संभल तीर्थ नगरी में 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण: 3200 किसानों के 999 गाटों पर चलेगी विकास की मुहर, नई तहसील सभागार में बड़ा फैसला
हजारों सालों की पौराणिक मान्यता, पग-पग पर बिखरी सनातन आस्था और अपनी माटी को भगवान की प्रदक्षिणा का मार्ग बनते देखने का संतोष—उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक जनपद संभल की पावन धरती आज एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की गवाह बन रही है। नई तहसील सभागार में जब प्रशासनिक अधिकारियों, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों और परिक्रमा समिति के पदाधिकारियों के बीच नक्शे खोले गए, तो साफ हो गया कि संभल को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर स्थापित करने का खाका अब जमीनी हकीकत बनने जा रहा है। भगवान कल्कि की इस अवतरण भूमि के कायाकल्प के लिए सरकार ने ₹100 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दे दी है।
लेकिन इस भव्य धार्मिक और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ ही इलाके के हजारों अन्नदाताओं के जीवन में एक बड़ा नीतिगत मोड़ आ गया है। संभल तीर्थ नगरी में 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण की इस महा-प्रक्रिया के तहत क्षेत्र के 32 सौ किसानों की किस्मत और जमीन सीधे तौर पर इस परियोजना से जुड़ने जा रही है। 49.470 किलोमीटर लंबे इस पूरे आस्था पथ को लगभग 50 किलोमीटर लंबे एक आलीशान रिंग रोड के रूप में तब्दील करने की तैयारी है। आइए इस आधिकारिक बैठक से निकले हर एक बिंदु, प्रभावित गांवों की सूची और मुआवजे के गणित को बारीकी से समझते हैं।
नई तहसील सभागार में लगी अंतिम मुहर: प्रशासनिक अमला हुआ सक्रिय
संभल की नई तहसील सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रशासन, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) और परिक्रमा समिति के प्रमुख चेहरों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) निधि पटेल ने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रशासन ने अब तक जनसहयोग के माध्यम से इस परिक्रमा मार्ग को जिस मुकाम तक पहुंचाया है, वह सराहनीय है। अब वक्त इसे और अधिक व्यवस्थित, चौड़ा और सर्वसुविधाभायुक्त बनाने का है।
बैठक के दौरान परिक्रमा मार्ग समन्वय समिति द्वारा तैयार किए गए विस्तृत प्रस्ताव और सर्वे रिपोर्ट की समीक्षा की गई, जिसके बाद परियोजना के वित्तीय और तकनीकी प्रारूप पर अंतिम मुहर लगा दी गई। इस ऐतिहासिक मार्ग के सुंदरीकरण और चौड़ीकरण से संभल के ग्रामीण अंचलों की सूरत पूरी तरह बदलने वाली है।
38 गांवों से गुजरेगा आस्था का पथ: सिर्फ 2 गांवों में है सरकारी जमीन
सहायक अभियंता विवेक बंसल (लोनिवि) और राजस्व टीम द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग की कुल लंबाई 49.470 किलोमीटर निर्धारित की गई है। यह भव्य मार्ग संभल जनपद के कुल 38 गांवों की सीमाओं से होकर गुजरेगा।
इस परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती और जमीनी हकीकत यह है कि इन 38 गांवों में से केवल 2 गांवों में ही सरकार के पास अपनी ‘सरकारी भूमि’ उपलब्ध है। शेष 36 गांवों में मार्ग को चौड़ा करने के लिए निजी स्वामित्व वाली जमीनों का सहारा लेना पड़ेगा। यही वजह है कि संभल तीर्थ नगरी में 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण का यह अभियान उत्तर प्रदेश के इस हिस्से में अब तक का सबसे बड़ा भूमि अधिग्रहण बनने जा रहा है।
999 गाटे और 33.66 हेक्टेयर भूमि: आंकड़ों में समझिए प्रोजेक्ट का पैमाना
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बैठक में भूमि की पैमाइश का जो सटीक विवरण प्रस्तुत किया है, उसके अनुसार कुल 33.66782 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का सीधा असर क्षेत्र के किसानों पर पड़ेगा, जिनकी कुल संख्या और गाटों का विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| परियोजना के मुख्य मानक | आधिकारिक सांख्यिकी व विवरण |
| परिक्रमा मार्ग की कुल लंबाई | 49.470 किलोमीटर (लगभग 50 किमी रिंग रोड) |
| कुल प्रभावित गांव | 38 गांव (36 गांवों में होगा निजी भूमि अधिग्रहण) |
| प्रभावित किसानों की कुल संख्या | 3,200 (बत्तीस सौ किसान) |
| अधिग्रहित होने वाले गाटों की संख्या | 999 गाटे |
| कुल अधिग्रहित भूमि का रकबा | 33.66782 हेक्टेयर |
| परियोजना की कुल अनुमानित लागत | ₹100 करोड़ (एक अरब रुपये) |
आस्था के साथ आर्थिक समृद्धि का नया द्वार: तहसीलदार का दावा
बैठक को संबोधित करते हुए तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने इस परियोजना के आर्थिक पहलुओं पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि यह परिक्रमा मार्ग संभल को केवल एक धार्मिक पहचान ही नहीं देगा, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए जीवनदायिनी साबित होगा। जब धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, तो स्थानीय स्तर पर होटलों, परिवहन, ढाबों और संभल के पारंपरिक सींग-शिल्प (Horn Craft) उद्योग को हजारों नए ग्राहक मिलेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के अपार अवसर पैदा होंगे।
दूसरी तरफ, लोनिवि के सहायक अभियंता विवेक बंसल ने तकनीकी पक्ष रखते हुए बताया कि इस 50 किलोमीटर लंबे मार्ग को भविष्य में एक मजबूत रिंग रोड के रूप में देखा जा रहा है। यह रिंग रोड संभल शहर के भीतर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम की समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर देगा, क्योंकि बाहरी वाहन शहर के अंदर आए बिना ही बाहर से निकल सकेंगे।
श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं: क्या बोले परिक्रमा समिति के पदाधिकारी?
