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Home - Natural Disaster - “हवा में जहर” AQI क्या है और यह कितना खतरनाक हो सकता है? जानिए हवा की गुणवत्ता मापने का पूरा सच

“हवा में जहर” AQI क्या है और यह कितना खतरनाक हो सकता है? जानिए हवा की गुणवत्ता मापने का पूरा सच

AQI कैसे मापा जाता है, इसका इंसानों और पर्यावरण पर असर क्या है और सरकार इसे सुधारने के लिए क्या कर रही है | Bharati Fast News

Abhay Jeet Singh by Abhay Jeet Singh
13/02/2026
in Natural Disaster, News, Weather News
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AQI-Bharati Fast News
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नमस्ते Bharati Fast News के पाठकों! हमारी सांसों पर मंडराता ‘ज़हर’ – AQI क्या है और क्यों है इतना ख़तरनाक? क्या आपने कभी सोचा है कि हर सांस के साथ आप क्या अंदर ले रहे हैं? क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा नंबर, जिसे हम वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कहते हैं, आपकी सेहत का कितना सटीक हाल बता सकता है? यह महज एक संख्या नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है, एक निमंत्रण है अपनी हवा के बारे में जानने और सचेत होने का। आज, भारती फास्ट न्यूज़ के माध्यम से, हम AQI के रहस्यमय संसार में उतरेंगे, इसके इतिहास को खंगालेंगे, वर्तमान के विवादों पर बात करेंगे, और भविष्य की उन उम्मीदों को भी टटोलेंगे जो शायद हमारी सांसों को कुछ राहत दे सकें।

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  • “हवा में जहर” AQI क्या है और यह कितना खतरनाक हो सकता है? जानिए हवा की गुणवत्ता मापने का पूरा सच
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  • AQI की ABCD: ये क्या बला है और कैसे काम करती है?
    • हवा का थर्मामीटर: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को सरल शब्दों में समझें
    • हवा के 8 ‘विलेन’: कौन से प्रदूषक AQI में शामिल हैं?
    • रंगों का खेल: AQI की श्रेणियां और उनका मतलब क्या है?
    • AQI कैसे मापा जाता है? हवा की नब्ज़ पकड़ने का विज्ञान
    • अपनी हवा, अपनी जानकारी: AQI को कैसे ट्रैक करें?
  • AQI का सफ़र: इतिहास के झरोखे से आज तक
    • भारत में वायु गुणवत्ता नियंत्रण की शुरुआत: एक छोटा सा बीज
    • मानकों का विकास: NAAQS की बदलती तस्वीर
    • राष्ट्रीय AQI का जन्म: जनता को जागरूक करने की पहल (साल 2014)
    • दुनिया में AQI: वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत कहां खड़ा है?
  • “सांसों पर संकट”: इंसान और पर्यावरण पर AQI का जानलेवा असर
    • इंसानों पर बुरा प्रभाव: दिल, दिमाग और फेफड़ों पर अटैक
    • पर्यावरण को नुकसान: हरियाली से पानी तक, सब पर असर
  • भारत में AQI स्थिति 2026
    • प्रमुख शहरों की वर्तमान AQI (जनवरी 2026)
    • 2026 ट्रेंड्स और कारण
    • सुधार के संकेत
  • जनता की राय और विशेषज्ञों की पुकार: हवा पर क्या सोचते हैं हम?
    • जागरूकता बनाम समझ का अंतर: क्या हम AQI को वाकई समझते हैं?
    • “सरकार कुछ करे!” – लोगों की उम्मीदें और विशेषज्ञों की चिंताएं
  • AQI के इर्द-गिर्द के विवाद: क्या वाकई हवा साफ दिखती है?
    • मानक और सीमाएं: क्या भारत का AQI सच छिपाता है?
    • डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल: मॉनिटरिंग स्टेशन की असलियत
    • अपर्याप्त मॉनिटरिंग नेटवर्क का अभाव: हर गली-मोहल्ले की हवा का सच क्यों नहीं मिलता?
    • सरकारी रवैया और जन-विश्वास का संकट
  • “कल की हवा”: भविष्य की उम्मीदें, नई तकनीकें और सरकारी पहल
    • हवा पर ‘AI की नजर’: तकनीक कैसे बदल रही है निगरानी का तरीका?
    • प्रदूषण नियंत्रण के नए हथियार: स्रोत से ही समस्या को खत्म करना
    • प्रकृति का साथ: हरियाली से स्वच्छ हवा
    • भारत सरकार के भावी कदम: NCAP और आगामी योजनाएं
  • AQI का स्वास्थ्य पर खतरा: विस्तार से प्रभाव (AQI 50+ से गंभीर तक)
    • AQI स्तर और स्वास्थ्य प्रभाव तालिका
    • AQI स्तर अनुसार स्वास्थ्य जोखिम
    • AQI 0-50 (अच्छा) – सुरक्षित
    • AQI 51-100 (संतोषजनक) – हल्का खतरा
    • AQI 101-200 (मध्यम) – सावधानी
    • AQI 201-300 (खराब) – गंभीर खतरा
    • AQI 301-400 (बहुत खराब) – इमरजेंसी
    • AQI 401-500+ (गंभीर) – जानलेवा
    • विशेष समूहों पर प्रभाव
    • लंबे समय (Chronic) प्रभाव
    • शरीर के अंदर क्या होता है?
    • तुरंत बचाव (AQI 300+)
    • Bharati Fast News पर यह भी देखें-प्राइवेट जॉब या सरकारी नौकरी: कौन है बेहतर विकल्प, अवसर या सिर्फ अपवाद?
  • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
    • पोस्ट से सम्बंधित अन्य ख़बर-भारत में AQI
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“हवा में जहर” AQI क्या है और यह कितना खतरनाक हो सकता है? जानिए हवा की गुणवत्ता मापने का पूरा सच

