Income Tax Warning: 31 दिसंबर 2025 के बाद Revised ITR नहीं होगा संभव – रिफंड वालों के लिए अलर्ट
नमस्ते Bharati Fast News के पाठकों! क्या आपने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भर दिया है? अगर हाँ, तो क्या आपको पूरा यकीन है कि उसमें कोई गलती नहीं है? क्योंकि Revised ITR भरने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 बहुत करीब है और यह उन सभी के लिए एक बड़ा अलर्ट है जिन्हें रिफंड का इंतजार है या जो अपनी किसी गलती को सुधारना चाहते हैं। Bharati Fast News आपको बता रहा है कि यह तारीख क्यों इतनी महत्वपूर्ण है! Revised ITR, वस्तुतः एक ‘सेकंड चांस’ है-एक अवसर, जिसके माध्यम से हम अपनी वित्तीय कथानक को फिर से लिख सकते हैं, त्रुटियों को सुधार सकते हैं, और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारी कर गाथा पूरी तरह से सत्य और सटीक हो। तो, आइए जानते हैं कि यह संशोधित रिटर्न क्या है और इसे आखिरी मौके के तौर पर क्यों देखना चाहिए।

CBDT के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक Assessment Year 2025–26 (यानी FY 2024–25) के लिए Revised ITR और Belated ITR की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2025 तय की गई है। इसका मतलब यह है कि अगर आपने अपना ITR 16 सितंबर 2025 तक भर दिया था लेकिन बाद में कोई गलती पकड़ में आई-जैसे इनकम कम–ज्यादा दिख गई, TDS मैच नहीं हुआ या सेक्शन 80C/80D जैसी डिडक्शन मिस हो गई-तो उसे सुधारने के लिए Revised Return फाइल करने का समय सिर्फ 31 दिसंबर 2025 तक ही है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक बार यह तारीख निकल जाने पर नॉर्मल Revised ITR (धारा 139(5)) का ऑप्शन खत्म हो जाएगा और टैक्सपेयर को सिर्फ Updated Return (ITR-U) की तरफ जाना पड़ेगा, जिसमें न तो अतिरिक्त रिफंड क्लेम किया जा सकता है और न टैक्स लायबिलिटी कम की जा सकती है, उल्टा अतिरिक्त टैक्स और इंटरेस्ट भरना पड़ता है। यही वजह है कि Income Tax Warning: 31 दिसंबर 2025 के बाद Revised ITR नहीं होगा संभव सिर्फ हेडलाइन नहीं, बल्कि हर salaried और बिज़नेस टैक्सपेयर के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
Revised ITR की कानूनी लिमिट: 31 दिसंबर 2025 का मैकेनिज़्म समझिए
Income Tax Warning: 31 दिसंबर 2025 के बाद Revised ITR नहीं होगा संभव — लॉ क्या कहता है?
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत कोई भी टैक्सपेयर अपने पहले से भरे ITR को सुधारने (revised करने) का अधिकार रखता है, लेकिन समय सीमा के भीतर।
नियम साफ है: Revised ITR Assessment Year खत्म होने से 3 महीने पहले तक या assessment complete होने से पहले, जो भी पहले हो, फाइल किया जा सकता है।
AY 2025–26 के लिए Assessment Year 31 मार्च 2026 पर खत्म होगा, उसका 3 महीने पहले का कट–ऑफ 31 दिसंबर 2025 बनता है।
इसी आधार पर CBDT, ClearTax, CAalley और अन्य प्लेटफॉर्म्स ने कन्फर्म किया है कि FY 2024–25 के Revised और Belated ITR की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2025 ही होगी।
यानी 1 जनवरी 2026 से आप उसी साल के लिए Revised Return नहीं भर पाएंगे, भले ही बाद में गलती पता चले या अतिरिक्त रिफंड बनता हो—उसके लिए पूरी अलग, महंगी प्रक्रिया (ITR-U) अपनानी पड़ेगी।
इतिहास के पन्नों से: ITR और Revised Return का सफर
1961 के इनकम टैक्स एक्ट से आधुनिक कर प्रणाली की शुरुआत हुई, जिसने हमारे देश में कर संग्रह के तरीकों को एक नया आयाम दिया। Revised Return की अवधारणा हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, जो करदाताओं को अपनी गलतियों को सुधारने और सही जानकारी प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करती है।
समय के साथ ITR फाइलिंग की तारीखों में कई बदलाव हुए, जैसे 2002 में 30 जून से 31 जुलाई तक की वृद्धि, जिसने करदाताओं को अधिक समय दिया। Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने हाल के वर्षों में बार-बार डेडलाइन में विस्तार किया, जिसका कारण नए फॉर्म, तकनीकी दिक्कतें, और कोविड-19 जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियाँ थीं। यह दिखाता है कि कर प्रणाली कितनी लचीली है और यह करदाताओं की सुविधा के लिए कैसे अनुकूलित होती है।
किस–किस के लिए Income Tax Warning ज़्यादा क्रिटिकल है?