24 कोसीय मासिक परिक्रमा समिति की ओर से अपनी बात रखते हुए महंत बाल योगी दीनानाथ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल सड़क का चौड़ीकरण काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि हर महीने और मुख्य वार्षिक उत्सवों पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए मार्ग के किनारे पीने के साफ पानी, छांव के लिए शेल्टर, शौचालय, लाइटिंग और प्राथमिक चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
समिति के वरिष्ठ सदस्य छत्रपाल सिंह ने इस मार्ग के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भूमि आदिकाल से ऋषियों की तपस्थली रही है। इसका सुंदरीकरण आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने का काम करेगा।
जनआंदोलन से धरातल तक: पूर्व और वर्तमान कप्तानों से उम्मीदें
बैठक में चर्चा के दौरान राजकुमार शर्मा ने इस बात को याद किया कि कैसे संभल के तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने इस परिक्रमा मार्ग के विकास अभियान को एक सरकारी फाइल से निकालकर एक जनआंदोलन का रूप दे दिया था। उन्होंने स्वयं जमीन पर उतरकर झाड़ियां साफ कराई थीं और मार्ग को एक आकार दिया था।
सभागार में मौजूद सभी पदाधिकारियों और जसपाल सिंह व मुकेश शर्मा जैसे स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने उम्मीद जताई कि संभल के वर्तमान जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल भी इस अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील परियोजना को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखेंगे और इसके निर्माण कार्य को शीघ्र धरातल पर साकार कर श्रद्धालुओं को एक अनुपम सौगात भेंट करेंगे।
Key Highlights: मुख्य बातें
विशाल बैठक: संभल की नई तहसील सभागार में एसडीएम निधि पटेल की अध्यक्षता में मेगा प्रोजेक्ट पर चर्चा।
अधिग्रहण का पैमाना: 36 गांवों के 3200 किसानों की 33.66 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहित होगी।
गाटों की संख्या: राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार कुल 999 गाटे इस चौड़ीकरण की जद में आएंगे।
रिंग रोड का स्वरूप: लोनिवि इस 49.470 किमी लंबे मार्ग को 50 किलोमीटर लंबे आधुनिक रिंग रोड के रूप में विकसित करेगा।
कुल बजट: इस भव्य धार्मिक-अवसंरचना परियोजना के लिए ₹100 करोड़ के बजट पर अंतिम मुहर लगी।
FAQ Section: आपके जरूरी सवालों के जवाब
1. संभल तीर्थ नगरी में 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है?
इस प्राचीन और ऐतिहासिक परिक्रमा मार्ग की वर्तमान चौड़ाई बेहद कम है, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा में कठिनाई होती है। इसे 50 किमी लंबे आधुनिक और चौड़े रिंग रोड के रूप में विकसित करने और सुंदरीकरण के लिए निजी भूमि का अधिग्रहण अनिवार्य हो गया है।
2. इस भूमि अधिग्रहण से कुल कितने किसान और जमीन प्रभावित होगी?
इस सरकारी परियोजना से कुल 3200 किसान प्रभावित हो रहे हैं। राजस्व विभाग के अनुसार उनके 999 गाटों (जमीन के टुकड़ों) से कुल 33.66782 हेक्टेयर भूमि ली जाएगी।
3. प्रभावित किसानों को मुआवजे का वितरण किस प्रकार होगा?
तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारियों (जैसे ओंकार गोंड, राहुल धारीवाल, स्पर्श गुप्ता) की देखरेख में सभी 36 गांवों की खतौनी और गाटा संख्या की जांच की जा रही है। प्रभावित किसानों को शासन की नीतियों के अनुसार तय मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में दिया जाएगा।
4. क्या इस परिक्रमा मार्ग के बनने से शहर के ट्रैफिक को कोई फायदा होगा?
जी हां, लोनिवि के सहायक अभियंता के अनुसार यह मार्ग एक बाईपास या रिंग रोड की तरह काम करेगा, जिससे संभल शहर के मुख्य बाजारों को भारी वाहनों के जाम से मुक्ति मिलेगी।
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निष्कर्ष: विकास और विरासत का एक सुंदर संतुलन
संभल तीर्थ नगरी में 24 कोसीय परिक्रमा मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण की यह घोषणा संभल के इतिहास में एक नया मील का पत्थर है। ₹100 करोड़ की लागत से बनने वाला यह 50 किलोमीटर लंबा रिंग रोड न केवल तीर्थयात्रियों के सफर को सुगम बनाएगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी एक नई संजीवनी देगा। हालांकि, प्रशासन की असली परीक्षा उन 3200 प्रभावित किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से उचित मुआवजा दिलाने में होगी, जिन्होंने अपनी उपजाऊ भूमि इस धार्मिक महायज्ञ के लिए समर्पित की है। जब आस्था, प्रशासन और जनता का ऐसा समन्वय होता है, तभी किसी क्षेत्र का वास्तविक विकास संभव हो पाता है।
Disclaimer: यह लेख संभल की नई तहसील सभागार में आयोजित आधिकारिक बैठक, प्रशासनिक बयानों और राजस्व विभाग द्वारा जारी प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित है। भूमि अधिग्रहण की सटीक गाटा संख्या, मुआवजे की राशि और रूट मैप की अंतिम आधिकारिक पुष्टि के लिए कृपया जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय संभल या संबंधित तहसील के भूलेख अनुभाग से संपर्क करें।

Bharati Fast News Editorial Team
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