AQI क्या है, यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में है जो रोज प्रदूषित हवा में सांस लेता है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हवा की गुणवत्ता मापने का सरल पैमाना है, जो PM2.5, PM10, NO2 जैसे प्रदूषकों से 0-500 स्कोर देता। दिल्ली में 500+ AQI ‘गंभीर’ है, जो फेफड़े-हृदय को नुकसान पहुंचाता। Bharati Fast News लाता है पूरा विश्लेषण।

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AQI क्या है-Bharati Fast News

20 जनवरी 2026 को दिल्ली AQI 350+।

AQI की ABCD: ये क्या बला है और कैसे काम करती है?

AQI क्या है? यह 6 प्रदूषकों (PM2.5, PM10, O3, NO2, SO2, CO) का औसत स्कोर। CPCB मॉनिटरिंग स्टेशन से डेटा लेता।​

AQI स्तरश्रेणीरंगस्वास्थ्य असर
0-50अच्छाहरासुरक्षित​
51-100संतोषजनकपीलासंवेदनशील प्रभावित
101-200मध्यमनारंगीहल्का असर
201-300खराबलालसभी प्रभावित
301-400बहुत खराबबैंगनीसांस समस्या
401-500गंभीरभूराआपातकाल​

500+ कैप्ड, लेकिन IQAir 1000+ दिखाता।

हवा का थर्मामीटर: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को सरल शब्दों में समझें

AQI, या वायु गुणवत्ता सूचकांक, एक जटिल विषय को सरल बनाने का एक प्रयास है। यह एक तरह का थर्मामीटर है जो हवा में मौजूद प्रदूषण की मात्रा को दर्शाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जटिल डेटा को इस तरह प्रस्तुत करना है कि एक आम आदमी भी समझ सके कि हवा कितनी साफ है या कितनी दूषित। यह हमें बताता है कि हमारी सांस लेने वाली हवा हमारे स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है।

हवा के 8 ‘विलेन’: कौन से प्रदूषक AQI में शामिल हैं?

AQI की गणना में कई प्रदूषकों को शामिल किया जाता है, लेकिन इनमें से कुछ ‘विलेन’ सबसे कुख्यात हैं। PM2.5 और PM10, ये वो सूक्ष्म कण हैं जो हमारी सांसों के साथ हमारे फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), ओजोन (O3), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), अमोनिया (NH3), और लेड (Pb) भी महत्वपूर्ण प्रदूषक हैं जो AQI को प्रभावित करते हैं। इनमें से प्रत्येक प्रदूषक का हमारे स्वास्थ्य पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।

रंगों का खेल: AQI की श्रेणियां और उनका मतलब क्या है?

