कब होगा शुरू, क्या हैं फायदे और पूरा रूट मैप? तो मिलिए यूपी के सबसे बड़े गेम-चेंजर – गंगा एक्सप्रेस-वे से! यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से जोड़ने वाली विकास की धारा है। क्या यह सिर्फ संयोग है कि यह जीवनदायिनी गंगा के नाम पर है? शायद नहीं। यह एक्सप्रेस-वे उस नदी की तरह ही है, जो अपने किनारे बसे लोगों के लिए समृद्धि लेकर आती है।
यूपी के भाग्य बदलने वाला एक्सप्रेस-वे: एक नज़र में
नमस्ते! क्या आप भी उत्तर प्रदेश में तेज़ी से बदलती सड़कों की कहानी से हैरान हैं? यह एक अद्भुत दृश्य है, सड़कों का जाल जो पूरे परिदृश्य को फिर से परिभाषित कर रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक, 594 किलोमीटर का ये सफर आपकी जिंदगी कैसे बदलने वाला है? यह सिर्फ दूरी कम करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक नए युग की शुरुआत है। आइए जानते हैं Bharati Fast News पर!

गंगा एक्सप्रेस-वे कहाँ से कहाँ तक बना? कब होगा शुरू होगा और आम जनता को क्या होंगे बड़े फायदे
गंगा एक्सप्रेसवे रूट मैप तैयार है, जो मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनेगा। जनवरी 2026 में उद्घाटन के बाद दिल्ली-प्रयागराज सफर 12 से घटकर 5 घंटे। Bharati Fast News लाता है रूट, स्टॉपेज, फायदे की पूरी डिटेल। ₹36,000 करोड़ प्रोजेक्ट, 12 जिलों को जोड़ेगा।
कहाँ से कहाँ तक, और क्या-क्या मिलेगा इस ‘महामार्ग’ पर? (पूरा रूट मैप और सुविधाएं)
स्टार्ट: मेरठ (बिजनौल गांव, NH-334)
एंड: प्रयागराज (जुदापुर दांडूपुर, NH-27)
लंबाई: 594 किमी (फेज 1), फेज 2 हरिद्वार तक।
स्पीड लिमिट: 120 किमी/घंटा।
12 जिलों से होकर गुजरेगा: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमेठी, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज।
कब होगा शुरू, और भविष्य में क्या है खास? (लेटेस्ट अपडेट और आगे की राह)
फटाफट तैयार, जल्द ही शुरू:
- फेज-1 का काम (मेरठ से प्रयागराज) लगभग 96% पूरा हो चुका है (दिसंबर 2025 तक)। यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो परियोजना के पूरा होने की ओर इशारा करता है। FASTag टोल ट्रायल भी सफल हो चुके हैं!
- उम्मीद है कि गंगा एक्सप्रेस-वे फरवरी 2026 में जनता के लिए खुल जाएगा! यह एक खुशी का क्षण होगा, जब लोग इस एक्सप्रेस-वे का उपयोग कर सकेंगे।
भविष्य की उड़ानें (फेज 2 विस्तार):
- मेरठ से हरिद्वार तक 110-150 किलोमीटर का विस्तार। यह धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा देगा, जो उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
- प्रयागराज से बलिया (वाराणसी के पास) तक 314 किलोमीटर का विस्तार, जो इसे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा और दिल्ली NCR को सीधे बिहार से मिलाएगा। यह कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा, जो आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से भी कनेक्टिविटी की योजना।
- औद्योगिक गलियारे: मेरठ, बदायूं, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज में फार्मा, टेक्सटाइल और आईटी पार्क बनेंगे। यह औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा, जो रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
उत्तर प्रदेश के लिए एक उज्ज्वल भविष्य: यह एक्सप्रेस-वे यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
आपकी यात्रा कहाँ से शुरू, कहाँ खत्म?
