कस्टम सिस्टम में बड़ा सुधार जल्द! वित्त मंत्री बोलीं – नियमों में सरलता से तेज होगा व्यापार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के कस्टम सिस्टम में बड़े सुधारों की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य व्यापार को तेज़, आसान और पारदर्शी बनाना है। यह पहल ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने और अनुपालन लागत को कम करने के व्यापक सरकारी प्रयास का हिस्सा है।

HT Leadership Summit 2025 के मंच से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ा ऐलान किया – कस्टम सिस्टम में बड़ा सुधार उनका अगला प्रमुख लक्ष्य होगा। उन्होंने कहा,
“कस्टम्स का पूरा ओवरहॉल ज़रूरी है। इसे इतना सरल बनाना होगा कि व्यापारियों को compliance बोझ न लगे और transparency बढ़े।”
Bharati Fast News – तेज़ खबरें, सच्ची खबरें – यही है भारती फास्ट न्यूज़ इस विस्तृत रिपोर्ट में बताएगा कि यह सुधार क्यों ज़रूरी हैं, किन चुनौतियों का समाधान करेंगे, व्यापार पर क्या असर पड़ेगा और बजट 2026 से पहले क्या उम्मीदें हैं।
वित्त मंत्री का पूरा बयान – “नेक्स्ट बिग क्लीन-अप असाइनमेंट”
शनिवार को HTLS 2025 में हिंदुस्तान टाइम्स के एडिटर-इन-चीफ आर. सुकुमार के सवाल पर सीतारमण ने स्पष्ट कहा,
“आयकर में faceless assessments से ‘टैक्स टेररिज्म’ खत्म हुआ, अब कस्टम्स में वैसा ही बदलाव लाएँगे।”
उन्होंने duty rationalisation का भी ज़िक्र किया – जहाँ दरें optimal से ऊपर हैं, उन्हें कम किया जाएगा।
यह सुधार व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को नई ऊँचाई देंगे, क्योंकि कस्टम प्रक्रियाएँ अभी जटिल और समय लेने वाली हैं।
प्रमुख सुधार और घोषणाएँ:
- 31 पुरानी कस्टम अधिसूचनाओं का एकीकरण: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 31 पुरानी कस्टम अधिसूचनाओं को मिलाकर एक नई, एकीकृत अधिसूचना (45/2025) जारी की है, जो 1 नवंबर 2025 से प्रभावी होगी। इसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना है।
- ड्यूटी दरों में संभावित कटौती: कुछ उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी को ‘इष्टतम सीमा’ से अधिक माना जा रहा है, और आने वाले महीनों में इनमें कमी की संभावना है।
- विभिन्न सेक्टर्स को छूट:
- सौर और पवन ऊर्जा उपकरण (हरित ऊर्जा को बढ़ावा)
- इलेक्ट्रिक वाहन (बैटरी, मोटर, चार्जिंग उपकरण)
- जीवन रक्षक दवाएं और टीके
- अनुसंधान उपकरण
- पेट्रोलियम और गैस अन्वेषण से संबंधित उपकरण
- निर्यातकों के लिए कच्चा माल
- जीएसटी पंजीकरण में सरलता: ₹5 लाख से कम मासिक कर देयता वाले व्यवसायों को अब 3 कार्य दिवसों में जीएसटी पंजीकरण की सुविधा मिलेगी, जिससे लगभग 96% छोटे व्यवसायों को लाभ होगा।
- कार्गो सेवा प्रदाताओं के लिए राहत: बीमा अवधि को 10 दिन से घटाकर 5 दिन कर दिया गया है, और लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है, जिसे AEO (Authorised Economic Operator) प्राधिकरण के साथ सिंक्रोनाइज किया गया है।
कस्टम सिस्टम में सुधार का ऐतिहासिक सफर:
- 1991 से पहले: भारत की व्यापार नीति संरक्षणवादी थी, जिसमें कस्टम ड्यूटी 100-300% से अधिक थी, जिससे व्यापार करना अत्यंत कठिन था।
- 1991 के आर्थिक सुधार: भुगतान संतुलन संकट के कारण उदारीकरण की शुरुआत हुई, जिसके तहत कस्टम ड्यूटी को 300% से घटाकर 150% और फिर 35% किया गया।
- 90s और 2000s (डिजिटल क्रांति का आगाज): टैरिफ युक्तिकरण जारी रहा और EPCG (Export Promotion Capital Goods) योजना पेश की गई। कंप्यूटरीकरण की शुरुआत (मुंबई 1986) और EDI (Electronic Data Interchange) सिस्टम (दिल्ली 1995) लागू किए गए।
- WTO और ‘ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट’ (TFA) (2016): भारत ने TFA की पुष्टि की, जिसका उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना था।
- आधुनिक पहल:
- ICEGATE, SWIFT, Turant Customs: इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग, सिंगल विंडो इंटरफ़ेस, और फेसलेस-पेपरलेस-कॉन्टैक्टलेस प्रक्रियाओं को अपनाया गया।
- रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (RMS) और AEO प्रोग्राम: जोखिम-आधारित निरीक्षण और कम-जोखिम वाले माल की तेज़ी से निकासी को बढ़ावा दिया गया।
- डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी (DPD): समय और लागत में कमी लाने के उद्देश्य से लागू किया गया।
व्यापार जगत की राय और अनुमानित लाभ:
- विशेषज्ञों का सकारात्मक दृष्टिकोण: इन सुधारों से लागत में कमी, व्यापार में वृद्धि और दक्षता में सुधार की उम्मीद है।
- WTO के अनुमान: TFA से वैश्विक व्यापार लागत में 14.3% की कमी और निर्यात में $1 ट्रिलियन तक की वृद्धि का अनुमान है।
- भारत की रैंकिंग में सुधार: वर्ल्ड बैंक के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (ट्रेडिंग अक्रॉस बॉर्डर्स) में भारत 146वें से 68वें स्थान पर पहुंचा। UNESCAP डिजिटल ट्रेड फैसिलिटेशन में भारत का स्कोर 90.3% रहा।
