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Home - Corruption & Crime News - संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला, पूर्व DGC और पूर्व प्रधान समेत 6 गिरफ्तार

संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला, पूर्व DGC और पूर्व प्रधान समेत 6 गिरफ्तार

संभल में 1000 बीघा सरकारी जमीन घोटाले पर बड़ा एक्शन, रिटायर्ड SDM समेत 6 गिरफ्तार; वर्तमान SDM सहित 19 पर FIR

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
04/07/2026
in Corruption & Crime News, News
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संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला

संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला: पूर्व DGC और SDM फंसे

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यूपी का सबसे बड़ा भूमि भूमि-घोटाला: गंगा किनारे की सरकारी ‘झाऊ’ भूमि को फर्जी पट्टों से अपनों में बांटा, वर्तमान SDM सहित 19 पर FIR दर्ज होने से हड़कंप

उत्तर प्रदेश के संभल जिले से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख देने वाली आपराधिक खबर सामने आ रही है। संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई की संयुक्त कमान ने एक ऐसे अंतर-प्रांतीय और संगठित भू-माफिया सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसने सरकारी जमीनों की लूट के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जिले की संभल और गुन्नौर तहसील के अंतर्गत आने वाली करीब संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला मामले में अब तक का सबसे भीषण प्रशासनिक हंटर चला है। इस महा-घोटाले में जांच रिपोर्ट के आधार पर त्वरित एक्शन लेते हुए पुलिस ने एक रिटायर्ड एसडीएम (SDM), पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC राजस्व) और एक पूर्व ग्राम प्रधान समेत 6 रसूखदार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

यह केवल ज़मीन के किसी छोटे टुकड़े पर अवैध कब्जे की मामूली वारदात नहीं है, बल्कि यह करोड़ों रुपये मूल्य की गंगा किनारे स्थित सरकारी ‘झाऊ’ भूमि को कूट रचित दस्तावेजों, जाली हस्ताक्षरों और पद का दुरुपयोग कर भू-माफियाओं के हवाले करने की एक गहरी कूटनीतिक साजिश थी। इस मामले ने उस समय और अधिक गंभीर रूप ले लिया जब जांच की आंच वर्तमान में सेवारत एक एसडीएम (SDM) तक भी पहुंच गई। प्रशासन ने बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के वर्तमान एसडीएम सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इस धमाकेदार दंडात्मक कार्रवाई से पूरे उत्तर प्रदेश के राजस्व गलियारों में हड़कंप मच गया है और सफेदपोश अपराधियों की रीढ़ टूट गई है।

संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला: मुख्य अंश

  • घोटाले का विशाल पैमाना: संभल और गुन्नौर तहसील क्षेत्र में गंगा नदी के तटवर्ती इलाकों की लगभग 1000 बीघा बेशकीमती सरकारी ‘झाऊ’ भूमि का अवैध आवंटन।

  • शीर्ष अधिकारियों पर गाज: सिंडिकेट के मुख्य चेहरों में शामिल एक रिटायर्ड एसडीएम (SDM) और पूर्व डीजीसी (DGC राजस्व) को पुलिस ने दबोचा।

  • वर्तमान एसडीएम भी जद में: जांच के बाद गुन्नौर तहसील के वर्तमान सेवारत एसडीएम सहित 19 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में FIR दर्ज।

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  • फर्जी पट्टों का खेल: सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी कर काल्पनिक और चहेते लोगों के नाम पर रातों-रात बंजर व सार्वजनिक भूमि के पट्टे जारी किए गए।

  • जिलाधिकारी व एसपी का कड़ा एक्शन: डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई की विशेष टीम द्वारा लगातार छापेमारी कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर सीधे जेल भेजा गया।

  • एंटी-भूमाफिया कानून के तहत कार्रवाई: जब्त जमीनों को पुनः सरकार के खाते में दर्ज करने और आरोपियों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने की कानूनी प्रक्रिया प्रारंभ।

लेटेस्ट अपडेट: गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश कर भेजा गया जेल

