पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को लेकर एक बड़ा राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दार्जिलिंग दौरे के दौरान प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन और वेन्यू में बदलाव के बाद “राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद” अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद: PM मोदी का बयान, ममता बनर्जी ने दिया जवाब
आज 8 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब राष्ट्रपति ने एक सार्वजनिक मंच से अपनी नाराजगी जाहिर की। दरअसल, दार्जिलिंग के बिधाननगर में आयोजित ‘9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन’ के आयोजन स्थल को अचानक बदले जाने और मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति ने राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद को जन्म दे दिया है।
Bharati Fast News की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को आदिवासियों और राष्ट्रपति का अपमान बताया है, जबकि ममता बनर्जी ने इसे केंद्र की राजनीति करार दिया है।
राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद: आखिर क्या है मुख्य वजह?
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए उन बिंदुओं को देखना जरूरी है जिन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद को हवा दी:
आयोजन स्थल का बदलाव: प्रशासन द्वारा ऐन वक्त पर कार्यक्रम को बड़े मैदान से हटाकर छोटे स्थान पर शिफ्ट किया गया, जिससे राष्ट्रपति ने मंच से ही सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री उनसे नाराज हैं।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन: राष्ट्रपति के दौरे के समय राज्य के प्रमुख (मुख्यमंत्री) या वरिष्ठ मंत्रियों का मौजूद न होना शिष्टाचार के खिलाफ माना जा रहा है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप: भाजपा का दावा है कि टीएमसी सरकार ने जानबूझकर राष्ट्रपति को वह सम्मान नहीं दिया जिसकी वह हकदार हैं।
PM Modi का कड़ा रुख: “यह लोकतंत्र का अपमान है”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पश्चिम बंगाल सरकार की कड़ी निंदा की है। पीएम मोदी ने कहा कि एक आदिवासी महिला जो देश की राष्ट्रपति है, उनका इस तरह स्वागत करना बंगाल की संस्कृति नहीं बल्कि टीएमसी की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर प्रोटोकॉल की चूक और संवैधानिक गरिमा पर हमला बताया।
ममता बनर्जी का जवाब: “भाजपा कर रही है गंदी राजनीति”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद पर अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने कहा:
“प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से जगह बदली थी, इसमें कोई अपमान की मंशा नहीं थी।”
उन्होंने पीएम मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा राष्ट्रपति के कंधे पर बंदूक रखकर बंगाल में चुनाव लड़ना चाहती है।
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उनकी व्यस्तताओं के कारण वे व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुँच सकीं, लेकिन प्रतिनिधि वहां मौजूद थे।
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आंकड़ों की नज़र में: आदिवासियों की नाराजगी और चुनाव
आंकड़ों की बात करें तो पश्चिम बंगाल में लगभग 5.3 मिलियन (53 लाख) आदिवासी आबादी है, जो कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है। राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद होने से आगामी चुनावों में आदिवासी वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ गई है।
| विवरण | सांख्यिकी (संभावित) |
| बंगाल में आदिवासी जनसंख्या | ~6% |
| प्रभावित होने वाली सीटें | 40-45 विधानसभा सीटें |
| संथाल समुदाय का हिस्सा | आदिवासियों में ~50% |

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद क्यों शुरू हुआ?
A: यह विवाद दार्जिलिंग में संथाल सम्मेलन के वेन्यू बदलने और मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति के कारण शुरू हुआ।
Q2: प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर क्या कहा?
A: पीएम मोदी ने इसे आदिवासी समाज और देश के सर्वोच्च पद का अपमान बताया है।
Q3: क्या ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति से माफी मांगी है?
A: फिलहाल ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे भाजपा का प्रोपेगेंडा बताया है।
Q4: प्रोटोकॉल के नियम क्या कहते हैं?
A: राष्ट्रपति के राज्य दौरे पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल को अगवानी करनी होती है, हालांकि अनिवार्य कारणों से प्रतिनिधि भेजे जा सकते हैं।
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निष्कर्ष: राष्ट्रपति मुर्मू से जुड़े कार्यक्रम पर विवाद ने एक बार फिर केंद्र और राज्य के बीच के कड़वे रिश्तों को उजागर कर दिया है। जहाँ संवैधानिक गरिमा की बात सर्वोपरि होनी चाहिए, वहां राजनीतिक रोटियां सेंकना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद चुनावी मैदान में क्या मोड़ लेता है।
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अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार विभिन्न स्रोतों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। Bharati Fast News किसी भी दल का पक्ष नहीं लेता है।
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