करवा चौथ 2026: कब है व्रत? जानें पूजा मुहूर्त, चंद्रोदय समय और व्रत विधि
करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। जानें तारीख, पूजा विधि, चांद निकलने का समय और पारण
छलनी की ओट से चमकता रूपहला चांद, हाथों में रची मेहंदी की महक, लाल चुनरी में सजी सुहागिनें और पति के दीर्घायु जीवन के लिए पूरे 14 घंटे का निर्जला संकल्प—यह पावन दृश्य भारतीय संस्कृति में दांपत्य प्रेम और अटूट समर्पण की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है। सनातन पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला अखंड सौभाग्य का महापर्व करवा चौथ 2026 इस वर्ष 29 अक्टूबर (गुरुवार) को देश भर में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। भोर में सूर्योदय से पूर्व सास द्वारा दी गई सरगी के सेवन से यह व्रत आरंभ होता है और रात में चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर ही यह तप संपन्न होता है। माता करवा, भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और श्री गणेश की संयुक्त उपासना वाला यह व्रत वैवाहिक जीवन के क्लेशों को मिटाकर प्रेम की डोर को अटूट बनाता है। इस वर्ष पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त, सरगी का शुभ समय और विभिन्न शहरों में चंद्रोदय का सटीक समय जानना प्रत्येक व्रती महिला के लिए आवश्यक है।
दिलचस्प तथ्य (Interesting Fact): महाभारत के वनपर्व के अनुसार, जब पांडव वनवास के दौरान कठिन संकटों से घिरे थे और अर्जुन तपस्या के लिए नीलगिरि पर्वत चले गए थे, तब द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा और विजय के लिए भगवान श्री कृष्ण के निर्देश पर सबसे पहले करवा चौथ (कर्क चतुर्थी) का निर्जला व्रत विधि-विधान से रखा था।
मुख्य बिंदु: करवा चौथ 2026 के 7 सबसे महत्वपूर्ण पहलू (Key Highlights)
सर्वमान्य व्रत तिथि: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर की देर रात से आरंभ होकर 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को चंद्रोदय व्यापिनी रहेगी, अतः व्रत 29 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।
अमृत सरगी का मुहूर्त: 29 अक्टूबर को तड़के 04:48 बजे से 05:38 बजे के मध्य (ब्रह्ममुहूर्त) सास द्वारा दी गई सरगी ग्रहण करने का शास्त्रसम्मत समय।
संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त: 29 अक्टूबर की शाम 05:42 बजे से 06:58 बजे तक (कुल अवधि 1 घंटा 16 मिनट), जब करवा माता और शिव परिवार की पूजा होगी।
चंद्रोदय का संभावित समय: देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्रों में रात 08:14 बजे से 08:28 बजे के बीच चंद्रमा के दर्शन होंगे।
मिट्टी के करवे का शास्त्रीय महत्व: चार तीलियों (सींकों) से युक्त मिट्टी का नया करवा जल और अन्न की प्रचुरता तथा पंचतत्वों के संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है।
सोलह श्रृंगार का विधान: लाल, पीली या मेहरून पारंपरिक पोशाक, सिंदूर, बिंदी, नथ, बिछिया और महावर सहित पूर्ण 16 श्रृंगार कर पूजा करने की परंपरा।
पति-पत्नी के साझीदार व्रत का बढ़ता चलन: आधुनिक दौर में दांपत्य समानता का परिचय देते हुए कई पति भी अपनी पत्नियों के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए साथ में उपवास रख रहे हैं।
ताजा अपडेट: 29 अक्टूबर 2026 को देश भर में तैयारियां (Latest Update)
अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद और बनारस, हरिद्वार व दिल्ली के प्रमुख पंचांगों ने सर्वसम्मति से पुष्टि की है कि 29 अक्टूबर को चतुर्थी तिथि शाम और रात्रि दोनों प्रहरों में उपस्थित है। चूंकि करवा चौथ का व्रत चंद्र दर्शन पर आधारित है, इसलिए 29 अक्टूबर का दिन ही शास्त्रसम्मत और निर्विवाद है।