संभल पुलिस लाइंस से आ रही ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी 6 मुख्य आरोपियों का जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें विशेष मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के निर्देशन में पुलिस की पांच विशेष टीमें वर्तमान फरार चल रहे अन्य आरोपियों और बिचौलियों की तलाश में मुरादाबाद, बदायूं, अलीगढ़ और लखनऊ के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

राजस्व विभाग की एक उच्च-स्तरीय तकनीकी टीम गुन्नौर तहसील के पिछले 15 वर्षों के पट्टा आवंटन के कंप्यूटर डेटा और मैन्युअल रजिस्टरों की फोरेंसिक जांच कर रही है ताकि इस कूटनीतिक जाल की हर परत को उघाड़ा जा सके।

🚨 पाठक अलर्ट (Reader Alert): यदि आप संभल, गुन्नौर या गंगा एक्सप्रेस-वे के कछारी इलाकों के आसपास कृषि भूमि या फार्महाउस के लिए जमीन खरीदने की सोच रहे हैं, तो बहुत सावधान रहें। भू-माफिया सरकारी और डूब क्षेत्र (Floodplain) की जमीनों के फर्जी कागजात दिखाकर सीधे-साधे लोगों को ठग रहे हैं। रजिस्ट्री कराने से पहले कलेक्ट्रेट के भू-अभिलेख विभाग से मूल खतौनी की जांच जरूर कराएं।

पृष्ठभूमि: गंगा किनारे की ‘झाऊ’ भूमि पर कैसे नजरें गड़ाए बैठे थे भू-माफिया

संभल और गुन्नौर तहसील के अंतर्गत गंगा नदी के तटवर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर सरकारी ‘झाऊ’ और बंजर भूमि स्थित है। यह भूमि मूल रूप से ग्राम सभा और राजस्व विभाग के नियंत्रण में आती है और सार्वजनिक कल्याण व पर्यावरण संतुलन के लिए आरक्षित होती है। चूंकि पिछले कुछ समय में बुनियादी ढांचे के विकास और कछारी इलाकों में खेती के आधुनिकीकरण के कारण इन जमीनों की बाजारू कीमत करोड़ों में पहुंच गई, इसलिए यह इलाका भू-माफियाओं के निशाने पर आ गया।

जांच में सामने आया है कि संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला की पटकथा कई साल पहले से लिखी जा रही थी। पूर्व प्रधानों, स्थानीय राजस्व कर्मियों (लेखपाल और कानूनगो), और तहसील के शीर्ष अधिकारियों ने मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया, जिसमें सरकारी फाइलों को इस तरह घुमाया गया कि मानो वह जमीन किसी निजी खातेदार की थी। इसके बाद, मृत व्यक्तियों और काल्पनिक नामों का सहारा लेकर फर्जी पट्टे तैयार किए गए और उन पट्टों को बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया गया।

क्या हुआ? कैसे खुला सरकारी जमीनों की इस महा-लूट का राज?

इस विशाल घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के पास गुन्नौर क्षेत्र के कुछ स्थानीय किसानों ने शपथ पत्र के साथ सामूहिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जिस सरकारी चरागाह और झाऊ भूमि पर ग्रामीण सदियों से आश्रित थे, उसे रातों-रात कुछ रसूखदार बाहरी लोगों के नाम ट्रांसफर कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एडीएम (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

जब इस एसआईटी ने गुन्नौर और संभल तहसील के रिकॉर्ड रूम के मूल दस्तावेजों का मिलान किया, तो चौंकाने वाले सच सामने आए। कई महत्वपूर्ण पन्नों को जानबूझकर फाड़ दिया गया था और उनकी जगह फर्जी प्रविष्टियां जोड़ दी गई थीं। सबसे शर्मनाक बात यह थी कि पूर्व डीजीसी (राजस्व), जिनका काम सरकारी जमीनों की अदालत में रक्षा करना था, उन्होंने ही भू-माफियाओं को कानूनी कमियां ढूंढकर फाइलें पास कराने में मदद की। इस विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने पुलिस को तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारियां शुरू करने के कड़े निर्देश दिए।