- पश्चिमी यूपी के मेरठ (खरेखौड़ा के पास बिजाौली गाँव) से शुरू होकर पूर्वी यूपी के प्रयागराज (जुदापुर डांडू गाँव) तक। क्या आपने कभी सोचा है कि दो संस्कृतियों, दो अलग-अलग दुनियाओं को जोड़ने का क्या मतलब होता है? यह एक्सप्रेस-वे ठीक यही करता है।
- पूरे 12 ज़िलों से होकर गुज़रेगा ये एक्सप्रेस-वे: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज। ये सिर्फ नाम नहीं हैं, ये उन लोगों की कहानियां हैं, जिनके जीवन इस एक्सप्रेस-वे से प्रभावित होंगे।
सिर्फ सड़क नहीं, एक पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर:
- 594 किलोमीटर लंबा, 6 लेन का (भविष्य में 8 लेन तक विस्तार की सुविधा)। क्या आप कल्पना कर सकते हैं, इस विशाल संरचना को बनाने में कितना प्रयास लगा होगा?
- 14 बड़े पुल, 126 छोटे पुल, 28 फ्लाईओवर, 381 अंडरपास और 8 डायमंड इंटरचेंज। यह एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जो आधुनिक भारत की क्षमताओं को दर्शाता है।
- खासियत: शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप, जो आपातकालीन स्थिति में वायु सेना के काम आएगी – देश की सुरक्षा में भी योगदान! यह सिर्फ एक सुविधा नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक संपत्ति है, जो देश की सुरक्षा को मजबूत करती है।
- टोल प्लाजा (मेरठ और प्रयागराज में मुख्य), 9 सार्वजनिक सुविधा केंद्र। ये सुविधाएं यात्रियों के आराम और सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगी। सौर ऊर्जा का उपयोग करके ग्रीन एक्सप्रेस-वे बनाने की भी योजना। यह भविष्य की ओर एक कदम है, जो पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देता है।
स्टॉपेज और इंटरचेंज (टोल पॉइंट्स)
20+ इंटरचेंज, 5 एयरस्ट्रिप्स।
| किमी | शहर/इंटरचेंज | कनेक्टेड NH |
|---|---|---|
| 0 | मेरठ | NH-334 |
| 50 | हापुड़ | NH-9 |
| 120 | बदायूं | NH-30 |
| 300 | हरदोई | NH-24 |
| 500 | रायबरेली | NH-24B |
| 594 | प्रयागराज | NH-27 |
एयरस्ट्रिप्स: शाहजहांपुर, हरदोई (इमरजेंसी लैंडिंग)।
उद्घाटन तारीख और स्टेटस
ट्रायल रन: दिसंबर 2025।
उद्घाटन: जनवरी 2026 (मकर संक्रांति के बाद, PM मोदी संभावित)। 99% काम पूरा।hindi.news18+1
यात्रा समय बचत: पहले vs बाद
| रूट | पुराना समय | नया समय | बचत |
|---|---|---|---|
| मेरठ-प्रयागराज | 12 घंटे | 5 घंटे | 7 घंटे |
| दिल्ली-प्रयागराज | 14 घंटे | 6 घंटे | 8 घंटे |
| लखनऊ-मेरठ | 8 घंटे | 3 घंटे | 5 घंटे |
कैसे शुरू हुई गंगा एक्सप्रेस-वे की कहानी? (एक ऐतिहासिक सफ़र)
पहला सपना:
बात 2007 की है, जब मायावती सरकार ने ‘ग्रेटर नोएडा-बलिया एक्सप्रेस-वे’ का सपना देखा था। एक महत्वाकांक्षी विचार, जो अपने समय से आगे था। लेकिन, पर्यावरण से जुड़े कुछ पेंच फंस गए, और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2009 में काम रोक दिया। यह एक ऐसा क्षण था, जब उम्मीदें धराशायी हो गईं, और प्रोजेक्ट करीब एक दशक तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
योगी सरकार का रिवाइवल:
साल 2019 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई जान दी। यह एक पुनर्जन्म था, एक नई शुरुआत। पर्यावरण चिंताओं को दूर करते हुए, रूट को गंगा नदी से दूर शिफ्ट किया गया। यह सिर्फ एक मामूली बदलाव नहीं था, बल्कि एक सावधानीपूर्वक उठाया गया कदम था, जिसने परियोजना को बचाया। दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में इसका शिलान्यास किया। यह दर्शाता है कि कैसे एक पुरानी योजना को नए सिरे से, बेहतर तरीके से लागू किया गया। एक पुरानी विरासत को वर्तमान की जरूरतों के अनुरूप ढालना।
आम जनता के लिए फायदे ही फायदे! (यात्रा, व्यापार और रोजगार)
आर्थिक: 7 इंडस्ट्रियल नोड्स, 5 लाख जॉब्स।
ट्रैवल: महाकुंभ 2026 आसान।
सुरक्षा: CCTV, AI सेंसर, इमरजेंसी स्ट्रिप्स।
कनेक्टिविटी: पूर्वांचल, यमुना एक्सप्रेसवे से लिंक।
समय की बचत, ईंधन की बचत:
मेरठ से प्रयागराज का सफर जो पहले 10-12 घंटे लेता था, अब सिर्फ 6-7 घंटे में पूरा होगा। दिल्ली से प्रयागराज का सफर भी 10-11 घंटे से घटकर लगभग 7 घंटे रह जाएगा। 30-40% तक ईंधन की बचत!
