Varanasi Flood: जल पुलिस थाना भी बाढ़ की चपेट में, कुबरी घाट की 20 सीढ़ियां डूबीं
लगातार उफनती लहरों ने काशी के अर्धचंद्राकार घाटों के भूगोल को अपनी आगोश में ले लिया है। घाटों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला दशाश्वमेध स्थित जल पुलिस चौकी का निचला हिस्सा खुद जलमग्न हो चुका है। जहां कुछ दिन पहले तक सुरक्षाकर्मी बैठकर नदी की निगरानी करते थे, वहां अब गंगा की तेज धाराएं टकरा रही हैं। प्रयागराज, मिर्जापुर और पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों से आ रहे भारी पानी के दबाव से वाराणसी गंगा बाढ़ का दायरा अब रिहायशी गलियों और प्राचीन मंदिरों की चौखट तक पहुंच गया है।
कुबरी घाट की 20 सीढ़ियां और कालेश्वर घाट की 10 सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह छतों और संकरी गलियों में शिफ्ट करना पड़ा है। गंगा आरती का स्थल बदलकर छत पर ले जाया गया है और सभी 84 घाटों का आपसी संपर्क कट चुका है।
मुख्य बिंदु: काशी में जलप्रलय की स्थिति (Key Highlights)
सुरक्षा केंद्र पर पानी का कब्जा: दशाश्वमेध घाट पर स्थित जल पुलिस थाना बाढ़ की चपेट में आ गया है, जिससे जवानों को अपना वायरलेस और रेस्क्यू उपकरण ऊपरी तल पर शिफ्ट करने पड़े हैं।
सीढ़ियां डूबीं, संपर्क टूटा: कुबरी घाट की 20 और कालेश्वर घाट की 10 से अधिक सीढ़ियां पानी में समा चुकी हैं; नमो घाट से अस्सी घाट तक पैदल आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
शवदाह में भारी संकट: मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट के मुख्य प्लेटफॉर्म डूबने से शवदाह का काम गलियों और आसपास की इमारतों की छतों पर किया जा रहा है।
नौका संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध: जलस्तर में प्रति घंटे 2 से 3 सेंटीमीटर की वृद्धि और उफनती जलधारा को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी प्रकार के निजी और पर्यटक नौका संचालन पर रोक लगा दी है।
आरती का स्थान बदला: विश्वप्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट की दैनिक संध्या गंगा आरती को मुख्य सीढ़ियों से हटाकर जल पुलिस चौकी के पास स्थित ऊपरी चबूतरे पर सांकेतिक रूप से संपन्न कराया जा रहा है।
एनडीआरएफ और जल पुलिस मुस्तैद: बाढ़ प्रभावित तटीय इलाकों और वरुणा नदी के मुहाने पर एनडीआरएफ की 4 टीमों और 20 से अधिक मोटरबोट्स को रेस्क्यू ड्यूटी पर लगाया गया है।
वरुणा का बैक-फ्लो शुरू: गंगा के उफान से वरुणा नदी उल्टी बहने लगी है, जिससे सरैया, कोनिया, नक्खीघाट और शैलपुत्री इलाके के रिहायशी मकानों में पानी घुसने लगा है।
ताजा घटनाक्रम: चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ता जलस्तर (Latest Update)
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु (70.26 मीटर) के करीब पहुंच गया है। शनिवार दोपहर तक जलस्तर में 2.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी। ऊपर के बांधों—विशेषकर बाणसागर, रिहंद और माताटीला बैराज से छोड़े जा रहे अतिरिक्त पानी के कारण बनारस के तटवर्ती इलाकों पर दबाव अचानक बढ़ गया है।
दशाश्वमेध घाट पर स्थित जल पुलिस चौकी के निचले कमरे पानी में डूब गए हैं। पुलिसकर्मियों को अपनी फाइलें, वायरलेस सेट, लाइफ-जैकेट्स और कंप्यूटर उपकरण सीढ़ियों के रास्ते ऊपर बने अस्थायी कंट्रोल रूम में शिफ्ट करने पड़े। गंगा का पानी शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट और मणिकर्णिका घाट के प्रवेश द्वारों तक पहुंच चुका है।
रोचक तथ्य (Interesting Fact): काशी के घाटों का निर्माण अर्धचंद्राकार (Crescent Shape) रूप में पत्थरों को interlocking तकनीक से जोड़कर किया गया है। जब गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार करता है, तो सभी 84 घाटों का जमीनी संपर्क एक-दूसरे से कट जाता है और पूरा तट 84 अलग-अलग टापुओं जैसा नजर आने लगता है।
पृष्ठभूमि: जलप्रलय की यह स्थिति क्यों बनी? (Background Story)
पूर्वांचल में मॉनसून की वापसी और मध्य भारत में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते गंगा, यमुना, चंबल, केन और बेतवा नदियां एक साथ उफान पर हैं। प्रयागराज में संगम का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंचते ही उसका सीधा दबाव मिर्जापुर और वाराणसी पर पड़ता है।
वाराणसी में हर साल बाढ़ आती है, लेकिन इस बार जलस्तर में वृद्धि की गति उम्मीद से काफी तेज रही है। सामान्यतः पानी धीरे-धीरे सीढ़ियों पर चढ़ता है, लेकिन बीते 48 घंटों में जलस्तर में 1.5 मीटर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। कुबरी घाट और कालेश्वर घाट जैसे मध्यम ऊंचाई वाले घाटों पर पानी तेजी से सीढ़ियों को निगलते हुए ऊपर स्थित संतों के आश्रमों और अखाड़ों के दरवाजों तक पहुंच चुका है।
घाटों पर ग्राउंड जीरो के हालात: क्या हो रहा है? (What Happened?)