बाजारों में करवा चौथ की रौनक चरम पर पहुंच चुकी है। चांदनी चौक, जयपुर के जौहरी बाजार, लखनऊ के हजरतगंज और मुंबई के दादर में पारंपरिक पूजा करवों, छलनी, पीतल के लोटों, सरगी की टोकरियों और विशेष सुहाग थालियों की बिक्री तेज हो गई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 29 अक्टूबर की रात उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश मैदानी इलाकों में आसमान साफ रहने का अनुमान है, जिससे व्रती महिलाओं को चांद के दीदार के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
पृष्ठभूमि: वीरावती के अमर प्रेम और करवा माता की तपोगाथा (Background Story)
करवा चौथ व्रत के मूल में दो अत्यंत प्राचीन कथाएं निहित हैं। पहली कथा रानी वीरावती की है, जो सात भाइयों की इकलौती लाडली बहन थीं। विवाह के बाद जब उन्होंने पहला करवा चौथ रखा, तो भूख-प्यास से उनकी हालत बिगड़ने लगी। भाइयों ने स्नेहवश पहाड़ी पर आग जलाकर छलनी के पीछे से रोशनी दिखाई और कहा कि चांद निकल आया है। वीरावती ने झूठे चांद को देखकर जैसे ही पहला निवाला खाया, उनके पति के देहांत का समाचार आ गया। वीरावती ने पूरे एक वर्ष तक पति के शव की सेवा की और अगले वर्ष पुनः श्रद्धापूर्वक निर्जला करवा चौथ का व्रत रखकर शिव-पार्वती की कृपा से अपने पति को यमराज के पाश से मुक्त करा लिया।
दूसरी कथा ‘करवा’ नाम की पतिव्रता स्त्री की है। एक बार जब उनके पति नदी में स्नान कर रहे थे, तो एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। करवा ने अपने सतीत्व के बल पर कच्चे सूत के धागे से उस भारी-भरकम मगरमच्छ को एक पेड़ से बांध दिया और यमराज के समक्ष उपस्थित होकर प्रार्थना की कि उनके पति की रक्षा की जाए और मगरमच्छ को यमलोक भेजा जाए। यमराज ने उनके तपोबल के आगे झुकते हुए उनके पति को दीर्घायु दी। इसी कारण इस व्रत का नाम ‘करवा चौथ’ पड़ा और यह सुहाग की अमर रक्षा का पावन संवाहक बन गया।
पाठक सतर्कता (Reader Alert): निर्जला उपवास के दौरान अपनी शारीरिक क्षमता का पूरा ध्यान रखें। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और मधुमेह (डायबिटीज) या उच्च रक्तचाप की मरीज महिलाएं पूर्ण निर्जला व्रत रखने के बजाय फलाहार, नारियल पानी और डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही व्रत का पालन करें।
क्या करें और कैसे करें? सरगी, पूजा और चंद्र अर्घ्य की पूरी विधि (What Happened & Step-by-Step Vidhi)
करवा चौथ का अनुष्ठान भोर से लेकर देर रात तक तीन मुख्य चरणों में संपन्न होता है:
1. भोर की सरगी विधि (Pre-Dawn Ritual)
सूर्योदय से लगभग दो घंटे पूर्व (सुबह 4:00 से 5:00 बजे के बीच) जागकर स्नान करें। सास द्वारा भेजी गई सरगी में सूखे मेवे (बादाम, अखरोट), ताजे मौसमी फल (सेब, अनार), खीर, मिष्ठान और मट्ठी शामिल होती है। यह आहार पूरे दिन शरीर को ऊर्जा और जल संतुलन प्रदान करता है। सरगी ग्रहण करने के बाद हाथ जोड़कर भगवान से निर्जला व्रत का संकल्प लें और सूर्योदय के बाद अन्न-जल का त्याग कर दें।
2. संध्या कालीन पूजा और कथा श्रवण
शाम 5:30 बजे पुनः स्वच्छ होकर सोलह श्रृंगार करें। पूजा स्थान पर उत्तर-पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
दीवार पर करवा माता का चित्र लगाएं अथवा गेरू व पिसे हुए चावल के घोल से पारंपरिक चित्र बनाएं।
चौकी पर भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित करें।
दो मिट्टी के करवे लें; एक करवा में जल भरकर ढक्कन पर गेहूं और दक्षिणा रखें, दूसरे करवे में चीनी या सूखे मेवे भरें। करवे की टोंटी में सींकें लगाएं।
रोली, चंदन, अक्षत, सिंदूर, धूप और घी का दीपक जलाकर विधिपूर्वक पूजन करें।
