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Home - Political News - जितन राम मांझी ने SC-ST सांसदों के लिए मांगा ज्यादा बोलने का समय

जितन राम मांझी ने SC-ST सांसदों के लिए मांगा ज्यादा बोलने का समय

केंद्रीय मंत्री जितन राम मांझी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण विधेयकों पर SC-ST सांसदों को पर्याप्त बोलने का अवसर देने की मांग की।

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
26/09/2026
in Political News
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जितन राम मांझी

जितन राम मांझी: SC-ST सांसदों के लिए ज्यादा बोलने का समय

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जितन राम मांझी ने SC-ST सांसदों के लिए मांगा ज्यादा बोलने का समय

केंद्रीय मंत्री जितन राम मांझी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण विधेयकों पर SC-ST सांसदों को पर्याप्त बोलने का अवसर देने की मांग की।

केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जितन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों से आने वाले सांसदों को महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान पर्याप्त समय दिए जाने का मुद्दा उठाया है।

मांझी ने अपने 16 सितंबर 2026 के पत्र में 5 अगस्त को अपने दिल्ली स्थित आवास पर हुई NDA सांसदों की समूह संवाद बैठक का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इसी बैठक में भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने SC/ST सांसदों को अपने समुदायों से जुड़े मुद्दे सदन में रखने के लिए अधिक अवसर देने की बात उठाई थी।

मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष से इस अनुरोध पर आवश्यक कार्रवाई करने और संबंधित अधिकारियों को उचित निर्देश देने का आग्रह किया है।

जितन राम मांझी ने ओम बिरला को क्या लिखा?

मांझी के पत्र का मुख्य मुद्दा संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर होने वाली चर्चाओं के दौरान SC और ST सांसदों के बोलने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराने से जुड़ा है।

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पत्र में उन्होंने 5 अगस्त की NDA MP Group Dialogue Meeting का संदर्भ दिया। मांझी के अनुसार, इस बैठक में खरगोन से भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने यह मुद्दा उठाया था कि SC/ST समुदायों से आने वाले सांसदों को अपने समुदायों से संबंधित विषयों को सदन में रखने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

इसके बाद मांझी ने इस विषय को लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखा और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया।

मांग की शुरुआत कहां से हुई?

यह मांग सीधे तौर पर मांझी की ओर से पहली बार उठाए गए मुद्दे के रूप में सामने नहीं आई। उनके पत्र के अनुसार, गजेंद्र सिंह पटेल ने 5 अगस्त को मांझी के आवास पर आयोजित NDA सांसदों की बैठक में यह विषय उठाया था।

पटेल मध्य प्रदेश की खरगोन लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। उन्होंने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि यह चिंता केवल उनकी नहीं थी और बैठक में मौजूद कई सांसदों ने इस विषय पर अपनी बात रखी थी।

पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि यह चर्चा एक अनौपचारिक बातचीत के रूप में हुई थी। उनके मुताबिक सांसदों को कभी बोलने का अवसर मिलता है और कभी नहीं, इसलिए अधिक समय दिए जाने की मांग रखी गई।

SC-ST सांसदों के बोलने का समय क्यों चर्चा में आया?

संसद में किसी विधेयक पर चर्चा के दौरान उपलब्ध कुल समय सीमित होता है। इस समय में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को बोलने का अवसर मिलता है।

गजेंद्र सिंह पटेल के अनुसार, दल को मिलने वाला समय उसके सांसदों में बांटा जाता है। ऐसे में SC/ST समुदायों से आने वाले सांसदों के लिए अलग से पर्याप्त अवसर सुनिश्चित करने की मांग सामने आई है।

हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि SC/ST सांसदों को संसद में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। मुद्दा उपलब्ध चर्चा समय और उसमें प्रतिनिधित्व को लेकर उठाई गई चिंता का है।

जितन राम मांझी की मांग का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मांझी ने अपने पत्र के जरिए लोकसभा अध्यक्ष से इस विषय पर कार्रवाई का अनुरोध किया है। उनकी मांग का मूल बिंदु यह है कि SC और ST समुदायों से आने वाले सांसदों को महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान अपने समुदायों से संबंधित मुद्दे रखने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

यह मामला विशेष रूप से उन सांसदों के लिए चर्चा में आया है जो पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं और अपने समुदायों से संबंधित विषयों को सदन में रखने के लिए अधिक अवसर चाहते हैं।

संसद में बोलने का समय कैसे तय होता है?

लोकसभा में बोलने का समय किसी सांसद को केवल उसकी सामाजिक श्रेणी के आधार पर स्वतः निर्धारित नहीं होता। सदन में चर्चा का समय, राजनीतिक दलों की भागीदारी और अध्यक्ष द्वारा सदन की कार्यवाही संचालित करने से जुड़े नियम महत्वपूर्ण होते हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मार्च 2026 में भी स्पष्ट किया था कि संसद में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित है, लेकिन सदन में बोलना संविधान, नियमों और सदन की कार्यवाही को नियंत्रित करने वाले निर्देशों के अधीन होता है।

इसलिए मांझी की मांग को मौजूदा संसदीय प्रक्रिया के भीतर SC/ST सांसदों को चर्चा में पर्याप्त अवसर देने के अनुरोध के रूप में समझना उचित है।

क्या SC-ST सांसदों के लिए अलग से बोलने का समय तय है?

