Ex-Trishul: पाकिस्तान सीमा पर तीनों सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास 30 अक्टूबर से होगा | Bharati Fast News
भारत की तीनों सेनाएं – थलसेना, नौसेना और वायुसेना – इस साल 30 अक्टूबर से पाकिस्तान सीमा पर संयुक्त रूप से ‘Ex-Trishul’ के नाम से एक विशाल त्रि-सेना युद्धाभ्यास (Tri-Service Exercise) शुरू करने जा रही हैं।
यह अभ्यास 10 नवंबर 2025 तक चलेगा और इसका केंद्र गुजरात के सिर क्रीक (Sir Creek) से लेकर सौराष्ट्र तट तक का इलाका रहेगा।
फोकस कीवर्ड: Ex-Trishul युद्धाभ्यास Bharati Fast News
यह अभ्यास न केवल भारत की सामरिक तैयारियों की झलक है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘JAI मिशन’ (Jointness, Aatmanirbharta, Innovation) विजन का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है |

तीनों सेनाओं का दमदार प्रदर्शन: Ex-Trishul 2025 की शुरुआत, जाने पूरी खबर।
लीड कमांड: Southern Command (Lt. General धीरज सेठ के नेतृत्व में)
सहभागी सेनाएं: इंडियन आर्मी, नेवी और एयरफोर्स
प्रमुख क्षेत्र: सिर क्रीक, सौराष्ट्र तट, थार डेजर्ट, अब्दासा-भुज सेक्टर
अभ्यास की ऊँचाई: 28,000 फीट तक आरक्षित एयरस्पेस (NOTAM जारी)
आवधि: 30 अक्टूबर – 10 नवंबर 2025
इस युद्धाभ्यास में भारतीय सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं द्वारा समन्वित ऑपरेशन का प्रदर्शन किया जाएगा – जमीनी युद्ध से लेकर समुद्री हमलों तक, तथा वायु अभियानों से लेकर साइबर रक्षा तक |
उद्देश्य: संयुक्तता (Jointness) और आत्मनिर्भरता की मिसाल
Ex-Trishul का मकसद आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए तीनों सेनाओं के बीच ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन, रिसॉर्स शेयरिंग, कमांड-कंट्रोल सिस्टम, और रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग का परीक्षण करना है।
इसका मुख्य जोर ‘Made in India’ हथियार प्रणालियों जैसे “ध्रुव” हेलीकॉप्टर, “तेजस” लड़ाकू विमान, “INS विक्रांत” से लॉन्च होते अम्फीबियस ऑपरेशन, और “अग्नि-V” मिसाइल सिस्टम के समग्र उपयोग पर रहेगा |
सिर क्रीक सेक्टर: रणनीतिक रूप से चुना गया मैदान
गुजरात में स्थित सिर क्रीक (Sir Creek) भारत-पाकिस्तान के बीच 96 किलोमीटर लंबा समुद्री सीमावर्ती क्षेत्र है।
इस इलाके में अब तक बहुत सीमित संयुक्त युद्धाभ्यास हुए हैं क्योंकि यहाँ का भू-भाग दलदली, कठिन तथा सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
इस बार तीनों बलों की ‘ज्वाइंट थियेटर कमांड’ रणनीति यहाँ पहली बार लागू की जा रही है।
थलसेना (Army): रेगिस्तानी और दलदली क्षेत्र में सीमित लक्ष्य भेदन अभियानों में भाग लेगी।
नौसेना (Navy): अम्फीबियस ऑपरेशन और समुद्री हमलों का अभ्यास करेगी।
वायुसेना (Air Force): एयर सपोर्ट, रियल-टाइम सर्विलांस और स्ट्राइक मिशन के अभ्यास करेगी |
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया – बढ़ी हलचल
‘Ex-Trishul’ के ऐलान के बाद पाकिस्तान ने अपनी दक्षिणी और मध्य हवाई रूट्स पर “Airspace Restrictions” लागू कर दिए हैं।
पाकिस्तानी मीडिया में कहा जा रहा है कि भारत की यह गतिविधि एक “संदेश” है – कि अब भारतीय सेनाएं किसी भी सेक्टर में एक साथ कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
पाकिस्तान के रक्षा विश्लेषक इसे “प्रोवोकेटिव लेकिन स्ट्रैटेजिक” कह रहे हैं |
भारतीय दृष्टिकोण – “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद की तैयारी
भारत ने अप्रैल 2025 में हुए पाहलगाम आतंकी हमले के बाद “ऑपरेशन सिंदूर” में पाकिस्तानी आतंकी ढाँचों पर सटीक हवाई हमले किए थे, जिनमें 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे।
‘Ex-Trishul’ उसी नीति के तहत Rehearsal to Deterrence (प्रतिक्रिया से रोकथाम) की दिशा में कदम है।
मूल उद्देश्य – किसी संभावित संकट की स्थिति में रियल-टाइम एक्शन कैपेबिलिटी को टेस्ट करना है |
“Jointness-Atmanirbharta-Innovation”: तीन स्तंभ, एक दृष्टिकोण
Ex-Trishul प्रधानमंत्री मोदी के रक्षा सिद्धांत ‘JAI’ विजन का व्यावहारिक रूप है —
Jointness (सहयोग): तीनों सेनाओं की संचालनात्मक एकजुटता।