  • हरा रंग (0-50): अच्छी हवा
  • पीला (51-100): संतोषजनक
  • नारंगी (101-200): मध्यम प्रदूषण
  • लाल (201-300): खराब
  • बैंगनी (301-400): बहुत खराब
  • मैरून (401-500+): गंभीर स्थिति

AQI कैसे मापा जाता है? हवा की नब्ज़ पकड़ने का विज्ञान

AQI को मापने के लिए, शहरों में मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जाते हैं। ये स्टेशन हवा में मौजूद विभिन्न प्रदूषकों की मात्रा को मापते हैं। डेटा कलेक्शन की इस प्रक्रिया में सेंसर का उपयोग किया जाता है। फिर, एक जटिल फ़ॉर्मूले का उपयोग करके इन प्रदूषकों की सांद्रता को एक सूचकांक में बदला जाता है। PM2.5 या PM10 की उपस्थिति अनिवार्य है और कम से कम तीन प्रदूषकों को शामिल किया जाता है।

अपनी हवा, अपनी जानकारी: AQI को कैसे ट्रैक करें?

आज के डिजिटल युग में, AQI को ट्रैक करना बहुत आसान है। मौसम ऐप, गूगल सर्च, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की वेबसाइट और एयर विजुअल जैसे ऐप्स के माध्यम से आप आसानी से अपने क्षेत्र का AQI जान सकते हैं। AQI क्या है का जवाब जानकर भी 300+ पर सांस लेना खतरनाक। PM2.5 फेफड़े में घुस PM2.5 फेफड़े में घुसता, कोविड रिस्क 20% बढ़ा। बच्चे-अस्थमा वाले 5x खतरा। हृदय रोग, कैंसर लिंक।​

AQI का सफ़र: इतिहास के झरोखे से आज तक

भारत में वायु गुणवत्ता नियंत्रण की शुरुआत: एक छोटा सा बीज

भारत में वायु गुणवत्ता नियंत्रण की शुरुआत 1970 के दशक में हुई, जब वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ने लगी। 1981 में Air (Prevention and Control of Pollution) Act आया, जिसने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। CPCB और SPCB का गठन हुआ, और उन्होंने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मानकों का विकास: NAAQS की बदलती तस्वीर

1982 में पहली बार वायु गुणवत्ता के दिशानिर्देश जारी किए गए। इसके बाद 1994 और 1998 में संशोधन किए गए। 2009 में सबसे महत्वपूर्ण मानक आए, जिसने पूरे देश में एकसमान और कड़े नियम लागू किए।

राष्ट्रीय AQI का जन्म: जनता को जागरूक करने की पहल (साल 2014)

2014 में राष्ट्रीय AQI की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य जनता को वायु प्रदूषण के बारे में जागरूक करना था।

दुनिया में AQI: वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत कहां खड़ा है?

अमेरिका में PSI से AQI का विकास हुआ और PM2.5 को शामिल किया गया। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में, भारत अभी भी कई विकसित देशों से पीछे है, लेकिन सुधार की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

AQI के विभिन्न स्तरों के स्वास्थ्य प्रभाव: विस्तृत गाइड

“सांसों पर संकट”: इंसान और पर्यावरण पर AQI का जानलेवा असर

इंसानों पर बुरा प्रभाव: दिल, दिमाग और फेफड़ों पर अटैक

AQI का सबसे गंभीर प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण स्ट्रोक, हार्ट अटैक, फेफड़ों का कैंसर और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। अन्य प्रदूषक (NO2, SO2, CO, O3, NH3, Pb) भी स्वास्थ्य पर तात्कालिक और दीर्घकालिक प्रभाव डालते हैं। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं। WHO के दिशानिर्देशों की तुलना में भारत की स्थिति चिंताजनक है।

पर्यावरण को नुकसान: हरियाली से पानी तक, सब पर असर

वायु प्रदूषण न केवल हमारे स्वास्थ्य को, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है। अमोनिया से यूट्रोफिकेशन (पानी में शैवाल का बढ़ना) होता है और यह जलवायु परिवर्तन में भी योगदान देता है। एसिड रेन, कम होती दृश्यता और पारिस्थितिकी तंत्र (पेड़-पौधों, वन्यजीवों) पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

भारत में AQI स्थिति 2026

दिल्ली 400+, UP/हरियाणा 300+। NCAP से 131 शहरों में 40% सुधार लक्ष्य, लेकिन 2023 तक 13% ही। सर्दी में क्रॉप बर्निंग बूस्ट।