अर्थव्यवस्था को रफ्तार:
कृषि, विनिर्माण, पर्यटन जैसे क्षेत्रों को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा। माल ढुलाई तेज़ और सस्ती होगी, किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलेंगे। नए औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स ज़ोन और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स आएंगे।
रोजगार का महासागर:
निर्माण से लेकर संचालन तक, 1 लाख से ज़्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर। यह सिर्फ नौकरियां नहीं हैं, ये लोगों के सपने हैं, जो साकार हो सकते हैं।
रियल एस्टेट में चमक:
एक्सप्रेस-वे के किनारे ज़मीन की कीमतें बढ़ेंगी, नए आवासीय और वाणिज्यिक विकास होंगे। यह एक नया अवसर है, जो निवेशकों और डेवलपर्स को आकर्षित करेगा।
पर्यटन को बढ़ावा:
प्रयागराज (महाकुंभ मेला), हरिद्वार और अन्य धार्मिक स्थलों तक आसान पहुंच। यह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है।
सुरक्षा और सुविधा:
अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली, आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाइयां और बेहतर सड़क सुरक्षा। यह यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, जो सबसे महत्वपूर्ण है।
चुनौतियों का सफर: विवाद और समाधान
पुराने पर्यावरणीय विवाद: शुरुआत में गंगा नदी के बहुत करीब होने के कारण प्रदूषण और बाढ़ के खतरे को लेकर काफी चिंताएं थीं। यह एक गंभीर मुद्दा था, जिस पर ध्यान देना जरूरी था। हाई कोर्ट ने इसीलिए इस पर रोक लगाई थी।
भूमि अधिग्रहण के पेचीदा मामले: किसानों को उनकी ज़मीन के लिए उचित मुआवजे और आजीविका के नुकसान को लेकर दिक्कतें आईं। यह एक संवेदनशील मुद्दा था, जिस पर सरकार को सावधानीपूर्वक काम करना पड़ा। हालांकि, सरकार ने संशोधित रूट और बेहतर मुआवजे से इन चिंताओं को काफी हद तक दूर किया।
राजनीतिक श्रेय की दौड़: प्रोजेक्ट की शुरुआत को लेकर राजनीतिक दलों में बहस भी चलती रही है। यह राजनीति का एक अपरिहार्य हिस्सा है, लेकिन यह विकास की गति को धीमा नहीं करना चाहिए।
निर्माण की गुणवत्ता: सरकार ने निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ज़ोर दिया है ताकि यह एक्सप्रेस-वे लंबे समय तक टिकाऊ रहे। बारिश के कारण निर्माण में कभी-कभी देरी भी देखी गई।
एक्सप्रेसवे पर खास सुविधाएं: आधुनिक हाईवे का पूरा इंतजाम
भारत के आधुनिक एक्सप्रेसवे (दिल्ली-मुंबई, गंगा, यमुना, पूर्वांचल) पर विश्वस्तरीय सुविधाएं हैं जो यात्रा को सुरक्षित, तेज और आरामदायक बनाती हैं।
मुख्य सुविधाएं (हर 25-100 किमी पर)
1. वे-साइड अमेनिटीज़ (Wayside Amenities)
✅ AC रेस्ट रूम (ट्रक ड्राइवरों के लिए)
✅ साफ टॉयलेट + बाथरूम (पुरुष/महिला अलग)
✅ फूड कोर्ट + ढाबा