रिफंड वालों के लिए खास अलर्ट
Economic Times और कई टैक्स पोर्टल्स ने साफ लिखा है कि जिन लोगों का ITR already processed नहीं हुआ है या जिन्होंने गलत रिफंड क्लेम किया है, उनके लिए 31 दिसंबर 2025 के बाद Revised ITR नहीं होगा संभव वाली चेतावनी और भी अहम है।
क्रिटिकल कैटेगरी:
जिन्होंने ITR फाइल किया लेकिन कुछ TDS या 26AS/AIS की एंट्री मिस हो गई, जिससे रिफंड कम दिख रहा है।
जिनका सेक्शन 80C, 80D, 80G आदि का डिडक्शन छूट गया और अब ज़्यादा टैक्स दिख रहा है।
जिनके ITR में गलत बैंक अकाउंट, PAN या पर्सनल डीटेल भरने से रिफंड स्टक हो सकता है।
जिन्होंने जल्दी–जल्दी रिटर्न फाइल कर दिया और बाद में पता चला कि एक–दो इनकम सोर्स (जैसे FD interest, Freelancing, किराया इत्यादि) छूट गए।
इन सभी मामलों में Revised ITR ही एक ऐसा साधन है जिसके जरिए आप सही रिफंड क्लेम कर सकते हैं या गलती सुधारकर नोटिस से बच सकते हैं—और इसकी कानूनी डेडलाइन 31 दिसंबर 2025 है।
गलतियाँ जो Revised ITR से सुधर सकती हैं: एक नजर
- आय, कटौती या वित्तीय विवरण में त्रुटियां शामिल हैं, जैसे गणना की गलती या टाइपो।
- आप छूटे हुए डिडक्शन या छूट, जैसे धारा 80C, 80D, 24(b) आदि को भी जोड़ सकते हैं।
- यदि आपने कोई अघोषित आय, जैसे किराया या ब्याज प्राप्त किया है, तो उसे भी आप संशोधित रिटर्न में शामिल कर सकते हैं।
- आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी में भी सुधार कर सकते हैं, जैसे पैन या बैंक खाता।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको फॉर्म 26AS या AIS से डेटा बेमेल होने की स्थिति में भी सुधार करना चाहिए।
यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आपके द्वारा दी गई सभी जानकारी सही और अद्यतित है, क्योंकि इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की कर संबंधी जटिलताओं से बचा जा सकता है।
विवाद और चुनौतियाँ: Revised ITR फाइलिंग की राह में कांटे
- बार-बार संशोधन करने से जाँच का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि AI-आधारित सिस्टम की कड़ी नजर होती है।
- ITR यूटिलिटीज जारी होने में देरी भी एक समस्या है, क्योंकि इससे फाइलिंग की समय-सीमा कम हो जाती है।
- नए ITR फॉर्म्स की जटिलता और डेटा सत्यापन की चुनौती भी करदाताओं के लिए मुश्किल पैदा करती है।
- गलत संशोधन करने से दंड और असेसमेंट फिर से खुलने का जोखिम होता है।