ग्राउंड जीरो पर स्थिति चिंताजनक है। घाटों के किनारे सदियों से अपनी छोटी-मोटी दुकानें चलाने वाले पुरोहितों, चाय-पान की गुमटियों और नाव चालकों की आजीविका पर सीधा प्रहार हुआ है।
1. कुबरी और कालेश्वर घाट
कुबरी घाट की 20 सीढ़ियां जलमग्न होने से घाट का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट चुका है। यहां के स्थानीय नाविक रामजी निषाद बताते हैं कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि घाट किनारे बंधी कई छोटी डोंगियों को सुरक्षित निकालने का समय नहीं मिला। कालेश्वर घाट पर लगभग 10 सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं और वहां स्थित प्राचीन शिवलिंग जलमग्न हो चुके हैं।
2. मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट
महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए आने वाले परिजनों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नीचे के सभी पक्के प्लेटफॉर्म गंगा के गंदले पानी में डूब चुके हैं। अब शवदाह मणिकर्णिका की ऊपरी गलियों में और छत पर बने सीमित चबूतरों पर किया जा रहा है। कतारें इतनी लंबी हैं कि अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को 4 से 6 घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है।
3. वरुणा नदी के तटीय इलाके
गंगा के बढ़ते दबाव ने वरुणा नदी को बैक-फ्लो (उल्टा बहाव) के लिए मजबूर कर दिया है। वरुणा के किनारे बसे कोनिया, सरैया, पुराना पुल और नक्खीघाट के सैकड़ों घरों के निचले तलों में पानी भर चुका है। कई परिवारों ने अपनी छतों पर तिरपाल डालकर शरण ली है, जबकि प्रशासन ने उन्हें राहत शिविरों में जाने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञ विश्लेषण (Expert View): बीएचयू के जल संसाधन एवं पर्यावरण विज्ञान विशेषज्ञ प्रो. आर. के. मिश्रा के अनुसार, “गंगा का यह उफान केवल स्थानीय बारिश का नतीजा नहीं है। यह मध्य भारत की पठारी नदियों (चंबल, बेतवा, केन) और पहाड़ी ढलानों से छोड़े गए अतिरिक्त पानी का सम्मिलित असर है। यदि अगले 48 घंटों तक डिस्चार्ज कम नहीं हुआ, तो गंगा का जलस्तर डेंजर लेवल (71.26 मीटर) को छू सकता है, जिससे वरुणा कॉरिडोर में व्यापक जलभराव होगा।”
आधिकारिक कदम: प्रशासन की आपातकालीन तैयारी (Official Information)
वाराणसी के जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जलपोत से निरीक्षण किया है। प्रशासन द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:
बाढ़ नियंत्रण कक्ष (Flood Control Room): कलेक्ट्रेट परिसर में 24×7 कार्यशील आपदा राहत कक्ष स्थापित किया गया है। इसका हेल्पलाइन नंबर नागरिकों के लिए जारी कर दिया गया है।
राहत शिविरों की सक्रियता: प्राथमिक विद्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में 18 राहत शिविर तैयार किए गए हैं, जहां भोजन पैकेट, शुद्ध पेयजल और ओआरएस के घोल की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य टीमें अलर्ट: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में क्लोरीन की गोलियां बांटने और एंटी-वेनम (सांप के जहर की दवा) के साथ मेडिकल टीमों को नावों पर तैनात किया है।
पशुओं के लिए चारा डिपो: तटीय बस्तियों के पालतू मवेशियों के लिए ऊंचे स्थानों पर पशु शेल्टर और हरे चारे की व्यवस्था की जा रही है।
