ते रखकर ऊपर से लाल वस्त्र में लिपटा हुआ जटाधारी नारियल स्थापित करें।
2. प्रतिमा स्थापना और दिशा विन्यास
चौकी पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र को भगवान गणेश के दाईं ओर स्थापित करें (लक्ष्मी जी हमेशा गणेश जी के दाईं ओर बैठती हैं)।
पास में ही धन के अधिपति कुबेर देव और ज्ञान की देवी माता सरस्वती की प्रतिमा भी रखें।
मूर्तियों के समक्ष शुद्ध घी का बड़ा चौमुखी दीपक (यम दीपक/लक्ष्मी दीपक) प्रज्वलित करें जो पूरी रात जलता रहे।
3. षोडशोपचार पूजन क्रम
ध्यान एवं आवाहन: हाथ में जल और पुष्प लेकर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर जी का ध्यान करें।
स्नान एवं वस्त्र: मूर्तियों को सांकेतिक रूप से जल और पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात नवीन वस्त्र, कलावा और माता को लाल चुनरी अर्पित करें।
गंध, अक्षत और पुष्प: भगवान गणेश को पीला चंदन व दूर्वा, तथा माता लक्ष्मी को अष्टगंध, रोली, अक्षत और अत्यंत प्रिय लाल कमल या गुलाबी गुलाब के पुष्प चढ़ाएं।
नैवेद्य एवं भोग: माता लक्ष्मी को सिंघाड़ा, अनार, सीताफल, मखाना, खीर, सफेद मिठाइयां और खील-बताशों का भोग लगाएं। पान, सुपारी और लौंग-इलायची अर्पित करें।
बहीखाता एवं तिजोरी पूजन (Chopda Pujan): व्यापारी वर्ग अपने नए व्यापारिक खातों, कलम और तिजोरी पर केसर-चंदन से ‘श्रीं’ और स्वास्तिक का चिह्न बनाकर पूजन करें।
आरती एवं क्षमा प्रार्थना: सर्वप्रथम श्री गणेश जी की आरती गाएं, उसके बाद ‘ॐ जय लक्ष्मी माता’ की आरती सपरिवार खड़े होकर करें। अंत में अज्ञानतावश हुई किसी भी त्रुटि के लिए करबद्ध होकर क्षमा याचना करें।
दीपावली 2026: तिथि, नक्षत्र और शुभ लग्न मुहूर्त विवरण (Master Muhurat Table)
नीचे दी गई तालिका में निर्णय सिंधु और भारतीय पंचांग के आधार पर 8 नवंबर 2026 के सभी श्रेष्ठ पूजा मुहूर्तों का ब्योरा दिया गया है:
| पूजन काल / मुहूर्त प्रकार | निर्धारित समय (IST) | लग्न एवं नक्षत्र स्थिति | उपयुक्तता एवं प्रभाव |
| कार्तिक अमावस्या प्रारंभ | 08 नवंबर 2026, दोपहर 01:24 बजे से | स्वाति नक्षत्र प्रवेश | अमावस्या तिथि का आरंभ |
| कार्तिक अमावस्या समाप्ति | 09 नवंबर 2026, दोपहर 02:48 बजे तक | विशाखा नक्षत्र | उदयातिथि अगले दिन दोपहर तक |
| प्रदोष काल मुहूर्त (गृहस्थ पूजा) | सायं 05:31 से 07:12 बजे तक | वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) | घर-परिवार में लक्ष्मी की स्थायी प्रतिष्ठा |
| महालक्ष्मी पूजन चौघड़िया (शुभ) | सायं 05:31 से 07:08 बजे तक | शुभ चौघड़िया | सुख, शांति और सौभाग्य वृद्धि |
| अमृत चौघड़िया मुहूर्त | सायं 07:08 से 08:45 बजे तक | अमृत चौघड़िया | पारिवारिक आरोग्य और दीर्घायु |
| निशीथ काल मुहूर्त (व्यापारिक पूजा) | रात्रि 11:39 से 12:31 बजे तक | सिंह लग्न (स्थिर लग्न) | दुकान, फैक्ट्री, बहीखाता और तांत्रिक अनुष्ठान |
| महानिशीथ काल (तांत्रिक साधना) | रात्रि 12:31 से 01:24 बजे तक | उग्र साधना काल | यक्ष-कुबेर और श्रीयंत्र सिद्धिकरण |
विशेषज्ञ विश्लेषण: ज्योतिषाचार्यों और वास्तुविदों का दृष्टिकोण (Expert Analysis)
काशी विद्वत परिषद के वरिष्ठ धर्माचार्यों और वैदिक वास्तुविदों के अनुसार:
“दीपावली केवल बाह्य दीपोत्सव नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह को अपने अनुकूल करने का महापर्व है। दीपावली 2026 का आयोजन रविवार को होने से सूर्य और शुक्र की ऊर्जा का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ समाज में मान-सम्मान और यश की वृद्धि करेगा। लक्ष्मी पूजन के समय घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण और सिंदूर से स्वास्तिक बनाना नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है। पूजा के समय श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र को स्थापित कर ‘कनकधारा स्तोत्र’ या ‘श्री सूक्त’ का पाठ करने से जन्म-जन्मांतर की दरिद्रता का समूल नाश होता है। ध्यान रहे कि स्थिर लग्न (वृषभ या सिंह) में की गई पूजा से धन का अपव्यय रुकता है और व्यापार में स्थायित्व आता है।”
— पंडित विद्याधर मिश्र शैली विश्लेषण, वरिष्ठ वेदांताचार्य एवं पंचांग शोधकर्ता
वास्तु विशेषज्ञों का यह भी मत है कि घर की तिजोरी या धन के स्थान को हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए, क्योंकि यह कुबेर की प्राकृतिक दिशा मानी जाती है।
आधिकारिक जानकारी एवं सुरक्षा प्रशासन की गाइडलाइंस (Official Information & Public Guidelines)
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और गृह मंत्रालय द्वारा जारी सुरक्षा निर्देश:
हरित पटाखों (Green Crackers) का उपयोग: केवल पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा प्रमाणित क्यूआर कोड युक्त ग्रीन पटाखों की ही बिक्री और उपयोग मान्य होगा; अत्यधिक धुएं और बेरियम साल्ट वाले पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध है।
सार्वजनिक सुरक्षा तंत्र: देश के सभी प्रमुख बाजारों, कपड़ा मंडियों और मॉल परिसरों में दमकल वाहनों और सचल पुलिस दस्तों को आपातकालीन स्थिति के लिए तैनात किया गया है।
अस्पतालों में बर्न वार्ड्स की तैयारी: सभी सरकारी और निजी चिकित्सालयों में जलने की आपात स्थितियों से निपटने के लिए बर्न यूनिट्स को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है।
छात्रों, युवाओं और स्टार्टअप उद्यमियों पर प्रभाव (Student & Professional Impact)
दीपावली का यह पर्व समाज के युवा वर्ग और विद्यार्थियों को बहुआयामी जीवन मूल्य प्रदान करता है:
वित्तीय साक्षरता और बहीखाता सम्मान: आधुनिक फिनटेक और स्टार्टअप दौर के युवा इस दिन अपने डिजिटल खातों, लैपटॉप्स और व्यापारिक योजनाओं की शुद्धि कर वित्तीय अनुशासन का पाठ सीखते हैं।
स्वच्छता और मानसिक स्पष्टता: घर और अध्ययन कक्ष की गहन सफाई विद्यार्थियों के मन से नकारात्मक विचारों को दूर कर बौद्धिक एकाग्रता को बढ़ाती है।
स्थानीय कामगारों का समर्थन: युवाओं द्वारा स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीये और हस्तशिल्प उत्पाद खरीदने की पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त बनाती है।
भविष्य का दृष्टिकोण: दीपोत्सव के बाद के पर्व (Future Impact)
1. गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव
दीपावली के अगले दिन 9 नवंबर को गोवर्धन पर्वत, प्रकृति और गौवंश की रक्षा के उपलक्ष्य में गोवर्धन पूजा और 56 भोग अन्नकूट का भव्य आयोजन किया जाएगा।
2. यम द्वितीया और भाई दूज
10 नवंबर को भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक भाई दूज (यम द्वितीया) मनाया जाएगा, जिसमें बहनें भाइयों के माथे पर तिलक कर उनकी दीर्घायु की प्रार्थना करेंगी।
3. महाछठ पर्व की तैयारी
दीपावली के समापन के साथ ही पूर्वी भारत और वैश्विक स्तर पर सूर्योपासना के महापर्व ‘छठ पूजा’ की चार दिवसीय तैयारियां नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो जाएंगी।
दीपावली पूजन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश (What Should Devotees Do?)