- Revised ITR, Updated Return (ITR-U) और Rectification Request के बीच भ्रम भी एक आम समस्या है।
इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, करदाताओं को धैर्य और सावधानी बरतनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो एक कर सलाहकार की मदद लेनी चाहिए।
डेडलाइन के बाद क्या? Revised ITR भरने की आखिरी तारीख चूकने पर विकल्प
यदि आप 31 दिसंबर 2025 की डेडलाइन चूक जाते हैं, तो आपके पास Revised ITR भरने का विकल्प नहीं होगा। हालांकि, आपके पास कुछ अन्य विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी अपनी सीमाएं हैं।
- आप Updated Return (ITR-U) (धारा 139(8A)) फाइल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको अतिरिक्त टैक्स देना होगा। ध्यान रखें कि ITR-U का उपयोग रिफंड बढ़ाने या टैक्स कम करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
- आप Rectification Request (धारा 154) भी फाइल कर सकते हैं, लेकिन यह केवल रिकॉर्ड में स्पष्ट गलतियों के लिए है, नई कटौती या आय जोड़ने के लिए नहीं।
- इसके अलावा, देर से फाइलिंग के लिए दंड (धारा 234F) और ब्याज (धारा 234A) भी लागू हो सकते हैं।
इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप डेडलाइन का पालन करें और समय पर अपना रिटर्न फाइल करें।

भविष्य की ओर: इनकम टैक्स एक्ट 2025 और आगामी बदलाव
भविष्य में इनकम टैक्स एक्ट 2025 में कई महत्वपूर्ण बदलाव होने वाले हैं। यह 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसका लक्ष्य कर कानूनों को सरल बनाना है।
- ITR-U की समय-सीमा को भी 24 महीने से बढ़ाकर 48 महीने कर दिया गया है, जो AY 2026-27 से प्रभावी होगा।
- नई टैक्स व्यवस्था में भी कई बदलाव किए गए हैं, जैसे बढ़ी हुई छूट और नई स्लैब (₹12 लाख तक आय कर-मुक्त)।
- धारा 206AB और 206CCA को भी हटा दिया गया है, जिससे कम्प्लायंस बोझ कम होगा।
- इसके अलावा, ULIPs, किराये पर TDS की सीमा, और वरिष्ठ नागरिकों के लिए कटौती में भी बदलाव किए गए हैं।
इन सभी बदलावों का उद्देश्य कर प्रणाली को अधिक सरल और करदाता के अनुकूल बनाना है।
Updated Return (ITR-U): 31 दिसंबर के बाद सिर्फ “महंगा विकल्प”
अगर आप 31 दिसंबर 2025 तक Revised ITR नहीं file कर पाते, तो Income Tax Act आपको एक और ऑप्शन देता है—Updated Return (ITR-U), जो धारा 139(8A) के तहत आता है।
ITR-U में क्या–क्या फर्क है?