विशेषज्ञ विश्लेषण: राजस्व प्रशासन की कमियों और सुधारों की आवश्यकता

“राजस्व मामलों के कानून विशेषज्ञों और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि संभल का यह मामला देश के सबसे बड़े भूमि घोटालों में से एक है क्योंकि इसमें रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। जब एक सिटिंग या रिटायर्ड एसडीएम और सरकारी वकील (DGC) खुद भू-माफिया सिंडिकेट का हिस्सा बन जाते हैं, तो आम जनता का पूरी व्यवस्था से भरोसा उठ जाता है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UP Revenue Code) के तहत सार्वजनिक और कछारी जमीनों का निजी आवंटन पूरी तरह प्रतिबंधित है। संभल प्रशासन की यह त्वरित कार्रवाई काबिले तारीफ है, लेकिन भविष्य में ऐसे घोटालों को पूरी तरह रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित लैंड रजिस्ट्री और डिजिटल सिग्नेचर ऑडिट को हर तहसील में अनिवार्य करना होगा।”

आधिकारिक जानकारी: मुकदमे का दायरा और शामिल धाराएं

संभल जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ कोतवाली में दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) में बेहद कड़े विधिक प्रावधान शामिल किए गए हैं:

प्रशासनिक वक्तव्य और कानूनी धाराएं:

  • दर्ज मुख्य धाराएं: भारतीय दंड संहिता (IPC) / भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की कूटरचना), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना), 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) और 120B (आपराधिक षड्यंत्र)।

  • विशेष अधिनियम: सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की विभिन्न कड़ी धाराएं।

  • प्रशासनिक निर्देश: वर्तमान और रिटायर्ड सरकारी सेवकों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई और पेंशन रोकने के लिए शासन को पत्र प्रेषित।

आरोपियों की प्रोफाइल और वर्तमान विधिक स्थिति

इस घोटाले में शामिल मुख्य चेहरों और उनके खिलाफ हुए एक्शन की प्रामाणिक जानकारी इस मोबाइल-फ्रेंडली तालिका के माध्यम से देखें:

आरोपी का नाम और तत्कालीन पदसिंडिकेट में मुख्य भूमिकावर्तमान विधिक स्थिति (Current Status)भावी प्रशासनिक कार्रवाई
रिटायर्ड एसडीएम (SDM)पद का दुरुपयोग कर फर्जी आवंटन फाइलों को दी मंजूरीगिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गयाअवैध संपत्तियों के चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू
पूर्व डीजीसी (DGC राजस्व)भू-माफियाओं को कानूनी कवच दिया, फाइलों में हेरफेर कीगिरफ्तार, जेल की सलाखों के पीछेबार काउंसिल को लाइसेंस निरस्तीकरण का पत्र
पूर्व ग्राम प्रधान (गुन्नौर)ग्राम सभा की जमीनों को चिन्हित कर फर्जी लाभार्थी तैयार किएगिरफ्तार और न्यायालय द्वारा जेल भेजा गयापंचायत फंड के दुरुपयोग की ऑडिट शुरू
वर्तमान एसडीएम (SDM)जांच के दौरान कूटरचना को दबाने और सहयोग करने का आरोपFIR दर्ज, गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठितशासन स्तर से निलंबन की कार्रवाई प्रक्रियाधीन
अन्य 15 आरोपी (भू-माफिया व डीलर)जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री और प्लॉटिंग की3 गिरफ्तार, बाकी फरार आरोपियों पर इनाम घोषितगैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्की की तैयारी

आम जनता और कृषि समाज पर प्रभाव

इस संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला के उजागर होने के बाद सबसे बड़ा संकट उन गरीब और भूमिहीन किसानों पर मंडरा रहा है, जिन्हें भू-माफियाओं ने बहला-फुसलाकर इन जमीनों पर खेती करने या छोटे-छोटे आशियाने बनाने के लिए फंसा दिया था। गंगा किनारे की यह भूमि स्थानीय पारिस्थितिकी (Ecology) के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अवैध कब्जे के कारण नदी के प्राकृतिक प्रवाह और कछारी जीवों के आशियाने पूरी तरह नष्ट हो रहे थे।