उपलब्ध रिपोर्टों में मांझी ने SC/ST सांसदों के लिए कोई निश्चित मिनट या अलग संवैधानिक कोटा मांगने की बात नहीं कही है। उनकी मांग महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान इन समुदायों से आने वाले सांसदों को पर्याप्त अवसर और समय दिए जाने से जुड़ी है।

इसलिए इसे एक निश्चित समय-सीमा तय करने की मांग के बजाय संसदीय चर्चाओं में प्रतिनिधित्व और अवसर से जुड़ा अनुरोध कहना अधिक सटीक होगा।

गजेंद्र सिंह पटेल ने क्या कहा?

गजेंद्र सिंह पटेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह चिंता केवल उनकी व्यक्तिगत नहीं थी। उनके अनुसार, बैठक में मौजूद कई सांसदों ने भी इस विषय पर बात की थी।

पटेल ने यह भी कहा कि सांसदों को कभी सदन में बोलने का अवसर मिलता है और कभी नहीं। उनका कहना था कि सांसदों को अपनी बात रखने के लिए अधिक समय मिलना चाहिए।

इससे यह स्पष्ट होता है कि चर्चा का केंद्र केवल SC/ST सांसदों की संख्या नहीं, बल्कि सदन में उपलब्ध सीमित चर्चा समय में उनके मुद्दों को रखने का अवसर भी है।

NDA सांसदों की बैठक में क्या हुआ था?

5 अगस्त को जितन राम मांझी के दिल्ली स्थित आवास पर NDA सांसदों की समूह संवाद बैठक हुई थी। मांझी के अनुसार, ऐसी बैठकें सांसदों को अपनी समस्याएं और सुझाव रखने का मंच देती हैं।

इसी बैठक में SC/ST समुदायों से जुड़े कई सांसदों की ओर से बोलने के समय का मुद्दा सामने आया। मांझी ने बाद में इस विषय को लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंचाने का फैसला किया।

रिपोर्टों के अनुसार यह बैठक केवल SC/ST सांसदों की बैठक नहीं थी, बल्कि NDA सांसदों के बीच संवाद का हिस्सा थी।

यह भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज, CEC को हटाने की क्या है प्रक्रिया?

मांझी पहले भी SC-ST आरक्षण को लेकर चर्चा में रहे हैं

जितन राम मांझी इससे पहले भी SC/ST आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपने विचारों के कारण चर्चा में रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने SC आरक्षण में उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर से जुड़े विचारों का समर्थन किया है।

मांझी का तर्क रहा है कि आरक्षण का लाभ अनुसूचित जातियों के भीतर अपेक्षाकृत सशक्त समूहों तक अधिक पहुंचने की स्थिति में अत्यंत वंचित समुदायों तक लाभ पहुंचाने के लिए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।

यह एक अलग नीतिगत बहस है और मौजूदा पत्र का मुख्य विषय संसद में SC/ST सांसदों के बोलने के अवसर से संबंधित है।

संसद में SC-ST प्रतिनिधित्व का संवैधानिक आधार

लोकसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आरक्षण का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 330 है। इसका उद्देश्य संसद में इन समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।

हालांकि, किसी सीट का SC या ST के लिए आरक्षित होना अपने आप में सदन की प्रत्येक चर्चा के लिए अलग से बोलने का समय निर्धारित नहीं करता। सदन की कार्यवाही में बोलने का अवसर संसदीय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित होता है।

यही अंतर मांझी की वर्तमान मांग को समझने में महत्वपूर्ण है—मुद्दा संसद में प्रतिनिधित्व के साथ-साथ चर्चा के दौरान उस प्रतिनिधित्व को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के अवसर का है।

क्या मांझी की मांग पर अब फैसला हो गया है?

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इस मांग को स्वीकार करने या किसी नए नियम की घोषणा की जानकारी नहीं है।

मांझी ने अपने पत्र के जरिए कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया है। इसलिए इस समय यह मांग और अनुरोध के स्तर पर है, न कि लागू हो चुके किसी नए संसदीय नियम के रूप में।

आगे यदि लोकसभा सचिवालय या अध्यक्ष की ओर से कोई निर्देश जारी होता है, तो उससे इस व्यवस्था में बदलाव की स्थिति स्पष्ट होगी।

महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा का मामला

मांझी की मांग खास तौर पर महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा से जुड़ी है। उनका कहना है कि SC/ST समुदायों से आने वाले सांसदों को ऐसे विधेयकों पर अपने समुदायों से संबंधित मुद्दे उठाने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