महत्वपूर्ण नोट (Important Note): जल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गंगा में स्नान के लिए गहरे पानी में उतरना सख्त वर्जित है। घाटों के किनारे चेतावनी की लाल झंडियां लगा दी गई हैं। किसी भी श्रद्धालु को सीढ़ियों पर काई या फिसलन वाले हिस्सों में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गंगा जलस्तर और प्रमुख सांख्यिकी (Ganga Water Level Table)
| पैरामीटर / स्थान | वर्तमान स्थिति | मानक स्तर | स्थिति की गंभीरता |
| वर्तमान जलस्तर (वाराणसी) | 69.85 मीटर | — | चेतावनी स्तर के करीब |
| चेतावनी बिंदु (Warning Level) | 70.26 मीटर | 70.26 मीटर | 41 सेमी दूर |
| खतरे का निशान (Danger Level) | 71.26 मीटर | 71.26 मीटर | 1.41 मीटर दूर |
| ऐतिहासिक उच्चतम स्तर (HFL) | 73.90 मीटर (वर्ष 1978) | — | ऐतिहासिक रिकॉर्ड |
| जलस्तर बढ़ने की गति | 2.5 सेमी / घंटा | — | मध्यम से तीव्र |
| प्रभावित घाटों की संख्या | सभी 84 घाट | 84 घाट | संपर्क पूर्णतः भंग |
| डूबी सीढ़ियां (कुबरी/कालेश्वर) | 20 / 10 सीढ़ियां | — | जलमग्न |
आम नागरिकों, छात्रों और तीर्थयात्रियों पर प्रभाव (Citizen & Student Impact)
बाढ़ का प्रभाव केवल घाटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने बनारस की दैनिक दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है:
छात्रों की पढ़ाई पर असर: तटीय और वरुणा किनारे के कई प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में जलभराव के चलते प्रशासन ने अस्थायी अवकाश घोषित कर दिया है या उन्हें ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट करने का निर्देश दिया है।
नाविकों और गाइडों की बेरोजगारी: सैकड़ों परिवारों का चूल्हा गंगा में चलने वाली नावों से जलता है। नौकायन बंद होने से लगभग 5000 से अधिक नाविक, फेरीवाले और स्थानीय गाइड आर्थिक तंगी के मुहाने पर खड़े हो गए हैं।
यातायात और जलभराव: राजघाट, खिड़किया (नमो) घाट और सामने घाट की ओर जाने वाले कई निचले रास्तों पर पानी चढ़ने से स्थानीय ट्रैफिक को मुख्य जीटी रोड और बाईपास की तरफ डायवर्ट किया गया है, जिससे शहर में जाम की स्थिति बन रही है।
पाठक सतर्कता (Reader Alert): सोशल मीडिया पर गंगा आरती रद्द होने की भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं। ध्यान रहे कि दैनिक गंगा आरती कभी बंद नहीं होती; परंपरा के अनुसार इसका केवल स्थान बदलकर सुरक्षित ऊपरी चबूतरे पर सांकेतिक रूप से अर्चकों द्वारा विधिवत संपन्न किया जा रहा है।
भविष्य का आकलन: आगे क्या होगा? (Future Impact)
यदि पहाड़ी और पठारी इलाकों में बारिश की यही स्थिति बनी रही, तो आगामी तीन दिनों में परिस्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं:
रिहायशी इलाकों में पानी का फैलाव: यदि गंगा 70.50 मीटर को पार करती है, तो सामने घाट, अस्सी की कुछ निचली गलियां और लंका-भगवानपुर मार्ग जलमग्न हो सकते हैं।
संक्रामक रोगों का खतरा: बाढ़ का पानी जब उतरना शुरू होगा, तो घाटों और गलियों में जमा भारी गाद (Silt) और कीचड़ के कारण डायरिया, डेंगू और त्वचा रोगों का खतरा बढ़ेगा। इसके लिए नगर निगम को व्यापक फॉगिंग और ब्लीचिंग छिड़काव अभियान चलाना होगा।
पर्यटन उद्योग को झटका: मॉनसून के दौरान काशी आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए बोटिंग मुख्य आकर्षण होती है। नावों पर पाबंदी रहने से होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की बुकिंग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक क्या करें? (What Should Devotees / Readers Do?)