भारत में 2026 की AQI स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है, खासकर उत्तर भारत में। जनवरी 20, 2026 तक दिल्ली-NCR का औसत AQI 320-450 (बहुत खराब से गंभीर) रहा। NCAP प्रोग्राम के बावजूद सर्दियों में PM2.5 स्पाइक्स जारी।

प्रमुख शहरों की वर्तमान AQI (जनवरी 2026)

शहरAQI स्तरमुख्य प्रदूषकस्थिति
दिल्ली380-450​PM2.5गंभीर
गाजियाबाद350-420PM2.5बहुत खराब
ग्रेटर नोएडा340PM10बहुत खराब
मुंबई120-180PM2.5मध्यम
बेंगलुरु90-140O3संतोषजनक
कोलकाता200-280PM2.5खराब
चेन्नई80-120PM10अच्छा

स्रोत: CPCB/SAMEER ऐप (20 जनवरी 2026 डेटा)।

AQI के विभिन्न स्तरों के स्वास्थ्य प्रभाव-Bharati Fast News

2026 ट्रेंड्स और कारण

  • उत्तर भारत: स्टबल बर्निंग + वाहन उत्सर्जन से AQI 400+। दिल्ली 500 कैप्ड, लेकिन IQAir 700+ दिखा।​

  • NCAP प्रोग्राम: 131 शहरों में PM10 20-30% कम, लेकिन लक्ष्य अधूरा। 2023-26 में 40% कट टारगेट।​

  • GRAP स्टेज 3-4: दिल्ली में कंस्ट्रक्शन बैन, BS-IV डीजल बंद।

सुधार के संकेत

  • इलेक्ट्रिक वाहन 15% बढ़े।

  • GRAP से 15% AQI ड्रॉप।

  • 2026 बजट: क्लीन एयर फंड ₹5,000 करोड़।

चेतावनी: बच्चे/बुजुर्ग घर में रहें। N95 मास्क यूज करें। AQI.in चेक करें।

जनता की राय और विशेषज्ञों की पुकार: हवा पर क्या सोचते हैं हम?

जागरूकता बनाम समझ का अंतर: क्या हम AQI को वाकई समझते हैं?

प्रदूषण को लेकर सामान्य जागरूकता तो 90% से अधिक है, लेकिन PM2.5 और AQI जैसे तकनीकी शब्दों की समझ सीमित है। युवाओं (18-25) में हवा की गुणवत्ता जानने की उत्सुकता बढ़ रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

“सरकार कुछ करे!” – लोगों की उम्मीदें और विशेषज्ञों की चिंताएं

नागरिकों का मानना है कि व्यक्तिगत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, और सरकारी हस्तक्षेप की तीव्र मांग है। विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत के मानक WHO से कमज़ोर क्यों हैं, जिसके कारण लाखों मौतें हो रही हैं। सुधार के लिए कड़े नीतिगत क्रियान्वयन, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, बेहतर जन-जागरूकता अभियान और ‘एयरशेड-स्तरीय’ योजना की आवश्यकता है।

AQI के इर्द-गिर्द के विवाद: क्या वाकई हवा साफ दिखती है?

मानक और सीमाएं: क्या भारत का AQI सच छिपाता है?

भारत के NAAQS का WHO दिशानिर्देशों से कम सख्त होना एक चिंता का विषय है। आधिकारिक AQI स्केल का 500 पर कैप होना, अत्यधिक प्रदूषण की भयावहता को कम दिखाता है। 24 घंटे का औसत पीक प्रदूषण घंटों को छिपा सकता है।

डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल: मॉनिटरिंग स्टेशन की असलियत

दिवाली जैसे मौकों पर “गायब डेटा” और पारदर्शिता की कमी एक गंभीर मुद्दा है। मॉनिटरिंग स्टेशन के “रणनीतिक” प्लेसमेंट पर भी सवाल उठते हैं। पानी का छिड़काव करके सेंसर रीडिंग को प्रभावित करने के आरोप भी लगते हैं।

अपर्याप्त मॉनिटरिंग नेटवर्क का अभाव: हर गली-मोहल्ले की हवा का सच क्यों नहीं मिलता?

