संभल-मुरादाबाद रोड पर 100 करोड़ की ग्राम सभा जमीन का महा-फर्जीवाड़ा: तत्कालीन अफसरों और भू-माफियाओं के गठजोड़ पर मुकदमा दर्ज
उत्तर प्रदेश के संभल जिले से भू-माफियाओं और भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र के गठजोड़ को बेनकाब करने वाली इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है । संभल-मुरादाबाद मुख्य मार्ग पर स्थित करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन को कूटनीतिक साजिश और फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने के मामले में प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा कानूनी हंटर चलाया है । इस महा-घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद, राजस्व विभाग की तहरीर पर संभल कोतवाली में तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों, रसूखदार भू-माफियाओं और खरीदारों समेत कुल 32 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है ।
यह कार्रवाई सिर्फ जमीन पर अवैध कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तत्कालीन उपसंचालक चकबन्दी, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (नगर पालिका परिषद) और मानचित्रक जैसे रसूखदार पदों पर बैठे लोगों की सीधी संलिप्तता उजागर हुई है, जिन्होंने मिलकर सरकारी संपत्ति की खुलेआम बंदरबांट की । पुलिस ने राजस्व लेखपाल की लिखित शिकायत पर जालसाजी, धोखाधड़ी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर सघन जांच शुरू कर दी है । इस बड़ी कार्रवाई से पूरे मुरादाबाद मंडल के भू-कारोबारियों और भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
संभल सरकारी जमीन घोटाला: मुख्य अंश (Key Highlights)
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घोटाले का मुख्य केंद्र: ग्राम तख्तगुशाईन, संभल-मुरादाबाद मुख्य मार्ग पर स्थित कुल 6 किता रकवा 2.367 हेक्टेयर बेशकीमती भूमि ।
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जमीन की अनुमानित कीमत: प्राइम लोकेशन पर स्थित इस ग्राम सभा भूमि का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपये है 。
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प्रमुख प्रशासनिक धाराओं में केस: आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (भादंसं 1860) की धारा 420, 467, 468, 471 तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 2 व 3 के तहत केस दर्ज किया गया है ।
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बड़े अधिकारियों के नाम शामिल: तत्कालीन उपसंचालक चकबन्दी श्री खेम सिंह खड़क और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद श्री राजकुमार गुप्ता को साजिश का मुख्य सूत्रधार बनाया गया है ।
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शिकायतकर्ता: राजस्व लेखपाल क्षेत्र तश्तपुर, श्री स्पर्श गुप्ता (पुत्र उमेन्द्र कुमार) द्वारा लिखित रूप में मामला दर्ज कराया गया ।
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फर्जीवाड़े का आधार: वर्ष 1967 के एक कथित फर्जी पट्टा अभिलेख को आधार बनाकर वर्ष 2008 में गैर-कानूनी तरीके से नामांतरण (Mutation) आदेश पारित कराया गया था ।
लेटेस्ट अपडेट: 29 जून को दर्ज हुई एफआईआर, जांच अधिकारी नियुक्त (Latest Update)
संभल कोतवाली से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संभल सरकारी जमीन घोटाला मामले में दिनांक 29 जून 2026 को शाम 17:50 बजे औपचारिक रूप से एफआईआर संख्या 0162/2026 दर्ज की गई है । मामले की संवेदनशीलता और करोड़ों रुपये के राजस्व से जुड़े होने के कारण इसकी विवेचना किसी साधारण दरोगा को न देकर सीधे क्षेत्राधिकारी (CO) सम्भल / पुलिस उपाधीक्षक (Dy. SP) को सौंपी गई है ।
पुलिस टीमों ने नामजद किए गए स्थानीय भू-माफियाओं और बिचौलियों के ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया है। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद राजस्व रिकॉर्ड्स को पूरी तरह सील कर बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है।
🚨 पाठक अलर्ट (Reader Alert): संभल-मुरादाबाद रोड या इसके आसपास किसी भी भूखंड (Plot) का सौदा करने से पहले जिला प्रशासन या तहसील कार्यालय से यह सुनिश्चित कर लें कि संबंधित गाटा संख्या किसी जांच या विवाद के दायरे में तो नहीं है। अनजाने में खरीदी गई विवादित जमीन आपकी जमापूंजी को खतरे में डाल सकती है।
पृष्ठभूमि: 1967 के कथित पट्टे से शुरू हुआ खेल और 2008 का वो आदेश (Background Story)
इस महा-घोटाले की कहानी दशकों पुरानी और बेहद शातिराना है। एफआईआर के अनुसार, इस पूरे खेल की शुरुआत श्री सईदुल रहमान (पुत्र स्व. जमीरुल हसन खां, निवासी मियां सराय, सम्भल) द्वारा नगर पालिका परिषद सम्भल द्वारा जारी एक कथित फर्जी पट्टा अभिलेख (दिनांक 12.07.1967) के जरिए हुई ।
भू-माफियाओं ने इस कथित फर्जी पट्टे का इस्तेमाल कर तत्कालीन उपसंचालक चकबन्दी श्री खेम सिंह खड़क से मिलीभगत की और दिनांक 15.02.2008 को सरकारी भूमि का नामांतरण आदेश अपने पक्ष में करा लिया । इस एक गलत आदेश की बदौलत 2.367 हेक्टेयर (लगभग 5.8 एकड़) सरकारी जमीन रातों-रात निजी हाथों में सौंप दी गई, जिस पर भू-माफियाओं ने तुरंत कब्जा कर लिया ।
क्या हुआ? कैसे रची गई हाईकोर्ट को भी गुमराह करने की साजिश (What Happened?)