✅ चारपाई/बिस्तर (8 घंटे ₹112)
✅ वाई-फाई, टीवी, वॉशिंग मशीन
✅ किचन स्पेस (खुद खाना पकाएं)
2. इमरजेंसी और सुरक्षा
🚨 हर किमी CCTV (360° कवरेज)
🚨 AI सेंसर (गाड़ी रुकने पर अलर्ट)
🚨 आपातकालीन कॉल बॉक्स (100m अंतर)
🚨 ट्रॉमा सेंटर + एम्बुलेंस (50km अंतर)
🚨 फायर स्टेशन (हर 100km)
🚨 हेलीपैड (गंभीर दुर्घटना)
3. फ्यूल और मेंटेनेंस
⛽ पेट्रोल/डीजल पंप (25km अंतर)
🔌 EV चार्जिंग स्टेशन
🔧 टायर रिपेयर + मैकेनिक
🛠️ वाहन सर्विस सेंटर
4. डिजिटल और सूचना
📱 डिजिटल CMS बोर्ड (ट्रैफिक अपडेट)
📱 व्हाट्सएप चैटबॉट (रोड कंडीशन)
📱 ई-चालान सिस्टम (तुरंत मैसेज)
📱 टोल फास्टैग (रुकावट शून्य)
गंगा एक्सप्रेसवे की स्पेशल फीचर्स
✈️ 5 एयरस्ट्रिप्स (इमरजेंसी लैंडिंग)
🌳 ग्रीनफील्ड (कोई पुराना सड़क नहीं)
🎯 120 kmph स्पीड लिमिट
🤖 AI ट्रैफिक मॉनिटरिंग
🏥 ऑक्सीजन प्लांट (हर 100km)
ड्राइवर सुविधाएं (ट्रकर्स के लिए)
🏠 "अपना घर" रेस्ट एरिया (25km अंतर)
🍲 फ्री खाना सुबह-शाम (कुछ जगह)
🛀 नहाने का हौद वाला बाथरूम
📱 मोबाइल चार्जिंग पॉइंट
🛏️ 8-10 बेड AC वार्ड
सुरक्षा फीचर्स
🚫 एंट्री-एग्जिट कंट्रोल्ड
🚨 ब्रेकडाउन के 15 मिनट में मदद
🚨 फॉग लाइट्स + रिफ्लेक्टिव साइन
🚨 दुर्घटना में 20 मिनट एम्बुलेंस
लागत (प्रति 100km सफर)
⛽ फ्यूल: ₹800-1000
🏪 खाना: ₹150-300
🛀 रेस्ट: ₹100-200
📱 टोल: ₹500-800
**टोटल: ₹1600-2300**
खास बात: ये सुविधाएं दिल्ली-मुंबई, गंगा, यमुना एक्सप्रेसवे पर। NH-48 पर भी आ रही।
टिप: फास्टैग रखें, AQI चेक करें, रेस्ट एरिया यूज करें। सुरक्षित सफर!
गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स: वाहन-वार दरें और गणना
गंगा एक्सप्रेसवे पर डिस्टेंस बेस्ड टोल सिस्टम लागू होगा। यानी जितनी दूरी तय करेंगे, उतना ही टोल। फास्टैग अनिवार्य।
टोल दरें (प्रति किलोमीटर – 2026 अनुमानित)
| वाहन प्रकार | मेन एक्सप्रेसवे | बाईपास |
|---|---|---|
| कार/जीप/वैन | ₹2.55/km | ₹0.70/km |
| हल्का कमर्शियल | ₹4.05/km | ₹1.05/km |
| बस/ट्रक | ₹8.15/km | ₹2.10/km |
| भारी निर्माण | ₹12.55/km | ₹3.15/km |
| ओवरसाइज | ₹16.05/km | ₹4.15/km |
मेरठ-प्रयागराज (पूर्ण 594 km) टोल
एकतरफा (कार): ₹2.55 × 594 = ₹1515
राउंड ट्रिप: ₹3030
मासिक पास: ~₹20,000 (लगभग 40% छूट)
आंशिक दूरी टोल उदाहरण
| रूट | दूरी | कार टोल (एकतरफा) |
|---|---|---|
| मेरठ-हापुड़ | 50 km | ₹128 |
| मेरठ-बदायूं | 120 km | ₹306 |
| मेरठ-लखनऊ | 350 km | ₹893 |
| लखनऊ-प्रयागराज | 244 km | ₹622 |
टोल संग्रहण पद्धति
✅ 20+ इंटरचेंज पर ANPR कैमरा
✅ फास्टैग स्वाइप (रुकावट ZERO)
✅ दूरी कैलकुलेशन ऑटोमैटिक
✅ मोबाइल ऐप पर रसीद/बैलेंस
✅ मासिक/वार्षिक पास उपलब्ध
डिस्काउंट और छूट
🎯 LOCAL RESIDENTS: 30-50% छूट
👨👩👧👦 महिलाएं ड्राइवर: समय-समय पर छूट
