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SC में वकील ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश, सनातन अपमान का विरोध – Bharati Fast News

SC में CJI पर जूता हमला: सनातन अपमान का विरोध, सुप्रीम कोर्ट में सनसनी – Bharati Fast News

सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक विवाद उस समय सामने आया जब एक वरिष्ठ वकील ने सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। आरोपी वकील ने ‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे’ के नारे लगाए और कोर्टरूम में अफरातफरी मच गई । इस घटना ने न्यायपालिका की गरिमा और विशेष रूप से सनातन धर्म से जुड़े भावनात्मक मुद्दों को लेकर समाज में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।CJI


घटना का पूरा विवरण: जूता फेंकने की कोशिश कैसे हुई?

सोमवार (6 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील राकेश किशोर अचानक मंच के पास पहुंचे और जूता निकालकर CJI की ओर फेंकने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा कर्मियों की तत्परता के कारण जूता ब्रह्मदत्त चंद्रन (सह जज) तक ही पहुंचा, CJI तक नहीं । वकील को तुरंत हिरासत में ले लिया गया और कोर्टरूम से बाहर कर दिया गया। बाहर जाते समय, उसने ‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे’ के जोरदार नारे लगाए ।


सनातन अपमान के विरोध के नारे: पृष्ठभूमि और सामाजिक सन्दर्भ

घटना का मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट बेंच की हाल ही में खजुराहो स्थित Lord Vishnu की मूर्ति पुनः स्थापना याचिका पर टिप्पणी रही। याचिकाकर्ताओं ने सात फीट लंबी भगवान विष्णु की मूर्ति के पुनर्निर्माण की मांग की थी, जिसे मुगल काल में खंडित किया गया था। CJI गवई ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था, “आप खुद भगवान से कुछ करवाएं, ASI से अनुमति लेनी जरूरी है…” । इसके बाद, सोशल मीडिया पर ये टिप्पणी धार्मिक भावनाओं के अपमान के आरोप के साथ वायरल हो गई और सुप्रीम कोर्ट में विरोधस्वरूप यह घटना हुई।


चीफ जस्टिस का संयमित उत्तर और कोर्ट की प्रतिक्रिया

घटना के समय CJI बिलकुल शान्त बने रहे और अन्य वकीलों से कहा, “इन बातों से हमें फर्क नहीं पड़ता, आप लोग अपनी दलीलें जारी रखें।” कोर्ट कार्यवाही को प्रभावित नहीं होने दिया गया । वकील को सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा टीम ने गिरफ्तार कर पुलिस को सौंप दिया। इसके बाद कोर्ट परिसर की सुरक्षा और सख्त कर दी गई ।

वकील सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का पंजीकृत सदस्य है और कई सालों से बार में मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने CJI पर हुए हमले की निंदा की और कड़ी कार्रवाई की मांग की है ।


कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई: जाँच व दंड प्रक्रिया

कोर्ट परिसर की सुरक्षा इकाई ने घटना के तुरंत बाद जांच शुरू कर दी है और आरोपी वकील से गहन पूछताछ की जा रही है । आरोपी वकील पर अदालत की अवमानना, अदालत की गरिमा का उल्लंघन एवं सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। कानून के अनुसार, अदालत में हंगामा या किसी भी प्रकार का हमला करने पर दोषी पर जेल व लाइसेंस रद्द जैसी सजा का प्रावधान है ।

इस घटनाक्रम के बाद बार काउंसिल भी आरोपी वकील के लाइसेंस को निलंबित किए जाने पर विचार कर रही है ।


Supreme Court और सनातन सम्बंधित विवादों का सामाजिक असर

सुप्रीम कोर्ट में हुई इस घटना ने न्यायपालिका, कानून व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवादों को उजागर किया। हाल के वर्षों में न्यायपालिका पर धार्मिक मामलों को लेकर दबाव बढ़ा है । समाज और सोशल मीडिया पर न्यायालय की टिप्पणियों को लेकर जो प्रतिक्रियाएं होती हैं, वे अदालत की गरिमा और स्वतंत्रता के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंग ने बयान दिया कि ऐसे विचारधारात्मक हमलों को न्यायपालिका से संयुक्त रूप से निंदा करना चाहिए ।

एक अन्य बड़ी बात यह है कि CJI ने सुनवाई के दौरान ‘सभी धर्मों का सम्मान करता हूं’ जैसी सार्वजनिक सफाई भी दी थी, ताकि किसी धर्म के अपमान का सवाल न उठे ।


निष्कर्ष: न्यायपालिका की गरिमा और नागरिक जिम्मेदारी

SC में CJI पर जूता हमला न सिर्फ एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह भारत की न्यायव्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा भी है। अदालत की गरिमा का सम्मान सामाजिक जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाएं न सिर्फ कानून के उल्लंघन का मामला बनाती हैं, बल्कि सार्वजनिक विश्वास को भी चोट पहुंचाती हैं । अदालत प्रशासन, कानूनविद् और नागरिक सभी को मिलकर न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सम्मान को सुरक्षित रखना आवश्यक है। सनातन धर्म के नाम पर कोर्टरूम में अशान्ति फैलाना उचित नहीं है; धार्मिक भावनाएं पवित्र हैं, लेकिन कानून सर्वोपरि है।


आग्रह और आपके अमूल्य सुझाव

सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए समाज में जागरूकता और संवैधानिक आचरण जरूरी है। यदि आपके पास इस प्रकरण, अदालत की गरिमा या धार्मिक मामलों में न्यायपालिका की भूमिका को लेकर कोई सुझाव या अनुभव है, तो कृपया हमें जरूर बताएं। आपके विचार समाज को मजबूत बनाने और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। अपनी राय हमारे साथ साझा करें—Bharati Fast News समाजिक चेतना को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।


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Disclaimer: इस लेख में दी गई सभी जानकारी भरोसेमंद समाचार स्रोतों एवं सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कार्यवाही के अनुसार प्रस्तुत की गई है। किसी भी अद्यतन या स्पष्टीकरण के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

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