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संभल में अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई, पूर्व सांसद के परिवार पर ₹1.35 लाख जुर्माना

🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | संभल

ब्रेकिंग न्यूज़ | संभल में अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई, पूर्व सांसद के परिवार पर ₹1.35 लाख जुर्माना

संभल में प्रशासन ने एक बड़े राजनीतिक परिवार के अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई की है। आदेश के मुताबिक, ₹1,35,000 का जुर्माना लगाया गया है और 30 दिन में अवैध हिस्से को हटाने का निर्देश दिया गया है। पालन न करने पर उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशंस एक्ट, 1958 की धारा-10 के तहत तत्काल ध्वस्तीकरण होगा और खर्च की वसूली भी की जाएगी।

जिस भवन पर यह कार्रवाई हुई है, उसके बड़े बुजुर्ग दशकों तक संभल लोकसभा से सांसद रहे हैं। वर्तमान में इस परिवार के जियाउर्रहमान बर्क समाजवादी पार्टी से सांसद हैं।

यह कदम भवन बाइलॉज़ के उल्लंघन और बिना अनुमति निर्माण के खिलाफ लिया गया है, जिससे संभल में राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई है।

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ब्रेकिंग न्यूज़ | संभल में अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई, पूर्व सांसद के परिवार पर ₹1.35 लाख जुर्माना

संभल, उत्तर प्रदेश – संभल जिले में प्रशासन ने भवन निर्माण के नियमों के उल्लंघन पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक प्रमुख राजनीतिक परिवार के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है।
आदेश के मुताबिक, विवादित भवन पर ₹1,35,000 का जुर्माना लगाया गया है और भवन मालिक को 30 दिनों के भीतर अवैध हिस्से को स्वयं हटाने का निर्देश दिया गया है।

यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं की गई तो उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशंस एक्ट, 1958 की धारा-10 के अंतर्गत भवन का तत्काल ध्वस्तीकरण किया जाएगा और उसका खर्च भी मालिक से वसूला जाएगा।


क्या है मामला?

यह मामला संभल शहर के नियमित क्षेत्र का है, जहां निर्माण भवन बाइलॉज़ और अनुमन्य सीमाओं से बाहर किया गया। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि भवन बाइलॉज़ में जो अनुमति नहीं है, उसे “कंपाउंडिंग” (जुर्माना देकर स्वीकृति) के जरिए भी मंजूर नहीं किया जा सकता।
प्रशासन के अनुसार, अवैध निर्माण में दीवारें, कॉलम, छत और अन्य ढांचे शामिल हैं, जिन्हें हटाना अनिवार्य है।


कौन है भवन का मालिक?

जिस भवन पर यह कार्रवाई की गई है, वह एक बड़े राजनीतिक परिवार का है।


आदेश में क्या कहा गया है?

  1. भवन बाइलॉज़ के उल्लंघन की पुष्टि हुई है।

  2. ₹1,35,000 का जुर्माना तत्काल भरने का निर्देश।

  3. 30 दिन में अवैध हिस्सों (दीवार, कॉलम, छत आदि) को स्वयं हटाने का आदेश।

  4. पालन न करने पर प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण और खर्च की वसूली।

  5. नियम तोड़ने पर भविष्य में भी कठोर कार्रवाई की चेतावनी।


कानूनी पहलू


राजनीतिक हलकों में हलचल

इस कार्रवाई ने संभल में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, क्योंकि यह मामला सीधे एक मौजूदा सांसद और उनके परिवार से जुड़ा है।
सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

धारा-10 (Order of Demolition of Buildings in Certain Cases) – संक्षेप व्याख्या

प्रमुख प्रावधान:

  1. अनुपालन रूप में केस में लागू
    यदि किसी भवन का निर्माण, पुनर्निर्माण, या सामग्रीगत परिवर्तन (material change) इस अधिनियम की किसी भी नियमावली, अनुमति (Section 6) या अनुमतियों की शर्तों के उल्लंघन में किया गया हो—
    → तो प्रिस्क्राइब्ड अथॉरिटी (Prescribed Authority) ध्वस्त करने का आदेश जारी कर सकती है

  2. निर्धारित समय सीमा (अधिकतम दो माह)
    ऐसे निर्माण को अधिकतम दो महीने के भीतर स्वामी द्वारा ध्वस्त करने का निर्देश दिया जाता है।

  3. अनुपालन न होने पर प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण
    यदि स्वामी द्वारा आदेशित अवधि में कार्य नहीं किया जाता, तो प्रिस्क्राइब्ड अथॉरिटी या संबंधित लोकल अथॉरिटी इस कार्य को कर सकती है, और उसका खर्च भूमि राजस्व की तरह वसूला जा सकता है।

  4. सुनवाई की अनिवार्यता
    आदेश जारी करने से पहले, स्वामी को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है—यानी बिना उचित सुनवाई के यह आदेश नहीं दिया जा सकता।

  5. रोकथाम का अतिरिक्त अधिकार (परिवर्धित प्रावधान)
    अधिनियम में बाद में संशोधन के तहत, यदि कोई निर्माण अवैध रूप से शुरू या जारी है, तो अथॉरिटी लिखित नोटिस देकर उसे तुरंत रोक सकती है, और यदि आवश्यकता हो, तो उचित बल का प्रयोग भी कर सकती है


संक्षेप सारांश:

स्थिति कार्रवाई का ब्यौरा
नियमों का उल्लंघन ध्वस्तीकरण का आदेश जारी
समय सीमा स्वामी द्वारा 2 माह में आदेश का पालन
अनुपालन न होने पर प्रशासन स्वयं ध्वंस कार्य कराएगा; खर्च वसूला जाएगा
सुनवाई का अधिकार आदेश से पहले स्वामी को सुनने का अवसर अनिवार्य है
निर्माण को रोकना अवैध निर्माण रोकने के लिए तत्काल रोकटोक की शक्ति प्रदान की गई

इस तरह, धारा-10 एक शक्ति संपन्न विधिक प्रावधान है जो प्रशासन को बिना अनुमति या नियमों के उल्लंघन वाले निर्माणों से निपटने में सक्षम बनाता है—चाहे वह निर्माण हो चुका हो या अभी चल रहा हो।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)-इस समाचार में दी गई सभी जानकारियाँ संबंधित प्रशासनिक आदेश, उपलब्ध दस्तावेज़ों और सार्वजनिक रूप से प्राप्त सूचनाओं पर आधारित हैं। यहाँ उल्लिखित व्यक्तियों, पदों या संस्थाओं का उल्लेख केवल सूचना एवं जनहित के उद्देश्य से किया गया है।
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