🚌 सरकारी वाहन: 75% छूट
🛻 कृषि वाहन: मुफ्त (स्थानीय)
तुलना: अन्य UP एक्सप्रेसवे
| एक्सप्रेसवे | कार टोल/km | मेरठ-प्रयागराज टोल |
|---|---|---|
| गंगा | ₹2.55 | ₹1515 |
| यमुना | ₹2.05 | – |
| पूर्वांचल | ₹2.30 | – |
| आगरा-लखनऊ | ₹2.10 | – |
टोल भुगतान विकल्प
💳 फास्टैग (अनिवार्य)
💰 कैश (इमरजेंसी)
📱 UPI (QR कोड)
💻 ऐप (Paytm/UPI)
नोट: दरें 2025-26 WPI इंडेक्स पर आधारित। वार्षिक 5-6% बढ़ोतरी संभव। फास्टैग बैलेंस हमेशा ₹500+ रखें।
सबसे महंगा: पूर्ण लंबाई कार ₹1515 (एकतरफा)। सबसे सस्ता: 25km ₹64। 🚗
निर्माण और लागत
₹36,230 करोड़, 7,453 हेक्टेयर जमीन। अदानी/IRB डेवलपर।
गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण भारत के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी लंबा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे ₹36,230 करोड़ की कुल लागत से बनाया जा रहा है।
निर्माण का स्कोप और तकनीकी विवरण
मुख्य आंकड़े
📏 कुल लंबाई: 594 किलोमीटर (फेज 1)
🛣️ चौड़ाई: 120 मीटर (6 लेन)
🔮 विस्तार योग्य: 8 लेन तक
⏱️ डिज़ाइन स्पीड: 120 km/h
🏭 इंडस्ट्रियल नोड्स: 7 (5 लाख जॉब्स)
✈️ एयरस्ट्रिप्स: 5 (इमरजेंसी)
जमीन अधिग्रहण
🌾 कुल जमीन: 7,453 हेक्टेयर
🏘️ प्रभावित गांव: 518
🏠 प्रभावित परिवार: 40,000+
💰 मुआवजा: ₹15,000 करोड़
निर्माण चरण (Phases)
| चरण | लंबाई | जिलों | लागत | स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| Phase 1A | 210 km | मेरठ-बदायूं | ₹12,500 Cr | पूरा |
| Phase 1B | 210 km | बदायूं-हरदोई | ₹11,000 Cr | पूरा |
| Phase 1C | 174 km | हरदोई-प्रयागराज | ₹9,730 Cr | 99% पूरा |
लागत ब्रेकडाउन (₹36,230 करोड़)
🏗️ निर्माण कार्य: ₹24,000 करोड़ (66%)
🌿 लैंड एक्विजिशन: ₹15,000 करोड़ (41%)
🛣️ इंजीनियरिंग डिज़ाइन: ₹2,500 करोड़ (7%)
⚙️ इक्विपमेंट/टेक्नोलॉजी: ₹3,730 करोड़ (10%)
📋 कंसल्टेंसी/PMC: ₹1,000 करोड़ (3%)
नोट: कुछ मदों में ओवरलैपिंग।
निर्माण एजेंसियां और EPC कॉन्ट्रैक्ट
👷 मुख्य डेवलपर: UPEIDA (UP Expressways Industrial Development Authority)
🏢 EPC कॉन्ट्रैक्टर्स:
• लार्सन एंड टुब्रो (L&T) - 210 km
• अदानी एंटरप्राइजेज - 150 km
• IRB इंफ्रास्ट्रक्चर - 120 km
• KNR कंस्ट्रक्शंस - 114 km
विशेष निर्माण तकनीकें
1. ग्रीनफील्ड डिज़ाइन
✅ कोई पुराना सड़क उपयोग नहीं
✅ पूरी नई जमीन पर निर्माण
✅ पर्यावरण अनुकूल डिज़ाइन
✅ वन्यजीव कॉरिडोर (15 अंडरपास)
2. हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर
🤖 AI ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम
📹 24×7 CCTV (हर किमी)
🚨 इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिग्नल
⚡ सोलर स्ट्रीट लाइटिंग (सभी)
🌧️ वाटर हार्वेस्टिंग (100+ पॉइंट)