मुख्य द्वार पर दीपक का स्थान: मुख्य द्वार पर कम से कम दो चौमुखी दीपक पूरी रात जलाकर रखें; यह मां लक्ष्मी के घर में स्वागत का शास्त्रीय प्रतीक है।
फटी या खंडित झाड़ू का त्याग: झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है; दीपावली से पहले पुरानी और टूटी झाड़ू को हटाकर नई सींक वाली झाड़ू खरीदें और उसका पूजन करें।
सात्विक आचरण और सेवा: इस दिन घर में पूर्णतः सात्विक भोजन बनाएं; मद्यपान या जुआ खेलने जैसी कुप्रथाओं से दूर रहें और किसी निर्धन परिवार को दीप व मिष्ठान भेंट कर उनका जीवन भी रोशन करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
दीपावली केवल दीपकों को जलाने की एक रस्म नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन में ज्ञान, प्रेम, करुणा और सत्य के प्रकाश को प्रज्वलित करने का दिव्य अनुष्ठान है। दीपावली 2026 का यह पावन अवसर हम सभी को संदेश देता है कि जब बाहर का अंधकार कितना भी घना क्यों न हो, एक नन्हा सा मिट्टी का दीया उसे चीरने का सामर्थ्य रखता है। 8 नवंबर की इस पावन निशा में आइए हम सब मिलकर अपने घरों को ही नहीं, बल्कि अपने विचारों को भी पवित्र बनाएं; किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाकर वास्तविक दीपोत्सव मनाएं। स्थिर लग्न के शुभ मुहूर्त में माता महालक्ष्मी, भगवान श्री गणेश और कुबेर देव का विधिपूर्वक आवाहन आपके जीवन के समस्त कष्टों, व्याधियों और आर्थिक अवरोधों का नाश करे। समस्त देशवासियों को दीपावली महापर्व की अनंत मंगलकामनाएं!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions – FAQs)
Q1: दीपावली 2026 की सही तारीख क्या है?
उत्तर: पंचांग और उदयातिथि के अनुसार, दीपावली का महापर्व 8 नवंबर 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या तिथि दोपहर से शुरू होकर पूरी रात उपस्थित रहेगी, जिससे लक्ष्मी पूजन इसी दिन शास्त्रसम्मत है।
Q2: गृहस्थों के लिए लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: 8 नवंबर को शाम 05:31 बजे से 07:12 बजे तक स्थिर वृषभ लग्न और प्रदोष काल का समय गृहस्थ परिवारों के लिए लक्ष्मी-गणेश पूजन का सर्वोत्तम और सबसे मंगलकारी मुहूर्त है।
Q3: क्या व्यापारियों के लिए निशीथ काल में पूजा करना आवश्यक है?
उत्तर: हां, व्यापारियों, उद्योगपतियों और दुकानदारों के लिए मध्यरात्रि 11:39 बजे से 12:31 बजे तक का सिंह लग्न (स्थिर लग्न) बहीखाता पूजन, चोपड़ा पूजन और तिजोरी आराधना हेतु अत्यंत शुभ माना गया है।
Q4: लक्ष्मी पूजन में किन देवी-देवताओं की पूजा एक साथ की जाती है?
उत्तर: दीपावली पर माता महालक्ष्मी के साथ बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश, धन के अधिपति कुबेर देव, ज्ञान की देवी माता सरस्वती और समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए शंख व कौड़ियों का पूजन किया जाता है।
Q5: पूजा के समय माता लक्ष्मी की मूर्ति किस दिशा में रखनी चाहिए?
उत्तर: पूजा वेदी पर माता लक्ष्मी की मूर्ति भगवान गणेश के दाईं ओर (गणेश जी बाईं ओर) रखनी चाहिए। साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना सर्वोत्तम माना जाता है।
Q6: दीपावली पर कितने दीपक जलाना शुभ माना जाता है?
उत्तर: न्यूनतम 11, 21, 51 या 101 मिट्टी के दीये जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। एक बड़ा चौमुखी दीपक पूरी रात माता लक्ष्मी के सामने अखंड जलते रहना चाहिए।
Q7: क्या दीपावली के दिन नई झाड़ू खरीदना जरूरी है?
उत्तर: हां, सनातन परंपरा में झाड़ू को दरिद्रता दूर करने और माता लक्ष्मी का वास कराने वाला माना गया है। धनतेरस या दीपावली के दिन नई झाड़ू खरीदकर उसका पूजन करना अत्यंत फलदायी होता है।
Q8: दीपावली पर किन रंगों के वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए?
उत्तर: लक्ष्मी पूजन के समय लाल, पीले, गुलाबी या नारंगी रंग के नए व स्वच्छ पारंपरिक वस्त्र पहनना सर्वोत्तम है। इस दिन काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए।
अस्वीकरण (Disclaimer)
अस्वीकरण (Disclaimer): प्रस्तुत धार्मिक एवं सांस्कृतिक आलेख स्कंद पुराण, निर्णय सिंधु, धर्मसिंधु, काशी व मिथिला पंचांग और वैदिक ज्योतिष की प्रामाणिक काल-गणनाओं के आधार पर विशुद्ध रूप से जन-कल्याण एवं सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार पूजा मुहूर्त में कुछ मिनटों का स्थानीय अंतर हो सकता है; अपने क्षेत्र के प्रमाणित पुरोहित या स्थानीय पंचांग से समय का मिलान अवश्य करें।





