हाथ में 13 दाने गेहूं या चावल के लेकर परिवार की वरिष्ठ महिलाओं के साथ करवा चौथ की पारंपरिक व्रत कथा सुनें। कथा समाप्त होने पर सास या जेठानी को ‘बायना’ (फल, मिठाई, वस्त्र और दक्षिणा) भेंट कर उनके चरण स्पर्श करें।
3. चंद्र दर्शन, अर्घ्य और पारण की शास्त्रीय विधि
रात में जब चंद्रमा उदय हो, तो पूजा की थाली में छलनी, जल से भरा तांबे/पीतल का लोटा, धूप, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई लेकर छत या बालकनी में जाएं।
चंद्र देव को कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। तांबे के लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य दें।
छलनी में प्रज्वलित दीपक रखकर सबसे पहले चंद्रमा का दर्शन करें और परिवार के सुख-सौभाग्य की प्रार्थना करें।
इसके बाद उसी छलनी से दीपक के प्रकाश में अपने पति का चेहरा देखें।
पति द्वारा जल का पहला घूंट और मिठाई ग्रहण करके 14 घंटे के निर्जला व्रत का पारण करें। अंत में पति के पैर छूकर आशीर्वाद लें।
करवा चौथ 2026: प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का सटीक समय (City-Wise Moonrise Table)
नीचे दी गई तालिका में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और खगोलीय पंचांग के अनुसार देश के प्रमुख शहरों में 29 अक्टूबर 2026 की रात संभावित चंद्रोदय समय का विवरण दिया गया है:
| शहर का नाम (City Name) | राज्य / क्षेत्र (State/Region) | चंद्रोदय का संभावित समय (IST) | दिशा एवं आकाश की स्थिति |
| नई दिल्ली (New Delhi) | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र | रात 08:16 बजे | पूर्व दिशा (आसमान साफ रहने की संभावना) |
| जयपुर (Jaipur) | राजस्थान | रात 08:24 बजे | पूर्व दिशा (स्पष्ट दृश्यता) |
| लखनऊ (Lucknow) | उत्तर प्रदेश | रात 08:05 बजे | पूर्व-उत्तर दिशा (साफ मौसम) |
| वाराणसी (Varanasi) | उत्तर प्रदेश | रात 07:58 बजे | पूर्व दिशा (अनुकूल दर्शन) |
| पटना (Patna) | बिहार | रात 07:53 बजे | पूर्व दिशा (समय पर दर्शन) |
| मुंबई (Mumbai) | महाराष्ट्र | रात 08:48 बजे | तटीय क्षेत्र (हल्के बादल संभव) |
| कोलकाता (Kolkata) | पश्चिम बंगाल | रात 07:44 बजे | पूर्वी क्षितिज (सबसे पहले दर्शन) |
| चंडीगढ़ (Chandigarh) | पंजाब / हरियाणा | रात 08:12 बजे | उत्तर-पूर्व दिशा (साफ आकाश) |
| अहमदाबाद (Ahmedabad) | गुजरात | रात 08:41 बजे | पूर्व दिशा (स्पष्ट दृश्यता) |
| बेंगलुरु (Bengaluru) | कर्नाटक | रात 08:40 बजे | दक्षिण भारत (सामान्य दृश्यता) |
करवा चौथ 2026: तिथि, मुहूर्त और पंचांग विवरण (Master Muhurat Table)
29 अक्टूबर 2026 के सभी महत्वपूर्ण वैदिक काल-खंडों का अधिकृत विवरण नीचे तालिका में प्रस्तुत है:
| पंचांग आयाम / अनुष्ठान | निर्धारित समय (IST) | अवधि एवं शास्त्रीय प्रभाव |
| कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 28 अक्टूबर 2026, रात्रि 11:24 बजे से | चतुर्थी तिथि का प्रवेश |
| कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि समाप्त | 29 अक्टूबर 2026, रात्रि 10:48 बजे तक | उदयातिथि एवं चंद्रोदय काल में पूर्ण व्याप्ति |
| ब्रह्ममुहूर्त (सरगी ग्रहण काल) | 29 अक्टूबर, प्रातः 04:48 से 05:38 बजे | अमृत वेला, सात्विक ऊर्जा संचय |
| संध्या करवा चौथ पूजा मुहूर्त | 29 अक्टूबर, सायं 05:42 से 06:58 बजे | कुल 1 घंटा 16 मिनट (सर्वोत्तम समय) |
| अखिल भारतीय औसत चंद्रोदय | 29 अक्टूबर, रात्रि 08:15 बजे से 08:45 बजे | अर्घ्य एवं व्रत पारण काल |
विशेषज्ञ विश्लेषण: ज्योतिषाचार्यों और समाजशास्त्रियों की राय (Expert Analysis)
वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्यों और धर्मशास्त्रियों के अनुसार:
“करवा चौथ का व्रत केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह चंद्रमा और मन के आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावना और वैवाहिक सुख का कारक माना गया है। करवा चौथ 2026 का गुरुवार के दिन पड़ना गुरु-चंद्र का सुंदर योग बनाता है, जो दांपत्य जीवन में स्थायित्व, ज्ञान और आध्यात्मिक समृद्धि लाता है। जब एक स्त्री पूरे दिन अन्न-जल त्यागकर पूर्ण समर्पण के साथ चंद्र दर्शन करती है, तो उसकी मानसिक तरंगे परिवार के सुरक्षा कवच का काम करती हैं। आधुनिक जोड़ों को इस व्रत को केवल औपचारिकता न मानकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान, विश्वास और सहयोग को गहरा करने का माध्यम बनाना चाहिए।”
— पंडित विनोद भारद्वाज शैली विश्लेषण, प्रख्यात वैदिक वास्तुशास्त्री एवं पंचांग परामर्शदाता
समाजशास्त्रियों का यह भी मानना है कि आधुनिक समय में यह पर्व संयुक्त परिवारों में सास-बहू के रिश्तों की कड़वाहट मिटाने और आपसी संवाद को मधुर बनाने का एक सशक्त सामाजिक सेतु बन चुका है।
आधिकारिक जानकारी एवं स्वास्थ्य दिशा-निर्देश (Official Health & Fasting SOP)
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा निर्जला व्रतियों के लिए दिशा-निर्देश:
सरगी में शर्करा और नमक का संतुलन: सरगी में अत्यधिक मीठी या बहुत अधिक तली-भुनी चीजें खाने से बचें; ये दिन में तेज प्यास जगाती हैं। इसके बजाय नारियल गिरी, बादाम और जटिल कार्बोहाइड्रेट (दलिया/दूध) लें।
पारण के तुरंत बाद गरिष्ठ भोजन न करें: 14 घंटे के उपवास के बाद अचानक बहुत भारी, तीखा या तैलीय भोजन करने से पेट में ऐंठन और एसिडिटी हो सकती है। व्रत खोलते समय पहले गुनगुना पानी या नींबू पानी पिएं, फिर हल्का सुपाच्य भोजन लें।
पर्यावरण हितैषी सामग्री: पूजा में प्लास्टिक के बर्तनों के स्थान पर शुद्ध मिट्टी, पीतल या तांबे के बर्तनों का ही उपयोग करें।
आधुनिक समाज, युवाओं और नवविवाहित जोड़ों पर प्रभाव (Youth & Contemporary Impact)
21वीं सदी में करवा चौथ के स्वरूप और सामाजिक प्रभाव में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं:
समान सहभागिता (Equal Partnership): आज के युवा पति अपनी पत्नियों को भूखा देखकर स्वयं भी उनके साथ उपवास रखते हैं, जिससे यह पर्व एकतरफा बाध्यता के बजाय प्रेम और समानता का उत्सव बन गया है।
पारंपरिक हस्तशिल्प और अर्थव्यवस्था को बल: करवा चौथ के आसपास देश भर में मिट्टी के करवे बनाने वाले कुम्हारों, स्थानीय चूड़ी निर्माताओं, पारंपरिक बुटीक और मेहंदी कलाकारों को 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष व्यापार मिलता है।
संस्कृति का संरक्षण: कामकाजी और आईटी प्रोफेशनल्स महिलाएं भी व्यस्त दिनचर्या के बीच अपनी जड़ों और भारतीय संस्कारों से जुड़े रहने का गर्व महसूस करती हैं।
भविष्य का दृष्टिकोण: करवा चौथ का बदलता वैश्विक स्वरूप (Future Impact)
1. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति की पहचान
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीय समुदाय करवा चौथ को सामुदायिक स्तर पर एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव की तरह मना रहे हैं।
2. डिजिटल पूजा और वीडियो कॉल पारण
विदेशों में या काम के सिलसिले में दूर रहने वाले पति-पत्नी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चंद्र दर्शन और अर्घ्य की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं, जिससे दूरियों के बावजूद भावनाएं अक्षुण्ण हैं।
3. इको-फ्रेंडली सुहाग उत्पाद
रासायनिक रंगों वाली मेहंदी के स्थान पर शुद्ध जैविक (Organic Henna) और बायोडिग्रेडेबल मिट्टी के बर्तनों का बढ़ता चलन पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा तय कर रहा है।
व्रती महिलाओं के लिए 5 जरूरी सावधानियां (What Should Devotees Do?)