जब इस अवैध नामांतरण आदेश के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक रिट याचिका (संख्या बी-341/2008) योजित की गई, तो वहां भी एक बड़ा खेल खेला गया । आरोप है कि नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी श्री राजकुमार गुप्ता ने विपक्षियों से हमसाज (मिलीभगत) होकर अपने निजी स्वार्थ के चलते उस याचिका को व्यक्तिगत रूप से ‘नोट प्रेस’ (आगे न बढ़ाने का निर्णय) कर दिया ।
इतना ही नहीं, नगर पालिका में कार्यरत तत्कालीन मानचित्रक (Draftsman) श्री शाहबुद्दीन एवं पैरोकार श्री माजिद खान ने भी इस कूटनीतिक षड्यंत्र में पूरा साथ दिया । इन कर्मचारियों ने जानबूझकर अधिशासी अधिकारी के समक्ष वास्तविक और सच्चे तथ्यों को प्रस्तुत नहीं होने दिया, ताकि करोड़ों की यह बेशकीमती जमीन भू-माफियाओं के हवाले बनी रहे । इस बात की पुष्टि तत्कालीन अधिशासी अधिकारी श्री रामपाल सिंह और डिप्टी कलेक्टर सम्भल श्री रमेशबाबू द्वारा अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से की गई है ।
विशेषज्ञ विश्लेषण: सरकारी व्यवस्था में कूटनीतिक सेंधमारी (Expert Analysis)
“भूमि और राजस्व मामलों के कानून विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि ग्राम सभा की ऐसी भूमि जो मुख्य मार्गों पर स्थित होती है, उसका मालिकाना हक किसी निजी व्यक्ति को हस्तांतरित करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। चकबंदी और नगर पालिका के अधिकारियों द्वारा उच्च न्यायालय में चल रहे केस को कमजोर करना और फर्जी पट्टों को मान्यता देना यह साबित करता है कि यह एक सुनियोजित ‘व्हाइट-कॉलर क्राइम’ है। सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत दर्ज यह मामला आरोपियों को लंबी जेल और उनकी निजी संपत्तियों की कुर्की तक ले जा सकता है। निर्दोष खरीदार जिन्होंने बाद में इनसे प्लॉट खरीदे, वे कानूनन ठगे जा चुके हैं।”
आधिकारिक सूचना: इन विवादित गाटा संख्याओं पर हुआ है घोटाला (Official Information)
राजस्व विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, मुरादाबाद रोड पर स्थित ग्राम तख्तगुशाईन की कुल 6 अलग-अलग गाटा (खसरा) संख्याओं की जमीनों में यह हेरफेर किया गया है:
विवादित गाटा संख्या और रकबा (हेक्टेयर में): * गाटा संख्या 376 — रकबा 0.815 हे० * गाटा संख्या 378 — रकबा 0.417 हे० * गाटा संख्या 423 — रकबा 0.679 हे० * गाटा संख्या 518 — रकबा 0.202 हे० * गाटा संख्या 440 — रकबा 0.212 हे० * गाटा संख्या 424 — रकबा 0.042 हे०
कुल किता: 6 | कुल रकबा: 2.367 हेक्टेयर | अनुमानित मूल्य: ₹100 करोड़
महत्वपूर्ण विवरण एवं एफआईआर टाइमलाइन (Important Case Details)
| मुख्य विवरण | एफआईआर और केस से जुड़े प्रामाणिक तथ्य |
| मामला दर्ज होने की तिथि व समय |
29 जून 2026, शाम 17:50 बजे |
| संबंधित पुलिस थाना व जिला |
थाना कोतवाली सम्भल, जिला सम्भल |
| अपराध की प्रारंभिक तिथि |
15 फरवरी 2008 (नामांतरण आदेश की तिथि) |
| कुल नामजद अभियुक्त |
32 (31 चिन्हित व्यक्ति + अन्य अज्ञात लोग) |