Aatmanirbharta (आत्मनिर्भरता): स्वदेशी उपकरणों, ड्रोन, और संचार नेटवर्क का उपयोग।
Innovation (नवाचार): एआई आधारित निर्णय प्रणाली और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन का प्रयोग।
इस त्रि-सेना अभ्यास में Artificial Intelligence, ISR (Intelligence, Surveillance and Reconnaissance) तथा Cyber Defense Capabilities का परीक्षण होगा |
“Theatre Command” मॉडल – भविष्य की तैयारी
भारतीय सेनाएं अब थियेटर कमांड मॉडल की दिशा में बढ़ रही हैं।
Ex-Trishul इस प्रणाली का प्रायोगिक मॉडल है, जिसमें एक से अधिक सेनाएं एक साझा कमांड सिस्टम में कार्य करेंगी।
Integrated Defence Staff (IDS) और Southern Command इस पूरे अभ्यास की निगरानी कर रही है।
Commanders 24×7 डिजिटल वॉर रूम से लाइव स्थिति पर निर्णय लेंगे।
हर गतिविधि पर Space-based satellite निगरानी रखेगा |
नई पीढ़ी के स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन
Ex-Trishul में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की झलक साफ देखी जा सकेगी:
लाइट टैंक ‘Zorawar’ का पहला फील्ड ट्रायल।
‘Bhairav’ Combat Drones का सामरिक उपयोग।
‘Ashni’ Drone Platoons प्रत्येक इन्फैंट्री यूनिट के साथ।
INS Vikrant और INS Chennai के अम्फीबियस स्ट्राइक ऑपरेशन।
यह पहली बार होगा जब सेना और नौसेना संयुक्त रूप से Zorawar और Tejas Mark-1A से तालमेल दिखाएंगे|

रक्षा मंत्रालय का बयान
रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:
“Ex-Trishul हमारी सामरिक तैयारियों का रोडमैप है। यह अभ्यास आधुनिक युद्ध की जटिलताओं में तीनों सेनाओं की एकजुटता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हमारी प्रगति को दर्शाता है।”
उन्होंने कहा कि यह अभ्यास भविष्य की “Integrated Battle Readiness Framework” की ओर एक निर्णायक कदम है|
पाकिस्तान सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक – युद्धस्तर की तैयारी
सिर क्रीक से सौराष्ट्र तक की लंबाई में सेना ने “Forward Observation Units” स्थापित किए हैं।
फाइटर जेट्स को भी वेस्टर्न एयर कमांड से गुजरात तटीय इलाकों में भेजा गया है।
युद्धाभ्यास में मिराज-2000, सुखोई-30MKI और तेजस फाइटर तैनात होंगे।
नौसेना के भाग में ‘Sub-Surface Tracking’, वायुसेना के भाग में ‘Air Superiority Operations’, जबकि थलसेना के हिस्से में ‘Rapid Fire Assault’ के अभ्यास होंगे|
पड़ोसी देशों का नजरिया
अमेरिका और फ़्रांस के डिफेंस ट्रैकर्स ने सैटेलाइट इमेज जारी करते हुए इस ऑपरेशन को “रेजनल बैलेंस मापने वाला कदम” कहा।
चीन ने आधिकारिक बयान में कहा, “भारत का यह अभ्यास उसकी आंतरिक संप्रभु सुरक्षा नीति का हिस्सा है।”
नेपाल और भूटान ने इसे दक्षिण एशिया में स्थायी सुरक्षा की दिशा में अच्छा कदम बताया |
मीडिया विश्लेषण – क्यों अहम है Ex-Trishul?
समग्र शक्ति प्रदर्शन: यह अभ्यास भारत की “Full-Spectrum War Preparedness” दिखाता है।
आर्थिक संदेश: आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन बढ़ा है – भारत अब निर्यातक के रूप में उभर रहा है।
रणनीतिक संतुलन: पाकिस्तान को स्पष्ट संकेत – भारत सिर्फ रिएक्शन नहीं, प्रिवेंशन भी कर सकता है।
तकनीकी श्रेष्ठता: ISR डाटा इंटीग्रेशन, ड्रोन नेटवर्क और सैटेलाइट कम्युनिकेशन का रियल-टाइम प्रयोग होगा।
निष्कर्ष: ‘Ex-Trishul’ भारत की सशक्त रक्षा नीति, सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
30 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह संयुक्त युद्धाभ्यास न केवल पाकिस्तान के लिए संदेश है, बल्कि पूरी दुनिया को यह दिखाता है कि भारत आधुनिक मल्टी-डोमेन युग के लिए तैयार है। तीनों सेनाओं की सहयोगी भावना, तकनीकी समन्वय और राष्ट्र-हित के प्रति समर्पण इस अभ्यास का मूल है।
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Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रक्षा स्रोतों (Defense Ministry Releases, NOTAM documents, और मीडिया रिपोर्ट्स) पर आधारित है। सुरक्षा कारणों के चलते कुछ रणनीतिक विवरण या लोकेशन साझा नहीं किए गए हैं।
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