- मुख्य लाभ:
- समय की बचत और लागत में कमी।
- पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि।
- डिजिटलीकरण से गलतियों में कमी और परिचालन लागत में बचत।
- AI, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का उपयोग।
- राजस्व संग्रह में सुधार और आर्थिक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि।
चुनौतियां और आलोचनाएं:
- कार्यान्वयन की चुनौतियां:
- आधुनिक सिस्टम को मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञता की कमी एक बाधा है।
- विभिन्न देशों के बीच अंतर-संचालनीयता (interoperability) की समस्या।
- हितधारकों का प्रतिरोध (अज्ञानता या बदलाव से डर)।
- IT इन्फ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में भारी निवेश की आवश्यकता।
- विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएं: संवेदनशील व्यापार डेटा की सुरक्षा (साइबर सुरक्षा)।
- राजस्व पर प्रभाव: ई-कॉमर्स और कम मूल्य के सामान के बढ़ते चलन से VAT और कस्टम ड्यूटी अनुपालन में चुनौतियां और राजस्व हानि की संभावना।
- आम आलोचनाएं:
- SMEs के लिए नए डिजिटल समाधानों को अपनाने की लागत और जटिलता।
- राजनीतिक हस्तक्षेप और निहित स्वार्थों द्वारा प्रणाली के दुरुपयोग का जोखिम।
- कस्टम्स की बहुआयामी भूमिका के बारे में उच्च-स्तरीय निर्णय-निर्माताओं में जागरूकता की कमी।
- बदलावों के बावजूद जटिल टैरिफ संरचना।
- बुनियादी ढांचे में कमी और तस्करी जैसे मुद्दे।
भविष्य की दिशा:
- भारत का लक्ष्य: आयकर और जीएसटी सुधारों के बाद अब कस्टम्स पर फोकस है। पूरी तरह से फेसलेस असेसमेंट, कार्गो स्कैनिंग जैसे तकनीकी समाधान और विश्व कस्टम्स संगठन (WCO) मानकों के साथ तालमेल स्थापित करना। घरेलू विनिर्माण और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना। बजट 2026 में विस्तृत योजनाएं अपेक्षित हैं।
- वैश्विक परिदृश्य:
- यूरोपीय संघ (EU): 2028 तक EUR 150 से कम मूल्य के पार्सल पर शुल्क-मुक्त सीमा को समाप्त करने और नवंबर 2026 तक ई-कॉमर्स पार्सल के लिए EU-व्यापी डेटा हब बनाने की योजना है।
- मिस्र: जनवरी 2025 से सीमा शुल्क सुविधा उपायों का पहला चरण शुरू करेगा, जिसका लक्ष्य दक्षता, प्रतिस्पर्धा और सिंगल-विंडो सिस्टम है।
- WCO और IMF के सिद्धांत: पारदर्शी नियम, स्वैच्छिक अनुपालन, प्रभावी राजस्व संग्रह, सुरक्षा, व्यापार सुविधा और पूरी तरह से स्वचालित वातावरण पर जोर दिया जा रहा है।
ये सुधार भारत को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर एक मजबूत और भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
Global परिप्रेक्ष्य – भारत vs दुनिया
Singapore, UAE में customs paperless हैं। भारत का Single Window Environment (SWIFT) अच्छा start है, लेकिन end-to-end digitalization बाकी। यह सुधार India को trade superpower बनाएगा।
व्यापारियों के लिए प्रैक्टिकल टिप्स – अभी से तैयार हों
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ICEGATE portal पर registration अपडेट करें
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Digital docs (e-invoice, e-BRC) ready रखें
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Duty drawback schemes का लाभ लें
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FTA benefits (India-UAE, India-Australia) maximize करें।
सुधार से पहले compliance strong रखें।
अर्थव्यवस्था पर लॉन्ग-टर्म असर
कस्टम सिस्टम में बड़ा सुधार से GDP growth 0.5-1% boost हो सकता है। Atmanirbhar + Global integration का balance बनेगा। Job creation, inflation control में मदद।
उद्योग संगठनों की प्रतिक्रिया
CII अध्यक्ष ने कहा,
“यह export competitiveness बढ़ाएगा।”
FIEO ने duty cuts की मांग दोहराई। Stock market में positive sentiment।
कस्टम सिस्टम में बड़ा सुधार – किस तरह होगा implementation?
Phased approach: Phase 1 – Rules simplification, Phase 2 – Tech upgrade, Phase 3 – Duty review। Stakeholder consultations होंगी।
अन्य देशों के मॉडल – क्या सीखें?
Vietnam ने customs digitalization से export दोगुना किया। भारत SWIFT को Vietnam model जैसा बना सकता है।
MSMEs कैसे सबसे ज़्यादा फायदा लेंगे?
80% exporters MSME हैं। सरल rules से उनका compliance cost 30% कम। EPCG, RoDTEP schemes आसान।
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निष्कर्ष: कस्टम सिस्टम में बड़ा सुधार से नई व्यापार क्रांति
वित्त मंत्री का कस्टम सिस्टम में बड़ा सुधार ऐलान भारत को global trade hub बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। नियम सरलता से तेज व्यापार, कम cost और ज़्यादा jobs आएँगे। बजट 2026 में concrete steps की उम्मीद।
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Disclaimer: यह सामान्य जानकारी है। सुधारों की official details CBIC/Finance Ministry से verify करें