| मुख्य जांच अधिकारी (I.O.) |
क्षेत्राधिकारी (CO) सम्भल, पद- पुलिस उपाधीक्षक |
| प्राथमिकी का आधार |
धारा 173 बी.एन.एस.एस. (BNSS) के तहत एकीकृत जाँच फार्म-1 |
एफआईआर में दर्ज प्रमुख नामजद आरोपियों की सूची (Accused List)
इस महा-घोटाले की एफआईआर में कुल 32 नामजद लोगों को शामिल किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
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श्री राजकुमार गुप्ता (तत्कालीन अधिशासी अधिकारी)
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श्री खेम सिंह खड़क (तत्कालीन उपसंचालक चकबन्दी)
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श्री शाहबुद्दीन (तत्कालीन मानचित्रक)
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श्री माजिद खान (पैरोकार)
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श्री इबादुर्रहमान खान, एहसानुर्रहमान खां (पुत्रगण सईदुल रहमान खां) व श्रीमती शाहजहाँ बेगम
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गुलाम साबिर के वारिसान: इफ्त आरा, तारिक अली, फारीक अली, शाकिर अली, शारिक अली, साजिद अली
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बिल्डर्स एवं अन्य केतागण: शिवानी रियलटी एण्ड इन्फ्रांस द्वारा अधिकृत धर्मेंद्र (निवासी दिल्ली), प्रदीप कुमार अग्रवाल (दिल्ली), श्रीमती मधु खुराना, विजय गुप्ता, श्रीमती रूपाली गुप्ता, फुरकान, इमरान, आजम खान, ममदूद आलम वारसी और हरजीत सिंह ।
आम जनता और जमीन खरीदारों पर असर (Impact on General Public)
इस मामले के उजागर होने से उन आम लोगों में दहशत का माहौल है जिन्होंने इस 2.367 हेक्टेयर के दायरे में आने वाली जमीनों पर डीलर के झांसे में आकर निवेश किया था । चूंकि यह भूमि सीधे तौर पर ग्राम सभा (सरकारी) घोषित है, इसलिए इस पर भविष्य में होने वाले किसी भी निजी निर्माण या कब्जे को अवैध मानकर ढहाया जा सकता है । प्रशासन द्वारा बहुत जल्द इन सभी गाटा संख्याओं पर ‘सरकारी संपत्ति’ का बोर्ड लगाकर कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
भविष्य के कानूनी परिणाम (Future Impact)
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संपत्ति की जब्ती: एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस और राजस्व विभाग आरोपियों की निजी चल-अचल संपत्तियों का ब्यौरा जुटा रहा है ताकि राजस्व नुकसान की भरपाई की जा सके।
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अधिकारियों पर विभागीय गाज: सेवानिवृत्त हो चुके या वर्तमान में सेवारत दोषी अधिकारियों के खिलाफ पेंशन रोकने और बर्खास्तगी जैसी विभागीय कठोर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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सख्त जांच का दायरा: मुरादाबाद रोड की अन्य जमीनों के पुराने पट्टों की फाइलें भी दोबारा खोली जा सकती हैं।
जमीन संबंधी धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या करें? (What Should Citizens Do?)