प्रशासन द्वारा इन जमीनों को खाली कराए जाने के अभियान से स्थानीय स्तर पर छोटे किसानों में अपनी आजीविका को लेकर थोड़ी चिंता जरूर है, लेकिन वे इस बात से खुश हैं कि बड़े मगरमच्छों और भ्रष्ट अधिकारियों को आखिरकार उनके किए की सजा मिल रही है।

भविष्य के परिणाम और शासन का कड़ा रुख

इस महा-कार्रवाई के दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे:

  1. गैंगस्टर एक्ट और बुलडोजर एक्शन: पुलिस अधीक्षक ने साफ किया है कि इस सिंडिकेट के सभी सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उनकी अवैध रूप से कमाई गई करोड़ों की संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा।

  2. तटवर्ती जमीनों का विशेष सर्वे: उत्तर प्रदेश सरकार ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी (Satellite Imagery) के माध्यम से राज्य भर में गंगा, यमुना और हिंडन नदी के किनारे स्थित सभी सरकारी जमीनों का एक विशेष सुरक्षा ऑडिट शुरू करने जा रही है।

  3. राजस्व विभाग की छवि में सुधार: बड़े अधिकारियों पर सीधे हाथ डालने से निचले स्तर के कर्मचारियों (लेखपालों और कानूनगो) में भ्रष्टाचार को लेकर एक खौफ पैदा होगा, जिससे पारदर्शी व्यवस्था बनेगी।

भूमि सौदों में धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?

यदि आप भविष्य में किसी भी प्रकार की कृषि या व्यावसायिक भूमि खरीदने जा रहे हैं, तो इन चार बुनियादी सुरक्षा चक्रों का पालन अवश्य करें:

  • तहसील का ‘सर्टिफाइड रिकॉर्ड’ निकालें: कभी भी केवल डीलर द्वारा दिखाए गए कागजात पर भरोसा न करें। स्वयं तहसील जाकर ‘आरके कार्यालय’ से जमीन का पिछले 20 वर्षों का इतिहास (Chain of Deeds) चेक करें।

  • अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मांगें: सुनिश्चित करें कि संबंधित भूमि किसी डूब क्षेत्र, नदी कछार, चरागाह या सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में तो नहीं आती है।

  • सरकारी बैंक से लोन का प्रयास करें: यदि संभव हो, तो जमीन पर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से छोटे लोन के लिए आवेदन करें। बैंक की लीगल टीम जमीन के मालिकाना हक की बेहद कड़ी और अचूक जांच करती है, जिससे धोखाधड़ी का चांस खत्म हो जाता है।

  • ग्राम प्रधान और स्थानीय बुजुर्गों से पूछें: जमीन का सौदा फाइनल करने से पहले उस गांव के स्थानीय लोगों से भूमि के पुराने इतिहास और उस पर किसी संभावित विवाद की मौखिक जानकारी जरूर लें।

निष्कर्ष (Conclusion)

संभल में उजागर हुआ यह 1000 बीघा जमीन का महा-घोटाला इस बात का जीवंत प्रमाण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उत्तर प्रदेश में कानून का राज कितना मजबूत हो चुका है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का यह संयुक्त और निष्पक्ष एक्शन यह साबित करता है कि चाहे पद कितना भी बड़ा हो और रसूख कितना भी ऊंचा, सरकारी संपत्ति की लूट करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। रिटायर्ड एसडीएम और पूर्व डीजीसी की यह गिरफ्तारी अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा सबक है। पाठकों को हमारी यही सलाह है कि वे प्रॉपर्टी मार्केट के चमकदार विज्ञापनों और फर्जी डीलरों के झांसे में आने से बचें। इस हाई-प्रोफाइल जमीन घोटाले से जुड़ी कोर्ट की कार्यवाही, फरार आरोपियों की धरपकड़ और कुर्क होने वाली संपत्तियों के पल-पल के लाइव अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट ‘Bharati Fast News’ को नियमित रूप से फॉलो करते रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: संभल में 1000 बीघा जमीन घोटाला मुख्य रूप से क्या है?