Finance Act 2025 के बाद ITR-U अब Assessment Year खत्म होने के 48 महीने के भीतर तक भरा जा सकता है (पहले 24 महीने की लिमिट थी)।
ITR-U का इस्तेमाल तब किया जाता है जब:
आपने ओरिजिनल/बिलेटेड/रिवाइज़्ड ITR में कोई इनकम छोड़ दी हो,
या बिल्कुल ITR ही न भरा हो,
या बाद में समझ आए कि टैक्स कम दिखा दिया है।
लेकिन सबसे बड़ा फर्क:
ITR-U ज़्यादातर उन केसों के लिए है जहां आपको “ज़्यादा टैक्स” देना है, न कि रिफंड बढ़ाने के लिए।
CBDT के नोटिफिकेशन के अनुसार ITR-U के जरिए अतिरिक्त रिफंड क्लेम नहीं किया जा सकता, न ही पहले से क्लेम किए रिफंड को बढ़ाया जा सकता है—यह सिर्फ under-reporting सही करने का टूल है।
साथ में additional tax भी देना होता है:
अगर ITR-U Assessment Year के बाद पहले 12 महीनों में फाइल हो, तो extra 25% टैक्स+इंटरेस्ट,
12–24 महीने के बीच फाइल हो तो extra 50%,
Finance Act 2025 के बाद तीसरे और चौथे साल में filing पर यह extra tax 60% और 70% तक जा सकता है।
इसलिए अगर आपका मकसद सिर्फ रिफंड सही करना है या छोटी–मोटी गलती ठीक करना है, तो ITR-U बिल्कुल भी किफायती नहीं माना जाएगा—इससे पहले ही Revised ITR का विकल्प इस्तेमाल करना बेहतर है।
अभी क्या करें? 31 दिसंबर 2025 से पहले की “एक्शन लिस्ट”
Income Tax पोर्टल, Tax2Win, Quicko, TaxBuddy जैसी साइट्स जो स्टेप–बाय–स्टेप गाइड देती हैं, उनकी सलाह को मिलाकर एक प्रैक्टिकल “To-Do List” बनती है:
AIS/TIS, Form 26AS तुरंत चेक करें
देखें कि सभी TDS, interest, capital gains, salary आदि सही रिपोर्ट हुए हैं या नहीं।
अपना ITR सारांश डाउनलोड कर मिलान करें
ITR में दिखाई गई income, deduction, tax और रिफंड को AIS/26AS से compare करें।
अगर गलती मिले तो Revised ITR फाइल करें
वही Assessment Year चुनकर “Revised Return u/s 139(5)” ऑप्शन से e-filing पोर्टल पर return re-file करें।
गलती सिर्फ रिफंड में हो तो भी Revised ITR ज़रूर भरें
गलत बैंक डिटेल, IFSC, अकाउंट टाइप या रिफंड कम क्लेम हुआ है, तो भी revise करना ही safest path है।
31 दिसंबर 2025 की deadline को absolute मानिए
आखिरी हफ्ते या दिनों तक मत टालिए—portal load, OTP issue या अन्य tech glitches की वजह से बाद में पछताना पड़ सकता है।
Disclaimer- यह लेख Income Tax Department, CBDT सर्कुलर, सेक्शन 139(5) और 139(8A) से जुड़ी कानूनी प्रावधानों, तथा विश्वसनीय टैक्स पोर्टल्स (ClearTax, Tax2Win, CAalley, TaxBuddy आदि) की पब्लिक जानकारी पर आधारित है। यह किसी भी तरह की पर्सनल टैक्स/कानूनी सलाह नहीं है। हर टैक्सपेयर की स्थिति अलग होती है—इसलिए Revised ITR, ITR-U या किसी भी अन्य विकल्प पर निर्णय लेने से पहले किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स प्रोफेशनल से अपनी केस–स्पेसिफिक सलाह अवश्य लें।
Bharati Fast News – तेज़ खबरें, सच्ची खबरें – यही है भारती फास्ट न्यूज़
आग्रह और आपके अमूल्य सुझाव
क्या आपने FY 2024–25 (AY 2025–26) का ITR भरते समय कोई गलती नोटिस की है—जैसे रिफंड कम आना, TDS मिस होना या deduction छूट जाना? Income Tax Warning: 31 दिसंबर 2025 के बाद Revised ITR नहीं होगा संभव वाली इस डेडलाइन को लेकर आपके क्या सवाल हैं? अपने अनुभव और प्रश्न कमेंट में ज़रूर लिखें। टैक्स, रिफंड और सरकारी नियमों से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण खबरों के लिए Bharati Fast News को नियमित रूप से पढ़ें, बुकमार्क करें और यह लेख अपने दोस्तों व परिवार के साथ शेयर करें।