शहरी केंद्रों के बाहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मॉनिटरिंग स्टेशनों की कमी है, जिससे हर गली-मोहल्ले की हवा का सच नहीं मिल पाता।

सरकारी रवैया और जन-विश्वास का संकट

अधिकारियों द्वारा प्रदूषण की गंभीरता को कम आंकना या वैज्ञानिक डेटा पर सवाल उठाना जन-विश्वास को कम करता है। हवा प्रदूषण और मौतों के बीच “सीधा संबंध” न होने जैसे बयानों से भी लोगों में निराशा फैलती है। NCAP की आलोचना भी होती है, क्योंकि इसमें अपर्याप्त फंडिंग, कमजोर डिज़ाइन और कानूनी समर्थन की कमी है।

“कल की हवा”: भविष्य की उम्मीदें, नई तकनीकें और सरकारी पहल

हवा पर ‘AI की नजर’: तकनीक कैसे बदल रही है निगरानी का तरीका?

IoT सेंसर और AI/मशीन लर्निंग रियल-टाइम डेटा प्रदान करते हैं, प्रदूषण पैटर्न की पहचान करते हैं और भविष्य की भविष्यवाणी करते हैं। मोबाइल और ड्रोन-आधारित निगरानी दूरदराज के इलाकों और बड़े शहरी परिदृश्यों की निगरानी करती है। कम लागत वाले सेंसर और सघन नेटवर्क अधिक सटीक स्थानीय डेटा प्रदान करते हैं। सैटेलाइट-आधारित निगरानी वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है।

प्रदूषण नियंत्रण के नए हथियार: स्रोत से ही समस्या को खत्म करना

स्रोत में कमी और रोकथाम, उन्नत उत्सर्जन नियंत्रण प्रणालियां और कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) तकनीकें प्रदूषण को नियंत्रित करने के नए तरीके हैं।

प्रकृति का साथ: हरियाली से स्वच्छ हवा

आर्द्रभूमि, ग्रीन रूफ और वनीकरण के प्रयास प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं।

भारत सरकार के भावी कदम: NCAP और आगामी योजनाएं

NCAP के लक्ष्य में संशोधन (2026 तक PM10 में 40% कमी), प्रदर्शन-आधारित वित्तीय हस्तांतरण और Commission of Air Quality Management (CAQM) की भूमिका महत्वपूर्ण हैं। स्वच्छ वायु अनुसंधान पहल (CARI) और WAYU जैसे उपकरण भी उपयोगी हैं।

AQI का स्वास्थ्य पर खतरा: विस्तार से प्रभाव (AQI 50+ से गंभीर तक)

AQI का स्वास्थ्य पर खतरा हर उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के लोगों के लिए अलग-अलग होता है। PM2.5, PM10 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों से खून में घुसकर पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।

AQI स्तर और स्वास्थ्य प्रभाव तालिका

AQI रेंजश्रेणीरंग कोडसभी पर प्रभावसंवेदनशील समूहों परसावधानियां
0-50अच्छाहरा ✅कोई प्रभाव नहींसुरक्षितसामान्य जीवन
51-100संतोषजनकपीला 🟡सामान्यहल्की खांसी, आंख जलनआउटडोर सामान्य
101-200मध्यमनारंगी 🟠आंख/नाक जलनसांस फूलना, अस्थमाभारी व्यायाम कम
201-300खराबलाल 🔴सांस लेने में तकलीफअस्थमा अटैक, हार्ट स्ट्रेसबाहर कम निकलें
301-400बहुत खराबबैंगनी 🟣फेफड़ा सूजन, BP बढ़नाअस्पताल जाने लायकN95 मास्क, घर में रहें
401-500गंभीरभूरा 🟤जानलेवा (सभी)तुरंत मेडिकल हेल्पइमरजेंसी, मास्क अनिवार्य

AQI स्तर अनुसार स्वास्थ्य जोखिम

AQI 0-50 (अच्छा) – सुरक्षित

  • सभी के लिए हानिरहित

  • आउटडोर एक्टिविटी सामान्य

AQI 51-100 (संतोषजनक) – हल्का खतरा

  • संवेदनशील लोग (अस्थमा, हृदय रोगी): हल्की खांसी, गला खराब

  • सामान्य: कोई असर नहीं

AQI 101-200 (मध्यम) – सावधानी

सभी लोगों में:
✅ आंखों में जलन
✅ नाक बहना
✅ हल्की सांस फूलना
⚠️ बच्चे/बुजुर्ग: दवा लेना शुरू करें