उत्तर: यह संभल और गुन्नौर तहसील में गंगा किनारे स्थित करीब 1000 बीघा बेशकीमती सरकारी ‘झाऊ’ और बंजर भूमि को फर्जी पट्टों, जाली कूट रचित दस्तावेजों और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से निजी लोगों के नाम ट्रांसफर करने का एक महा-घोटाला है।

प्रश्न 2: इस मामले में अब तक कौन-कौन से बड़े चेहरे गिरफ्तार किए जा चुके हैं?

उत्तर: जिला प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई के तहत एक रिटायर्ड एसडीएम (SDM), पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC राजस्व) और एक पूर्व ग्राम प्रधान सहित कुल 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

प्रश्न 3: क्या वर्तमान में सेवारत किसी अधिकारी पर भी इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई है?

उत्तर: हां, इस घोटाले की जांच की आंच वर्तमान व्यवस्था तक भी पहुंची है। गुन्नौर तहसील के वर्तमान सेवारत एसडीएम (SDM) सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

प्रश्न 4: इस घोटाले का पर्दाफाश करने में किन प्रशासनिक अधिकारियों की मुख्य भूमिका रही?

उत्तर: इस महा-घोटाले का खुलासा संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल (IAS) और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई (IPS) की संयुक्त कड़े निर्देशों और एसआईटी (SIT) की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट के बाद हुआ है।

प्रश्न 5: आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने किन-किन मुख्य कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है?

उत्तर: आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) / भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 420, 467, 468, 471, 120B और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

प्रश्न 6: ‘झाऊ भूमि’ (Jhau Land) क्या होती है और यह इतनी कीमती क्यों है?

उत्तर: नदी के कछारी या तटवर्ती इलाकों की वह नम भूमि जहां प्राकृतिक रूप से झाऊ की झाड़ियां उगती हैं, उसे झाऊ भूमि कहते हैं। कृषि के आधुनिकीकरण और एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं के पास होने के कारण आजकल इन जमीनों की बाजारू कीमत करोड़ों में है।

प्रश्न 7: क्या इस घोटाले के आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट भी लगाया जाएगा?

उत्तर: हां, पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के आधिकारिक बयान के अनुसार, संगठित रूप से सरकारी जमीनों को हड़पने वाले इस पूरे भू-माफिया सिंडिकेट के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनकी अवैध संपत्तियां कुर्क की जाएंगी।

प्रश्न 8: आम जमीन खरीदार इस प्रकार के घोटालों और फर्जी पट्टों से खुद को कैसे बचा सकते हैं?

उत्तर: खरीदारों को हमेशा उत्तर प्रदेश भूलेख पोर्टल पर जाकर जमीन की श्रेणी की जांच करनी चाहिए। किसी भी कछारी या चरागाह भूमि को खरीदने से बचें और तहसील के सरकारी अभिलेखागार से पिछले 20 वर्षों के मूल रिकॉर्ड्स (Chain Documents) की विधिक जांच जरूर कराएं।

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Disclaimer: यह समाचार समीक्षा संभल जिला प्रशासन, पुलिस विभाग द्वारा दर्ज की गई आधिकारिक प्राथमिकी (FIR), जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई द्वारा जारी किए गए आधिकारिक वक्तव्यों और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध तथ्यों के गहन संकलन पर आधारित है। किसी भी नामजद या गिरफ्तार आरोपी के संबंध में अंतिम दोषसिद्धि या बेगुनाही का फैसला पूरी तरह से माननीय न्यायालय की न्यायिक और विधिक प्रक्रिया के अधीन है।

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Abhay Jeet Singh

Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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अगस्त 22, 2026

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Indian Railways Double Stack Train
National News

Indian Railways का नया रिकॉर्ड! 360 कंटेनर लेकर 422 KM दौड़ी डबल-स्टैक ट्रेन, माल ढुलाई होगी सस्ती

by Abhay Jeet Singh
अगस्त 25, 2026
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