घाटों के किनारे न जाएं: गंगा का बहाव सामान्य से तीन गुना तेज है। सीढ़ियों पर पानी चढ़ने से काई जम जाती है, जिससे फिसलकर गहरे पानी में गिरने का जानलेवा जोखिम रहता है।
नौका विहार की जिद न करें: यदि कोई निजी नाविक चोरी-छिपे नाव चलाने की पेशकश करे, तो कतई न बैठें। यह गैरकानूनी और जानलेवा है।
पेयजल उबालकर पिएं: बाढ़ के दौरान भूमिगत पाइपलाइनों में सीपेज का खतरा रहता है। किसी भी जलजनित बीमारी से बचने के लिए पानी उबालकर या क्लोरीन मिलाकर ही इस्तेमाल करें।
अफवाहों से बचें और कंट्रोल रूम से जुड़ें: किसी भी आपात स्थिति में सीधे जिला प्रशासन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों (0542-2508550) पर संपर्क करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
उफनती गंगा और वाराणसी गंगा बाढ़ ने एक बार फिर काशी के प्राचीन घाटों की परीक्षा ली है। जल पुलिस थाने का डूबना और कुबरी व कालेश्वर घाटों की सीढ़ियों का जलमग्न होना इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति के वेग के सामने प्रशासनिक बंदोबस्त भी सीमित हो जाते हैं। हालांकि, एनडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और नाविक समाज के संयुक्त प्रयासों से हालात अभी नियंत्रण में हैं। काशीवासियों और देश-भर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील है कि वे आस्था के साथ-साथ सतर्कता बरतें, सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करें और केवल आधिकारिक बुलेटिन पर ही भरोसा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions – FAQ)
Q1: क्या वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है?
नहीं, वर्तमान में जलस्तर 69.85 मीटर के आसपास है, जो चेतावनी स्तर (70.26 मीटर) से कुछ नीचे है। खतरे का निशान 71.26 मीटर पर निर्धारित है। हालांकि, जलस्तर में प्रति घंटे 2 से 3 सेमी की बढ़ोतरी जारी है।
Q2: कुबरी और कालेश्वर घाट पर बाढ़ का क्या असर हुआ है?
कुबरी घाट की 20 सीढ़ियां और कालेश्वर घाट की 10 से अधिक सीढ़ियां गंगा के पानी में पूरी तरह डूब चुकी हैं। यहां के किनारे स्थित छोटे मंदिर और संतों के आश्रम जलमग्न हो गए हैं।
Q3: क्या बनारस में नौका संचालन (Boating) पूरी तरह बंद है?
हां, तेज जलधारा, बढ़ते जलस्तर और पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन और जल पुलिस ने सभी प्रकार की नौकाओं के संचालन पर आगामी आदेश तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
Q4: क्या दशाश्वमेध घाट की विश्वप्रसिद्ध संध्या गंगा आरती बंद कर दी गई है?
नहीं, गंगा आरती कभी बंद नहीं होती। सुरक्षा कारणों से आरती का स्थान मुख्य सीढ़ियों से बदलकर ऊपर स्थित जल पुलिस चौकी के पास पक्के चबूतरे पर सांकेतिक रूप से 1 या 3 पुरोहितों द्वारा संपन्न कराया जा रहा है।
Q5: मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह की क्या व्यवस्था है?
मुख्य शवदाह प्लेटफॉर्म डूब चुके हैं। दाह संस्कार अब घाट की ऊंची सीढ़ियों, गलियों और आसपास के भवनों की छतों पर कराया जा रहा है।
Q6: जल पुलिस चौकी क्यों जलमग्न हो गई?
दशाश्वमेध घाट पर स्थित जल पुलिस थाना बिल्कुल तट के करीब और निचले स्तर पर बना है। गंगा का जलस्तर 69 मीटर पार करते ही चौकी के निचले कमरों में पानी भर गया, जिसके बाद उपकरणों को ऊपरी तल पर ले जाया गया।
Q7: वरुणा नदी में बैक-फ्लो का क्या असर हो रहा है?
गंगा का जलस्तर ऊंचा होने के कारण वरुणा नदी का पानी वापस पीछे की बस्तियों में फैल रहा है, जिससे सरैया, पुराना पुल, नक्खीघाट और कोनिया क्षेत्र के निचले मकानों में पानी घुसने लगा है।
Q8: बाढ़ संबंधी आपातकालीन सहायता के लिए जिला प्रशासन का हेल्पलाइन नंबर क्या है?
वाराणसी जिला आपदा नियंत्रण कक्ष का नंबर 0542-2508550 और आपातकालीन नंबर 1077 / 112 है, जिस पर 24 घंटे सहायता प्राप्त की जा सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह विशेष रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग (CWC), वाराणसी जिला प्रशासन, जल पुलिस और ग्राउंड जीरो पर तैनात हमारे संवाददाताओं से प्राप्त प्राथमिक आंकड़ों और आधिकारिक जानकारियों के आधार पर तैयार की गई है। गंगा का जलस्तर बांधों से छोड़े जाने वाले पानी और स्थानीय वर्षा के अनुसार घट-बढ़ सकता है। यात्रा अथवा दर्शन से पूर्व स्थानीय प्रशासन के अद्यतन निर्देशों की पुष्टि अवश्य करें।





























