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नवरात्र में कन्फ्यूजन! अष्टमी या नवमी – कब करें पूजा?
चैत्र नवरात्र अपने अंतिम पड़ाव की ओर है, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी तिथियों के घटने-बढ़ने और पंचांग के गणित ने भक्तों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अष्टमी और नवमी की सही तारीख को लेकर संशय गहरा गया है।
आज 21 मार्च 2026 को नवरात्र का तीसरा दिन है, लेकिन अभी से ही देश भर के श्रद्धालु इस बात को लेकर परेशान हैं कि कन्या पूजन और हवन किस दिन करना श्रेष्ठ होगा। नवरात्र में कन्फ्यूजन! होना स्वाभाविक है क्योंकि हिंदू पंचांग में तिथियाँ सूर्योदय और मध्यरात्रि के समय के अनुसार बदलती रहती हैं। Bharati Fast News की विशेष पड़ताल के अनुसार, साल 2026 में अष्टमी और नवमी की तिथियाँ कुछ इस प्रकार पड़ रही हैं कि कई लोग 26 मार्च को ही दोनों त्यौहार मनाने की बात कर रहे हैं, जबकि विद्वानों का मत कुछ अलग है। यदि आपने गलत दिन पूजा की या समय से पहले व्रत खोला, तो आपकी नौ दिनों की कठिन साधना अधूरी रह सकती है। आइए, इस भ्रम को जड़ से खत्म करते हैं और जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार सही दिन और मुहूर्त क्या है।
मुख्य खबर: नवरात्र में कन्फ्यूजन! अष्टमी और नवमी की सटीक तारीखें
विभिन्न ज्योतिषाचार्यों और ‘द्रिक पंचांग’ (Drik Panchang) के आंकड़ों का मिलान करने पर यह स्पष्ट हुआ है कि इस वर्ष चैत्र नवरात्र पूरे 9 दिनों का है। Chaitra Navratri 2026 Ashtami Navami Date को लेकर मुख्य भ्रम नवमी तिथि के प्रारंभ होने के समय को लेकर है।
महाअष्टमी (Maha Ashtami), जो माँ महागौरी को समर्पित है, वह 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। वहीं, महानवमी (Maha Navami) और राम नवमी का पावन पर्व 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हालाँकि, नवमी तिथि 26 मार्च की दोपहर से ही शुरू हो जाएगी, लेकिन ‘उदयातिथि’ (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) के सिद्धांत के कारण मुख्य पूजा 27 मार्च को ही संपन्न होगी।
शास्त्र कहते हैं – जब तिथि सूर्योदय पर हो तो उसी दिन पूजा करें। इसलिए अष्टमी पूजा 26 मार्च सुबह करें। नवमी पर राम नवमी का जन्माभिषेक दोपहर 12 बजे के आसपास करें। अगर आप 9 दिन का व्रत रख रहे हैं तो 27 मार्च को पारण करें।
क्या हुआ? तिथियों के फेर में क्यों उलझे भक्त?
इस साल नवरात्र में कन्फ्यूजन! की जड़ पंचांग का वह समय है जब एक तिथि समाप्त होती है और दूसरी शुरू होती है।
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पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 25 मार्च की दोपहर 01:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च की सुबह 11:48 बजे तक रहेगी। इसके तुरंत बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। चूंकि 26 मार्च को सूर्योदय के समय अष्टमी मौजूद है, इसलिए ‘महाअष्टमी’ इसी दिन मनाई जाएगी। वहीं, 27 मार्च को सूर्योदय के समय नवमी तिथि होगी (जो सुबह 10:06 बजे तक रहेगी), इसलिए राम नवमी और नवरात्र का समापन 27 मार्च को होगा। जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे गुरुवार को पूजा करेंगे और जो नवमी को करते हैं, वे शुक्रवार की सुबह 10 बजे से पहले कन्या पूजन संपन्न कर सकते हैं।

घटना का पूरा विवरण: कन्या पूजन और हवन का शुभ मुहूर्त
अगर आप नवरात्र में कन्फ्यूजन! से बचकर सही समय पर माँ की कृपा पाना चाहते हैं, तो इन मुहूर्तों को नोट कर लें:
दुर्गा अष्टमी (26 मार्च 2026, गुरुवार):
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अष्टमी तिथि समाप्त: सुबह 11:48 बजे।
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कन्या पूजन मुहूर्त: सुबह 06:20 से 07:52 तक (प्रातः काल) और सुबह 10:56 से दोपहर 02:01 तक।
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विशेष: इसी दिन ‘संधि पूजा’ भी होगी जो अष्टमी और नवमी के मिलन काल में की जाती है (सुबह 11:24 से 12:12 के बीच)।
महानवमी/राम नवमी (27 मार्च 2026, शुक्रवार):
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नवमी तिथि समाप्त: सुबह 10:06 बजे।
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कन्या पूजन मुहूर्त: सूर्योदय से लेकर सुबह 10:00 बजे तक।
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हवन मुहूर्त: सुबह 09:30 बजे से पहले हवन कर लेना उत्तम होगा।
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पारण (व्रत खोलना): शुक्रवार, 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे के बाद।
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भारत की भूमिका: सांस्कृतिक विविधता और क्षेत्रीय परंपराएं
भारत जैसे विशाल देश में नवरात्र मनाने के तरीके अलग-अलग हैं, जिससे कभी-कभी नवरात्र में कन्फ्यूजन! बढ़ जाता है। उत्तर भारत में जहाँ अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन (कंजक) का विशेष जोर रहता है, वहीं बंगाल में ‘संधि पूजा’ और ‘महानवमी’ का महत्व अलग है। अयोध्या में राम नवमी का उत्सव 27 मार्च को अपनी पूरी भव्यता के साथ मनाया जाएगा, क्योंकि भगवान राम का जन्म नवमी तिथि के मध्याह्न (दोपहर) काल में हुआ था। भारत सरकार ने इस अवसर पर अयोध्या और अन्य शक्तिपीठों में विशेष सुरक्षा और दर्शन के प्रबंध किए हैं।
वैश्विक प्रभाव: सात समंदर पार भी गूँजेगी अष्टमी की आरती
Chaitra Navratri 2026 Ashtami Navami Date की गूँज केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया में बसे हिंदू समुदाय के लोग भी भारतीय मानक समय (IST) और स्थानीय चंद्रोदय के अनुसार पूजा का समय तय कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर ‘डिजिटल पंचांग’ के बढ़ते उपयोग ने नवरात्र में कन्फ्यूजन! को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन स्थानीय मंदिरों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना ही प्रवासियों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता होता है।
Drik Panchang Official Website – Chaitra Navratri Muhurat
लोगों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया: “श्रद्धा बड़ी या समय?”