AQI 201-300 (खराब) – गंभीर खतरा

सभी प्रभावित:
🔴 सांस लेने में तकलीफ
🔴 अस्थमा अटैक
🔴 हार्ट रोगी: अस्पताल जाने का रिस्क
⚠️ स्वस्थ भी: भारी व्यायाम बंद

AQI 301-400 (बहुत खराब) – इमरजेंसी

शारीरिक प्रभाव:
💨 फेफड़ों में सूजन (ब्रोंकाइटिस)
❤️ हृदय पर अतिरिक्त लोड (BP बढ़ना)
🧠 दिमागी असर (सिरदर्द, चक्कर)
⚠️ बच्चों में ऑक्सीजन लेवल ड्रॉप

AQI 401-500+ (गंभीर) – जानलेवा

24 घंटे के अंदर:
☠️ स्वस्थ भी अस्पताल
☠️ अस्थमा/COPD अटैक
☠️ हार्ट अटैक/स्ट्रोक 6x रिस्क
☠️ कैंसर/निमोनिया खतरा
⚠️ बाहरी गतिविधि पूरी बंद
देश की प्राकृतिक आपदाएँ न्यूज़ आपके लिए

विशेष समूहों पर प्रभाव

समूहसबसे ज्यादा खतरालक्षण
बच्चे (<12 साल)फेफड़े छोटेब्रोंकाइटिस, निमोनिया
बुजुर्ग (>60)कमजोर इम्यूनिटीहार्ट अटैक, स्ट्रोक
अस्थमा/COPDसांस नलियां संकुचिततुरंत अटैक
हृदय रोगीखून के कण जमनाअनियमित धड़कन
गर्भवतीऑक्सीजन बेबी तक कमसमय से पहले प्रसव

लंबे समय (Chronic) प्रभाव

📅 1-3 महीने लगातार खराब AQI:
• फेफड़ों की क्षमता 10-20% घटी
• हृदय रोग 30% बढ़ा
• कैंसर रिस्क 15% ज्यादा
📅 1+ साल:
• स्थायी फेफड़ा क्षति
• IQ 3-5 पॉइंट कम (बच्चों में)
• जीवन प्रत्याशा 2-4 साल कम

शरीर के अंदर क्या होता है?

1️⃣ PM2.5 कण → फेफड़े की गहराई
2️⃣ खून में घुलना → सूजन (Inflammation)
3️⃣ ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस → सेल डैमेज
4️⃣ इम्यूनिटी कम → संक्रमण
5️⃣ DNA म्यूटेशन → कैंसर

तुरंत बचाव (AQI 300+)

🚨 बाहर न निकलें
✅ N95/KN95 मास्क (सर्जिकल NO)
🏠 HEPA एयर प्यूरीफायर
💧 भाप सेंक/नेबुलाइजर
🥗 विटामिन C (आंवला, नींबू)

सबसे खतरनाक: AQI 500+ में 10 मिनट भी बिना मास्क घूमना = 1 सिगरेट के बराबर नुकसान।

बचें या इलाज करवाएं? AQI 200+ = डॉक्टर से सलाह। 400+ = घर में बंद।

AQI-Bharati Fast News

Bharati Fast News पर यह भी देखें-प्राइवेट जॉब या सरकारी नौकरी: कौन है बेहतर विकल्प, अवसर या सिर्फ अपवाद?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

– 401-500+

– औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों से निकलने वाला धुआं, कृषि अपशिष्ट का जलाना

– NCAP, GRAP

– सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, ऊर्जा की बचत

500 AQI कितना खतरनाक?

गंभीर, सांस समस्या।​

Disclaimer: स्वास्थ्य सलाह नहीं, डॉक्टर से परामर्श।

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Abhay Jeet Singh

Abhay Jeet Singh

Abhay Bharati Fast News में लेखक एवं संपादक के रूप में कार्यरत हैं। ये टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल और सामयिक घटनाओं से संबंधित विषयों पर समाचार लेखन और संपादन का कार्य करते हैं।इनकी जिम्मेदारी विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना, तथ्यों का सत्यापन करना तथा सामग्री की संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशन सुनिश्चित करना है।भूमिका: Author & Editor – Bharati Fast News

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