इसका संबंध केवल एक विशेष विधेयक से नहीं है। पत्र में संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर होने वाली चर्चाओं के दौरान अवसर की बात उठाई गई है।

संसद की कार्यवाही में स्पीकर की भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही संचालित करते हैं और बोलने वाले सदस्यों को अवसर देने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मार्च 2026 में लोकसभा अध्यक्ष ने भी कहा था कि सदन में भाषण और अभिव्यक्ति संसदीय नियमों तथा निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत होती है।

इसी संदर्भ में मांझी ने अपने पत्र में लोकसभा अध्यक्ष से आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया है।

हालांकि, बोलने का समय तय करने में केवल अध्यक्ष की व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं होता। सदन के कामकाज, चर्चा के लिए निर्धारित समय, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधित्व और संसदीय प्रक्रिया जैसे कई पहलू इसमें शामिल होते हैं।

जितन राम मांझी के पत्र से क्या संदेश सामने आया?

मांझी के पत्र से यह मुद्दा सामने आया है कि संसद में SC/ST समुदायों से आने वाले सांसदों को महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान अपने समुदायों के मुद्दे रखने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

यह मांग विशेष रूप से पहली बार चुने गए सांसदों के संदर्भ में भी सामने आई है। वहीं, गजेंद्र सिंह पटेल ने इसे केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि बैठक में कई सांसदों की ओर से व्यक्त चिंता बताया है।

अब इस विषय पर लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित संसदीय अधिकारियों की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, यह देखना होगा।

FAQ: जितन राम मांझी और SC-ST सांसदों की मांग

1. जितन राम मांझी ने ओम बिरला को पत्र क्यों लिखा?
उन्होंने महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान SC और ST समुदायों से आने वाले सांसदों को पर्याप्त बोलने का अवसर देने की मांग से जुड़े अनुरोध पर कार्रवाई करने की अपील की है।

2. जितन राम मांझी ने पत्र कब लिखा?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पत्र 16 सितंबर 2026 को लिखा गया था।

3. यह मुद्दा सबसे पहले किसने उठाया था?
मांझी के पत्र के अनुसार, भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने 5 अगस्त को मांझी के आवास पर हुई NDA सांसदों की समूह संवाद बैठक में यह मुद्दा उठाया था।

4. गजेंद्र सिंह पटेल किस सीट से सांसद हैं?
गजेंद्र सिंह पटेल मध्य प्रदेश की खरगोन लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

5. क्या SC/ST सांसदों को संसद में बोलने की अनुमति नहीं है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा। मुद्दा यह है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान इन समुदायों के सांसदों को पर्याप्त समय और अवसर दिए जाने की मांग उठाई गई है।

6. क्या SC/ST सांसदों के लिए अलग से बोलने का समय लागू हो गया है?
उपलब्ध रिपोर्टों में किसी नए लागू नियम की घोषणा की जानकारी नहीं है। फिलहाल यह लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखी गई मांग है।

7. संसद में बोलने का समय कैसे तय होता है?
यह सदन की निर्धारित कार्यवाही, चर्चा के लिए उपलब्ध समय, राजनीतिक दलों की भागीदारी और संसदीय नियमों के अनुसार तय होता है। लोकसभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही संचालित करते हैं।

8. क्या यह मांग केवल SC/ST सांसदों के लिए है?
मांझी का वर्तमान पत्र विशेष रूप से SC/ST समुदायों से आने वाले सांसदों को पर्याप्त अवसर देने से संबंधित है। गजेंद्र सिंह पटेल ने व्यापक रूप से अधिक बोलने के समय की जरूरत की बात भी कही है।

9. क्या ओम बिरला ने मांग स्वीकार कर ली है?
उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में लोकसभा अध्यक्ष की ओर से मांग स्वीकार करने या नया निर्देश जारी करने की पुष्टि नहीं है।

10. मांझी के पत्र में किस बैठक का उल्लेख है?
पत्र में 5 अगस्त को मांझी के दिल्ली आवास पर आयोजित NDA सांसदों की समूह संवाद बैठक का उल्लेख है।

जितन राम मांझी की मांग पर अंतिम बात

केंद्रीय मंत्री जितन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने SC/ST सांसदों को महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान पर्याप्त बोलने का अवसर देने का मुद्दा रखा है। यह मुद्दा 5 अगस्त की NDA सांसदों की बैठक में भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल द्वारा उठाए जाने के बाद मांझी के पत्र के जरिए लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंचा।

फिलहाल यह एक मांग है और उपलब्ध जानकारी में लोकसभा सचिवालय की ओर से इसे लागू करने संबंधी कोई नया नियम सामने नहीं आया है। आगे इस पर क्या प्रशासनिक या संसदीय कदम उठता है, यह लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों के निर्णय से स्पष्ट होगा।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। परिस्थितियों या आधिकारिक निर्णयों में बदलाव होने पर जानकारी बदल सकती है। पाठकों को किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित विभाग या आधिकारिक स्रोत से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।

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Abhay Jeet Singh

Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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