Bharati Fast News ने इस विषय पर विद्वानों और भक्तों से बात की।
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ज्योतिषाचार्य का पक्ष: पंडित प्रवीण द्विवेदी ने बताया, “शास्त्रों में ‘उदयातिथि’ सर्वोपरि है। इसलिए 26 को अष्टमी और 27 को नवमी मनाना ही शास्त्रसम्मत है। भ्रम में पड़ने की आवश्यकता नहीं है।”
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भक्त की राय: दिल्ली की निवासी सरिता ने कहा, “हर साल दो दिन का चक्कर पड़ता है, हम तो अपने कुल की परंपरा के अनुसार अष्टमी को ही कन्या पूजन करते हैं।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि श्रद्धा सच्ची हो, तो माँ हर भाव स्वीकार करती हैं, लेकिन मुहूर्त का पालन अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
आगे क्या हो सकता है? राम जन्मोत्सव और सूर्य तिलक
नवरात्र में कन्फ्यूजन! दूर होने के बाद अब सबकी निगाहें 27 मार्च को अयोध्या पर टिकी हैं।
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राम लला का सूर्य तिलक: पिछले साल की तरह इस बार भी राम नवमी पर दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें सीधे राम लला के मस्तक को सुशोभित करेंगी।
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भीड़ प्रबंधन: अयोध्या में 25-30 लाख श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद है, जिसके लिए एआई (AI) आधारित क्राउड कंट्रोल सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है।
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डिजिटल दर्शन: दुनिया भर के करोड़ों लोग राम जन्मोत्सव का सीधा प्रसारण घर बैठे देख सकेंगे।
निष्कर्ष: नवरात्र में कन्फ्यूजन! को पीछे छोड़ते हुए यह स्पष्ट है कि 26 मार्च को अष्टमी और 27 मार्च को नवमी मनाना सबसे उचित है। कन्या पूजन आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दोनों में से किसी भी दिन कर सकते हैं, बशर्ते वह मुहूर्त के भीतर हो। माँ दुर्गा की भक्ति का यह पर्व हमें धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। Bharati Fast News की पूरी टीम की ओर से आप सभी को अष्टमी और राम नवमी की अग्रिम शुभकामनाएँ।
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FAQ Section: आपके सवालों के जवाब
Q1: क्या 26 मार्च को ही अष्टमी और नवमी दोनों मनाई जा सकती हैं? उत्तर: पंचांग के अनुसार 26 मार्च की दोपहर से नवमी लग जाएगी, लेकिन उदयातिथि के कारण नवमी का व्रत और राम जन्मोत्सव 27 मार्च को मनाना ही श्रेष्ठ है।
Q2: कन्या पूजन के लिए कौन सा दिन ज्यादा शुभ है? उत्तर: यह आपकी कुल परंपरा पर निर्भर करता है। कई लोग कुलदेवी की पूजा अष्टमी को करते हैं, तो कुछ नवमी को। दोनों ही दिन माँ की कृपा के लिए शुभ हैं।
Q3: नवरात्र का व्रत कब खोलना चाहिए (पारण)? उत्तर: चैत्र नवरात्र 2026 का पारण 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे के बाद, नवमी तिथि समाप्त होने पर करना चाहिए।
Q4: कन्या पूजन में कन्याओं की उम्र कितनी होनी चाहिए? उत्तर: शास्त्रों के अनुसार 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन माँ के विभिन्न स्वरूपों के रूप में किया जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख धार्मिक मान्यताओं और विभिन्न पंचांगों के विश्लेषण पर आधारित है। स्थानीय मान्यताओं और कुल परंपराओं के अनुसार पूजा के नियमों में भिन्नता हो सकती है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए अपने पुरोहित से परामर्श अवश्य लें।
लेखक: Bharati Fast News Global Desk हम आपको देश और दुनिया की हर महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक हलचल का निष्पक्ष विश्लेषण प्रदान करते हैं।