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गाटा संख्या का मिलान करें: उत्तर प्रदेश भूलेख पोर्टल पर जाकर हमेशा चेक करें कि जमीन ‘श्रेणी-5’ या ग्राम सभा/तालाब/चरागाह के नाम दर्ज तो नहीं है।
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पुरानी जांच रिपोर्ट देखें: यदि जमीन प्राइम लोकेशन पर है, तो रजिस्ट्री कार्यालय से उसका ‘बारह साला’ (Encumbrance Certificate) जरूर मांगें।
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फर्जी पट्टों से सावधान: नगर पालिका या ग्राम प्रधान द्वारा दशकों पहले दिए गए कथित पट्टों की प्रामाणिकता की जांच हमेशा तहसील के रिकॉर्ड रूम (अभिलेखागार) से करवाएं।
निष्कर्ष (Conclusion)
संभल का यह संभल सरकारी जमीन घोटाला साफ तौर पर दर्शाता है कि जब प्रशासनिक पद पर बैठे लोग ही रक्षक की जगह भक्षक बन जाएं, तो करोड़ों की जन-संपत्ति को किस कदर चूना लगाया जाता है । लेखपाल स्पर्श गुप्ता की तत्परता और वर्तमान जिला प्रशासन की कड़ाई के कारण आज 32 बड़े नामजद चेहरे कानून के शिकंजे में हैं । यह कार्रवाई भू-माफियाओं के लिए एक कड़ा संदेश है। आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी किसी भी विवादित गाटा संख्या (376, 378, 423, 440, 424, 518) वाली जमीनों के झांसे में न आएं और सतर्क रहें ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: संभल सरकारी जमीन घोटाला मुख्य रूप से कहां का है? उत्तर: यह घोटाला संभल जिले के संभल-मुरादाबाद मुख्य मार्ग पर स्थित ग्राम तख्तगुशाईन की ग्राम सभा भूमि से जुड़ा हुआ है ।
प्रश्न 2: इस घोटाले में कुल कितनी जमीन और कितने रुपयों का हेरफेर हुआ है? उत्तर: इसमें कुल 6 किता गाटा संख्याओं का कुल 2.367 हेक्टेयर रकबा शामिल है, जिसकी वर्तमान बाजारू कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी गई है ।
प्रश्न 3: एफआईआर किस तारीख को और किस थाने में दर्ज की गई है? उत्तर: यह एफआईआर दिनांक 29 जून 2026 को शाम 17:50 बजे थाना कोतवाली सम्भल में दर्ज की गई है ।
प्रश्न 4: इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार कौन से अधिकारी पाए गए हैं? उत्तर: तत्कालीन उपसंचालक चकबन्दी श्री खेम सिंह खड़क और नगर पालिका परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी श्री राजकुमार गुप्ता इस कूटनीतिक षड्यंत्र के मुख्य जिम्मेदार पाए गए हैं 。
प्रश्न 5: इस मामले में शिकायतकर्ता कौन है? उत्तर: इस मामले की लिखित शिकायत राजस्व लेखपाल क्षेत्र तश्तपुर श्री स्पर्श गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई है ।
प्रश्न 6: आरोपियों पर किन-किन मुख्य कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है? उत्तर: आरोपियों पर भादंसं की धारा 420, 467, 468, 471 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 2 व 3 के तहत केस दर्ज किया गया है ।
प्रश्न 7: क्या इस जमीन पर आम लोगों ने भी प्लॉट खरीदे हैं? उत्तर: हां, एफआईआर के अनुसार कई केतागण (खरीदार) और शिवानी रियलटी जैसी फर्म्स के नाम शामिल हैं, जिन्होंने इस विवादित सरकारी भूमि को निजी स्वार्थ के लिए खरीदा-बेचा था ।
प्रश्न 8: इस मामले की जांच कौन से पुलिस अधिकारी कर रहे हैं? उत्तर: इस संवेदनशील मामले की उच्च-स्तरीय जांच सीधे क्षेत्राधिकारी (CO) सम्भल / पुलिस उपाधीक्षक (Dy. SP) द्वारा की जा रही है ।
📍 UP Gram Sachivalaya Update: 1 जुलाई 2026 से ग्राम सचिवालय में बैठेंगे लेखपाल, सरकार का बड़ा आदेश
Disclaimer: यह लेख पूरी तरह से पुलिस कोतवाली सम्भल में दर्ज आधिकारिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR No. 0162/2026) के तथ्यों, गाटा संख्याओं और राजस्व लेखपाल द्वारा दी गई लिखित तहरीर पर आधारित है । इस समाचार का उद्देश्य केवल लोकहित में सूचना प्रसारित करना है। किसी भी नामजद आरोपी के संबंध में अंतिम निर्णय माननीय न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
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