भारत में अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) को लेकर गंभीर संकेत मिल रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य पर बढ़ती गतिविधियाँ पृथ्वी के आयनमंडल को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे Strong Radio Blackout जैसी स्थिति बन सकती है।
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Toggleसूरज का प्रकोप! ISRO की चेतावनी-भारत में Strong Radio Blackout का खतरा
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी Indian Space Research Organisation (ISRO) ने भी हालिया अवलोकनों के आधार पर संकेत दिए हैं कि तीव्र सोलर फ्लेयर्स और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) रेडियो संचार, जीपीएस नेविगेशन, एविएशन कम्युनिकेशन और सैटेलाइट लिंक पर असर डाल सकते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ नागरिक उड्डयन, समुद्री संचार और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट मोड में रहने की सलाह दे रहे हैं।
Strong Radio Blackout क्या होता है और क्यों खतरनाक है?


जब सूर्य पर X-class सोलर फ्लेयर फटता है, तो कुछ ही मिनटों में उच्च-ऊर्जा विकिरण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल (आयनमंडल) तक पहुँच जाता है। इससे आयनमंडल की D-layer असामान्य रूप से आयनाइज़ हो जाती है और HF (High Frequency) रेडियो वेव्स अवशोषित हो जाती हैं। नतीजा—लंबी दूरी की रेडियो संचार सेवाएँ अचानक बाधित। यही स्थिति Strong Radio Blackout कहलाती है।
संभावित असर:
हवाई जहाजों की HF रेडियो बातचीत प्रभावित
समुद्री जहाजों की आपात रेडियो लिंक में रुकावट
GPS/Navigation में त्रुटि
सैटेलाइट कम्युनिकेशन में व्यवधान
दूरदराज़ क्षेत्रों में वायरलेस सेवाएँ ठप
Strong Radio Blackout: वैज्ञानिक कारण सरल भाषा में
सूर्य 11 साल के सोलर साइकिल से गुजरता है। जब यह साइकिल अपने सोलर मैक्सिमम पर होती है, तब सनस्पॉट्स, फ्लेयर्स और CME की घटनाएँ बढ़ जाती हैं। इनसे निकलने वाली एक्स-रे और पराबैंगनी किरणें पृथ्वी के आयनमंडल की संरचना को मिनटों में बदल देती हैं। यही बदलाव रेडियो वेव्स के परावर्तन/प्रसार को बिगाड़ देता है।
Strong Radio Blackout और सैटेलाइट सिस्टम पर प्रभाव

सैटेलाइट सिग्नल का डिले या ड्रॉप
GNSS (GPS/NavIC) की एक्युरेसी घट सकती है
एविएशन रूटिंग में अस्थायी बदलाव
आपातकालीन सेवाओं के बैकअप चैनल सक्रिय करने की जरूरत
भारत के लिए जोखिम क्यों अधिक?
भारत भूमध्य रेखा के पास स्थित है, जहाँ आयनमंडल की संरचना जटिल होती है। यहाँ Equatorial Ionospheric Anomaly के कारण सोलर एक्टिविटी का प्रभाव तेज़ी से दिख सकता है। इसी कारण Strong Radio Blackout की स्थिति में भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ हिस्सों में रेडियो संचार अधिक प्रभावित हो सकता है।
Strong Radio Blackout के दौरान क्या-क्या बंद हो सकता है?
एयर ट्रैफिक कंट्रोल की HF बैकअप लाइन
शिपिंग कम्युनिकेशन
दूरस्थ इलाकों की वायरलेस सेवाएँ
आपदा प्रबंधन रेडियो नेटवर्क
शौकिया रेडियो (Ham Radio)
Strong Radio Blackout से निपटने के उपाय (एजेंसियों के लिए)
VHF/UHF बैकअप चैनल तैयार रखें
सैटेलाइट आधारित कम्युनिकेशन का वैकल्पिक मार्ग
GPS पर निर्भरता कम कर INS/रेडार का उपयोग
रियल-टाइम स्पेस वेदर मॉनिटरिंग
एविएशन/मैरिटाइम में SOP अलर्ट
Strong Radio Blackout: इतिहास से सीख
1859 का कैरिंगटन इवेंट—टेलीग्राफ ठप
1989—कनाडा में पावर ग्रिड फेल
हाल के वर्षों में X-class फ्लेयर्स के दौरान एविएशन रूट बदले गए
Strong Radio Blackout की मॉनिटरिंग कैसे होती है?
स्पेस वेदर सैटेलाइट्स, सोलर ऑब्जर्वेटरी, ग्राउंड-बेस्ड आयनोसॉन्ड और मैग्नेटोमीटर के जरिए वैज्ञानिक हर मिनट डेटा ट्रैक करते हैं। इसी डेटा के आधार पर अलर्ट जारी होते हैं।
FAQ — Strong Radio Blackout
Q1. Strong Radio Blackout क्या है?
रेडियो तरंगों का आयनमंडल में अवशोषण, जिससे लंबी दूरी की रेडियो सेवाएँ बाधित होती हैं।
Q2. इसका असर मोबाइल नेटवर्क पर पड़ेगा?
आमतौर पर सेल्युलर नेटवर्क कम प्रभावित, पर बैकहॉल/सैटेलाइट लिंक प्रभावित हो सकते हैं।
Q3. यह कितनी देर रहता है?
कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक, सोलर फ्लेयर की तीव्रता पर निर्भर।
Q4. क्या GPS बंद हो जाता है?
पूरी तरह नहीं, पर एक्युरेसी घट सकती है।
Q5. क्या आम लोगों को घबराना चाहिए?
नहीं। यह मुख्यतः पेशेवर संचार प्रणालियों को प्रभावित करता है।
Conclusion: बढ़ती सोलर एक्टिविटी के बीच Strong Radio Blackout की आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता। वैज्ञानिक एजेंसियाँ लगातार निगरानी कर रही हैं और आवश्यक अलर्ट जारी कर रही हैं। बेहतर तैयारी और बैकअप सिस्टम से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। — यह विशेष रिपोर्ट Bharati Fast News पर
Disclaimer: यह लेख स्पेस वेदर से जुड़े वैज्ञानिक आकलनों पर आधारित है। वास्तविक प्रभाव समय, तीव्रता और भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।