3. सुरक्षा फीचर्स
🔥 फायर स्टेशन (हर 100km)
🚁 हेलीपैड (5 लोकेशन)
🚑 ट्रॉमा सेंटर (हर 50km)
🛬 5 एयरस्ट्रिप्स (इमरजेंसी लैंडिंग)
फाइनेंशियल मॉडल
💰 कुल निवेश: ₹36,230 करोड़
🏦 डेट-इक्विटी रेशियो: 70:30
💳 टोल से रिकवरी: 25 साल (PPP मॉडल)
📈 IRR: 12.5% (अनुमानित)
🎯 ब्रेकईवन: 2030-32
प्रमुख निर्माण माइलस्टोन
| तारीख | मील का पत्थर | स्थिति |
|---|---|---|
| Dec 2021 | प्रोजेक्ट स्वीकृत | UPEIDA |
| Mar 2022 | Land Acquisition शुरू | 7,453 Ha |
| Dec 2023 | 50% निर्माण पूरा | Phase 1A |
| Aug 2025 | 95% निर्माण | सभी चरण |
| Dec 2025 | ट्रायल रन | पूर्ण लंबाई |
| Jan 2026 | उद्घाटन | PM मोदी |
आर्थिक प्रभाव
💼 प्रत्यक्ष रोजगार: 25,000 (निर्माण)
🏭 अप्रत्यक्ष रोजगार: 5 लाख (इंडस्ट्रियल नोड्स)
📈 GDP बूस्ट: UP GDP में 2.5% वृद्धि
🚛 लॉजिस्टिक्स कॉस्ट: 20% कमी
चुनौतियां और समाधान
⚠️ जमीन विवाद: 5% देरी (कोर्ट सेटलमेंट)
🌾 किसान मुआवजा: ₹15,000 Cr वितरित
⛈️ मानसून देरी: 3 महीने (2023)
🔧 टेक्निकल स्नैग्स: L&T ने रिजॉल्व
कुल मिलाकर: ₹36,230 करोड़ की यह निवेश 10 साल में 3 गुना रिटर्न देगी। जनवरी 2026 उद्घाटन के साथ UP इंफ्रास्ट्रक्चर में नया युग शुरू!
तैयार रहें: फास्टैग अपडेट करें, टोल ₹1500 तैयार रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: गंगा एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई कितनी है?
A1: पहले चरण में 594 किलोमीटर।
Q2: यह किन दो प्रमुख शहरों को जोड़ता है?
A2: मेरठ (पश्चिमी यूपी) को प्रयागराज (पूर्वी यूपी) से जोड़ता है।
Q3: गंगा एक्सप्रेस-वे पर यात्रा में कितना समय लगेगा?
A3: मेरठ से प्रयागराज का सफर लगभग 6-7 घंटे में पूरा होगा।
Q4: इसमें कौन से प्रमुख ज़िले शामिल हैं?
A4: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज।
Q5: एक्सप्रेस-वे पर एयरस्ट्रिप कहाँ बनी है?
A5: शाहजहांपुर जिले में जलालपुर तहसील के पास 3.5 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप बनाई गई है।
निष्कर्ष
गंगा एक्सप्रेस-वे सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विकास, समृद्धि और तेज गति का प्रतीक है।
यह लाखों लोगों की जिंदगी बदलने, व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला एक मील का पत्थर साबित होगा।
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Disclaimer:
यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और शोध पर आधारित है। प्रोजेक्ट के विवरण, समय-सीमा और अन्य जानकारियों में सरकारी घोषणाओं या संबंधित अधिकारियों द्वारा बदलाव संभव है। नवीनतम अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों की जाँच करें।
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