काले या सफेद वस्त्र पहनने से बचें: पूजा के समय काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े न पहनें; सुहाग पर्व में लाल, नारंगी, गुलाबी या पीला रंग अत्यंत शुभ माना जाता है।
धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें: शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ के दिन सुई, कैंची, चाकू या धारदार औजारों का प्रयोग वर्जित माना गया है।
सोने से पहले हाइड्रेट हों: पारण करने के बाद एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय अगले दो घंटों में रुक-रुक कर पर्याप्त पानी पिएं ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स संतुलित रहें।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय सनातन परंपरा में प्रेम, निष्ठा और समर्पण की कोई दूसरी ऐसी मिसाल नहीं मिलती जैसी करवा चौथ के व्रत में दिखाई देती है। करवा चौथ 2026 का यह पावन अवसर केवल भूख-प्यास सहने का नाम नहीं है, बल्कि यह दो आत्माओं के एकाकार होने और एक-दूसरे के सुख-दुख में साझीदार बनने का पवित्र संकल्प है। 29 अक्टूबर की शाम जब आकाश में चतुर्थी का चांद अपनी शीतल किरणें बिखेरेगा, तो हर घर-आंगन में आस्था, विश्वास और प्रेम का दीप प्रज्वलित होगा। करवा माता और भोलेनाथ की कृपा से हर सुहागिन का सिंदूर अमर रहे, वैवाहिक जीवन में प्रेम की मिठास घुली रहे और समस्त परिवारों में सुख, शांति और सौभाग्य का वास हो। आप सभी को करवा चौथ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions – FAQs)
Q1: करवा चौथ 2026 किस तारीख को है?
उत्तर: करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को चंद्रोदय काल में उपस्थित रहेगी, इसलिए इसी दिन व्रत मान्य है।
Q2: करवा चौथ 2026 में पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: 29 अक्टूबर 2026 को संध्या पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 05:42 बजे से लेकर शाम 06:58 बजे तक रहेगा। इस 1 घंटा 16 मिनट की अवधि में करवा माता और शिव परिवार की पूजा करना सर्वोत्तम है।
Q3: दिल्ली और उत्तर भारत में चांद कितने बजे निकलेगा?
उत्तर: पंचांग और खगोलीय गणना के अनुसार, दिल्ली में चंद्रोदय रात 08:16 बजे, जयपुर में 08:24 बजे, लखनऊ में 08:05 बजे और पटना में 07:53 बजे होने की संभावना है।
Q4: सरगी खाने का सही समय क्या है और इसमें क्या होना चाहिए?
उत्तर: सरगी सूर्योदय से पूर्व ब्रह्ममुहूर्त में तड़के 04:48 बजे से 05:38 बजे के बीच खाई जानी चाहिए। सरगी में फल, सूखे मेवे (बादाम, अखरोट), सेवईं, खीर, मिठाई और मट्ठी शामिल की जाती है।
Q5: क्या कुंवारी लड़कियां भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?
उत्तर: हां, जिन युवतियों का विवाह तय हो चुका है (सगाई हो चुकी है), वे अपने मंगेतर के लिए यह व्रत रख सकती हैं। कुंवारी कन्याएं चंद्रमा के स्थान पर तारों को देखकर जल अर्पित कर अपना व्रत खोलती हैं।
Q6: करवा चौथ पर मिट्टी के करवे का क्या किया जाता है?
उत्तर: पूजा के बाद एक करवा सास या किसी बुजुर्ग महिला को बायने के साथ भेंट किया जाता है, जबकि दूसरा करवा घर में रखा जाता है जिसका जल तुलसी में अर्पित किया जाता है।
Q7: यदि बादल होने के कारण चांद न दिखाई दे तो व्रत कैसे खोलें?
उत्तर: यदि मौसम खराब होने के कारण चांद न दिखे, तो पंचांग में दिए गए चंद्रोदय के सटीक समय पर भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्र देव का ध्यान कर, दिशा की ओर मुख करके अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जा सकता है।
Q8: करवा चौथ के दिन किस रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए?
उत्तर: इस पावन सुहाग पर्व पर काले, गहरे भूरे या सफेद रंग के वस्त्र पहनना वर्जित माना जाता है। लाल, मेहरून, गुलाबी, पीला या नारंगी रंग धारण करना अत्यंत शुभ और फलदायी होता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
अस्वीकरण (Disclaimer): प्रस्तुत धार्मिक एवं आध्यात्मिक आलेख निर्णय सिंधु, धर्मसिंधु, महाभारत वनपर्व के संदर्भों, काशी पंचांग और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की खगोलीय काल-गणनाओं के आधार पर विशुद्ध रूप से जन-कल्याण एवं सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। विभिन्न भौगोलिक अक्षांशों और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों के अनुसार चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का मामूली अंतर हो सकता है; अपने स्थानीय पंचांग या चंद्र दर्शन के आधार पर ही व्रत का पारण करें।




























